पहली बार चक दे गर्ल्स Girls हॉकी विश्वकप में Boys से निकली आगे

हॉकी विश्वकप में हमेशा भारतीय पुरुष टीम से महिला टीम कोसो पीछे रहती थी। ना जाने कितनी बार तो महिला टीम क्वालिफाय ही नहीं कर पाती थी। लेकिन इस बार महिला टीम ने ना केवल क्वालिफाय किया बल्कि अपने पुरुष साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बार उम्मीद की पुरुष टीम कम से कम सेमीफाइनल खेलेगी और महिला टीम से कोई उम्मीद ही नहीं थी। लेकिन भारतीय महिला टीम ने पांचवा पायदान पाया और पुरुष टीम को आठवां पायदान मिला।

अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत के साथ, भारतीय महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार समापन किया। टीम ने 5वें-छठे स्थान के लिए खेले गए मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराया। यह मैच गुरुवार शाम को खेला गया।

इस नतीजे से भारतीय महिला टीम को पांचवां स्थान मिला, जो 1974 में हुए पहले महिला वर्ल्ड कप (जिसमें वे चौथे स्थान पर रही थीं) के बाद से उनका वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

वहीं पुरुष टीम ने खासा निराश किया। पुरुष टीम की आलोचना पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने भी की। हरमनप्रीत सिंह ने ने अंतिम मैच में गोल दागकर खुद को शीर्ष 5 गोल स्कोरर में स्थापित कर दिया लेकिन कुल मिलाकर टीम का अभियान निराशाजनक रहा।पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

पुरुष टीम ने पूल डी के मुकाबले में इंग्लैंड जैसी टीम से 4-2 से मैच गंवाया।वह भी मैच में बढ़त बनाने के बाद। इसके बाद टीम का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा था लेकिन 5-3 की स्कोरलाइन संतोषजनक नहीं थी।

अगले दौर में टीम को नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना मिली। नीदरलैंड्स ने भारतीय टीम को 3-1 से हराया। नीदरलैंड से हारने के बाद भारत पूल ई से अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर ही हो गया था लेकिन अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के बाद तकनीकी तौर पर उसके रास्ते खुले थे । इसके लिये उसे कम से कम तीन गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी।  लेकिन भारत ने पहले छह मिनट में ही दो गोल गंवा दिये और इस दबाव से टीम निकल ही नहीं सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत 3-5 से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।

लेकिन निराशाजनक अभियान और ज्यादा निराशाजनक तब हो जब सातवें और आठवें पायदान के लिए भारत बेल्जियम से भिड़ा।भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

रोमांचक मैच में भारत बेल्जियम से पेनल्टी शूटआउट से हारकर रहा आठवें स्थान पर

भारत बेल्जियम का मैच किसी भी हॉकी प्रेमी के लिए बहुत रोमांचक मैच रहा लेकिन यह मैच कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ होता रहा। इसके साथ ही दोनों ही टीम के खिलाड़ियों को चोटों से जूझना पड़ा। खासकर मनप्रीत सिंह जिन्होंने अपने माथे पर चोट खा ली और खेल को काफी वक्त के लिए रोकना पड़ा उन्होंने स्ट्रेचर से जाने से मना कर दिया और चलकर मैदान छोड़ा। इसके बाद जरमनप्रीत की स्टिक बेल्जियम के खिलाड़ी के नाक पर लग गई। लेकिन भारत को रेड कार्ड नहीं मिला।

भारत ने इस मैच में पहले बढ़त बनाई। इसके बाद बेल्जियम ने दो गोल दागे। लेकिन भारत ने फिर से पलटवार कर बराबरी हासिल की। चौथे क्वार्टर में बेल्जियम ने मैदानी गोल दागा। भारत के लिए समय निकलता जा रहा था। लेकिन अंतिम 2.50 मिनट में भारत ने गोलकीपर सूरज करकेरा को बाहर बैठाकर दांव खेला जो अंतिम 30 सेकेंड में काम आया। पेनल्टी स्ट्रोक मिला जिस पर हरमनप्रीत सिंह ने गोल दागकर बराबरी की। हालांकि पेनल्टी शूटआउट की पटकथा भारत के खिलाफ रही।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

शूटआउट में भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने गोल किए, लेकिन यह टीम को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।इससे पहले निर्धारित समय में भारत के लिए अभिषेक ने शुरुआती गोल किया, जबकि हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल दागे। बेल्जियम की ओर से रोमन डुवेकोट, ह्यूगो लाबूशे और निकोलस डी केरपेल ने गोल किए।शूटआउट में बेल्जियम के खिलाड़ियों ने दबाव के बीच बेहतर संयम दिखाया और 4-3 से जीत दर्ज कर ली।

