12th और Graduation में फेल, फिर बने Civil Servant | Dancer to Civil Servant | Brijesh Parmar

12th और Graduation में फेल, फिर बने Civil Servant | Dancer to Civil Servant | Brijesh Parmar

कभी Physics में सिर्फ 3 नंबर पाने वाले
सिरोही, राजस्थान के Brijesh Parmar ने 12वीं और फिर BA First Year में भी असफलता देखी।
पढ़ाई छोड़कर Dance की दुनिया में गए, दिल्ली में ट्रेनिंग ली और मुंबई में बड़े Choreographers के साथ काम किया।
लेकिन Lockdown में जब घर लौटे, तो लोगों के तानों ने उन्हें अंदर तक चोट पहुंचाई।
उसी अपमान को उन्होंने अपनी ताकत बनाया।
2020 से दोबारा पढ़ाई शुरू की और लगातार मेहनत करते रहे।
नतीजा?
RAS 2023 और RAS 2024 में सफलता।
आज उनका सफर उन हजारों Aspirants के लिए उम्मीद है, जिन्हें कभी खुद पर भरोसा नहीं होता।
क्या एक असफलता किसी इंसान का भविष्य तय कर सकती है?

@brijeshparmar__ras

brijeshparmar__ras

12th और Graduation में फेल, फिर बने Civil Servant | Dancer to Civil Servant | Brijesh Parmar | Rajasthan

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गाँव की लड़की ने YouTube से बदली किस्मत | Poonam Kushwaha | Desi Food Creator | Madhya Pradesh

गाँव की लड़की ने YouTube से बदली किस्मत | Poonam Kushwaha | Desi Food Creator | Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव शिवपुरी की रहने वाली पूनम कुशवाहा ने YouTube और Instagram पर देसी खाना बनाकर अपनी किस्मत बदल दी।
200 वीडियो तक सिर्फ 1000 views मिलने के बाद भी हार नहीं मानी और एक दिन 35 Million views के साथ Viral हो गई।
आज वीडियो पर व्यूज भी आते है और लोगों का प्यार भी। इस सफर में उनका साथ दिया उनके छोटे भाई नरेंद्र ने जिन्होंने हर मुश्किल वक्त पर भी बहन का साथ नहीं छोड़ा।

@poonamk.official

Desi Food Vlogger, Brother Sister Bond, Small Village Success Story

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|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

रितेश हिंडोचा को 3 साल की उम्र में Down Syndrome होने का पता चला। लेकिन उनके परिवार ने उन्हें कभी सीमाओं में नहीं बाँधा। Swimming, Speech Classes, Sports, लोगों से जुड़ना, हर कदम ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
45 साल की उम्र में भी रितेश उसी जोश के साथ ज़िंदगी जीते हैं। Covid के दौरान शुरू हुआ उनका Instagram आज लाखों लोगों तक मुस्कान और उम्मीद पहुँचा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में भी काम किया।
रितेश की कहानी याद दिलाती है कि सही साथ, प्यार और भरोसा किसी भी Diagnosis से बड़ा हो सकता है।

@riteshhindocha

Person with Down Syndrome Achievement, Family Support for Down Syndrome Child, Down Syndrome Influencer

खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha

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इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं।
लेकिन उन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी कौन लेता है?
उत्तर प्रदेश के 28 वर्षीय वैभव राठौर ने इसी सवाल का जवाब खोजा। उनकी संस्था Revamp India Foundation की ‘Faldaar’ पहल में पेड़ों को सिर्फ़ लगाया नहीं जाता, उनसे रिश्ता बनाया जाता है।
जब हर पौधे को एक पहचान मिली और हर बच्चे को उसकी ज़िम्मेदारी, तो नतीजा भी बदल गया।

40+ सरकारी स्कूल
10,000+ फलदार पेड़
करीब 75% सर्वाइवल रेट

आज ये पेड़ सिर्फ़ छाया और फल नहीं दे रहे, बल्कि बच्चों को ज़िम्मेदारी, टीमवर्क और प्रकृति से जुड़ाव भी सिखा रहे हैं।

लेकिन सफर अभी बाकी है।
कुछ पौधे आज भी जानवरों या ट्री गार्ड की कमी की वजह से नुकसान झेलते हैं।
अगर आप सिर्फ़ ₹200 का योगदान करते हैं, तो एक पौधे के लिए ट्री गार्ड लगाने में मदद कर सकते हैं।

