युवराज सिंह ने किया छात्रों का समर्थन पर दी यह हिदायत, इंस्टा पर डाली पोस्ट

भारत को दो विश्वकप जिता चुके युवराज सिंह ने नीट पेपर लीक के विवाद से उत्पन्न हुए छात्र आंदोलन पर अपनी राय रखी। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि हर स्त्री पुरुष और विद्यार्थी को अपना सपना पूरा करने के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण में समय व्यत्तीत करने का हक है। आपकी भलाई भारत की बुनियाद है। इस कारण हर मसले को बैठकर शांति से सुलझाया जा सकता है।

पिता भी थे क्रिकेटर

युवराज भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 ट्वंटी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने क्रमश: 1900, 8701 और 1177 रन बनाए हैं। युवराज ने अपना आखिरी ट्वंटी-20 मैच फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ और वनडे जून 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था।

उम्दा बल्लेबाज युवराज ने गेंदबाजी में हाथ आजमाए। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 9, वनडे मैचों में 111, टी-20 में 28 और आईपीएल में 36 विकेट लिए। संन्यास के बाद कैंसर के खिलाफ जंग लड़ने वाले युवराज कैंसर पीड़ितों समय समय पर मदद भी करते हैं।

12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ शहर में जन्‍मे युवराज सिंह के पिता योगराज भी भारतीय टीम के लिए खेल चुके हैं। बचपन में स्केटिंग का शौक रखने वाले युवराज को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली। उन्‍होंने बेहद कड़ाई से युवराज को इस खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवराज के लिए घर में ही पिच बनवा दी थी। युवराज ने बचपन में एक पंजाबी फिल्‍म 'मेहंदी शगणा दी' में भी काम किया था।

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उनके करियर का मुख्य आकर्षण केंद्र स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में 6 छक्के लगाना और एकदिवसीय विश्वकप 2011 का मैन ऑफ द टूर्नामेंट पाना रहा। इसके अलावा वह अभी टीम में मौजूद अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल की कोचिंग कर रहे हैं।

Union Bank Recruitment 2026: यूनियन बैंक में मैनेजर, सीनियर मैनेजर से लेकर कई पदों पर निकली बंपर भर्ती, 10 अगस्त है आवेदन करने की लास्ट डेट

Union Bank Recruitment 2026: बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए काफी काम की खबर है। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने यूनियन बैंक भर्ती प्रक्रिया 2026-27 के तहत 395 पदों पर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत डोमेन विशेषज्ञता वाले अधिकार, साधारण बैंकिंग अधिकारी और विशेष अधिकारी के पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर 10 अगस्त, 2026 तक अपना अवेदन कर सकते हैं। यूनियन बैंक भर्ती प्रक्रिया 2026-27 की शुरुआत 21 जुलाई से हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवेदन शुल्क भी अदा करना होगा।

पदों का विवरण

वैकेंसी में 163 मैनेजर, 153 सीनियर मैनेजर, 52 चीफ मैनेजर, 20 असिस्टेंट जनरल मैनेजर और 7 डिप्टी जनरल मैनेजर के पद शामिल हैं। कैंडिडेट को आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा करना होगा, बताए गए फॉर्मेट में जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और आखिरी तारीख से पहले एप्लीकेशन फीस देनी होगी।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें?

कैंडिडेट यूनियन बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • यूनियन बैंक के भर्ती पोर्टल ibpsreg.ibps.in पर जाएं।
  • ‘Click Here for New Registration’ पर क्लिक करें।
  • अपने नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके रजिस्टर करें।
  • आवेदन फॉर्म ध्यान से भरें और सभी डिटेल्स वेरिफाई करें।
  • जरूरी फोटो, सिग्नेचर, बाएं अंगूठे का निशान और हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन अपलोड करें।
  • ‘कम्प्लीट रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करने से पहले एप्लीकेशन का प्रीव्यू देखें।
  • आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें।
  • आवेदन सबमिट करें और आगे के लिए कन्फर्मेशन पेज और ई-रसीद डाउनलोड करें।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026: आवेदन शुल्क

SC/ST/PwBD कैंडिडेट: Rs. 177 (GST के साथ)

UR/EWS/OBC कैंडिडेट: Rs. 1,180 (GST के साथ)

फीस डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, IMPS, कैश कार्ड या मोबाइल वॉलेट/UPI से पे की जा सकती है।

कैंडिडेट को पेमेंट कन्फर्मेशन का इंतजार करना चाहिए और सफल भुगतान के बाद ई-रसीद डाउनलोड करनी चाहिए।