FIH World Cup में भारतीय हॉकी टीम भिड़ेगी बेल्जियम से

भारतीय पुरुष टीम कल (शुक्रवार) 7वें-8वें स्थान के लिए प्ले-ऑफ मैच में सह-मेजबान बेल्जियम का सामना करते हुए अपने हॉकी वर्ल्ड कप अभियान का सकारात्मक अंत करने की कोशिश करेगी।

नीदरलैंड (1-3) और अर्जेंटीना (3-5) से हारने के बाद भारतीय टीम दूसरे चरण में पूल ई में सबसे नीचे रही, जिससे सेमीफाइनल में पहुंचने की उनकी उम्मीदें खत्म हो गईं। इसलिए, यह क्लासिफिकेशन मैच भारत के लिए एक अच्छा प्रदर्शन करने और अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों पर ध्यान केंद्रित करने से पहले अपनी लय वापस पाने का मौका है।

वहीं, बेल्जियम भी अपने घरेलू वर्ल्ड कप अभियान का सुखद अंत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऑस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलने के बाद पूल ऍफ़ में सबसे नीचे रहने और सेमीफाइनल में जगह न बना पाने के कारण सह-मेजबान टीम निराश थी। वावरे में अपने घरेलू समर्थकों के सामने खेलने से ‘रेड लायंस’ (बेल्जियम टीम) का हौसला और बढ़ेगा, जिससे भारत के लिए यह मुकाबला चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

भारत के लिए प्राथमिकता अपनी लय और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करना होगा। हालांकि टीम ने आक्रामक इरादे और मौके बनाने की क्षमता दिखाई है, लेकिन बेल्जियम की टीम के खिलाफ – जो जीत के साथ अपना अभियान खत्म करने के लिए उतनी ही दृढ़ होगी – खेल के चारों क्वार्टर में निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

भारत के लिए ध्यान देने वाली एक मुख्य बात डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक के बीच तालमेल होगी। बेल्जियम के खिलाफ, टीम को पीछे से अधिक उद्देश्यपूर्ण तरीके से गेंद को आगे बढ़ाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि आक्रामक खिलाड़ियों को मिडफील्ड से अच्छी सप्लाई मिले, और फिर फिनिशिंग टच देना स्ट्राइकरों का काम होगा।

कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में भारत की पेनल्टी-कॉर्नर बैटरी फिर से एक महत्वपूर्ण हथियार होगी; लेकिन टीम ओपन प्ले से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। बेल्जियम के सर्कल के अंदर लगातार दबाव बनाना और सर्कल में प्रवेश को गोल करने के मौकों में बदलना जरूरी होगा।

बेल्जियम के पास ट्रांजिशन (खेल के दौरान स्थिति बदलने) के समय खाली जगहों का फायदा उठाने की क्षमता है, और भारत डिफेंसिव ढांचे में कोई चूक नहीं कर सकता या खतरनाक इलाकों में आसानी से गेंद नहीं गंवा सकता। खेल की गति को नियंत्रित करने और टीम के बीच तालमेल बनाए रखने में मिडफील्ड की अहम भूमिका होगी। जीत से भारत को सातवां स्थान मिलेगा और, इससे भी ज़रूरी बात यह है कि अगले बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, “टूर्नामेंट में जितना हो सके बेहतर स्थान पर रहने का यह एक शानदार मौका है। टूर्नामेंट में हमारा कुछ काम अभी बाकी है और हम ऐसा अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे जिस पर हमें गर्व हो सके।”

उन्होंने आगे कहा, “बेल्जियम की टीम के खेलने का तरीका बहुत खास है। हमने उनके साथ काफी मैच खेले हैं। उनके पास कुछ अहम खिलाड़ी हैं जो उनकी टीम के ढांचे को सही ढंग से चलाते हैं, इसलिए हमें बहुत व्यवस्थित रहना होगा और बॉल पर अच्छी पकड़ बनाए रखनी होगी।”

वर्ल्ड कप के तुरंत बाद जापान में एशियाई खेल होने हैं, और भारत बेल्जियम के खिलाफ़ खेले गए मैच से मिली सीख को आगे ले जाना चाहेगा, साथ ही उन कमियों को भी दूर करना चाहेगा जिनकी वजह से उन्हें दूसरे चरण में नुकसान उठाना पड़ा था।

