ब्रिक्स की साझा करेंसी नहीं आएगी:सदस्य देश अपनी करेंसी में लेनदेन करेंगे; आज PM मोदी की 4 वर्ल्ड लीडर्स के साथ बैठक

BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है। BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं। हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। ———————- BRICS से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. BRICS के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा: टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… 2. पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज:कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें…

ब्रिक्स की इकोनॉमी अमेरिका से 3 गुना बड़ी:10 साल बाद भारत में साथ दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग; 20 देशों के नेता भी होंगे शामिल

BRICS समिट शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारत में होने वाले BRICS समिट में 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे। समिट में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे। BRICS की ताकत को सिर्फ सदस्य देशों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी आबादी और अर्थव्यवस्था से भी समझा जा सकता है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है। अर्थव्यवस्था की बात करें तो PPP यानी खरीदने की क्षमता के आधार पर BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब 3 गुना है। PM मोदी 4 वर्ल्ड लीडर्स से मिलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी। गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा। अब भारत और चीन LAC से लेकर कारोबार तक 6 बड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इनमें सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है। दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच कारोबार है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। ब्रिक्स तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन BRICS 11 देशों का ऐसा समूह है, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। BRICS का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है। शुरुआत में इसमें 4 देश थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया था। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। लेकिन बाद में ये चारों देश एक साथ आने लगे। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके साथ BRICS का दायरा और बढ़ गया। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। पाकिस्तान के चाहने के बावजूद BRICS में नहीं मिली एंट्री BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने इसमें शामिल होने की कोशिश की। इनमें पाकिस्तान और तुर्किये भी थे। पाकिस्तान ने 2023 में सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक BRICS में उसकी एंट्री नहीं हो पाई है। तुर्किये ने भी सदस्यता की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। इससे सवाल उठा कि दोनों देशों की एंट्री क्यों अटकी। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत पाकिस्तान और तुर्की को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी किसी एक देश की आपत्ति से सदस्यता रुक सकती है। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है। ——————- यह खबर भी पढ़ें… BRICS में पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज: कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें…

क्या आपके पास इंटरनेट या UPI ऐप नहीं है? RBI का नया ‘Tap and Pay’ फीचर बदल देगा आपके पेमेंट का तरीका

UPI Tap and Pay: अब बिना एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन के भी UPI से पेमेंट करना आसान हो सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ‘UPI टैप एंड पे’ (UPI Tap and Pay) सुविधा शुरू की है। इससे यूजर्स NFC-इनेबल्ड पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों पर पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए बस उन्हें अपने NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन को अनलॉक करके टर्मिनल पर टैप करना होगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 10 सितंबर को इस फीचर का ऐलान किया है। यह डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने और ग्राहकों को बेहतर सपोर्ट व सुरक्षा देने के लिए शुरू किए गए दो नए फीचर्स में से एक है।

हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ‘UPI Tap and Pay’ का मतलब यह नहीं है कि UPI हर जगह बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम करेगा। ट्रांजैक्शन के लिए यूजर के फोन में मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पेमेंट के लिए POS मशीन के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

UPI ‘Tap and Pay’ कैसे काम करता है?

इस नए फीचर को इस तरह से बनाया गया है कि UPI पेमेंट भी कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट की तरह काम करे।

NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन वाले यूजर्स अपने डिवाइस को अनलॉक करके उसे कम्पैटिबल POS टर्मिनल पर टैप कर सकते हैं। इसके बाद टर्मिनल के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके पेमेंट प्रोसेस किया जा सकता है।

यह सुविधा अलग-अलग तरह के UPI-लिंक्ड अकाउंट्स को सपोर्ट करती है, जिसमें UPI से जुड़े RuPay क्रेडिट कार्ड भी शामिल हैं।

छोटे पेमेंट के लिए, यूजर्स UPI PIN डाले बिना ₹5,000 तक का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। ₹5,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए, POS टर्मिनल पर UPI PIN डालना होगा।

इससे फिजिकल स्टोर्स पर UPI का इस्तेमाल ज्यादा आसान हो सकता है, खासकर उन यूजर्स के लिए जिनके पास पेमेंट के समय मोबाइल डेटा उपलब्ध नहीं हो सकता है।

MyUPI क्या है?

