विदेश में बसने का सपना देखने वालों की आंखें खुल जाएंगी! पेरिस में रहने वाले तनिष्क ने बताई इस सपने के पीछे की असली कीमत

विदेश जाकर अच्छी नौकरी, ज्यादा कमाई और बेहतर जीवन जीने का सपना कई भारतीय देखते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर विदेश की चमक-दमक और शानदार लाइफस्टाइल देखकर ऐसा लगता है कि वहां सब कुछ कितना आसान है। लेकिन सच्चाई हमेशा ऐसी नहीं होती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पेरिस में रहने वाले एक भारतीय युवक का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक ने बताया कि, विदेश में रहने का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक देखकर कोई बड़ा फैसला न लें, बल्कि हर पहलू को समझने के बाद ही विदेश जाने का निर्णय करें।

विदेश में बसने वाले लोगों को दी सलाह

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में तनिष्क लोहान ने बताया कि विदेश जाने की सोच रखने वाले कई भारतीय युवाओं को अक्सर एक जैसी सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि कुछ साल के लिए भारत छोड़ दो। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या किसी भी दूसरे देश चले जाओ। वहां पार्ट-टाइम नौकरी करके हर महीने 2 से 3 हजार यूरो कमा सकते हो। फिर जब फुल-टाइम नौकरी मिल जाएगी, तो जिंदगी पूरी तरह सेट हो जाएगी।”

लोहान ने कहा कि, इस तरह की बातें सुनकर कई लोग विदेश जाने का फैसला कर लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरी सच्चाई नहीं बताई जाती। उन्होंने आगे कहा, “अगर आप भी ऐसी बातें सुनकर प्रेरित हो रहे हैं और विदेश आने की सोच रहे हैं, तो पहले इसकी असली हकीकत भी जान लें।”

परिवार से दूर रहना पड़ता है

तनिष्क लोहान ने बताया कि विदेश में पढ़ाई करने का खर्च सिर्फ कॉलेज की फीस और हवाई टिकट तक सीमित नहीं होता। उनके अनुसार, कई छात्र पढ़ाई के लिए 50 से 60 लाख रुपये या उससे भी अधिक का एजुकेशन लोन लेते हैं। वहीं, कुछ परिवार अपने बच्चों का सपना पूरा करने के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च कर देते हैं या अपनी संपत्ति तक बेच देते हैं। उनके मुताबिक, विदेश जाने से पहले इन आर्थिक जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है। लोहान ने कहा कि, विदेश में बसने की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि इमोशनल भी होती है। दूसरे देश में रहने का मतलब परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से दूर रहना होता है।

नए माहौल में ढलना आसान नहीं होता

इसके साथ ही नई भाषा, अलग संस्कृति और नए माहौल में खुद को ढालते हुए करियर की शुरुआत भी करनी पड़ती है। लोहान ने कहा कि, विदेश में पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम नौकरी करना, पढ़ाई और काम के बीच बैलेंस बनाए रखना, अच्छी फुल-टाइम नौकरी हासिल करना और नए माहौल में खुद को ढालना आसान नहीं होता। इन सबके लिए समय, धैर्य और लगातार मेहनत करनी पड़ती है। उनका कहना है कि इन चुनौतियों पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती।

 

उन्होंने कहा, “अगर आप विदेश आते हैं, तो यहां अपने लिए एक बेहतर जिंदगी बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको धैर्य, मेहनत और लगातार कोशिश करनी होगी। हर दिन खुद को यह भरोसा दिलाना होगा कि आप कड़ी मेहनत करेंगे और अपने लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।” उन्होंने ये भी कहा कि, विदेश की जिंदगी सिर्फ घूमने-फिरने और छुट्टियां मनाने तक सीमित नहीं होती। उन्होंने कहा, “अच्छे पल भी आते हैं, लेकिन उनसे पहले आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है।”