भारतीय हॉकी टीम सिर्फ पाक से बेहतर, श्रीजेश समेत इन दिग्गजों ने की आलोचना

विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाये हैं।अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी।

पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

भारतीय टीम विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में मानसिक दृढता बढाने के लिये बूट कैंप में गई लेकिन टूर्नामेंट में दबाव का सामना नहीं कर सकी। ड्रैग फ्लिकर और कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर अधिक निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे। मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे सीनियर अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।नतीजा यह हुआ कि अंकतालिका में भारतीय टीम फिलहाल सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर है और 8वें स्थान पर है।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने कहा ,‘‘सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा । क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिये इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। नहीं।’’उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।’’

पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे।उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिये । कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।’’

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा ,‘‘ मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किये और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।’उन्होंने कहा ,‘‘ हमने नये खिलाड़ियों को मौके ही नहीं दिये। नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक टीम के छह स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी विश्व कप टीम में नहीं थे। हम हमदर्दी, पिछले रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ही टीम चुन लेते हैं। कम से कम छह जूनियर खिलाड़ियों को प्रो लीग में आजमाना चाहिये था।’’

वहीं एक और दिग्गज परगट सिंह का मानना है कि भारतीय हॉकी का आंतरिक ढांचा इतना कमजोर है कि प्रतिभायें निकलती ही नहीं है।उन्होंने कहा ,‘‘ अच्छी घरेलू स्पर्धायें नहीं होने से हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ नहीं है। यूरोप में कई डिविजन की लीग होती है जो हमारे यहां नहीं है। पहले बेटन कप, आगा खान कप, बांबे गोल्ड कप, मुरूगप्पा कप, नेहरू हॉकी से अच्छी प्रतिभायें निकलती थी। सारा ढांचा ही खराब कर दिया है। इसके अलावा नये खिलाड़ियों को मौका देना था तो दो साल पहले ही बदलाव की शुरूआत कर देनी चाहिये थी।’’

10 साल लगातर जीत, श्रीजेश ने कहा कि पाक अब कोई मुकाबला नहीं देती

भारत की पाकिस्तान की हॉकी टीम पर लगातार दसवीं जीत के बाद पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि यह अब सांसो को थाम देने वाला मुकाबला नहीं रहा। गौरतलब है कि भारतीय टीम आखिरी बार पाकिस्तान से साल 2016 में खेली गई चैंपियन्स ट्रॉफी में हारी थी। वहीं आखिरी बार विश्वकप में पाकिस्तान ने भारत को साल 1986 में हराया था।

भारत के पूर्व कप्तान और गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता, भारत के डिफेंसिव अप्रोच और दबाव वाली स्थितियों में शांत रहने की अहमियत पर अपनी राय रखी। पूर्व कप्तान पीआर श्रीजेश ने कहा, “भारतीय पुरुष हॉकी टीम पिछले डेढ़ साल से एक नए फॉर्मेशन के साथ खेल रही है। वह फॉर्मेशन ज़्यादातर हमें डिफेंस करने पर मजबूर करता है, लेकिन हाल ही में प्रो लीग में, हमने कई मैचों में आगे बढ़कर ज़ोरदार दबाव बनाया।

एक ज़रूरी बात यह है कि यूरोपीय टीमों के खिलाफ़ खेलते समय हमें डिफेंस में एकजुट रहना होगा। इसके अलावा, हमें विश्व कप में अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहिए। डिफेंस में, हमने ज़ोनल मार्किंग का इस्तेमाल किया, इसलिए हमें उस क्षेत्र में अपनी समझ को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। हमें बहुत पीछे नहीं हटना चाहिए। हमें आगे बढ़कर, हाई प्रेसिंग करनी चाहिए और सेंटर लाइन के आगे भी डिफेंस करना चाहिए।” हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी पर श्रीजेश ने कहा, “हरमनप्रीत एक बहुत अच्छे कप्तान हैं। पिच पर कप्तान का असर सीमित होता है क्योंकि आप हर चाल या खिलाड़ी को कंट्रोल नहीं कर सकते। जिसके पास गेंद होती है, उसे ही फ़ैसला लेना होता है।