अधूरे आवेदन या शुल्क भुगतान में फेल होने पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

यूनियन बैंक रिक्रूटमेंट 2026: जरूरी डॉक्यूमेंट्स

  • हाल का पासपोर्ट-साइज कलर फोटो (20 KB-50 KB)
  • सफेद कागज पर काली स्याही से सिग्नेचर (10 KB-20 KB)
  • बाएं अंगूठे का निशान (20 KB-50 KB)
  • कैंडिडेट की अपनी हैंडराइटिंग में हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन (50 KB-100 KB)
  • वैलिड फोटो ID जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर ID
  • रजिस्ट्रेशन और कम्युनिकेशन के लिए एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल ID

कैंडिडेट्स को सभी डिटेल्स ध्यान से वेरिफ़ाई कर लेनी चाहिए, बताए गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने चाहिए, फीस भुगतान पूरा करना चाहिए, और लास्ट-मिनट की दिक्कतों से बचने के लिए 10 अगस्त, 2026 से पहले आवेदन जमा कर देनी चाहिए।

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Rashifal Today: कैसा होगा आपका 23 जुलाई का पूरा दिन, जानें किन बातों का रखना होगा ध्यान

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने के लिए अच्छा समय है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें और देखें कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं।आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक मामलों में समझदारी से काम लेने का है। भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। बिना सोचे-समझे खर्च करने से बचें और अपने बजट पर नियंत्रण रखें। अगर आप लंबे समय के लिए निवेश या बचत की योजना बना रहे हैं, तो उस पर गंभीरता से काम करें।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें। बचत बढ़ाने और भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक योजना बनाने का यह अच्छा समय है। किसी भी निवेश या समझौते से पहले पूरी जानकारी जरूर लें।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति में सुधार के अवसर मिल सकते हैं। करियर और आय बढ़ाने से जुड़े नए रास्ते खुल सकते हैं। बाजार की गतिविधियों पर नजर रखें और समय के अनुसार अपनी वित्तीय योजना में बदलाव करने से न हिचकें। सही फैसले आपको आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। भावनाओं में आकर पैसा खर्च करने के बजाय जरूरत और सुविधा को प्राथमिकता दें। अपने बजट को व्यवस्थित रखें और सिर्फ जरूरी खर्चों पर ध्यान दें। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में व्यस्तता रह सकती है। बजट बनाकर चलेंगे तो फायदा होगा। फिजूल खर्च से बचें और हर खर्च को व्यावहारिक नजरिए से देखें। नई कमाई के अवसर भी मिल सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें और सही मौके का लाभ उठाएं।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज अपने खर्चों और आय का सही हिसाब रखने की जरूरत है। योजनाबद्ध तरीके से काम करने से भविष्य में लाभ मिलेगा। अनावश्यक खर्चों से दूरी बनाएं और सिर्फ जरूरी चीजों पर पैसा लगाएं। आर्थिक मामलों में आपकी समझदारी आपको आगे बढ़ाएगी।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान देने का है। लग्जरी चीजों पर बेवजह खर्च करने से बचें। अपनी आय और खर्च का संतुलन बनाए रखें। अगर आप अभी से सही योजना बनाएंगे, तो आने वाले समय में आर्थिक मजबूती मिलेगी।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने के लिए अच्छा समय है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें और देखें कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। जल्दबाजी में खर्च करने से बचें और भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लें।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी के कोई फैसला न लें। बढ़ते खर्चों पर नियंत्रण रखें और अपनी वित्तीय योजनाओं की दोबारा समीक्षा करें। सही समय पर लिया गया समझदारी भरा फैसला भविष्य में बड़ा लाभ दे सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Rohit Sharma: ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता’ रोहित शर्मा के रिटायरमेंट की अफवाहों पर पूर्व साथी खिलाड़ी का बड़ा बयान

Rohit Sharma: भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की सीरीज में टीम इंडिया को 2-1 से हार मिली है। वहीं कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि,लॉर्डस में होने वाले सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद रोहित शर्मा की रिटायरमेंट ले लेंगे। रोहित ने इस मुकाबले में शतक लगा कर इन खबरों को खारिज कर दिया है। इसी बीच रोहित शर्मा के साथी क्रिकेटर और पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि रोहित शर्मा के संन्यास को लेकर उठी चर्चाएं पूरी तरह बेबुनियाद नहीं थीं। उन्होंने कहा कि, भले ही इन्हें बाहरी अफवाह बताया गया हो, लेकिन अक्सर ऐसी बातों के पीछे कुछ न कुछ वजह होती है।