Tap and Pay के साथ-साथ, RBI ने MyUPI की शुरुआत की है, जो भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित एक AI-संचालित ग्राहक सहायता प्लेटफॉर्म है।

MyUPI, NPCI के FiMI स्मॉल लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य विभिन्न बैंकों और UPI ऐप्स में यूजर्स के UPI लेनदेन और ऑटोपे की जानकारी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

इस प्लेटफॉर्म में कई ऐसे फीचर्स भी हैं जो यूजर्स को अपने भुगतानों पर अधिक नियंत्रण प्रदान करते हैं।

इनमें से एक है सेफ्टी स्विच, जो यूजर्स को यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि यदि उन्हें संदेह है कि उनका खाता असुरक्षित हो गया है तो UPI डेबिट लेनदेन अस्वीकार कर दिए जाएं। एक अन्य फीचर, UPI नंबर डिलिंक, यूजर्स को अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से UPI भुगतान प्राप्त करना बंद करने की अनुमति देता है।

MyUPI पेमेंट पूरा होने से पहले यूजर्स को बेनिफिशियरी के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी देगा। योग्य ट्रांजेक्शन के लिए, यह प्लेटफॉर्म ऑटोमेटेड चार्जबैक प्रोसेसिंग को सपोर्ट करेगा।

एक और फीचर, जिसे ‘ट्रांजेक्शन रीप्ले’ कहा जाता है, यूजर्स को किसी भी UPI ऐप के जरिए पहले किए गए ट्रांजेक्शन को दोबारा करने की सुविधा देगा।

ये बदलाव क्यों जरूरी हैं?

NPCI के अनुसार, UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा बन गया है और कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में इसकी हिस्सेदारी 89 प्रतिशत है।

नए फीचर्स से पता चलता है कि अब फोकस सिर्फ डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने से आगे बढ़ रहा है। इसका मकसद फिजिकल टर्मिनल्स पर पेमेंट को आसान बनाना, कस्टमर सपोर्ट को बेहतर करना और यूजर्स को अपने अकाउंट्स पर ज्यादा कंट्रोल देना भी है।

NPCI ने कहा कि MyUPI का मकसद सिर्फ कस्टमर-सपोर्ट सर्विस के तौर पर नहीं, बल्कि एक भरोसे और कंट्रोल लेयर के तौर पर काम करना है। यह चौबीसों घंटे कई भाषाओं में मदद और सेल्फ-सर्विस के विकल्प देगा।

ये नई लॉन्चिंग UPI ऑथेंटिकेशन को आसान बनाने की NPCI की कोशिशों को भी आगे बढ़ाती हैं। GFF 2025 में UPI के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लॉन्च किया गया था और NPCI के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक बायोमेट्रिक-ऑथेंटिकेटेड UPI ट्रांजेक्शन की कुल संख्या 6.29 बिलियन से ज्यादा हो गई थी।

‘Tap and Pay’ और MyUPI मिलकर UPI के लिए एक नए दौर की ओर इशारा करते हैं — एक ऐसा दौर जो न सिर्फ पेमेंट प्रोसेस करने पर, बल्कि उन्हें ज्यादा सुविधाजनक, सुरक्षित और मैनेज करने में आसान बनाने पर भी फोकस करता है।

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IPO News: एक-दो नहीं, खुले 6 कंपनियों के आईपीओ; ग्रे मार्केट में सबसे तगड़ी इसकी सेहत

IPO News: आज 9 सितंबर को निवेशकों के लिए छह मेनबोर्ड आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुले हैं। मेनबोर्ड का मतलब ऐसी छह कंपनियों के आईपीओ खुले हैं, जिनके शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने हैं। इनमें डिजिटल पेमेंट, कंज्यूमर रेंटल, इंजीनियरिंग, एसेट रिकंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। ये सभी आईपीओ 11 सितंबर तक खुले रहेंगे। इनमें से मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस (Manipal Payment and Identity Solutions) के साथ-साथ ऑनलाइन फर्नीचर और एप्लाएंस रेंटल प्लेटफॉर्म रेंटोमोजो (Rentomojo) अहम हैं और बड़े आईपीओ में शुमार हैं। ग्रे मार्केट में सबकी सेहत मजबूत दिख रही है लेकिन ध्यान दें कि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निवेश का फैसला जीएमपी नहीं बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

Manipal Payment and Identity Solutions IPO

मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस के ₹805 करोड़ के आईपीओ के लिए प्राइस बैंड ₹322-₹339 और लॉट साइज 44 शेयर है। ग्रे मार्केट में इसके शेयर आईपीओ के प्राइस बैंड से ₹33 यानी 9.73% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। इस इश्यू के तहत ₹320 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे और बाकी शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री होगी।

