CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

Deepak letter to Education Ministers

Deepak letter to the Education Ministers: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश और राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय और डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

CJP ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भी बच्चे मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। बच्चों को सुरक्षित पेयजल, चालू शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

दीपके के 6 प्रमुख सवाल

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार (Renovation) किया गया है और कितनों में मरम्मत या पूर्ण सुधार की आवश्यकता है?
  • वर्तमान में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे गए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं?
  • बीते पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) काम सौंपे गए हैं?
  • कितने सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग, साफ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं?

पत्र के अंत में CJP ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति या किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन जानकारियों को सार्वजनिक करे और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

सीजेपी टीम पर राजस्थान में हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त 2026 को CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कथित रूप से हमला और पथराव हुआ था। CJP की टीम अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस सरकारी स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से एक मवेशी शेड में चलाया जा रहा था। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल पहुंचने से पहले ही स्थानीय उपद्रवियों और विरोधियों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।

PM-YASASVI Scholarship: पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्र कर सकते हैं आवेदन, जानें आवेदन का तरीका और लास्ट डेट

PM-YASASVI Scholarship: कक्षा 9 से 12 तक के बहुत छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई पैसों की कमी के चलते जारी रखना मुश्किल होता है। इस वजह से असंख्य छात्र हर साल 10वीं या 12वीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी करने से वंचित रह जाते हैं। पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति ऐसे छात्रों को शिक्षा की उनकी मंजिल तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। यह स्कॉलरशिप केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दी जाती है। यह छात्रवृत्ति अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EBC), और विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के योग्य छात्रों को आर्थिक मदद देती है। इस स्कीम का मकसद इन समुदायों के छात्रों को बिना किसी आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है। पात्र छात्र 31 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 9 से 12 के लिए स्कॉलरशिप सपोर्ट

पीएम यशस्वी स्कीम कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को सहयोग प्रदान करती है। इस स्कॉलरशिप का मकसद पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने और छात्रों को उनकी सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी पढ़ाई के दौरान मदद करना है। इस आर्थिक मदद का इस्तेमाल लागू गाइडलाइन के अनुसार, ट्यूशन फीस, हॉस्टल चार्ज और दूसरी पढ़ाई की जरूरतों सहित पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि इस स्कीम का मकसद पिछड़े बैकग्राउंड के मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और अपने पढ़ाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

ऑनलाइन योग्यता चेक करें छात्र

पीएम यशस्वी योजना के तहत चयन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस प्रक्रियाका मकसद पारदर्शिता पक्का करना और योग्य छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने का बराबर मौका देना है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस छात्रवृत्ति योजना के बारे में डिटेल्स शेयर कीं और छात्रों और अभिभावकों से गाइडलाइंस को ध्यान से पढ़ने को कहा। उन्हें और जानकारी पाने में मदद के लिए एक QR कोड भी दिया गया।

नोट करें आवेदन और वेरिफिकेशन की तारीख

इस स्कॉलरशिप के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर नए और नवीनीकरण (रिन्यूअल) दोनों श्रेणी के छात्र 1 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद शिक्षण संस्थान 15 सितंबर 2026 तक आवेदनों का सत्यापन करेंगे। मंत्रालय स्तर पर अंतिम सत्यापन 30 नवंबर 2026 तक इस काम को पूरा किया जाएगा।

पीएम यशस्वी योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

  • नेशनल स्कॉलरशिप की वेबसाइट scholarships.gov.in पर जाएं।
  • New Registration पर क्लिक करें, दिशानिर्देश पढ़ें और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें।
  • इसके बाद User ID और Password मिल जाएगा।
  • एनएसपी पोर्टल पर आईडी और पासवर्ड से Log-in करें।
  • स्कॉलरशिप चुनें और आवेदन फॉर्म भरें।
  • डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और सबमिट करें।
  • इसके बाद स्कूल के नोडल अधिकारी ऑनलाइन वेरिफिकेशन करेंगे।
  • बाद में राज्य सरकार भी इसकी ऑनलाइन पुष्टि कर देगी।

पीएम यशस्वी योजना के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • एजुकेशन सर्टिफिकेट
  • इनकम सर्टिफिकेट
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जाति/समुदाय प्रमाण पत्र
  • विकलांगता प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
  • बैंक खाता विवरण

UP Board Exam 2027: नए पैटर्न का होगा यूपी बोर्ड 12वीं के छात्र का प्रश्न पत्र, 80 नंबर की लिखित परीक्षा में हर यूनिट से आएंगे सवाल

Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest

स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए, आंदोलन नहीं।
लेकिन जब बच्चों को साफ़ पानी, शौचालय, पंखे और शिक्षक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़े,
तो सवाल बच्चों पर नहीं, सिस्टम पर उठता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से शुरू हुई यह आवाज़ अब बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों तक पहुँच रही है।
क्या आपको लगता है कि बच्चों को अपने अधिकारों के लिए इस तरह प्रदर्शन करना पड़ना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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AI की ताकत से घर बैठे पाई 1.06 करोड़ की नौकरी! जानिए आंध्र प्रदेश के इस युवक ने कैसे हासिल किया यह मुकाम

आंध्र प्रदेश के एक दर्जी के बेटे ने कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर 1.06 करोड़ रुपये की रिमोट जॉब हासिल करके सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है।

अखिलेश माल्थी कौन हैं?