Revamp India Foundation के साथ
आप वॉलंटियर बनकर भी इस मिशन से जुड़ सकते हैं।

Support Revamp India Foundation
Account Name: REVAMP INDIA FOUNDATION
Account Number: 00000041354317942
IFSC: SBIN0003752
UPI ID: revampindia@sbi
Volunteer: 9305716172

कभी-कभी बदलाव किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि एक छोटे-से आइडिया से शुरू होता है।

क्या आपको लगता है कि हर स्कूल में ऐसी पहल होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।:point_down:

@vaibhavrathoree

naming trees helped 10000 saplings survive, Children protecting trees in schools, How to increase tree survival rate

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

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खुदीराम बोस: 18 साल की उम्र में अमर शहीद | Khudiram Bose | Martyred at Just 18

18 साल की उम्र में फांसी के फंदे तक पहुंचे, लेकिन चेहरे पर डर नहीं था…
11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
जिस उम्र में एक युवा अपनी ज़िंदगी के सपने बुनता है, उस उम्र में खुदीराम ने आज़ाद भारत का सपना देखा और उसके लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
एक माँ ने अपना बेटा खोया, लेकिन भारत ने एक ऐसा वीर पाया, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को साहस, देशभक्ति और बलिदान की सीख देती रहेगी।
खुदीराम बोस सिर्फ़ इतिहास का एक नाम नहीं—वो उस जज़्बे का नाम हैं, जो देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना सिखाता है।
आज उनकी शहादत को नमन करें और याद रखें—
आज़ादी हमें विरासत में नहीं, बल्कि ऐसे अनगिनत वीरों के बलिदान से मिली है।
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अस्पताल पहुँचने में लगते थे घंटे, तो बना दी उड़ने वाली कार | Ravi Tamta | Flying Car | Uttarakhand

क्या हो अगर पहाड़ों के ऊपर से उड़कर जाया जा सके, वो भी बिना एयरपोर्ट के?

इसी सोच से उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रवि तम्टा ने 13 साल तक लगातार प्रयोग किए और एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया।

रवि के पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी न कोई बड़ी लैब थी, बस एक समस्या को हल करने की जिद थी।

उनका सपना है कि पहाड़ी इलाकों में, खासकर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान, लोगों तक जल्दी पहुँचा जा सके।

फ्लाइंग व्हीकल अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे कई और टेस्ट से गुजरना बाकी है।

लेकिन रवि की कहानी बताती है –
बड़े आविष्कार हमेशा बड़ी लैब में नहीं जन्म लेते। कभी-कभी एक मुश्किल सवाल ही उनकी शुरुआत होता है।

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माँ और पिता, बेटे को दे रहे हैं दोनों का प्यार | Single Father | Uttar Pradesh | Kuldeep Satvik Vlog

कहते हैं कि माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले कुलदीप भारद्वाज वो पिता हैं, जो अपने ढाई साल के बच्चे की मुस्कान के लिए हर दिन माँ और पापा, दोनों की भूमिका निभाते हैं।

पत्नी के निधन के बाद कुलदीप ने अपने बेटे की परवरिश की ज़िम्मेदारी अकेले उठाई। आज वह उसके लिए पिता भी हैं और माँ भी।

सोशल मीडिया पर उनके छोटे-छोटे वीडियोज़ आज हज़ारों लोगों का दिल जीत रहे हैं। और उन Single Parents के लिए भी उम्मीद बन रहे हैं, जो अपने बच्चों के लिए पूरी दुनिया हैं। आइए जानते हैं नन्हे सात्विक और उसके पापा की कहानी

@kuldeepsatvikvlogs

माँ और पिता, बेटे को दे रहे हैं दोनों का प्यार | Single Father | Uttar Pradesh | Kuldeep Satvik Vlogs

[Single Father from Uttar Pradesh Making Inpiring Vlogs on Parenthood, Single Parent

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ONGC New Chairman: आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने किया आवेदन, लिस्ट में Oil India के CMD रंजीत रथ भी

सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) का पद जल्द खाली होने वाला है। ऐसे में इस पद के लिए आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने आवेदन किया है। इनमें ऑयल इंडिया लिमिटेड के प्रमुख (सीएमडी) रंजीत रथ भी शामिल हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 54 साल के रथ लगातार दूसरे वर्ष ONGC में टॉप पोजिशन पाने की दौड़ में शामिल हुए हैं। रथ अगस्त, 2022 से ऑयल इंडिया का नेतृत्व कर रहे हैं।