Rentomojo IPO

रेंटोमोजो के ₹1256 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशक ₹384-₹404 के प्राइस बैंड और ₹37 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। ग्रे मार्केट में इसके शेयर ₹140 के प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे हैं यानी जीएमपी 34.65% है। इस आईपीओ के तहत ₹150 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे।

LCC Projects IPO

सिंचाई और पानी की सप्लाई से जुड़े काम करने वाली एलसीसी प्रोजेक्ट्स के ₹427 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड ₹139-₹146 और लॉट साइज 102 शेयर है। इस इश्यू के तहत ₹258 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। ग्रे मार्केट में यह ₹40 यानी 27.40% के प्रीमियम पर है।

Karamtara Engineering IPO

रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन लाइन्स से जुड़े प्रोडक्ट्स बनाने वाली करमतारा इंजीनियरिंग के ₹875 करोड़ के आईपीओ में निवेशक ₹241-₹254 के प्राइस बैंड और 59 शेयरों के लॉट में बोली लगा सकेंगे। इस इश्यू के तहत ₹675 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। इसकी जीएमपी ₹65 यानी 25.59% है।

Asset Reconstruction Company IPO

एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी के ₹733 करोड़ के आईपाओ के तहत निवेशक ₹132-₹139 के प्राइस बैंड और ₹107 शेयरों के लॉट में बोली लगा सकते हैं। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है। फिलहाल ग्रे मार्केट में यह ₹28 यानी 20.14% के प्रीमियम पर है।

Steamhouse India IPO

नाइट्रोजन का पाइपलाइन नेटवर्क चलाने वाली स्टीमहाउस इंडिया के ₹414 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड ₹77-₹81 और लॉट साइज ₹185 शेयर है। ग्रे मार्केट में यह आईपीओ के प्राइस बैंड से ₹19 यानी 23.46% की जीएमपी पर है। इस इश्यू के तहत ₹353 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दुनिया में बजेगा भारत के UPI का डंका, GFF 2026 में PM Modi ने बताया अगला बड़ा मिशन

दुनिया में बजेगा भारत के UPI का डंका, GFF 2026 में PM Modi ने बताया अगला बड़ा मिशन

pm modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest (GFF) 2026 के 7वें संस्करण को संबोधित करते हुए भारत के UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और दूसरे देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे देशों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हैं या जो अपने पेमेंट सिस्टम को भारत के सिस्टम से जोड़ने के लिए तैयार हैं।

 

रेमिटेंस लागत घटाने में UPI की बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में काम करते हैं और भारत दुनिया में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है। विदेशों से भारत भेजे जाने वाले पैसे का एक हिस्सा ट्रांजैक्शन फीस में चला जाता है। उन्होंने कहा कि UPI इस लागत को कम करने में मदद कर सकता है और विदेश से भेजा गया पैसा परिवारों तक पहले से ज्यादा तेजी से पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री ने फिनटेक इंडस्ट्री से दूसरे देशों के स्थानीय पेमेंट सिस्टम के साथ UPI को जोड़ने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

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11 देशों में UPI की पहुंच

 

पीएम मोदी ने UPI की 10 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की सीमाओं से आगे बढ़ चुका है। UPI की मौजूदगी 11 देशों तक पहुंच चुकी है और सिंगापुर के साथ इसका डायरेक्ट क्रॉस-बॉर्डर लिंक भी है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य सिर्फ अपने पेमेंट सिस्टम को दूसरे देशों में ले जाना नहीं होना चाहिए, बल्कि अलग-अलग देशों के पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने के लिए एक मजबूत ग्लोबल नेटवर्क तैयार करना भी होना चाहिए।

 

'दूसरे देशों के सिस्टम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं'

प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल कार्ड पेमेंट सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में कार्ड पेमेंट का बड़ा हिस्सा ऐसे सिस्टम पर चलता है जिन्हें दूसरे देशों में विकसित किया गया है। हालांकि, भारत के पास अब इसका अपना विकल्प मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नियम और मानक खुद तय कर सकता है और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकता है।

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UPI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, सभ्यता की कहानी भी

 

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें UPI को केवल टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं बल्कि एक सभ्यतागत बदलाव के रूप में देखा गया था। पीएम मोदी ने कहा कि पेमेंट के क्षेत्र में भारत ने पिछले वर्षों में बड़ी सफलता हासिल की है। अब भारतीय फिनटेक इंडस्ट्री के लिए अगला अध्याय पेमेंट से आगे बढ़कर नॉन-पेमेंट ट्रांजैक्शन पर काम करना होना चाहिए।

