फाइनल की हार से टूट चुके थे मेस्सी, नहीं कर पाए करियर का परिकथा अंत

शायद दुनिया के महानतम फुटबॉलर और इस खेल के जादूगर ने 20 जुलाई की रात को ही तय कर लिया था कि बस अब बहुत हुआ अब मैदान से विदाई ले लेने में ही भलाई है। 20 जुलाई की रात को उनके आंखो में आसूं थे क्योंकि वह लगातार अर्जेंटीना को विश्वकप नहीं जिता पाए थे और ना ही अपने करियर का परिकथा अंत कर पाए थे।

FIFA World Cup का टूर्नामेंट जिस हिसाब से जा रहा था ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेस्सी के करियर का परिकथा अंत होगा। लेकिन उनके हाथ ना ही खिताब लगा और ना ही पैर पर गोल्डन बूट लगा। मेस्सी के लिए बस एक बात अच्छी रही कि  वह पिछले साल विजेता टीम का हिस्सा थे अन्यथा इस महान फुटबॉलर को बिना किसी वैश्विक खिताब के रवाना होना पड़ता।

आखिरी सीटी बजने पर उनकी आंखों में नमी और चेहरे पर निराशा को सभी ने देखा। एक तरफ स्पेन के खिलाड़ी जश्न मना रहे थे तो दूसरी तरफ मेस्सी और उनकी टीम स्टेडियम के दक्षिणी छोर पर अर्जेंटीना के समर्थकों को धन्यवाद दे रही थी और शायद माफी भी मांग रही थी।

बार्सीलोना और पेरिस सेंट जर्मेन के साथ 12 लीग और चार चैम्पियंस लीग खिताब जीतने के बाद मेस्सी ने जब यूरोपीय फुटबॉल से विदा लेकर तीन साल पहले एमएलएस का रूख किया तो लोगों को लगा कि वह रिटायर होकर अमेरिका में बस जायेंगे ।

लेकिन वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व कप फाइनल तक ले गए जिनमें उनके खाते में आठ गोल आये और चार में वह सहायक रहे। विश्व कप में उनके 21 गोल हो गए हैं और शनिवार को तीसरे स्थान के मुकाबले में फ्रांस के कीलियन एमबाप्पे (22 गोल) के आगे निकलने तक वह शीर्ष पर थे। तीन विश्व कप फाइनल खेलने वाले पहले खिलाड़ी मेस्सी के 125 अंतरराष्ट्रीय गोल हैं और वह सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो (146) से पीछे हैं।

स्पेन के खिलाड़ी आखिरी सीटी बजने के बाद मेस्सी को ढांढस बंधाने आये। मेस्सी मैदान पर बैठ गए और हाथ पीछे रखकर एकटक देखते रहे। उपविजेता का पदक लेने आये तो मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।फिर अपने विचारों में खोये हुए, दुख को छिपाने की कोशिश करते मैदान के एक कोने से चुपचाप बाहर चले गए। विश्व कप से आखिरी बार।इस मैच के लगभग 1.5 महीने बाद लियोनेल मेस्सी ने जूता टांग दिया।

927 गोलों पर रुका मेस्सी का करियर, नहीं तोड़ पाए रोनाल्डो का यह रिकॉर्ड

फुटबॉल के ‘बेताज बादशाह’ लियोनेल मेसी ने अपने करियर में 1,171 मैचों में 927 गोल करने के बाद अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहा है। मेसी ने अपने आखिरी मैच में चार गोल करके इंटर मियामी को शनिवार को मेहमान टीम सीएफ मॉन्ट्रियल पर रिकॉर्ड 7-1 से जीत दिलाई। मियामी के लिए मेसी के चार गोल के शानदार प्रदर्शन से उनके करियर के गोल की संख्या 1,171 मैचों में 927 हो गई है।

लगभग दो दशकों से, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी फुटबॉल की सबसे बड़ी व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विताओं में से एक में शामिल रहे हैं। उन्होंने बैलन डी’ओर, चैंपियंस लीग रिकॉर्ड, लीग खिताब और गोल करने के मील के पत्थर के लिए प्रतिस्पर्धा की है, और लगातार एक-दूसरे को असाधारण स्तर तक आगे बढ़ाया है। लेकिन संन्यास के बाद लियोनेल मेसी 1,000 करियर गोल की दौड़ में क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पीछे रह गए हैं