आदित्य कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से B.Tech (डेटा साइंस) 2026 के ग्रेजुएट अखिलेश माल्थी ने कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए यह उपलब्धि हासिल की। ​​इससे साबित होता है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से सबसे मुश्किल हालात का भी सामना किया जा सकता है।

अखिलेश एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता एक दर्जी हैं जो सुन और बोल नहीं सकते, जबकि उनकी माँ सिलाई के काम में मदद करके परिवार का सहारा बनती हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके माता-पिता ने कभी भी अपनी मुश्किलों को बेटे की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने हमेशा उन्हें पढ़ाई करने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके माता-पिता की मेहनत और त्याग का फल अब मिल गया है। अखिलेश को Fabrantic AI में रिमोट AI इंजीनियर की नौकरी मिली है, जिसका सालाना पैकेज ₹1.06 करोड़ है। यह उनके परिवार के लिए ज़िंदगी बदलने वाला पल है।

X पर किए गए पोस्ट में लिखा है, “बहुत गरीब बैकग्राउंड से आने वाले और एक दर्ज़ी के बेटे, अखिलेश को Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर ₹1.06 करोड़ का पैकेज मिला है।” पोस्ट में आगे कहा गया है, “आज कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए अखिलेश को कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में ₹1.06 करोड़ की रिमोट जॉब मिली है।”

सोशल मीडिया पर उनकी इस कामयाबी की खूब तारीफ़ हो रही है। कई लोग इसे इस बात का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं कि कैसे शिक्षा, लगन और माता-पिता का साथ ज़िंदगी बदल सकता है। एक यूजर ने लिखा, “₹1.06 करोड़ और वो भी रिमोट जॉब! वाह, समय और उनकी मेहनत ने सच में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “गरीब बैकग्राउंड से आकर 1 करोड़ का पैकेज मिलना बहुत बड़ी बात है।”तीसरे कमेंट करने वाले ने लिखा, “पैकेज से भी ज़्यादा अच्छी बात यह देखना है कि कैसे उनकी मेहनत ने उनके परिवार का भविष्य बदल दिया… आख़िरकार उनके त्याग का फल मिल ही गया।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “B.Tech के दौरान हमारे पास काफ़ी समय होता है… अगर हम रोज़ाना कम से कम 2 घंटे नई स्किल्स सीखने में लगाएं… तो हम कुछ असाधारण हासिल कर सकते हैं।”

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।

US ETFs: बच्चे की विदेश में पढ़ाई के लिए अमेरिकी ETFs क्यों हैं बेस्ट? जानिए सही करेंसी में बचत का फॉर्मूला

US ETFs for Overseas Education: बच्चों को विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज (US, UK या यूरोप) में पढ़ाना आज कई भारतीय माता-पिता का सपना है। इसके लिए अधिकांश पेरेंट्स सालों पहले से भारतीय म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुपए में की गई आपकी बचत डॉलर में बढ़ते कॉलेज फीस के खर्च के सामने कम पड़ सकती है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वित्तीय लक्ष्य डॉलर या विदेशी मुद्रा में है, तो निवेश भी उसी करेंसी में होना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए US ETFs में सीधा निवेश क्यों सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

रुपए में बचत क्यों पड़ सकती है कम?

अगर आपका लक्ष्य डॉलर में है, तो सिर्फ रुपए में कंपाउंडिंग करना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1- ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी: विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस हर साल 5% से 8% की दर से बढ़ती है।

2- रुपए की कमजोरी: ऐतिहासिक रूप से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4% से 5% टूटता है।

एक उदाहरण से समझे तो जैसे आज किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी की 4 साल की फीस $2,00,000 है, तो अगले 10 साल बाद रुपए के अवमूल्यन और महंगाई को मिलाकर यह बिल ₹3.5 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।

भारतीय इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स के बजाय Direct US ETFs क्यों बेहतर?