बीसीसीआई ने रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों को खारिज कर दिया था। लेकिन रविचंद्रन अश्विन के मुतबिक, इन चर्चाओं के पीछे कुछ न कुछ सच्चाई जरूर रही होगी। रोहित शर्मा ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में 138 रनों की शानदार पारी खेलकर सभी अटकलों और आलोचनाओं का करारा जवाब दे दिया।

अफवाह नहीं था रिटायरमेंट 

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर रोहित शर्मा के संन्यास की अटकलों पर भी बात की। उन्होंने कहा, “जब रोहित शर्मा के संभावित रिटायरमेंट की खबर सामने आई, तो कई लोगों ने इसे बाहरी शोर बताया। लेकिन मैं इसे सिर्फ अफवाह नहीं मानता। तमिल में एक कहावत है, ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता।'” अश्विन ने आगे कहा, “आग तो थी, लेकिन रोहित ने अपने बल्ले से जवाब दिया। उन्होंने दिखा दिया कि वह अब भी ऐसा प्रदर्शन कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि उनके मन में कोई संदेह है। मेरा मानना है कि वह 2027 वनडे विश्व कप तक खेल सकते हैं।”

रोहित-विराट करें फैसला

अश्विन ने कहा, “मुझे लगता है कि ये चोट के बाद रोहित शर्मा की शानदार वापसी की शुरुआत है। अगर वह थोड़ी और बेहतर लय में होते या उनका आत्मविश्वास थोड़ा और ऊंचा होता, तो वह 180 रन तक भी पहुंच सकते थे और टीम को जीत दिला सकते थे।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगा कि रोहित शानदार फॉर्म में हैं। अगर रोहित और विराट खेलना चाहते हैं, तो उनके रिकॉर्ड और अनुभव के सामने कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। रोहित ने लगभग 12 हजार वनडे रन बनाए हैं, इसलिए उनके योगदान पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।”

रोहित ने आलोचकों को दिया जवाब

रोहित के रिटायरमेंट की चर्चा उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा वनडे रोहित शर्मा का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच हो सकता है। रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया था कि टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रोहित की योजना 2027 वनडे विश्व कप तक खेलकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहने की थी। रोहित शर्मा ने अपने प्रदर्शन से सभी चर्चाओं का जवाब दिया।

Vaibhav Sooryavanshi: ड्रॉप होने के बाद पहली बार बोले वैभव सूर्यवंशी, बोले- खुद पर पूरा भरोसा है

भारत और जिम्बाब्वे के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाएगा। वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के बाद जिम्बाब्वे सीरीज में भी मौका मिला है। वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मुकाबले में डेब्यू का मौका मिला था। तीन मैचों में खेलने के बाद वैभव को एक मैच में ड्रॉप कर दिया गया था। वहीं हाल ही में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपने डेब्यू और इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी मुकाबले में ड्रॉप किए जाने पर चुप्पी तोड़ी है।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अभी पूरी तरह जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले पर ध्यान लगा रहे हैं। शुरुआती चुनौतियों और टीम में अपनी जगह को लेकर उठे सवालों के बावजूद उन्होंने अपना फोकस बनाए रखा है और अब उनका लक्ष्य भारतीय टीम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।

हर मैच में देना है 100 प्रतिशत

15 वर्षीय युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि पिछले चार महीने उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन इन एक्सपीरिएंस ने उन्हें मजबूत बनाया। उन्होंने माना कि भारतीय टीम में शुरुआत आसान नहीं रही, फिर भी उनका आत्मविश्वास पहले जैसा कायम है। सूर्यवंशी ने BCCI से कहा, “हां, पिछले चार महीनों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। यह क्रिकेट का हिस्सा है और ऐसा आगे भी होता रहेगा। मुझे सिर्फ अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना है और हर मैच में टीम के लिए अपना 100 प्रतिशत देना है।”

वैभव ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड

आईपीएल 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चुना गया। आयरलैंड के खिलाफ उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में दूसरे टी20 मैच में उन्होंने इंटरनेशल क्रिकेट में डेब्यू किया। इसी के साथ 15 वर्षीय वैभव भारत के सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन गए और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