कप्तान का ज़्यादातर काम पिच के बाहर होता है – टीम को एकजुट रखना, युवा खिलाड़ियों का समर्थन करना, उन्हें जमने में मदद करना, टीम का सकारात्मक माहौल बनाना, खिलाड़ियों की चिंताओं को कोच तक पहुँचाना, संदेह दूर करना और यह पक्का करना कि हर कोई कोच के निर्देशों को समझे। इसलिए, हॉकी कप्तान के लिए मैदान के बाहर का काम मैदान पर किए जाने वाले काम से कहीं ज़्यादा अहम होता है।” श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीम के विकास और भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता पर कहा, “आखिरी क्वार्टर या आखिरी मिनटों में गोल खाना हमारे लिए एक समस्या हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अब, हम मैच जीतने के लिए देर से गोल करते हैं। पहले, 35 मिनट के हाफ के दौरान, हम फिटनेस या खराब फैसले लेने की वजह से गलतियां करते थे और गोल खा जाते थे। लेकिन जब से चार-क्वार्टर वाला सिस्टम आया है, और उससे पहले भी, हमने अपनी फिटनेस, ताकत, खेल की समझ और फैसले लेने की क्षमता में काफी सुधार किया है। इसी वजह से, पाकिस्तान के खिलाफ मैच अब उतने मुश्किल नहीं रहे जितने पहले हुआ करते थे। पहले, भारत बनाम पाकिस्तान के मैच बहुत कड़े मुकाबले वाले होते थे, जो अक्सर 1-0 या 2-1 पर खत्म होते थे। पाकिस्तान की मौजूदा टीम का स्तर पहले जैसा नहीं रहा है, उनके द्वारा किए गए 3 गोलों में भारतीय रक्षापंक्ति की गलतियां ज्यादा रही।”

FIH Hockey World Cup में भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराया

पाकिस्तान के खिलाफ पिछले एक दशक से चले आ रहे अजेय अभियान को जारी रखते हुए भारत ने एफआईएच विश्व कप के अहम मुकाबले में बुधवार को चिर प्रतिद्वंद्वी को 5-3 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया जबकि इस हार के साथ पाकिस्तान की पहले दौर से रवानगी तय हो गई।

आठ साल बाद विश्व कप खेल रही पाकिस्तानी टीम पहले क्वार्टर में ही दो गोल गंवाने के बाद दबाव में आ गई थी । दूसरे क्वार्टर में दो गोल करके उसने वापसी की कोशिश की लेकिन पिछले दो ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी भारतीय टीम अपेक्षा के अनुरूप उस पर भारी पड़ी।

भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने (पांचवां और 21वां) पेनल्टी कॉर्नर पर दो गोल किये जबकि अभिषेक (11वां और 24वां) ने दो शानदार फील्ड गोल दागे । हार्दिक सिंह ने 34 वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल किया।पाकिस्तान के लिये हन्नान शाहिद (22वां और 46वां) ने दो फील्ड गोल किये जबकि सूफियान शेख (24वां ) ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला।पूल डी से इंग्लैंड और भारत ने दूसरे दौर के लिये क्वालीफाई कर लिया । इंग्लैंड से पहले दौर में हारने वाली भारतीय टीम दूसरे दौर में कोई अंक लेकर नहीं जायेगी।

भारत और पाकिस्तान विश्व कप में 16 साल बाद आमने सामने थे और पिछली बार दिल्ली में 2010 विश्व कप में भी भारत ने पाकिस्तान को 4-1 से हराया था । वेगनेर स्टेडियम पर दोनों टीमों की टक्कर 1973 में हुई थी जब भारत ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल में एक गोल से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

पाकिस्तान के लिये यह मैच करो या मरो का था जिसे इंग्लैंड ने 4 -1 से हराया था जबकि वेल्स के खिलाफ मैच ड्रॉ रहा था।भारत ने पहले ही मिनट से आक्रामक खेल दिखाया और शुरूआती पंद्रह मिनट में पूरा खेल पाकिस्तान के सर्कल में हुआ । भारत ने पहले क्वार्टर में चार पेनल्टी कॉर्नर बनाये जिनमें से दूसरे पर पांचवें मिनट में हरमनप्रीत ने गोल करके बढत बना ली । इससे पहले सुखजीत ने बायें फ्लैंक से गेंद सर्कल पर अभिषेक को सौंपी लेकिन पाकिस्तानी गोलकीपर अली रजा ने अच्छा बचाव किया।भारत को अगले मिनट तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला और इस बार पाकिस्तान के गोलकीपर ने हरमनप्रीत की फ्लिक को भांपकर गोल नहीं होने दिया।

अपना पहला विश्व कप खेल रहे आदित्य लालागे जबर्दस्त ड्रिबलिंग का प्रदर्शन करते हुए गेंद लेकर डी के भीतर घुसे लेकिन शानदार मूव को फिनिशिंग टच नहीं दे सके।शानदार फॉर्म में दिख रहे अभिषेक ने भारत को बढत दिलाई। हरमनप्रीत से हवा में गेंद लेकर अभिषेक ने बेहतरीन नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए गोल पर निशाना साधा जबकि पाकिस्तान का पूरा डिफेंस उन्हें घेरे हुए था । गेंद पाकिस्तानी डिफेंडर की स्टिक से लगकर गोल के भीतर गई।