शनिवार को मॉन्ट्रियल के खिलाफ इंटर मियामी की 7-1 से शानदार जीत में मेसी के चार गोल के प्रदर्शन ने उन्हें 1,171 मैचों में 927 करियर गोल तक पहुंचा दिया।इस बीच, रोनाल्डो 1000 गोल के मील के पत्थर के बहुत करीब हैं। पुर्तगाली सुपरस्टार ने 1,333 मैचों में 978 गोल किए हैं, जिससे वे 1,000 गोल से सिर्फ़ 22 गोल दूर हैं।

हालांकि, रोनाल्डो ने बार-बार साबित किया है कि उम्र उनके लिए कोई रुकावट नहीं है। 41 साल की उम्र में भी वे लगातार गोल कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहतरीन फिटनेस और टॉप पर बने रहने की बेमिसाल चाहत के दम पर अपना करियर बनाया है। पुर्तगाली खिलाड़ी ने मेसी के मुकाबले करियर में 51 गोल ज़्यादा किए हैं।

अंतरराष्ट्रीय गोलो में मेस्सी से आगे रोनाल्डो

 

लियोनेल मेसी ने अपने करियर में 207 इंटरनेशनल मैचों में 125 गोल किए हैं, जिससे वे अर्जेंटीना के लिए अब तक के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इंटरनेशनल फुटबॉल में सबसे ज्यादा गोल करने वालों की लिस्ट में भी मेसी दूसरे नंबर पर हैं, उनसे आगे सिर्फ उनके प्रतिद्वंद्वी क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं।

मेसी का भावुक विदाई संदेश : ‘मेरे पास देने के लिए अब कुछ नहीं बचा’ 

एक दिल तोड़ने वाले संदेश के ज़रिए, लियोनेल मेसी ने अर्जेंटीना की नेशनल टीम से रिटायर होने का अपना पक्का फ़ैसला सार्वजनिक किया। ऐतिहासिक कप्तान ने माना कि यह फ़ैसला उनकी आत्मा को गहरी चोट पहुँचाता है, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने दो दशकों तक इस जर्सी के लिए अपना सब कुछ दिया।

मेसी ने अपने संदेश में कहा, “मैंने अपना सब कुछ दिया, मेरे पास देने के लिए अब कुछ नहीं बचा।” रोसारियो में जन्मे इस स्टार ने अपने बयान में बताया कि अब पीछे हटने और नई पीढ़ी के लिए जगह बनाने का समय आ गया है। उन्होंने अपने परिवार, कोच, टीम के साथियों और फ़ैन्स का उन्हें मिले प्यार के लिए दिल से शुक्रिया अदा किया और भरोसा दिलाया कि अब वह स्टैंड्स से किसी भी दूसरे सपोर्टर की तरह टीम का हौसला बढ़ाएंगे।

सोचा-समझा और पक्का किया गया फ़ैसला : मेसी ने बताया कि उन्होंने ये शब्द 21 जुलाई को, विश्व कप फ़ाइनल खेलने के दो दिन बाद लिखे थे। उन्होंने यह भी बताया कि हाल की पारिवारिक घटनाओं ने ‘एल्बिसेलेस्टे’ (अर्जेंटीना टीम) के साथ इस शानदार दौर को खत्म करने के उनके फ़ैसले को और मज़बूत किया।

Badshah- Isha Rikhi Divorce: 5 महीने बाद टूट गई बादशाह की दूसरी शादी, ईशा रिखी संग तलाक का किया ऐलान

रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी की शादी टूट गई है। दोनों ने सोमवार रात सोशल मीडिया पर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करके अपने अलग होने की घोषणा की है। दोनों ने आपसी सहमति से अपने रिश्ते को खत्म करने का फैसला लिया है। बता दें, पिछले कुछ दिनों से बादशाह और एक्ट्रेस ईशा रिखी के रिश्ते में दरार की खबरें सुर्खियों में थीं। अब आखिरकार उन्होंने अपने तलाक को कंफर्म कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने मार्च में एक निजी समारोह में शादी की थी और शादी के करीब पांच महीने बाद यह खबर सामने आई है।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

सोशल मीडिया पर शेयर जॉइंट स्टेटमेंट में बादशाह ने कहा, “मैंने और ईशा रिखी ने आपसी सहमति से अलग होने और अपने-अपने रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। यह फैसला हमने एक-दूसरे के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया है। हम सभी से अपील करते हैं कि इस समय हमारी निजता का सम्मान करें।” उन्होंने आगे कहा, “इस मामले में यह हमारा एकमात्र बयान होगा। हम ईमानदारी से अनुरोध करते हैं कि हमारे रिश्ते को लेकर आगे किसी तरह की अटकलें या धारणाएं न बनाई जाएं।”