वैभव ने खेल पाए बड़ी पारी

वैभव को लगातार चार टी20 मैचों में मौका मिला, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए। इसके बाद संजू की वापसी पर उन्हें अंतिम मैच से बाहर कर दिया गया। सूर्यवंशी ने इस कठिन दौर से बाहर निकलने का श्रेय अपने सपोर्ट सिस्टम को दिया। उन्होंने कहा, “मुझे जिस तरह की मदद और मार्गदर्शन की जरूरत होती है, कोच हमेशा उसे उपलब्ध कराते हैं। जिस तरह की प्रैक्टिस चाहिए, वह भी मुझे मिल रही है। मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं और मेरा आत्मविश्वास भी बरकरार है।” अब जिम्बाब्वे दौरे के साथ वह एक बार फिर उस मैदान पर लौट रहे हैं, जो उनके युवा क्रिकेट करियर में खास महत्व रखता है।

इसी मैदान पर खेली थी बड़ी पारी

उन्होंने कहा, “यह मैदान मेरे लिए बहुत खास है। सिर्फ चार महीने पहले हमने यहां अंडर-19 वर्ल्ड कप का फाइनल खेला था और खिताब जीता था। भारत का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और यह मेरे लिए बेहद यादगार पल है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं फिर उसी मैदान पर खेलने जा रहा हूं, जहां हमने चार महीने पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था। इस मैदान पर दोबारा उतरना एक अलग ही एहसास है और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा हूं।” उन्होंने कहा, “यहां की पिच और हालात के बारे में मुझे अच्छी जानकारी है, क्योंकि अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान मैं यहां खेल चुका हूं। उस टूर्नामेंट से जो अनुभव मिला, उसे अब आने वाले मैचों में इस्तेमाल करने की कोशिश करूंगा और अच्छा प्रदर्शन करना चाहूंगा।”

प्रैक्टिस पर पूरा भरोसा

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी प्रैक्टिस और अपने खेल पर पूरा भरोसा रखूंगा। टीम के लिए जितना भी योगदान दे सकूं, वह देने की कोशिश करूंगा। मैंने इस मैदान पर दो मैच खेले हैं और दोनों मेरे लिए अच्छे रहे। अब कोशिश होगी कि उसी प्रदर्शन को आगे भी जारी रखूं।” महज चार महीने पहले वैभव सूर्यवंशी ने भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत ने खिताब अपने नाम किया।

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लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

A portrait of Keshav Gangadhar Tilak on the birth anniversary of Lokmanya Tilak, a pioneer of the freedom movement

Lokmanya Tilak Biography: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जब भी राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और जनजागरण की बात होती है, तो लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्हें आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रवादियों में गिना जाता है। हर वर्ष 23 जुलाई को लोकमान्य तिलक की जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 170वीं जयंती मनाई जाएगी।

 

जब भारतीय जनमानस औपनिवेशिक दासता की गहरी नींद में सोया हुआ था, तब एक ऐसी आवाज़ गूंजी जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी- और वह थीं, 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।' यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के पुनर्जागरण का शंखनाद था। यह दिन केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों, विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को समझने का भी अवसर है।

 

  • जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर
  • इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन
  • सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग
  • आज के संदर्भ में जयंती का महत्व
  • लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य

 

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती 2026 पर जानें उनका जीवन परिचय, इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, महत्व, प्रसिद्ध विचार और अनसुने तथ्य…

 

जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर

जन्म: 23 जुलाई 1856 रत्नागिरी, महाराष्ट्र

मूल नाम: केशव गंगाधर तिलक  (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

माता-पिता: पार्वतीबाई एवं गंगाधर रामचंद्र तिलक

योग्यता: गणित और संस्कृत के प्रकांड विद्वान, एलएलबी में स्नातक

उपाधि: 'लोकमान्य' जनता द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया नेता।

पेशा: शिक्षक, पत्रकार, समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी

निधन: 1 अगस्त 1920, मुंबई

 

तिलक जी का मानना था कि किसी भी देश की स्वतंत्रता की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में की। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए पुणे में 'न्यू इंग्लिश स्कूल' और 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी/ फर्गुसन कॉलेज' की स्थापना की।

 

इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती दौर में जब अंग्रेज सरकार के समक्ष केवल प्रार्थना-पत्र देने की नीति अपनाई जा रही थी, तब तिलक जी ने इसका मुखर विरोध किया। लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल यानी त्रिदेव (लाल-बाल-पाल) के साथ मिलकर उन्होंने कांग्रेस में 'राष्ट्रवादी/गरम दल' का गठन किया। उनका मानना था कि आजादी भीख में नहीं, बल्कि संघर्ष से मिलती है।

 