भारत को 13वें मिनट में चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर हरमनप्रीत चूक गए । पहले क्वार्टर में भारत ने दो गोल की बढत बना ली थी।पाकिस्तान ने मैच का पहला मूव 18वें मिनट में बनाया लेकिन भारतीय डिफेंस को भेद नहीं सके। अगले मिनट पलटवार पर भारत ने पेनल्टी कॉर्नर बनाया जिस पर वैरिएशन में कामयाबी मिली।

हरमनप्रीत ने सीधे शॉट लेने की बजाय पीछे खड़े राजिंदर को गेंद सौंपी जिनके शॉट को पाकिस्तानी गोलकीपर ने बचा लिया लेकिन गेंद लौटकर हरमनप्रीत के पास आई जिनके दमदार शॉट पर गेंद सीधे गोल के भीतर जाकर रूकी। इससे पहले दीर्घा में किसी दर्शक को गेंद लगने से कुछ सेकंड खेल रोकना पड़ा।

तीन गोल गंवाने के बाद पाकिस्तानी टीम हरकत में आई और 22वें मिनट में इसका नतीजा पहले गोल के रूप में मिला। हन्नान शाहिद को डी के भीतर गेंद मिली जिनका पहला शॉट भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने बचा लिया लेकिन रिबाउंड पर उसे रोक नहीं सके।

अभिषेक ने जबर्दस्त कौशल का प्रदर्शन करते हुए अगले ही मिनट पाकिस्तानी डिफेंस को फिर दबाव में ला दिया। जुगराज से मिले लांग पास पर डी के भीतर बेहतरीन ड्रिबल करते हुए गेंद लेकर गए अभिषेक ने निशाना साधा और गेंद पाकिस्तानी डिफेंडर की स्टिक से टकराकर भीतर गई। पाकिस्तान को मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर 24वें मिनट में मिला जिस पर सूफियान ने गोल दागा।

अगले ही मिनट सुमित की गलती पर पाकिस्तान को एक और पेनल्टी कार्नर मिला लेकिन इस बार सुमित ने ही बचाव करके पाकिस्तान को तीसरा गोल नहीं करने दिया। सुखजीत को ब्रेक से ठीक पहले ग्रीनकार्ड मिला जिससे भारत दो मिनट तक दस खिलाड़ियों के साथ खेला।

भारत ने आक्रामक शुरूआत की लेकिन दूसरे क्वार्टर में पाकिस्तान ने दो गोल करके वापसी की कोशिश की । ब्रेक के समय स्कोर 4 -2 था।

भारत के लिये पांचवां गोल पेनल्टी स्ट्रोक पर हार्दिक सिंह ने किया । आदित्य लालागे को पाकिस्तानी डिफेंडर ने अरशद लियाकत ने बाधा पहुंचाई जिसका खामियाजा उन्हें पेनल्टी स्ट्रोक गंवाकर भुगतना पड़ा । पाकिस्तानी टीम ने दबाव में कई गलतियां की और तीन मिनट बाद फिर पेनल्टी कॉर्नर गंवाया।

हरमनप्रीत मैदान पर नहीं थे और अमित रोहिदास की स्लैप हिट गोलकीपर ने रोक दी । भारत के पास 41वें मिनट में गोल करने का सुनहरा मौका था जब सुखजीत लंबे पास पर गेंद लेकर भीतर गए और सामने सिर्फ पाकिस्तानी गोलकीपर था लेकिन वह सही निशाना नहीं लगा सके।

 अगले मिनट पाकिस्तान को पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन सूफियान की ड्रैग फ्लिक को रोहिदास ने रोक लिया । गेंद भीतर ही थी जिसे भारतीय डिफेंस ने मुस्तैदी से बाहर निकाल दिया । आखिरी क्वार्टर की शुरूआत में ही हार्दिक ने मिडफील्ड में गेंद गंवाई और भारत के खाली पड़े डिफेंस का फायदा उठाते हुए हन्नान ने आसान गोल दागा।

भारत को 49वें मिनट में फिर मौका मिला जब अभिषेक ने गेंद छीनकर दिलप्रीत को सौंपी लेकिन वह उस पर कब्जा बरकरार नहीं रख पाये । इसके दो मिनट बाद सर्कल के भीतर सुखजीत से मिले पास पर अभिषेक निशाना नहीं साध सके।

