
Samajwadi Party Rebel MLAs: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अमेठी में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेठी जनपद के गौरीगंज स्थित मंगलम भवन के सामने मैदान में आयोजित एक विशाल राजनीतिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली है। अमेठी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी भारी संख्या में दिग्गज नेताओं ने दल-बदल किया है।
समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी
भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी मंगलवार को पहली बार अमेठी पहुंचीं। उनकी अगुवाई और मौजूदगी में यह बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से पंकज चौधरी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष), अमरपाल मौर्य (पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष), दारा सिंह चौहान (यूपी सरकार के मंत्री) तथा कई अन्य सांसद, विधायक और स्थानीय वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।
राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती @smritiirani एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री @mppchaudhary ने विधायक गौरीगंज श्री राकेश प्रताप सिंह, विधायक गोसाईगंज श्री अभय सिंह और विधायक कालपी श्री विनोद चतुर्वेदी को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। https://t.co/v4g8EkcQZu
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 14, 2026
कौन हैं भाजपा में शामिल होने वाले सपा विधायक?
- राकेश प्रताप सिंह : गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के सपा विधायक। पार्टी विरोधी गतिविधियों और रामचरितमानस विवाद के बाद सपा ने इन्हें निष्कासित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने खुलकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी का समर्थन किया था और गौरीगंज से अयोध्या तक राम मंदिर पदयात्रा भी निकाली थी।
- अभय सिंह (अभय प्रताप सिंह) : गोसाईगंज (अयोध्या) से विधायक हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह और पिता भगवान बख्श सिंह समेत भारी संख्या में समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।
- विनोद चतुर्वेदी : जालौन के कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक, जो अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।
क्या कहा राकेश प्रताप सिंह ने?
सपा से निष्कासित और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने पर स्पष्ट कहा कि वे ‘राष्ट्र और राम’ के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इन तीनों ही विधायकों ने पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।
राजनीतिक समीकरण और आगे की राह
यह पूरा घटनाक्रम अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचे इन तीनों कद्दावर विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना, समाजवादी पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका है। वहीं, आगामी 2027 के चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल से भाजपा की ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत होती है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल अमेठी का यह सियासी घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