समाचार पत्रों का माध्यम: बाल गंगाधर तिलक ने ऐसे समय में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया, जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाना आसान नहीं था। उन्होंने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक आंदोलनों को जनजागरण का माध्यम बनाया।

उन्होंने मराठी समाचार पत्र 'केसरी' और 'मराठा' अंग्रेजी समाचार पत्र के माध्यम से अंग्रेजों की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब किया। केसरी में लिखे उनके लेख ब्रिटिश सरकार के लिए किसी बम धमाके से कम नहीं होते थे। सन् 1916 में उन्होंने एनी बेसेंट के साथ मिलकर ऑल इंडिया होम रूल लीग यानी स्वशासन की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाया, जिसने भारत के कोने-कोने में राष्ट्रवाद की ज्वाला जला दी। 

 

सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग

लोकमान्य तिलक एक दूरदर्शी नेता थे। वे जानते थे कि जब तक भारत की विविधता को एक सूत्र में नहीं पिरोया जाएगा, तब तक अंग्रेजों से लड़ना असंभव है। इसके लिए उन्होंने धर्म और संस्कृति को जन-जागरण का माध्यम बनाया, जिसके तहत उन्होंने सन् 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारंभ किया, अर्थात् जो पूजा घरों की चारदीवारी तक सीमित थी, उसे उन्होंने एक सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया ताकि लोग जाति-पात से ऊपर उठकर एक जगह एकत्र हों और देश की स्थिति पर चर्चा कर सकें।

उन्होंने 1895 में शिवाजी महोत्‍सव के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य को याद दिलाकर भारत के युवाओं में स्वाभिमान और साहस का संचार किया।

 

आज के संदर्भ में जयंती का महत्व

आज 21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत में लोकमान्य तिलक के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी जयंती हमें सिखाती है कि स्वावलंबन ही वास्तविक स्वतंत्रता है। तिलक जी ने जो 'स्वदेशी' का पाठ 100 साल पहले पढ़ाया था, वही आज 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का आधार है। उनकी निर्भीकता और मौलिक सोच तथा अन्याय के सामने न झुकने का उनका जज्बा आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाशपुंज है।

 

लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य

 

1. 'लोकमान्य' की उपाधि जनता ने दी

उनके लोकप्रिय नेतृत्व और जनसमर्थन के कारण लोगों ने उन्हें 'लोकमान्य', अर्थात् 'जिसे जनता ने स्वीकार किया हो', की उपाधि दी।

 

2. पत्रकारिता को बनाया आंदोलन का हथियार

उन्होंने अपने समाचार पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नीतियों का निर्भीक विरोध किया।

 

3. गणेशोत्सव को बनाया सार्वजनिक उत्सव

तिलक ने घरेलू गणेश पूजा को सार्वजनिक आयोजन का रूप देकर लोगों को एकजुट किया और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।

 

4. कई बार गए जेल

ब्रिटिश सरकार ने उनके राष्ट्रवादी लेखों और भाषणों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया। उन्हें म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के मांडले कारागार में भी कैद रखा गया।

 

5. जेल में लिखी प्रसिद्ध पुस्तक

मांडले जेल में रहते हुए उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने कर्मयोग का महत्व बताया।

 

6. स्वदेशी आंदोलन के समर्थक

उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का जोरदार समर्थन किया।

 

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मेटल डेकोर से चमकेगा घर का हर कोना? फेंगशुई में बताए गए हैं ये खास फायदे

फेंगशुई (Feng Shui) एक प्राचीन चीनी पद्धति है, जिसे घर और ऑफिस (Office) में सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है। इसमें धातु को पांच प्रमुख तत्वों में से एक माना गया है, जो प्रोग्रेस, डिसिप्लिन और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि सही जगह पर धातु की कलाकृतियां (metal artifacts) रखने से घर का माहौल पॉजिटिव बना रहता है। आइए जानते हैं फेंगशुई में धातु की कलाकृतियों का क्या महत्व है और इन्हें किस तरह इस्तेमाल करना शुभ (auspicious) माना जाता है:

घर का माहौल बदल सकती है ये छोटी-सी चीज

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फेंगशुई (Feng Shui) के अनुसार धातु की कलाकृतियां (Feng Shui) घर या ऑफिस में एनर्जी के फ्लो को बैलेंस करने में मदद करती हैं। खासतौर पर पीतल, तांबा, स्टील या कांस्य से बनी डेकोरेटिव आइटम नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) को कम कर सकारात्मक माहौल बनाने का प्रतीक मानी जाती हैं। इन्हें ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है, जहां लोग सबसे ज्यादा समय बिताते हैं।