 

क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश तक डिजिटल पहुंच

 

प्रधानमंत्री ने फिनटेक सेक्टर से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश जैसी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिनटेक का अगला चरण केवल डिजिटल पेमेंट को बढ़ाना नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पारदर्शी और आसान तरीके से पहुंचाना होना चाहिए।

 

साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन पर जोर

 

पीएम मोदी ने फिनटेक कंपनियों से उच्च स्तर के साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशन विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने नैतिक डेटा सुरक्षा मानकों की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने एक मजबूत फिनटेक रेगुलेटरी इकोसिस्टम और Fintech Consumer Protection Index विकसित करने की बात कही। उनका कहना था कि इससे कंपनियों की पारदर्शिता को रेट करने और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा में मदद मिल सकती है।

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पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें

  • UPI को ग्लोबल स्तर पर और विस्तार देने पर जोर।
  • UPI को दूसरे देशों के लोकल पेमेंट सिस्टम से जोड़ने की अपील।
  • क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस की लागत घटाने की कोशिश।
  • विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए तेज और सस्ता मनी ट्रांसफर।
  • पेमेंट के बाद फिनटेक का अगला फोकस क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश पर।
  • साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन को मजबूत करने की जरूरत।
  • पारदर्शिता के लिए Fintech Consumer Protection Index बनाने पर जोर।
  • भारत के अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मानकों को दुनिया से जोड़ने का लक्ष्य।

स्मार्टफोन नहीं है? फिर भी कर सकेंगे UPI पेमेंट, PhonePe ने शुरू की खास सुविधा

PhonePe ने एक नई UPI सर्विस शुरू की है, जिसका मकसद फीचर फोन पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा देना है। यह सर्विस यूजर्स को कम्पैटिबल हैंडसेट पर जरूरी UPI फंक्शन इस्तेमाल करने की सुविधा देती है, जिससे पेमेंट प्लेटफॉर्म का दायरा स्मार्टफोन से आगे बढ़ता है। इसे कई मैन्युफैक्चरर्स के फीचर फोन मॉडल के जरिए पेश किया जा रहा है और आने वाले महीनों में और भी डिवाइस पर यह सर्विस मिलने की उम्मीद है। इस लॉन्च से उन यूजर्स के लिए भी नए विकल्प खुलते हैं जो रोजाना बातचीत के लिए फीचर फोन पर निर्भर हैं और जिनके पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है।

PhonePe ने फीचर फोन के लिए शुरू की बिना इंटरनेट UPI पेमेंट सुविधा

PhonePe ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि उसकी UPI 123Pay सर्विस अब पूरे भारत में सपोर्टेड फीचर फोन पर उपलब्ध है। यह सर्विस बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम करती है और ट्रांजैक्शन (जैसे पैसे भेजना और मर्चेंट पेमेंट) के लिए SMS का इस्तेमाल करती है। इसे ऐसे इलाकों में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है जहां 2G कनेक्टिविटी कमजोर है, और यह भारत के 20 करोड़ से ज्यादा फीचर फोन यूजर्स तक UPI सर्विस पहुंचाती है।

UPI 123Pay सर्विस में पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर, मर्चेंट पेमेंट, बैंक बैलेंस चेक और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री जैसी सुविधाएं मिलती हैं। आने वाले अपडेट्स में PhonePe इस सर्विस में बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज और आधार के जरिए UPI रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ने की योजना बना रहा है।

HMD ने कई फीचर फोन मॉडल्स में PhonePe UPI 123Pay का सपोर्ट मिलने की पुष्टि की है। इनमें HMD 105 2G, HMD 110 2G, Nokia 105 Classic, Nokia 105 Single SIM, Nokia 105 Dual SIM, Nokia 106 और Nokia 123 Shield शामिल हैं। आने वाले समय में HMD और Nokia के कुछ और फीचर फोन में भी यह सुविधा मिल सकती है।

PhonePe ने यूजर्स की मदद के लिए AI बेस्ड वॉइस हेल्पलाइन भी शुरू की है। इसके जरिए यूजर्स आसानी से इस सर्विस को सेटअप कर सकेंगे। यह हेल्पलाइन अंग्रेजी के साथ 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करती है। इसमें सर्विस एक्टिवेट करने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी दी जाती है और UPI से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब भी मिलते हैं।