आदित्य लालागे को 56वें मिनट में पीला कार्ड मिलने से भारत को आखिरी मिनटों में दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा । पाकिस्तान को आखिरी सीटी बजने से दो मिनट पहले पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन वैरिएशन नाकाम रहा। 

Hockey World Cup 2026: पाकिस्तान को फिर मिली करारी शिकस्त, भारत ने 5-3 से हराया

IND vs PAK: भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 5-3 से जीत दर्ज की। नीदरलैंड्स में एम्सटेलवीन के वागेनर स्टेडियम में खेले गए पूल डी के इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और अभिषेक ने शानदार खेल दिखाते हुए दो-दो गोल किए, वहीं भारत की ओर से एक और गोल भी हुआ। भारतीय टीम ने पहले हाफ में बढ़त बना ली थी और बाद में पाकिस्तान की वापसी की कोशिशों को नाकाम करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने अपना अभियान मजबूत किया और अगले दौर में जगह पक्की कर ली।

पाकिस्तान को हराने के साथ ही भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में अपनी दूसरी जीत दर्ज कर ली। इस जीत ने भारतीय टीम का अगले दौर का रास्ता साफ कर दिया है। अब भारत टूर्नामेंट के दूसरे राउंड में पहुंच चुका है और टीम की नजरें आगे के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने पर होंगी। वहीं इस हार के साथ पाकिस्तान का हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का सफर यहीं खत्म हो गया है।

Hockey World Cup: भारत-पाकिस्तान में हाईवोल्टेज मुकाबला…दांव पर सेमीफाइनल की टिकट, जानें कहां देखें लाइव एक्शन

IND vs PAK: हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय हॉकी टीम एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के अपने आखिरी लीग मैच में पाकिस्तान का सामना करेगी। भारत और पाकिस्तान की टीमें 19 अगस्त को एम्सटेलवीन में एक दूसरे के आमने-सामने होंगी। दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला होने की उम्मीद है। इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से मिली हार के बाद भारत के लिए ये मुकाबला काफी अहम हो गया है। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारत टीम को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला जीतना बहुत जरुरी है। भारत के दो मैचों में 3 अंक हैं और अगले दौर में पहुंचने के लिए उसे कम से कम पाकिस्तान के खिलाफ मैच ड्रॉ करना होगा।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के खाते में सिर्फ 1 अंक है, इसलिए उसे आगे बढ़ने की उम्मीद बनाए रखने के लिए हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। इंग्लैंड ने अपने दोनों मुकाबले जीतकर अगले दौर में जगह पक्की कर ली है।

कैसा रहा है भारत का टूर्नामेंट

भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप में वेल्स के खिलाफ 3-1 की जीत से अभियान शुरू किया था। हालांकि, दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ टीम को 2-4 से हार झेलनी पड़ी। इस मैच में दूसरे हाफ के दौरान भारत ने तीन गोल गंवाए। टीम की डिफेंस में हुई गलतियां और पेनल्टी कॉर्नर का फायदा नहीं उठा पाना कोच क्रेग फुल्टन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारत का पाकिस्तान के खिलाफ हालिया रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। इस साल प्रो लीग के यूरोपियन लेग में भी भारत ने पाकिस्तान को लगातार दो मैचों में 7-1 और 4-3 से हराया था। पाकिस्तान ने आखिरी बार 2016 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को शिकस्त दी थी।

पाकिस्तान का टूर्नामेंट

पाकिस्तान को टूर्नामेंट में अब तक इंग्लैंड के खिलाफ 1-4 से हार का सामना करना पड़ा, जबकि वेल्स के खिलाफ उसका मुकाबला 3-3 से बराबरी पर खत्म हुआ। ऐसे में टीम को भारत के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करना होगा। खासकर पेनल्टी कॉर्नर का सही इस्तेमाल और डिफेंस को मजबूत करना पाकिस्तान के लिए अहम होगा।

कब शुरू होगा मुकाबला

भारत और पाकिस्तान के बीच एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप का मुकाबला बुधवार, 19 अगस्त को खेला जाएगा। दोनों टीमें एम्सटेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। ये मैच भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा।

कहां पर देखें भारत-पाक का मुकाबला

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, जो दर्शक मैच ऑनलाइन देखना चाहते हैं, वे JioHotstar पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।