पहले पेरेंट्स भारतीय फंड हाउसेज के ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए विदेश में निवेश करते थे। लेकिन अब Direct US-listed ETFs एक बेहतर विकल्प बन गए हैं:

SEBI ओवरसीज कैप की सीमा नहीं: भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर SEBI द्वारा लगाई गई विदेशी निवेश की लिमिट (करीब $7 बिलियन) बार-बार पूरी हो जाती है, जिससे फंड्स को अपनी SIP बार-बार रोकनी पड़ती है।

LRS के जरिए सीधा निवेश: RBI की लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर भारतीय नागरिक (नाबालिग सहित) को हर साल $2,50,000 तक विदेश भेजने और सीधे US ETFs में निवेश करने की पूरी छूट मिलती है।

कम एक्सपेंस रेशियो: डायरेक्ट US ETFs (जैसे- Vanguard या iShares) का एक्सपेंस रेशियो बेहद कम (0.03% से 0.09%) होता है, जबकि घरेलू इंटरनेशनल फंड्स में यह 1.25% से 1.75% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक रिटर्न का गणित

अगर पिछले 10 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो S&P 500, Nasdaq 100 और ग्लोबल इक्विटीज के 60/20/20 पोर्टफोलियो ने डॉलर (USD) टर्म में 13% से 14% वार्षिक रिटर्न दिया है। जब इसमें रुपए की 4-5% सालाना गिरावट को जोड़ दिया जाता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए यह सालाना रिटर्न रुपए के टर्म में 17% से 19% के करीब बैठता है। यानी डॉलर में निवेश करना फायदे वाला सौदा रहा है।

निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान

अमेरिकी ETFs में ऐप या ब्रोकरेज के जरिए निवेश करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं को न भूलें:

Micro-SIP से बचें: हर महीने ₹1,000 या ₹2,000 जैसी छोटी SIP पर बैंक वायर चार्ज और फॉरेक्स स्प्रेड का खर्च भारी पड़ सकता है। इसलिए पैसे को रुपए में इकट्ठा करें और हर 3 या 6 महीने में एक बार में रेमिटेंस करें।

TCS के नियम: एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख तक के रेमिटेंस पर अतिरिक्त टीसीएस नहीं लगता। ₹10 लाख से ऊपर 20% TCS कटता है, जिसे आप अपने वार्षिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में एडजस्ट या रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

Schedule FA रिपोर्टिंग: विदेश में शेयर या ETF खरीदते ही ITR-2 या ITR-3 भरते समय Schedule FA में उसका ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

टारगेट तक पहुंचने की सही रणनीति

जैसे-जैसे आपके बच्चे के कॉलेज एडमिशन का समय करीब आए, आपको अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना चाहिए:

Build Phase (शुरुआती 5-10 साल): इक्विटी ETFs (जैसे S&P 500 / Nasdaq) में आक्रामक तरीके से निवेश करें।

Protect Phase (3-4 साल पहले): जब एडमिशन में 3-4 साल बचें, तो धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर US डेट/बॉन्ड फंड्स में शिफ्ट करें।

Deploy Phase (आखिरी 1-2 साल): फीस भुगतान से 1-2 साल पहले फंड को USD कैश या लिक्विड बकेट में रखें, ताकि शेयर बाजार में किसी तात्कालिक गिरावट से आपकी फीस का बजट प्रभावित न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

खबर अपडेट हो रही है…

Dharmendra Pradhan Resign: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया

दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।  NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया।

सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को लिखा ये पत्र 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने हालात का कोई भी देश-विरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके, देश में एकता बनी रहे और छात्र किसी कानूनी विवाद में न फंसें। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता छात्रों की पढ़ाई और उनका भविष्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।

खबर अपडेट हो रही है…

स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने अपने ट्वीट में किया छात्रों का समर्थन

किसी भी ओलंपिक की एकल प्रतियोगिता में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता और निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है। उनका मानना है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करे।

उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘मैंने कभी खुद को राजनीतिक व्यक्ति नहीं माना। लेकिन मेरा मानना ​​है कि चाहे फिर हम किसी भी पक्ष के हों, कुछ मुद्दे हम सभी से जुड़े हुए हैं। शिक्षा उनमें से एक है।’’बिंद्रा ने कहा, ‘‘किसी राष्ट्र का आकलन केवल उसकी अर्थव्यवस्था या उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इससे होती है कि उसने अपने युवाओं के लिए कितने अवसर सृजित किए। एक ऐसी शिक्षा प्रणाली किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत में से एक है, जो आत्मविश्वास जगाती है, योग्यता को सम्मानित करती है और जिज्ञासा को बढ़ाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि हम सभी एकजुट होकर अपनी शिक्षा प्रणाली को लगातार मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि वह भावी पीढ़ियों के लिए अवसर, नवाचार और आशा का स्रोत बनी रहे।’’

अब 43 साल के हो चुके बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था। वह ओलिंपिक खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी हैं।

वह 2010 से 2020 तक अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (International Shooting Sport Federation ISSF) की एथलीट समिति के सदस्य थे जिसमें वह 2014 से इसके अध्यक्ष रहे। वह 2018 से आईओसी एथलीट आयोग के सदस्य हैं।