ईशा ने किया था पोस्ट

जुलाई में सोशल मीडिया पर बादशाह और ईशा रिखी के रिश्ते में अनबन की खबरें सामने आने लगी थीं। जुलाई में ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कुछ तस्वीरों और वीडियो का एक मोंटाज सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उन्होंने इस पोस्ट के साथ लिखा था, “हर तूफान एक सबक है। हर प्रार्थना उम्मीद है,” और इसके साथ दिल टूटने और हाथ जोड़ने वाले इमोजी भी लगाए थे। ईशा के इस पोस्ट के बाद दोनों के रिश्ते में अनबन की अटकलें तेज हो गई थीं।

Badshah

मार्च 2026 में हुई थी चर्चा

बादशाह और ईशा रिखी की शादी को लेकर मार्च 2026 में चर्चाएं शुरू हुई थीं। इसकी शुरुआत तब हुई जब ईशा की मां पूनम रिखी ने सोशल मीडिया पर शादी की रस्मों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। इन तस्वीरों में बादशाह भूरे रंग के कुर्ते और सुनहरे साफे में नजर आए, जबकि ईशा लाल रंग के पारंपरिक दुल्हन के लिबास में दिखाई दीं। इसके बाद जून में ईशा ने इंस्टाग्राम पर एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन के दौरान बादशाह के साथ अपनी शादी की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की थी। अब दोनों के अलग होने की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब ईशा के सलमान खान द्वारा होस्ट किए जाने वाले बिग बॉस 20 का हिस्सा बनने की भी चर्चा चल रही है।

कौन है ईशा रिखी

ईशा रिखी चंडीगढ़ की रहने वाली अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने साल 2013 में पंजाबी फिल्म ‘जट्ट बॉयज पुट्ट जट्टां दे’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘हैप्पी गो लकी’, ‘अरदास’ और ‘मिंडो तसीलदारनी’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। साल 2018 में उन्होंने फिल्म ‘नवाबजादे’ से बॉलीवुड में कदम रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईशा और बादशाह ने शादी से पहले कई साल तक एक-दूसरे को डेट किया था और इसके बाद दोनों ने निजी समारोह में शादी की।

बादशाह की थी दूसरी शादी

बादशाह की ईशा रिखी से ये दूसरी शादी है, जो अब खत्म हो गई है। इससे पहले बादशाह की जैस्मीन मसीह से 2012 में शादी हुई थी। दोनों का रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका और साल 2020 में उनका तलाक हो गया। दोनों की एक बेटी भी है, जेसीमी ग्रेस मसीह सिंह, जिसका जन्म जनवरी 2017 में हुआ था।

फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी ने कहा अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा

argentina messi magic

फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी ने 207 कैप जीतने के बाद अर्जेंटीना ड्यूटी से अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की है। 2005 में अर्जेंटीना में पदार्पण करने वाले 39 वर्षीय खिलाड़ी ने 2022 में विश्व कप जीता और इस गर्मी और 2014 में उपविजेता रहे। उन्होंने दो कोपा अमेरिका खिताब भी हासिल किए।

मेसी ने एक बयान में लिखा: “यह एक ऐसा निर्णय था जिसने दुख पहुंचाया – और अभी भी अंदर तक दर्द पहुंचाता है – लेकिन मैं समझता हूं कि समय आ गया है। मैं आपसे कसम खाता हूं कि मैंने हमेशा अपना सब कुछ दिया – न केवल इन पिछले कुछ वर्षों में जब हमने सब कुछ जीता, बल्कि उससे पहले भी; मैंने हमेशा इस जर्सी के लिए मैदान पर संघर्ष किया और सब कुछ छोड़ दिया, ताकि आपको खुशी मिल सके और फुटबॉल के माध्यम से आपको अर्जेंटीना होने पर गर्व महसूस हो सके।”

उन्होंने कहा, “समय कम होता जा रहा है, अध्याय ख़त्म होने वाले हैं, और यह वह बात है जिसने मुझे बहुत आहत किया है। मैं राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनना पसंद करता हूं, प्यार करता हूं और हमेशा पसंद करूंगा। मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने दे दिया है; मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं बचा है, और इसके अलावा, कुछ महान युवा खिलाड़ी भी आ रहे हैं जो यहां आने के योग्य हैं।”

