Asian Champions Trophy के लिए भारतीय हॉकी टीम का ऐलान, इस गोलकीपर की हुई वापसी

पंजाब में 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक होने वाली एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी के लिये हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय पुरूष टीम में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है लेकिन गोलकीपर कृशन बहादुर पाठक की वापसी हुई है।

हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया।

एशियाई खेलों और विश्व कप से बाहर रहे पाठक ने वापसी की है जबकि युवा डिफेंडर अमनदीप लाकड़ा और मिडफील्डर आदित्य अर्जुन लालागे भी टीम में हैं। मिडफील्डर विष्णु कांत सिंह और फॉरवर्ड अंगद बीर सिंह 18 सदस्यीय टीम में दो रिजर्व खिलाड़ी हैं।

एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी के जरिये पंजाब में दो दशक बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी हो रही है । इसके मुकाबले जालंधर और मोहाली में खेले जायेंगे।

भारतीय टीम :

गोलकीपर : सूरज करकेरा, कृशन बहादुर पाठक

डिफेंडर : संजय, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहदास, जुगराज सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमनदीप लाकड़ा

मिडफील्डर : राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालागे, नीलाकांता शर्मा, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह

फॉरवर्ड : शिलानंद लाकड़ा, अभिषेक, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, मनदीप सिंह

रिजर्व : विष्णु कांत सिंह, अंगद बीर सिंह

पुरुष हॉकी और क्रिकेट में भी गोल्ड

नई दिल्ली। जापान में चल रहे एशियाई खेलों में शनिवार को लगातार दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने शनिवार को पांच गोल्ड जीते। इससे पहले शुक्रवार को भारत के खिलाड़ियों ने छह गोल्ड अपने नाम किए थे। शनिवार को भारत ने पुरुषों के हॉकी मुकाबले में भी फाइनल जीत कर गोल्ड हासिल किया तो क्रिकेट में भी पाकिस्तान को हरा कर भारत ने गोल्ड जीता। इससे पहले महिला हॉकी में भी भारत ने गोल्ड जीता था।

पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में मलेशिया को 5-1 से हराया। इसके अलावा शनिवार को भारत ने पुरुषों के क्रिकेट, आर्चरी, गोल्फ और कुश्ती में भी गोल्ड मेडल जीता। भारत के अब 21 गोल्ड के साथ कुल 85 मेडल हो गए हैं और भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर आ गया है। यह एशियाड में भारत का अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2023 में भारत ने 28 गोल्ड सहित 106 मेडल जीते थे। भारत से ऊपर दक्षिण कोरिया और जापान हैं। 168 गोल्ड के साथ चीन पदक तालिका में नंबर एक पर है।

बहरहाल, पुरुषों के हॉकी मैच के फाइनल में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने डबल गोल किए। उन्होंने 11वें और 57वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किए। हरमनप्रीत के अलावा, जुगरात ने 23वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से और 42वें मिनट में हार्दिक ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल किया। 54वें मिनट में शिलानंद ने फील्ड गोल किया। मलेशिया की ओर से इकलौता गोल शेलो सिल्वरियस ने 14वें मिनट में दागा। उन्होंने फील्ड गोल किया।

अन्य मुकाबलों की बात करें तो अंतिम पंघाल ने विमेंस 53 किलो भार की श्रेणी में सिल्वर मेडल जीता है। गोल्ड मेडल मुकाबले में उन्हें जापान की मोए कियोका ने 9-1 से हराया। इससे पहले अंतिम पंघल ने हांगझोउ एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीता था। दीपक पुनिया ने पुरुषों के 97 किलो भार के फ्रीस्टाइल में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने मंगोलिया के गंखुयाग गनबातर को 2-1 से हराया। नागोया में भारत की प्रणवी उर्स ने विमेंस इंडिविजुअल गोल्फ में गोल्ड मेडल जीता। वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गईं। उन्होंने चार राउंड में 15 अंडर 265 का स्कोर किया।

Asian Games 2026: भारत ने ओलंपिक 2028 के लिए किया क्वालीफाई! हरमनप्रीत सिंह की टीम ने लगातार दूसरी बार जीता एशियाई हॉकी का गोल्ड

Asian Games 2026: कप्तान हरमनप्रीत सिंह के दो गोल की मदद से भारत ने शनिवार (3 अक्टूबर) को मलेशिया को एकतरफा फाइनल में 5.1 से हराकर एशियाई खेलों की पुरूष हॉकी का गोल्ड मेडल अपने पास बरकरार रखा। इसी के साथ भारतीय हॉकी टीम ने 2028 ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। इससे एक दिन पहले महिला टीम ने गत चैम्पियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 1.0 से हराकर 44 साल बाद एशियाई खेलों में गोल्ड जीता और ओलंपिक का टिकट कटाया था।