सफलता से जुड़ा है इसका खास कनेक्शन

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धातु तत्व (metal element) को फोकस, डिसिप्लिन और डिसीजन लेने की एबिलिटी से जोड़ा जाता है। इसलिए ऑफिस (offices), स्टडी रूम (study room) या वर्कप्लेस (workplace) में धातु की कलाकृतियां (metal artifact) रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे काम के प्रति एकाग्रता बढ़ती है और करियर (career) या व्यवसाय (business) में नई संभावनाओं का माहौल बनता है।

खुशहाली का छिपा हुआ राज

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फेंगशुई में धातु के सिक्के (metal coin), धातु का जहाज (metal ship model), सुनहरे रंग की कलाकृतियां (gold-colored artifact) या धातु से बने शुभ प्रतीकों (metal symbol) को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन्हें घर के उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखने की सलाह दी जाती है, ताकि पॉजिटिव एनर्जी का बैलेंस बना रहे।

सजावट के साथ मिलेगा डबल फायदा

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धातु की कलाकृतियां (Metal artifact) केवल फेंगशुई के लिहाज से ही नहीं, बल्कि इंटीरियर डेकोरेशन में भी खास भूमिका निभाती हैं। मॉडर्न डिजाइन वाली मेटल वॉल आर्ट, मूर्तियां या हैंगिंग पीस घर को स्टाइलिश और एलिगेंट लुक देते हैं। इससे घर का माहौल भी ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड और अट्रैक्टिव दिखाई देता है।

मन को सुकून देने वाला आसान तरीका

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फेंगशुई के अनुसार धातु तत्व मेंटल क्लैरिटी और इमोशनल बैलेंस का प्रतीक है। शांत और सुंदर धातु की कलाकृतियां (metal artifact) देखने से मन को सुकून महसूस हो सकता है और घर में सकारात्मक वातावरण का एहसास बढ़ सकता है। हालांकि इसे व्यक्तिगत आस्था के रूप में देखा जाता है।

एक छोटी-सी गलती बिगाड़ सकती है असर

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फेंगशुई में धातु तत्व के लिए पश्चिम (West) और उत्तर-पश्चिम दिशा (Northwest direction) को शुभ माना जाता है। इसलिए धातु की कलाकृतियों को इन दिशाओं में रखना बेहतर माना जाता है। साथ ही इन्हें हमेशा साफ और अच्छी कंडीशन में रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि टूटी या जंग लगी वस्तुएं शुभ नहीं मानी जातीं।

इसे अपनाते समय भूलकर भी न करें ये काम

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फेंगशुई में किसी भी एलिमेंट का बैलेंस सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूरे घर में केवल धातु की डेकोरेटिव आइटम (decorative item) रखने के बजाय लकड़ी, पौधे, पानी और मिट्टी जैसे अन्य तत्वों के साथ बैलेंस बनाकर डेकोरेट करने की सलाह दी जाती है। इससे घर का वातावरण बैलेंस्ड और खूबसूरत बना रहता है।

Video: 20 घंटे काम, पढ़ाई का दबाव और खर्चों की चिंता… विदेश में छात्रों की जिंदगी का सच आया सामने

विदेश में पढ़ाई करना आज कई भारतीय छात्रों का सपना बन चुका है। बेहतर करियर, नई संभावनाओं और अच्छी जीवनशैली की उम्मीद में हजारों छात्र हर साल दूसरे देशों का रुख करते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती। यूरोप में रह रहे भारतीय शख्स राहुल महाजन ने एक वीडियो में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की उन परेशानियों को सामने रखा, जिनका सामना उन्हें पढ़ाई के साथ करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई छात्र भारी खर्च और कर्ज लेकर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पढ़ाई, पार्ट टाइम नौकरी और रोजमर्रा के खर्चों के बीच फंस जाते हैं।

सीमित काम के घंटे, आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता कई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। राहुल की बातों ने विदेश जाकर पढ़ाई करने के सपने और उसकी वास्तविकता के बीच के अंतर पर नई चर्चा छेड़ दी है।

विदेश में शुरू होती है संघर्ष की दौड़

राहुल महाजन ने कहा कि कई छात्र भारत में अच्छी जिंदगी छोड़कर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। बड़ी फीस खर्च करने के बाद भी उन्हें पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ती है।

उनका कहना है कि कई बार छात्रों को ऐसे काम भी करने पड़ते हैं, जिन्हें उन्होंने भारत में कभी करने की कल्पना नहीं की थी।