मेसी ने कहा कि उन्होंने विश्व कप फाइनल के दो दिन बाद 21 जुलाई को अपना सेवानिवृत्ति वक्तव्य लिखा था, और पिछले महीने उनके पिता जॉर्ज की मृत्यु ने पुष्टि की थी कि इसे प्रकाशित करने और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को समाप्त करने का यह सही समय था।

मेसी ने अपने पिता की मृत्यु के बाद एक बयान लिखा था जिसमें कहा गया था कि उन्हें इस बारे में “काफी संदेह” था कि क्या वह “बहुत लंबे समय तक” खेलते रहेंगे। उन्होंने तब खुलासा किया कि स्पेन के हाथों अर्जेंटीना की विश्व कप फाइनल हार में उन्हें किस हद तक संघर्ष करना पड़ा था। उन्होंने लिखा, ”मेरे पैर अब और नहीं चल सकते।” “इस बार मैंने खुद को अपनी शारीरिक सीमाओं से परे धकेलने की कोशिश की, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सका।”

मेसी इंटर मियामी के लिए खेलते हैं, जहां उनका अनुबंध 2028 तक चलना था। उन्होंने पिछले शनिवार को पहली बार मेजर लीग सॉकर मैच में चार गोल किए और सीएफ मॉन्ट्रियल को 7-1 से हराने के लिए प्रेरित किया।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हार से निराश नोवाक जोकोविच कोर्ट पर ही रोने लग गए, वीडियो हुआ वायरल

Novak Djokovic

हार या असफलता बड़े से बड़े लोगों के आंसू निकलवा देती है। इसका एक नजारा आज अमेरिकी ओपन में दिखा जब सर्बिया के महान खिलाड़ी 1-3 से पीछे हो गए और अंत में टूर्नामेंट के पहले दौर से ही बाहर हो गए। रिकॉर्ड 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच को यह रास नहीं आया और वह कोर्ट पर ही रोने लग गए जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

रविवार को चार घंटे 36 मिनट तक चले पांच सेटों के इस मैराथन मैच में जोकोविच को अर्जेंटीना के मारियानो नावोन से 7-6 (5), 5-7, 4-6, 6-2, 6-1 से हार का सामना करना पड़ा।यूएस ओपन के पहले दौर में इससे पहले जोकोविच का रिकॉर्ड 19-0 था और उन्होंने 2006 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद से किसी भी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में अपना पहला मैच नहीं हारा था।

जोकोविच ने कहा, ‘‘यह एक अच्छा रिकॉर्ड है। लेकिन मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोच रहा हूं। बेशक मुझे अतीत की सभी उपलब्धियों पर बहुत गर्व रहा है, लेकिन अब समय बदल गया है।’चौथी वरीयता प्राप्त और चार बार के चैंपियन 39 वर्षीय जोकोविच फ्लशिंग मीडोज में काफी परेशान नजर आए। मैच के दौरान उन्हें उल्टी हुई और पैरों में भी तकलीफ हुई। इस बीच उन्होंने 70 बेजा गलतियां की। जोकोविच की पत्नी जेलेना भी स्टेडियम में मौजूद थी और वह भी काफी परेशान नजर आ रही थी।

जोकोविच ने कहा, ‘‘आज मैं सहज होकर नहीं खेल पा रहा था। मैं अपने खेल का आनंद नहीं ले रहा था। मैं मैच के चौथे गेम की बाद ही संघर्ष कर रहा था। दुर्भाग्य से इस साल मेरे साथ लगातार ऐसा हो रहा है। मुझे कोर्ट पर उल्टियां हो रही हैं। यह गंभीर मसला बन गया है।’’

जोकोविच यूएस ओपन में तीसरे दौर से पहले कभी नहीं हारे थे। यह उनके करियर में किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के पहले दौर में सबसे लंबी अवधि का मैच था।यूएस ओपन में अपने पदार्पण के ठीक 21 साल बाद मिली इस हार से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह इस या किसी भी ग्रैंड स्लैम में जोकोविच का आखिरी मैच था।