यह पहली बार हुआ है कि एक ही एशियाई खेलों में भारत की महिला और पुरूष दोनों टीमों ने स्वर्ण जीता है। पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में विश्व कप में निराशाजनक आठवें स्थान पर रहने के बाद हरमनप्रीत सिंह की टीम ने शानदार वापसी की। कप्तान हरमनप्रीत (11वें और 57वें मिनट), जुगराज सिंह (23वें मिनट), हार्दिक सिंह (42वें मिनट) और शिलानंद लाकड़ा (54वें मिनट) ने भारत के लिये गोल दागे । मलेशिया के लिये एकमात्र गोल 14वें मिनट में शेलो सिल्वेरियस ने किया।

हरमनप्रीत ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे। इसके साथ ही वह लगातार दो एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं। भारत के सबसे अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह तीन एशियाई खेलों में खिताब जीतने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी बन गए। वह 2014 और 2022 खेलों में गोल्ड मेडलिस्ट विजेता टीम का भी हिस्सा थे।

भारत को अधिक मिले पेनल्टी कॉर्नर

भारत को मैच में 14 जबकि मलेशिया को दो बार पेनल्टी कॉर्नर मिले। इस जीत के साथ लगातार दो एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाला पाकिस्तान के बाद भारत दूसरा देश बन गया है। भारत ने 1966, 1998, 2014 और 2022 में खिताब जीता था। पहले हाफ में मलेशियाई खिलाड़ियों ने अपनी चपलता से भारतीयों को काफी परेशान किया। लेकिन दूसरे हाफ में भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा।

पहले क्वार्टर में भारतीयों में तालमेल की कमी दिखीट। ट्रैपिंग भी खराब थी। सर्कल के भीतर भी अच्छे पास नहीं दे पा रहे थे। भारत को छठे मिनट में गोल करने का मौका मिला। लेकिन विवेक सागर प्रसाद की रिवर्स हिट गोल के ऊपर से चली गई। दो मिनट बाद हार्दिक सिंह को सर्कल के भीतर नीलाकांता शर्मा ने पास दिया। लेकिन शॉट इतना कमजोर था कि मलेशिया ने आसानी से बचा लिया।

हरमनप्रीत ने दागा गोल

भारत को 11वें मिनट में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले। दूसरे पर हरमनप्रीत ने गोल दागा। गोल गंवाने के बाद मलेशिया ने जवाबी हमले बोले और फैजल सारी भारतीय सर्कल में कई बार घुसे। मलेशिया के लिये बराबरी का गोल शेलो ने 14वें मिनट में दागा। हवा में आई गेंद को कब्जे में लेकर उन्होंने दमदार शॉट सीधे गोल के भीतर निशाना करके साधा जिसे गोलकीपर सूरज करकेरा रोक नहीं सके।

दूसरे हाफ में भारत का शानदार प्रदर्शन

दूसरे क्वार्टर में मलेशिया को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन गोल नहीं हो सका। वीडियो रेफरल पर मलेशिया को फिर पेनल्टी कॉर्नर दिया गया और फिर वे नाकाम रहे। भारत ने 23वें मिनट में चौथे पेनल्टी कॉर्नर पर बढत बना ली। हरमनप्रीत मैदान के बाहर थे और जुगराज ने यह गोल दागा। दूसरे हाफ में भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया।

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42वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक बनाया जब पेनल्टी कॉर्नर पर गेंद मलेशियाई रशर के शरीर से टकराई। हार्दिक ने इसे गोल में बदला। चौथा गोल अभिषेक के पास पर शिलानंद ने दागा। हरमनप्रीत ने हूटर से तीन मिनट पहले पेनल्टी कॉर्नर तब्दील करके भारत की 5.1 से जीत तय कर दी।

भारत ने मलेशिया को 5-1 से हराकर जीता एशियाड गोल्ड मेडल

INDvsMAL भारतीय पुुरुष हॉकी टीम का विश्वकप पिछले महीने भले ही अच्छा ना गया हो लेकिन एशियाई खेलों में टीम ने यह साबित कर दिया कि उपमहाद्वीप में वह सबसे बेहतरीन टीम है। हरमनप्रीत के लड़कों ने अपने गोल्ड मेडल का बचाव कर लिया। भारतीय टीम ने मलेशिया को 5-1 से रौंदकर अपनी धाक जमाई। 