17 खिलाड़ियों को मिलेगा अर्जुन पुरुस्कार पर एक को भी खेल रत्न नहीं

खेल मंत्रालय ने मंगलवार को वर्ष 2025 के लिए किसी भी खिलाड़ी को प्रतिष्ठित ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला किया जबकि 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना।इन पुरस्कारों के लिए छह महीने पहले सिफारिश की गई थी जिनका खेल मंत्रालय ने मूल्यांकन किया और किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न पुरस्कार नहीं देने का फैसला लिया।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने हॉकी स्टार हार्दिक सिंह को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार के लिए नामित किया था लेकिन आखिर में वह दौड़ से बाहर हो गए। इससे पहले, 2014 में भी खेल रत्न पुरस्कार नहीं दिया गया था।विश्वकप विजेता शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख, डेकाथलॉन और ऊंची कूद के एथलीट तेजस्विन शंकर और बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद उन 17 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें मंगलवार को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया।

अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों में ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती, गायत्री गोपीचंद की महिला युगल जोड़ीदार त्रीसा जॉली, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता मुक्केबाज नरेंद्र और युवा बधिर राइफल निशानेबाज धनुष श्रीकांत भी शामिल हैं।एशियाई खेल 1962 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे फुटबॉलर आई अरुमैनायगम को आजीवन उपलब्धि के लिए अर्जुन पुरस्कार दिया गया है।

इस वर्ष चयन समिति ने अर्जुन पुरस्कार के लिए 24 नामों की सिफारिश की थी, लेकिन मंत्रालय ने केवल 17 नामों को ही मंजूरी दी।पुरस्कारों की घोषणा करने में बहुत देरी हुई। खेल मंत्रालय ने योग के खिलाड़ियों को ही सम्मानित करने के उद्देश्य से पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई।

शतरंज खिलाड़ी 19 वर्षीय देशमुख विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। विदित गुजराती 2024 शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।एशियाई खेल 2023 में डेकाथलॉन में ऐतिहासिक रजत पदक और पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल करने वाले तेजस्विन शंकर ने घुटने की समस्या से जूझने के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों में एक कांस्य पदक जीता।

वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने पुरस्कारों की घोषणा में देरी की आलोचना करते हुए इसे खिलाड़ियों के प्रति अनादरपूर्ण बताया।वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 32 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिनमें से 17 पैरा-स्पोर्ट्स से थे। इस बार पैरा-स्पोर्ट्स से केवल दो नाम ही अंतिम सूची में शामिल हो पाए।

पैरा विश्व चैंपियनशिप 2024 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पैरा क्लब की थ्रोअर एकता भ्याण और पैरा विश्व कप 2024 के स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज रुद्रंश खंडेलवाल को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। हालांकि, इस सूची में किसी भी क्रिकेटर का नाम नहीं है। मोहम्मद शमी को 2023 में अर्जुन पुरस्कार दिए जाने के बाद कोई भी क्रिकेटर इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया है।

मंत्रालय ने तीन द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं के नाम घोषित किए हैं।देश का सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न में एक पदक, प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि अर्जुन पुरस्कार विजेता को 15 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।

पिछले साल खेल रत्न पुरस्कार चार खिलाड़ियों को दिया गया था। इनमें विश्व चैंपियन शतरंज खिलाड़ी डी गुकेश, पुरुष हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह, पैरा-एथलीट प्रवीण कुमार और निशानेबाज मनु भाकर शामिल थे।ये पुरस्कार परंपरागत रूप से हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में प्रदान किए जाते हैं, जो भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती भी है। लेकिन अब इसकी कोई तिथि निश्चित नहीं है।

इस वर्ष पुरस्कार चयनसमिति में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के उपाध्यक्ष गगन नारंग, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और पूर्व हॉकी खिलाड़ी एम एम सोमैया भी शामिल थे।

अर्जुन पुरस्कार: तेजस्विन शंकर (एथलेटिक्स), प्रियंका गोस्वामी (एथलेटिक्स), नरेंद्र (मुक्केबाजी), विदित गुजराती (शतरंज), दिव्या देशमुख (शतरंज), धनुष श्रीकांत (बधिर शूटिंग), राजकुमार पाल (हॉकी), सुरजीत (कबड्डी), रुद्रांश खंडेलवाल (पैरा-शूटिंग), एकता भ्याण (पैरा-एथलेटिक्स), अरविंद सिंह (रोइंग), अखिल श्योराण (शूटिंग), त्रीसा जॉली (बैडमिंटन), गायत्री गोपीचंद (बैडमिंटन), लालरेम्सियामी (हॉकी), मुहम्मद अजमल (एथलेटिक्स), पूजा (कबड्डी)।