पहले सेट के दौरान उनका मैच बीच में ही रोक दिया गया ताकि बारिश के कारण आर्थर ऐश स्टेडियम की छत को बंद किया जा सके।बचपन से ही जोकोविच को अपना आदर्श मानने वाले नावोन ने मैच के बाद कहा, ‘‘मेरे लिए यह बहुत मुश्किल था क्योंकि आप इस कोर्ट पर सर्वकालिक महान खिलाड़ी के खिलाफ खेल रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से कोर्ट पर यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन अनुभव रहा है। यह शानदार कोर्ट है और सबसे बड़ा मंच है। जिस तरह से हमने खेल दिखाया वह अद्भुत था। मेरे कहने का मतलब है की पांच सेट तक मैच चला। मैं बहुत खुश हूं और यह बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।’’

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

IIT-IIM के बाद लंदन में थी शानदार नौकरी, UPSC के लिए छोड़ा करियर; अब IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा

दिव्या मित्तल की कहानी उस सोच से बिल्कुल अलग है, जिसमें अच्छी पढ़ाई, विदेश की नौकरी और शानदार करियर को सफलता की आखिरी मंजिल माना जाता है। IIT Delhi और IIM Bangalore जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम किया। बाहर से उनकी जिंदगी पूरी तरह सफल नजर आती थी, लेकिन उनके मन में अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही। इसी सोच ने उन्हें विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने और IAS बनने के लिए प्रेरित किया। करीब 13 साल तक सिविल सेवा में रहने के बाद अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

30 अगस्त को सोशल मीडिया पर साझा किए गए भावुक पोस्ट में उन्होंने अपने सफर और उससे जुड़ी यादों को साझा किया। उनका ये फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने सफलता की कई मंजिलें हासिल करने के बाद भी अपनी राह बदलने का साहस दिखाया।

साधारण परिवार से IIT और IIM तक का सफर

दिव्या मित्तल ने बताया कि वह एक साधारण माहौल में पली-बढ़ीं और एक अच्छा और सफल जीवन बनाने का सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और IIT Delhi में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने IIM Bangalore से MBA किया और पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम शुरू किया। प्रतिष्ठित संस्थानों की डिग्री और विदेश में शानदार नौकरी के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी जिंदगी में कुछ कमी है।

लंदन की नौकरी छोड़ भारत लौटने का फैसला

विदेश में रहते हुए उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास लगातार परेशान करता रहा। Mittal के मुताबिक, उन्हें लगता था कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और मिले अवसरों पर देश का भी हक है। इसी सोच ने उन्हें वापस भारत आने और देश के लिए कुछ करने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने IAS को अपना रास्ता चुना और 2013 में सिविल सेवा में शामिल हो गईं।

उत्तर प्रदेश में अफसर रहते हुए बदली सफलता की परिभाषा

IAS बनने के बाद मित्तल ने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह Deoria, Mirzapur और Sant Kabir Nagar की District Magistrate भी रहीं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान उनके सामने ऐसे कई मौके आए, जिन्होंने उनके लिए सफलता का मतलब बदल दिया। किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिलना, दिव्यांग लोगों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलना या किसानों के खेतों तक पानी पहुंचना इन अनुभवों ने उन्हें महसूस कराया कि सरकारी काम सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने लिखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान की जिंदगी जुड़ी होती है।

एक बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद कभी नहीं भूल पाईं

Mirzapur के Lahuriya Dih गांव की एक घटना मित्तल के दिल में हमेशा के लिए बस गई। उन्होंने याद किया कि जब पहली बार गांव में पानी पहुंचा तो एक बुजुर्ग महिला ने यह देखकर कुछ नहीं कहा। इसके बजाय उसने कांपते हाथों से Mittal के सिर पर हाथ रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया। Mittal के लिए वह पल किसी पद या उपलब्धि से कहीं बड़ा था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पद आज भले पीछे छूट जाए, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का स्पर्श उनकी जिंदगीभर की याद बनकर रहेगा।

13 साल बाद समझ आया- देने से ज्यादा पाया

IAS के 13 सालों को याद करते हुए Mittal ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह लोगों को कुछ देने के लिए सेवा में आई हैं। लेकिन समय के साथ उनकी सोच बदल गई। उन्हें एहसास हुआ कि लोगों से मिले प्यार, भरोसे और सम्मान ने उन्हें कहीं ज्यादा समृद्ध किया। जब भी वह थकतीं या खुद मुश्किल दौर से गुजरतीं, लोगों का विश्वास उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता था।

पद छोड़ा, लेकिन सपना अब भी वही है

साधारण परिवेश से निकलकर IIT और IIM तक पहुंचना, लंदन में ट्रेडर बनना और फिर देश की सेवा के लिए IAS में आना Mittal का सफर कई मोड़ों से गुजरा है।