यूजर्स कम्पैटिबल फीचर फोन पर पहले से इंस्टॉल PhonePe ऐप के ज़रिए सर्विस सेट अप कर सकते हैं। उन्हें नियम और शर्तें स्वीकार करनी होंगी, अपना बैंक चुनना होगा, अपने डेबिट कार्ड के आखिरी छह अंक और उसकी एक्सपायरी डेट डालनी होगी, और एक UPI PIN बनाना होगा।

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यूजर्स कॉन्टैक्ट, मोबाइल नंबर या UPI ID के जरिए पेमेंट कर सकेंगे। जिन फीचर फोन में कैमरा है, उनमें QR कोड स्कैन करके भी भुगतान किया जा सकेगा।

पेमेंट करने से पहले यूजर्स को प्राप्तकर्ता की जानकारी चेक करनी होगी। इसके बाद पेमेंट की रकम दर्ज करके UPI PIN डालना होगा और फिर पेमेंट कन्फर्म करना होगा।

फिलहाल PhonePe UPI 123Pay की सुविधा HMD, Nokia, Lava International और Itel Mobile के चुनिंदा फीचर फोन मॉडल्स पर उपलब्ध है। PhonePe आने वाले महीनों में इसे और ज्यादा फीचर फोन मॉडल्स तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।

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Bank Holidays: सितंबर में 15 दिन बंद रहेंगे SBI-HDFC समेत सभी बैंक! ब्रांच जाने से पहले यहां देख लें पूरी लिस्ट

Bank Holidays September 2026: सितंबर के महीने में अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके बेहद काम की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी छुट्टियों की सूची के अनुसार, सितंबर में अलग-अलग राज्यों और शहरों में त्योहारों, जयंती और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण कई दिनों तक बैंक बंद रहेंगे।

इसके अलावा, हर महीने की तरह रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार को भी देशभर के बैंकों में छुट्टी रहेगी। चूंकि राज्यों के हिसाब से बैंक हॉलीडे अलग-अलग होते हैं, इसलिए अपने राज्य की लिस्ट देखकर ही बैंक जाने की योजना बनाएं।

सितंबर में किस-किस दिन बंद रहेंगे बैंक?

भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार सितंबर में छुट्टियों की तारीखें:

4 सितंबर: जन्माष्टमी (वैष्णव)/कृष्ण जयंती के अवसर पर गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे।

11 सितंबर: जयपुर नगर निगम क्षेत्र में चुनाव के कारण राजस्थान के संबंधित क्षेत्रों में बैंक हॉलीडे रहेगा।

12 सितंबर: श्रीमंत शंकरदेव की तिरुभाव तिथि के उपलक्ष्य में असम में बैंक बंद रहेंगे।

14 सितंबर: गणेश चतुर्थी/विनायक चतुर्थी/गणेश पूजा के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, गोवा और आंध्र प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

15 सितंबर: संवत्सरी (चतुर्थी पक्ष)/नुआखाई/गणेश चतुर्थी (दूसरा दिन) के अवसर पर गुजरात, ओडिशा और गोवा में बैंकों की छुट्टी रहेगी।

21 सितंबर: श्रीमंत शंकरदेव के जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण असम और केरल में बैंक बंद रहेंगे।

22 सितंबर: करमा पूजा के अवसर पर झारखंड में बैंक बंद रहेंगे।

23 सितंबर: महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के उपलक्ष्य में जम्मू-कश्मीर में बैंक हॉलीडे रहेगा।

25 सितंबर: इंद्रजात्रा त्योहार के अवसर पर सिक्किम में बैंक बंद रहेंगे।

इसके अलावा रविवार की रेगुलर छुट्टी और दूसरे व चौथे शनिवार के ऑफ को जोड़ते हुए सितंबर के महीने में कुल 15 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। हालांकि ये छुट्टियां अलग-अलग सर्किलों में है जरूरी नहीं कि एक ही दिन सभी जगह बैंक बंद रहे।

क्या छुट्टियों के दौरान चालू रहेंगी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं?

बैंक शाखाएं बंद रहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी बैंकिंग सेवाएं रुक जाएंगी। छुट्टियों के दौरान भी आप बिना किसी रुकावट के डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। आप पैसों की निकासी या डिपॉजिट के लिए एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं। Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट और फंड ट्रांसफर चालू रहेंगे। खाते से जुड़ी सामान्य सेवाएं, एनईएफटी (NEFT)/आईएमपीएस (IMPS) ट्रांसफर और बिल पेमेंट घर बैठे किए जा सकेंगे।

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

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1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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