20 घंटे काम की सीमा और बढ़ता खर्च

महाजन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए काम करने के घंटे सीमित होते हैं, जिससे कमाई करना आसान नहीं होता। पढ़ाई के साथ सीमित समय में नौकरी करना, किराया, खाने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना काफी मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बताया कि कई छात्र अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हर तरह का काम करने को मजबूर हो जाते हैं।

एजुकेशन लोन का बोझ बढ़ाता है दबाव

विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए कई छात्र एजुकेशन लोन लेते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद पढ़ाई और नौकरी के साथ-साथ लोन चुकाने की चिंता भी लगातार बनी रहती है। महाजन ने कहा कि छात्रों पर आर्थिक दबाव के अलावा परिवार और समाज की उम्मीदों का भी बोझ रहता है। कई लोगों को बार-बार यह सवाल झेलना पड़ता है कि वे कब वापस आएंगे।

NRI बनने का सपना और हकीकत के बीच फंसे छात्र

राहुल महाजन ने बताया कि विदेश में बसने की प्रक्रिया, पढ़ाई पूरी करना और भविष्य की योजनाएं बनाना भी छात्रों के लिए आसान नहीं होता। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो के बाद कई लोगों ने विदेशी शिक्षा और वहां की जिंदगी की वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा शुरू कर दी है।

यह वीडियो उन छात्रों के लिए एक सोचने का मौका है, जो विदेश जाने का फैसला केवल चमक-दमक देखकर लेते हैं, लेकिन वहां की वास्तविक चुनौतियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

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मुंबई में ऐमजॉन की 35 लाख की नौकरी छोड़ सान्या देशमुख ने पुणे में चुना ये काम, आज अपने फैसले पर बेहद खुश

अच्छी सैलरी और बड़ी कंपनी में नौकरी हर किसी का सपना होती है। वहीं 31 वर्षीय सान्या देशमुख ने इससे बिल्कुल अलग रास्ता चुना। सान्या देशमुख ने कई साल तक बड़ी टेक कंपनियों में काम करते हुए अपना सफल करियर बनाया। 31 वर्षीय सान्या डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में बाइटडांस, इनमोबी और अमेजन जैसी नामी कंपनियों से जुड़ी रहीं। अमेजन में काम करते हुए उनकी सालाना सैलरी करीब 30 से 35 लाख रुपये थी। वहीं उनके पति की भी लगभग इतनी ही कमाई थी, जिससे दोनों की कुल सालाना आय 60 से 65 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई थी।

लेकिन सान्या देशमुख के पास अच्छी नौकरी के बाद भी उन्हें धीरे-धीरे महसूस होने लगा कि मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी उनके लिए सही नहीं है। इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। अब वह नासिक में रहकर अपने बिजनेस पार्टनर के साथ डिजिटल मार्केटिंग का काम करती हैं।

कई जगहों पर किया काम

पुणे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सान्या देशमुख ने पारंपरिक इंजीनियरिंग की नौकरी करने के बजाय डिजिटल मार्केटिंग को अपना करियर बनाया। शुरुआत में उन्होंने फूड से जुड़ा एक सोशल मीडिया प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसकी लोकप्रियता ने उन्हें एक बड़ी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में नौकरी दिलाने में मदद की। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने करियर में तरक्की की और कई बड़ी कंपनियों में काम किया। सान्या पहले बाइटडांस से जुड़ीं, फिर भारत में बाइटडांस का कारोबार बंद होने के बाद उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद वह इनमोबी पहुंचीं और बाद में अमेजन के विज्ञापन कारोबार से जुड़े विभाग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

करियर में आगे बढ़ते हुए सान्या ने शुरुआती पद से शुरुआत की और धीरे-धीरे टीम लीडर की जिम्मेदारी तक पहुंचीं। अमेजन में सान्या देशमुख को अपना काम पसंद था, लेकिन कॉर्पोरेट लाइफ की भागदौड़ धीरे-धीरे उनके लिए थकाऊ होती गई। उनके माता-पिता औरंगाबाद में और पति नासिक में रहते थे।

काफी त्योहार मिस किए

सान्या देशमुख ने मनीकंट्रोल से कहा, “अब मुझे सोमवार आने से पहले रविवार वाली घबराहट या तनाव महसूस नहीं होता।” सान्या देशमुख ने बताया, “शुरुआत में हमें हफ्ते में दो दिन ऑफिस आना होता था। बाद में यह तीन दिन और फिर पूरे पांच दिन हो गया। मैं हर रविवार शाम मुंबई के लिए निकलती थी, ऑफिस से काम करती थी और फिर वापस घर लौट आती थी।” उन्होंने बताया कि शादी के बाद लगातार शहरों के बीच सफर करना और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए धीरे-धीरे काफी मुश्किल और थकाने वाला हो गया था।