अर्जुन पुरस्कार (जीवनपर्यंत): श्री आई अरुमैनायगम (फुटबॉल)

द्रोणाचार्य पुरस्कार: परवीर सिंह, छोटे लाल यादव, नेहा चव्हाण

द्रोणाचार्य पुरस्कार (जीवनपर्यंत): धर्मेंद्र यादव, वीरेंद्र कुमार।

हॉकी विश्वकप में अब पाकिस्तान पर जीत बेहद जरूरी, हारे तो होंगे बाहर

भारत ने FIH हॉकी विश्वकप में वेल्स को 3-1 से हराकर शानदार शुरुआत की लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ लचर रक्षात्मक पंक्ति के कारण मैच को 2-4 से गंवाना पड़ा। ऐसे में अब 19 तारीख को पाकिस्तान के खिलाफ मैच निर्णायक बन जाता है। इसमें भारत को हर हाल में जीत चाहिए क्योंकि ड्रॉ भी भारत को मुश्किल में डाल सकता है।

वैसे तो कल पाकिस्तान भी वेल्स के साथ 3-3 की बराबरी पर रहा। यह भारत को एक बेहतर समीकरण बनाकर दे सकता है अगर पाकिस्तान के खिलाफ मैच ड्रॉ होता है तो लेकिन 51 साल बाद विश्वकप का सपना संजोए खड़ी भारतीय टीम शुरुआत में ही इतनी चिंता में नहीं दिखना चाहती थी।

पाकिस्तान की बात करें तो कभी हॉकी विश्वकप की सबसे सफल टीम रसातल में है। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है जिसकी तस्वीर खिलाड़ियों के प्रदर्शन से दिख जाती है।

वहीं  कागज पर भारत कहीं बेहतर टीम लगती है। टीम के पास अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन संतुलन है। दोनों टीमों के बीच में तकनीक और कौशल का इतना अंतर है कि अगर कल पाकिस्तान भारत को हराने में कामयाब होता है तो इसको बहुत बड़ा उलटफेर कहा जाएगा।

आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत और चार बार की विश्व कप विजेता पाकिस्तान के बीच भले ही मैदानी प्रतिद्वंद्विता का गौरवशाली इतिहास रहा हो लेकिन एशियाई दिग्गजों के बीच पिछले लगभग सभी मुकाबले बेमेल रहने से वह रोमांच खत्म हो गया है।

मौजूदा फॉर्म को देखते हुए भारत का पलड़ा भारी लग रहा है लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मैच सिर्फ कौशल का नहीं होता, खिलाड़ियों को जज्बात पर काबू रखकर भी खेलना होगा। भारतीय टीम ने हालांकि विश्व कप से ठीक पहले लंदन में प्रो लीग के यूरोप चरण में पाकिस्तान पर 7-1 और 4-3 से जीत दर्ज की थी। पाकिस्तानी टीम ने आखिरी बाद भारत को 2016 चैम्पियंस ट्रॉफी में हराया था।

उसके बाद से भारत और पाकिस्तान के प्रदर्शन ग्राफ में जमीन आसमान का अंतर आ गया है। भारतीय टीम लगातार दो ओलंपिक पदक जीत चुकी है जबकि विश्व कप की सबसे सफल टीम रही चार बार की चैम्पियन पाकिस्तान टूर्नामेंट में आठ साल बाद लौटी है। एफआईएच प्रो लीग में सारे मैच हारकर आखिरी स्थान पर रही थी और टूर्नामेंट से ठीक पहले कोच हरमान क्रूस के लौट जाने से तैयारियों पर भी असर पड़ा है।

भारत के हरमनप्रीत सिंह पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं वैसे ही जैसे विराट कोहली पाकिस्तानी टीम के खिलाफ हमेशा बेहतरीन बल्लेबाजी करते हैं। भारत बनाम पाकिस्तान मैच का  जो भी नतीजा हो इंग्लैंड अब पूल डी के शीर्ष पर ही रहेगी।  भारत इस ग्रुप की दूसरी टीम बनने के करीब है लेकिन जो ग्रुप उसको इस पूल के बाद मिलेगा वह काफी कठिन होने वाला है।

इँग्लैंड के खिलाफ लचर रक्षापंक्ति ने टीम के अभियान की कलई खोलकर रख दी है। ऐसे में भारत को ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि आने वाले मुकाबलों में भी 70 मिनट तक बेहतरीन खेल दिखाना होगा।

मैच का समय – 19 अगस्त, शाम 6.30 बजे

कहां देखें- स्टार स्पोर्ट्स सिलेक्ट या फिर जियोहॉटस्टार