Nepal Flood: तबाही के बाद नेपाल से बहकर भारत आ रहे शव, गंडक नदी में मिलीं 3 लाशें, सामान भी बहकर आया

नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। वहीं इस आपदा में कई देशों के लोगों समेत कुल 626 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 2500 से ज्यादा लोग अभी तक लापता है। वहीं नेपाल में आई भयानक बाढ़ का असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तेज बहाव की वजह से ये शव नेपाल से बहकर भारतीय क्षेत्र तक पहुंचे हैं। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने गंडक नदी और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। शनिवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी

शुक्रवार को खड्डा के मदनपुर-सुकरौली इलाके में बैराज के पियर नंबर 3 के पास नदी में तीन शव दिखाई दिए। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालकर उनकी पहचान की कोशिश शुरू की।

शव के साथ बाकी चीजें भी बह कर आई

खड्डा के SHO संदीप सिंह ने बताया कि, SDRF की निगरानी टीम ने सबसे पहले शवों को नदी में तैरते हुए देखा था। इसके बाद टीम ने शवों को नदी से बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ का असर गंडक नदी में भी दिखाई दे रहा है। नदी के पानी के साथ गाड़ियां, घर का सामान, गैस सिलेंडर, ड्रम, फर्नीचर, लकड़ियां और अन्य मलबा बहकर भारतीय इलाके तक पहुंच रहा है। इनमें से कई सामान नदी में तैरते हुए नजर आए, जबकि कुछ नदी के किनारे जमा हो गए हैं।

लोगों को सामान निकालने से किया गया मना

नदी के किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए सामान को देखने और बाहर निकालने के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने नदी में उतरकर कोई सामान निकालने से मना किया है। अधिकारियों ने लोगों से कहा कि अगर उन्हें नदी में कोई सामान तैरता हुआ दिखाई दे, तो खुद उसे निकालने की कोशिश न करें और इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। कुशीनगर से एक दिन पहले महाराजगंज में भी नदी से चार शव मिले थे। शवों की पहचान नहीं हो सकी है। अधिकारी नेपाल प्रशासन से संपर्क कर यह पता लगा रहे हैं कि कहीं ये शव बाढ़ और भूस्खलन में लापता लोगों के तो नहीं है।

प्रशासन पूरी तरह से सर्तक

नेपाल में 26 अगस्त को रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का पानी अचानक बढ़ने से बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी आगे त्रिशूली और गंडक नदी तक पहुंच गया, जिससे आसपास के निचले इलाकों में भी असर पड़ा। इसके बाद कुशीनगर प्रशासन ने गंडक नदी और आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी। SDRF, पुलिस और अन्य टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। नदी का पानी अब कम होने लगा है, जिससे बाढ़ का खतरा भी घट गया है। हालांकि, प्रशासन अभी भी सतर्क है और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

Nepal Flood: 600 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता…तबाही के बीच नेपाल में अब भी मंडरा रहा सैलाब का खतरा

नेपाल में तबाही के बाद यूपी अलर्ट पर! सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी, राकेश टिकैत भी बाढ़ में फंसे

Nepal Flood: बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही, नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ से इन दोनों जिलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

वहीं, राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी मदद की जरूरत है, तो उनके रिश्तेदार तुरंत राज्य के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई लोग पड़ोसी देश में फंसे हुए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत, जो अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे, पोखरा में फंस गए।

बता दें कि बाढ़ ने चितवा, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कई सड़कों और पुलों को बहा दिया है।

भाकियू के नेता जारी किया वीडियो संदेश

भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हालात को देखते हुए हम कल फ्लाइट से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से फ्लाइट से दिल्ली जाएंगे। हम अपनी गाड़ियां वहीं छोड़ देंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि यूपी के किसान संगठनों के सदस्य नेपाल में हैं और उनसे कहा गया है कि वे वहां फंसे भारतीयों और स्थानीय लोगों की मदद करें।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान को गंभीर चिंता का विषय बताया और प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना की। साथ ही स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे नदी के जलस्तर पर कड़ी नजर रखें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

महराजगंज में अलर्ट, गंडक नदी की 24 घंटे निगरानी

वहीं, महाराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं, क्योंकि पानी का बढ़ा हुआ बहाव भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली के जरिए निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है।

जिला मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रहने और जरूरत पड़ने पर निचले और नदी के किनारे बसे जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और पानी से भरे इलाकों के पास न जाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें, साथ ही बच्चों, बुज़ुर्गों और मवेशियों को जोखिम वाले इलाकों से दूर रखें।

कुशीनगर में गांवों को खाली कराने का आदेश, प्रशासन अलर्ट

कुशीनगर में जिला प्रशासन ने मर्चहवा, शिवपुर समेत कई गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है। साथ ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह देने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से ऐलान भी किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, नारायणी नदी का जलस्तर अगले दो घंटे में और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में हुई भारी बारिश से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गांव वालों से कहा गया है कि वे सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है।

खड्डा तहसील के दियारा इलाके में शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में खास निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल में बारिश से नारायणी नदी का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।

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Bihar Flood Risk: नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में हाई अलर्ट, जानें- क्यों रखी जा रही है बारीकी से नजर

Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के कारण बिहार में खास सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई है और पानी के बहाव में अचानक तेजी आने की आशंका है। हालांकि, अभी तक बाढ़ के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पिछले साल इसी नदी में आई ऐसी ही अचानक बाढ़ का कारण बाद में एक ग्लेशियर झील का पानी निकलना बताया गया था।

नेपाल पर्यटन बोर्ड को ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय लापता हैं।

बता दें कि बुधवार को नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों देशों की सीमा पर चीन की तरफ तिब्बत के एक व्यापारिक केंद्र पर मडस्लाइड (कीचड़ और मलबे का बहाव) हुआ, जिसकी चपेट में आने से “काफ़ी लोग हताहत” हुए हैं।

बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?

नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए बिहार के अधिकारियों ने गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया है।

बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके, खासकर वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि नेपाल से बहकर आने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे में गंडक नदी तक पहुंच सकता है।

गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

बता दें कि भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।

न्यूज एजेंसी ANI ने बिहार में आपदा प्रबंधन अधिकारियों के हवाले से बताया कि गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं।

ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया, “नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जिलों (गंडक कैचमेंट एरिया) और दोलखा और सिंधुपालचोक जिलों (कोसी कैचमेंट एरिया) में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का ज्यादा खतरा होने का अनुमान है।”

फरक्का बैराज क्यों एक नया विवाद का मुद्दा बन गया है?

जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और राज्य में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के अपने समकक्ष सुवेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि बहाव बढ़ने से पूर्वी राज्य में बाढ़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि—जो फरक्का में नदी के कम बहाव वाले मौसम में पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है—इस साल दिसंबर में अपनी 30 साल की अवधि पूरी करने के बाद समाप्त होने वाली है। पटना लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि बांग्लादेश के साथ भविष्य में पानी के बंटवारे की किसी भी व्यवस्था में उसके हितों का ध्यान रखा जाए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्य को आश्वासन दिया है कि नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल बंटवारा संधि को लेकर उसकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

पटना की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

हालांकि, अभी सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के जलस्तर का बढ़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद, पटना और बक्सर समेत बिहार के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।

पटना के लिए अभी जरूरी है कि बैराज से और पानी छोड़ा जाए ताकि ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का दबाव कम हो सके। हालांकि, बैराज से जुड़ा कोई भी फैसला पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर भारत की प्रतिबद्धताओं पर भी असर डाल सकता है।

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