अब उन्होंने 13 साल की सेवा के बाद IAS से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पद छोड़ने के बावजूद उनका कहना है कि जिस भारत का सपना देखकर वह विदेश से वापस लौटी थीं, वह सपना आज भी उनके साथ है।

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Asian Games में मेडल जीते बिना घर नहीं जाएंगी मीराबाई चानू, खा ली कसम

भारत की मीराबाई चानू का मानना है कि जापान के आइची, नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 उनके इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग करियर की “सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं” में से एक होंगे।

मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पांच सदस्यों वाली भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करेंगी। तीन बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं मीराबाई टीम की चार महिला खिलाड़ियों में से एक होंगी। एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक आइची के टोकाई सिटिज़न जिम्नेजियम में होगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के बाद, टोक्यो 2020 की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई को लगता है कि एशियाई खेलों में मुकाबला “ओलंपिक स्तर” का होगा। मीराबाई ने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी (49 किग्रा) में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से ही आते हैं और आपको जापान में ओलंपिक जैसी झलक देखने को मिलेगी।”

इससे पहले चोटों की वजह से मीराबाई चानू एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत पाई थीं। हांगझोऊ में हुए पिछले खेलों में, हिप और जांघ की चोट के कारण स्नैच राउंड में ही उनका अभियान खराब हो गया था और वह 49 किग्रा कैटेगरी में चौथे स्थान पर रही थीं। जकार्ता में हुए 2018 के खेलों में, पीठ की गंभीर चोट के कारण मीराबाई चानू बाहर हो गई थीं।

आगामी एशियाई खेलों से पहले चोट से दूर रहना मीराबाई की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में एक सेंटर पर उनकी ट्रेनिंग की देखरेख करने वाले दो लोग कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. एरन हॉर्शिग हैं। डॉ. हॉर्शिग के साथ उनका जुड़ाव नवंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज भी जारी है।

मीराबाई ने कहा, “हम हर गुरुवार उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और आगे के कदमों के बारे में चर्चा करते हैं।” “हर चीज़ की बारीकी से समीक्षा की जाती है और चूंकि डॉ. हॉर्शिंग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी के बारे में जानकारी है। इस लगातार समीक्षा ने मुझे फिट रखा है।”

एशियाई खेलों की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई और उनकी टीम ने एक भी दिन बर्बाद नहीं किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों ने वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिया था, लेकिन मीराबाई, विजय शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम ढूंढा और ट्रेनिंग सेशन के लिए पैसे दिए।

मीराबाई ने कहा, “मैं सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आई। असल में, मैं घर नहीं गई और मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि ‘जब तक मैं एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत लेती, तब तक घर नहीं जाऊंगी’।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, यह भारतीय वेटलिफ्टर ग्लासगो में मुकाबले के स्तर को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। मीराबाई ने कहा, “सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला मेरे लिए मुश्किल नहीं था। मुझे ग्लासगो में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा एशियाई खेलों में होगी।”

ग्लासगो में, मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच – 85 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 105 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वज़न में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए।

नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा 93 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी ने 167 किग्रा (77 किग्रा 90 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

मीराबाई का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 205 किग्रा (89 किग्रा 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप और हाल ही में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। “मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे हैं।”

मीराबाई का कहना है कि उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के वेटलिफ्टरों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है। पेरिस 2024 में, थाईलैंड की सुरोदचाना खाम्बाओ ने मीराबाई को सिर्फ़ एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया। थाई एथलीट ने कुल 200 किलो वज़न उठाया था।

मीराबाई ने कहा, “हम फ़िटनेस को लेकर सावधान रहे हैं और अब तक मुझे अपने शरीर में अच्छा महसूस हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि एशियाई खेल ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। “मैं देखूँगी कि एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन रहता है। लॉस एंजेलिस में वेट क्लास 53 किलो होगी और मुझे अपना वज़न बढ़ाना होगा। “यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन सब कुछ एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उसके बाद हम दिसंबर में होने वाले ओलंपिक क्वालीफ़ायर के लिए योजना बना सकते हैं। मुझे लगता है कि जो भी जापान में मुक़ाबला करेंगे, वे लॉस एंजेलिस 2028 को लक्ष्य बनाएँगे, लेकिन अभी मेरे लिए मिशन एशियाई खेल ही है।”

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।