सान्या देशमुख ने कहा, “परिवार के कार्यक्रमों, त्योहारों और दूसरे खास मौकों पर शामिल होने के लिए हमें अक्सर छुट्टी लेनी पड़ती थी। ऐसे में कई बार हमें अपनों के साथ समय बिताने और भविष्य की यात्रा के लिए अपनी छुट्टियां बचाकर रखने के बीच चुनाव करना पड़ता था। हम परिवार के कई कार्यक्रम और त्योहार मिस कर रहे थे।”

किराए के लगते थे 65 हजार

सान्या देशमुख ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर भी पति-पत्नी के बीच गंभीर बातचीत होने लगी थी। ऑफिस आने-जाने का समय बचाने के लिए दोनों ने मुंबई में ऑफिस के पास एक बेडरूम का फ्लैट किराए पर लिया था, जिसका किराया करीब 65 हजार रुपये प्रति माह था। वे ये खर्च उठा सकते थे, लेकिन उन्हें लगने लगा कि लंबे समय तक ये व्यवस्था सही नहीं है। उन्होंने कहा, “हम अपनी कमाई, किराए, रोजमर्रा के खर्च और आखिर में कितनी बचत हो रही है, इन सभी बातों पर ध्यान देने लगे थे।”

मुंबई में बढ़ते खर्चों और बच्चों की परवरिश को लेकर सोचने के बाद सान्या और उनके पति ने नासिक में परिवार के साथ रहने का फैसला किया। यहां उन्हें किराया नहीं देना पड़ता, जिससे घर के खर्च में काफी कमी आई और उनकी बचत भी बढ़ गई।

पैसों को लेकर काफी कुछ सीखा

सान्या ने कहा कि, आय पहले से कम होने के बावजूद अब उनकी बचत पहले के मुकाबले ज्यादा हो रही है। सान्या देशमुख ने कहा, “जब हम मुंबई में रह रहे थे, तब मैं ठीक तरह से निवेश भी नहीं कर पा रही थी।” उन्होंने बताया कि उस समय उनकी ज्यादातर बचत PPF, कभी-कभी यात्रा और सोना खरीदने जैसे खर्चों में चली जाती थी। लेकिन अब उन्होंने SIP शुरू की, PPF में निवेश जारी रखा और पैसों के बेहतर प्रबंधन के लिए कई फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स भी किए। उन्होंने कहा, “मैंने निवेश और पैसों को मैनेज करने के बारे में काफी कुछ सीखा। इससे मेरा पूरा नजरिया बदल गया।”

नासिक आने के बाद सान्या की जिंदगी बदल गई। अब वह अपनी सेहत पर पूरा ध्यान देती हैं, नियमित जिम जाती हैं, खेलती हैं और पर्याप्त नींद व आराम भी करती हैं। सान्या देशमुख ने कहा, “अब काम का तनाव पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है।”

किसी बड़े प्लान के लिए नहीं छोड़ी नौकरी

उन्होंने कहा, “ऐसे भी दिन आए जब बढ़ते दबाव की वजह से मैं ऑफिस के वॉशरूम में जाकर खुद को बंद कर लेती थी और रोने लगती थी।” सान्या ने पहले से तय किसी बड़े प्लान के तहत नौकरी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी तय समय-सीमा से करीब एक साल पहले ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कुछ समय का ब्रेक लिया और फिर एक प्रोफेशनल साथी के साथ मिलकर डिजिटल मार्केटिंग का अपना कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें क्लाइंट मिलने लगे और अब उनका यह बिजनेस पिछले आठ महीनों से सफलतापूर्वक चल रहा है।

फैसले पर कोई अफसोस नहीं

सान्या ने कहा कि, नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें सबसे बड़ी खुशी अपना समय वापस मिलने की है। अब वह परिवार के साथ ज्यादा समय बिताती हैं। सान्या देशमुख ने कहा, “कमाई भले ही पहले से कम हो गई हो, लेकिन मुझे लगता है कि यह फैसला सही था। मौके हमेशा मिलते रहते हैं। लोगों को सबसे ज्यादा डर हर महीने मिलने वाली सैलरी छोड़ने का होता है। लेकिन जब आपके आर्थिक लक्ष्य साफ होते हैं, तो आप अपनी जिंदगी के लिए अलग फैसले लेने की हिम्मत जुटा लेते हैं।”