रथ पिछले साल भी ONGC प्रमुख के पद के लिए चुने गए उम्मीदवारों की सूची में शामिल थे, लेकिन सरकार ने ONGC के मौजूदा चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था। अब सिंह का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। लिहाजा यह पद 7 दिसंबर को खाली हो जाएगा।

बता दें कि सरकार ने ONGC के सीएमडी पद के लिए अधिकतम आयु सीमा समेत पात्रता संबंधी मानदंडों में ढील दी है। इसके तहत अधिकतम उम्र सीमा को बढ़ाकर 59 साल कर दिया गया है। साथ ही अब चुने गए उम्मीदवार को 3 साल का फिक्स्ड टर्म दिया जाएगा, जिसे और 2 साल बढ़ाया जा सकता है। ONGC भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है।

आवेदन करने वालों में और कौन

ONGC के सीएमडी पद के लिए आवेदन करने वालों में ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजर्षि गुप्ता भी शामिल हैं। सरकार द्वारा अधिकतम आयु सीमा 59 वर्ष किए जाने के बाद वह इस पद के लिए पात्र हुए हैं। गुप्ता जुलाई, 2027 में रिटायर होने वाले हैं और इस पद के लिए आवेदन करने वाले इंटर्नल कैंडिडेट्स में सबसे वरिष्ठ हैं। पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि ONGC के प्रौद्योगिकी एवं क्षेत्रीय सेवाओं के डायरेक्टर विक्रम सक्सेना, रणनीति एवं कॉरपोरेट मामलों के डायरेक्टर सत्यम कुमार और OVL के ऑपरेशंस के डायरेक्टर दुलाल हलदर ने भी ONGC के सीएमडी पद के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा इस दौड़ में MRPL के डायरेक्टर (फाइनेंस) देवेंद्र कुमार और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के मार्केटिंग डायरेक्टर एस.पी. श्रीवास्तव भी शामिल हैं।

पहली एंट्री सफलता की गारंटी नहीं; Google, Netflix और Facebook समेत ये पांच आए लेट लेकिन बदल दी कहानी

सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी करेगी कैंडिडेट का चुनाव

ONGC की ओर से दिए गए विज्ञापन के अनुसार, सीएमडी पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र पद खाली होने की तारीख यानि 7 दिसंबर, 2026 को 59 साल या उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए। चुने गए उम्मीदवार को शुरू में 3 साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद उनके कार्यकाल को 2 साल और बढ़ाया जा सकता है। 60 साल की उम्र के बाद कोई भी नौकरी या कार्यकाल का विस्तार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होगा। कैंडिडेट का सिलेक्शन सामान्य PESB सिलेक्शन प्रोसेस के बजाय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गठित एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया जाएगा।

पहली एंट्री सफलता की गारंटी नहीं; Google, Netflix और Facebook आए लेट लेकिन बदल दी कहानी

मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया

Android vs Apple’s iOS

जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।

Facebook vs Yahoo

मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।

Google vs Yahoo

गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।

Netflix vs Blockbuster

ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने ‘मेल के जरिए डीवीडी’ सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।

Nintendo vs Atari

मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।

हर Parent को सुननी चाहिए Harshad की बात | child safety awareness through Harshad Chopda’s story

सालों तक Harshad Chopda ने अपने बचपन का ये दर्द किसी से साझा नहीं किया।

पर अब उन्होंने पहली बार Netflix के show Lock Upp Season 2 में अपना सच बताया, तो उनका मकसद सिर्फ़ अपनी कहानी सुनाना नहीं था, बल्कि हर माता-पिता को ये याद दिलाना था कि बच्चों की बात सुनना कितना ज़रूरी है।
शर्म Survivor की नहीं, गुनाहगार की होनी चाहिए।
अगर आप Parent, Guardian या Teacher हैं, तो इस वीडियो को ज़रूर देखें और शेयर करें। क्योंकि एक बातचीत किसी बच्चे के लिए फ़र्क ला सकती है।
@harshad_chopda

Child sexual abuse awareness, Good touch bad touch awareness, Harshad Chopda childhood abuse story

हर Parent को सुननी चाहिए Harshad की बात | child safety awareness through Harshad Chopda’s story | Lock Upp Season 2 | Netflix
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