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिया रिएक्शन

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली लेकिन पॉजिटिव रिएक्शन मिले हैं। कई यूजर्स ने कहा कि यह वीडियो विदेश में रहने की सिर्फ सफलता की कहानियां नहीं, बल्कि वहां की असली चुनौतियों को भी सामने रखता है। एक यूजर ने लिखा, “बहुत शानदार बात कही दोस्त।” वहीं दूसरे ने कहा, “अक्सर लोग सिर्फ एक ही पहलू बताते हैं कि विदेश जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए। लेकिन इस वीडियो ने पूरी तस्वीर दिखाने की कोशिश की है।”

एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “मेहनत किए बिना कहीं भी सफलता नहीं मिलती। अगर कम्फर्ट जोन में रहकर ही सब कुछ पाना है, तो फिर विदेश जाने का सोचने का क्या मतलब?” कई अन्य लोगों ने भी माना कि विदेश में बेहतर अवसर जरूर मिल सकते हैं, लेकिन वहां सफल होने के लिए धैर्य और लगातार मेहनत सबसे ज़्यादा जरूरी होती है।

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Video: 20 घंटे काम, पढ़ाई का दबाव और खर्चों की चिंता… विदेश में छात्रों की जिंदगी का सच आया सामने

विदेश में पढ़ाई करना आज कई भारतीय छात्रों का सपना बन चुका है। बेहतर करियर, नई संभावनाओं और अच्छी जीवनशैली की उम्मीद में हजारों छात्र हर साल दूसरे देशों का रुख करते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती। यूरोप में रह रहे भारतीय शख्स राहुल महाजन ने एक वीडियो में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की उन परेशानियों को सामने रखा, जिनका सामना उन्हें पढ़ाई के साथ करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई छात्र भारी खर्च और कर्ज लेकर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पढ़ाई, पार्ट टाइम नौकरी और रोजमर्रा के खर्चों के बीच फंस जाते हैं।

सीमित काम के घंटे, आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता कई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। राहुल की बातों ने विदेश जाकर पढ़ाई करने के सपने और उसकी वास्तविकता के बीच के अंतर पर नई चर्चा छेड़ दी है।

विदेश में शुरू होती है संघर्ष की दौड़

राहुल महाजन ने कहा कि कई छात्र भारत में अच्छी जिंदगी छोड़कर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। बड़ी फीस खर्च करने के बाद भी उन्हें पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ती है।

उनका कहना है कि कई बार छात्रों को ऐसे काम भी करने पड़ते हैं, जिन्हें उन्होंने भारत में कभी करने की कल्पना नहीं की थी।

20 घंटे काम की सीमा और बढ़ता खर्च

महाजन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए काम करने के घंटे सीमित होते हैं, जिससे कमाई करना आसान नहीं होता। पढ़ाई के साथ सीमित समय में नौकरी करना, किराया, खाने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना काफी मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बताया कि कई छात्र अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हर तरह का काम करने को मजबूर हो जाते हैं।

एजुकेशन लोन का बोझ बढ़ाता है दबाव

विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए कई छात्र एजुकेशन लोन लेते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद पढ़ाई और नौकरी के साथ-साथ लोन चुकाने की चिंता भी लगातार बनी रहती है। महाजन ने कहा कि छात्रों पर आर्थिक दबाव के अलावा परिवार और समाज की उम्मीदों का भी बोझ रहता है। कई लोगों को बार-बार यह सवाल झेलना पड़ता है कि वे कब वापस आएंगे।

NRI बनने का सपना और हकीकत के बीच फंसे छात्र

राहुल महाजन ने बताया कि विदेश में बसने की प्रक्रिया, पढ़ाई पूरी करना और भविष्य की योजनाएं बनाना भी छात्रों के लिए आसान नहीं होता। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो के बाद कई लोगों ने विदेशी शिक्षा और वहां की जिंदगी की वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा शुरू कर दी है।

यह वीडियो उन छात्रों के लिए एक सोचने का मौका है, जो विदेश जाने का फैसला केवल चमक-दमक देखकर लेते हैं, लेकिन वहां की वास्तविक चुनौतियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

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