जिस IIT-IIM की डिग्री के लिए लाखों युवा मेहनत करते हैं, उससे बच्चों को दूर क्यों रखना चाहते हैं ये शख्स?

भारत में IIT-IIM में दाखिला मिलना बड़ी कामयाबी माना जाता है, लेकिन क्या अच्छी जिंदगी के लिए प्रतिष्ठित डिग्री जरूरी है? IIM अहमदाबाद से पढ़े एक शख्स की सोच ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे सिर्फ समाज की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए IIT या IIM का रास्ता चुनें। उनके मुताबिक, जिंदगी में अपनी पसंद से काम करना और खुश रहना भी उतना ही मायने रखता है। उनकी यह सोच ऐसे समय में सामने आई है, जब लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सालों लगा देते हैं और परिवार भी उनसे बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद करते हैं।

IIM से पढ़े पिता की सोच ने क्यों खींचा ध्यान?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फाउंडर आबिद हसन ने अपने IIM अहमदाबाद से पढ़े एक दोस्त के साथ हुई बातचीत साझा की। उन्होंने बताया कि उनका दोस्त नहीं चाहता कि उसके बच्चे IIT या IIM में जाने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बनाएं। अगर वे इन संस्थानों में पढ़ने के बजाय अपनी जिंदगी का आनंद लेना चुनते हैं, तो उसे इससे भी खुशी होगी।

आबिद हसन ने इस सोच को शिक्षा और करियर की सफलता का एक अलग नजरिया बताया। उनके मुताबिक, शायद प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का असली फायदा यही है कि इंसान एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे, जहां उसे अपनी जिंदगी के फैसले लेने के लिए किसी डिग्री या सामाजिक पहचान की जरूरत न पड़े।

बड़ी डिग्री ही सफलता की गारंटी नहीं

इस पोस्ट पर एक अन्य IIM ग्रेजुएट ने भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि वह भी अपने बच्चों पर प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का दबाव नहीं डालना चाहेंगे। उनके मुताबिक, कई IIM ग्रेजुएट आगे चलकर अपना कारोबार शुरू करते हैं। ऐसे में बच्चों को उद्यमी बनने के लिए MBA करना ही क्यों जरूरी हो?

उन्होंने व्यावहारिक अनुभव, हुनर और अपनी रुचि के मुताबिक काम करने की आजादी को अहम बताया। उनके अनुसार, कई बार माता-पिता डिग्री को इतना महत्व देने लगते हैं कि बच्चों की वास्तविक दिलचस्पी पीछे छूट जाती है।

आर्थिक सुरक्षा से मिल सकती है सपनों को उड़ान

चर्चा में एक यूजर ने कहा कि इतिहास के कई प्रभावशाली कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी संपन्न परिवारों से आते थे। आर्थिक सुरक्षा होने पर लोगों को रचनात्मक और बौद्धिक रुचियों को आगे बढ़ाने का ज्यादा अवसर मिल सकता है।