कल महिला टीम ने चीन को 1 गोल से हराकर एतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था। मलेशिया की टीम भारत के खेल के स्तर के आस पास भी नहीं दिखी और बेबस नजर आई। पहले हाफ में स्कोर 2-1 था लेकिन चौथे क्वा्रटर में तो टीम ने सिलसिलेवार हमले किए। इसमें एक मौका ऐसा भी आया जब टीम को 4 लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले। मलेशिया को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। वहीं ब्रॉंज मेडल मैच में पाकिस्तान ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हरा दिया।


 भारत ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह (11वें, 57वें मिनट) और जुगराज सिंह (23वें) के जरिए तीन पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला जबकि उप-कप्तान हार्दिक सिंह ने 42वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक से गोल किया और शिलानंद लकड़ा ने 54वें मिनट में मैदानी गोल करके औपचारिकताएं पूरी कीं।मलेशिया का एकमात्र गोल शेलो सिल्वरियस ने 14वें मिनट में किया।

पाकिस्तान को भारत ने सेमीफाइनल में कड़े मुकाबले में 4-3 से हराकर फाइनल की दौड़ से बाहर किया था। गौरतलब है कि पिछले एशियाई खेलों की तरह इस बार भी भारतीय पुरुष हॉकी टीम एक भी मैच नहीं हारी।

Asian Games के रोमांचक सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 4-3 से हराकर किया पदक पक्का

INDvsPAK एशियाड 2026 में भारत ने पाकिस्तान को एक बेहद करीबी मुकाबले में 4-3 से हरा दिया और फाइनल में जगह बना ली। अब भारतीय पुरुष हॉकी टीम स्वर्ण पदक और लॉस एंजलिस ओलंपिक में स्वत प्रवेश पाने से सिर्फ एक कदम दूर है। कुछ सालों में भारत पाकिस्तान के मुकाबले एकतरफा होते थे लेकिन यह मुकाबला अंतिम मिनट तक चला। पहले भारत ने बढ़त बनाई उसके बाद पाकिस्तान ने बराबरी की और अंतिम मिनट में अभिषेक ने गोल दागा।

भारत ने पहले हाफ में तीन गोल करके 3-0 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरा हाफ पाकिस्तान के नाम रहा जिसने तीन गोल करके स्कोर 3-3 कर दिया। ऐसा लग रहा था कि मैच पेनल्टी शूटआउट तक जायेगा लेकिन आखिरी सीटी बजने से कुछ सेकंड पहले अभिषेक ने गोल करके भारत को फाइनल में पहुंचाया।

फाइनल शनिवार को खेला जायेगा जिसमें भारत का सामना मलेशिया या कोरिया से होगा।भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (पांचवां और 13वां मिनट) ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किये जबकि सुखजीत सिंह (23वां) और अभिषेक (60वां) ने फील्ड गोल दागे। पाकिस्तान के लिये कप्तान अबू बकर ने 30वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर पहला गोल किया जबकि शाहिद हन्नान (45वां) और राणा वाहिद (49वां) ने पांच मिनट के भीतर दो गोल दागे।

पहली बार चक दे गर्ल्स Girls हॉकी विश्वकप में Boys से निकली आगे

हॉकी विश्वकप में हमेशा भारतीय पुरुष टीम से महिला टीम कोसो पीछे रहती थी। ना जाने कितनी बार तो महिला टीम क्वालिफाय ही नहीं कर पाती थी। लेकिन इस बार महिला टीम ने ना केवल क्वालिफाय किया बल्कि अपने पुरुष साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बार उम्मीद की पुरुष टीम कम से कम सेमीफाइनल खेलेगी और महिला टीम से कोई उम्मीद ही नहीं थी। लेकिन भारतीय महिला टीम ने पांचवा पायदान पाया और पुरुष टीम को आठवां पायदान मिला।

अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत के साथ, भारतीय महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार समापन किया। टीम ने 5वें-छठे स्थान के लिए खेले गए मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराया। यह मैच गुरुवार शाम को खेला गया।

इस नतीजे से भारतीय महिला टीम को पांचवां स्थान मिला, जो 1974 में हुए पहले महिला वर्ल्ड कप (जिसमें वे चौथे स्थान पर रही थीं) के बाद से उनका वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

वहीं पुरुष टीम ने खासा निराश किया। पुरुष टीम की आलोचना पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने भी की। हरमनप्रीत सिंह ने ने अंतिम मैच में गोल दागकर खुद को शीर्ष 5 गोल स्कोरर में स्थापित कर दिया लेकिन कुल मिलाकर टीम का अभियान निराशाजनक रहा।पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

पुरुष टीम ने पूल डी के मुकाबले में इंग्लैंड जैसी टीम से 4-2 से मैच गंवाया।वह भी मैच में बढ़त बनाने के बाद। इसके बाद टीम का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा था लेकिन 5-3 की स्कोरलाइन संतोषजनक नहीं थी।

अगले दौर में टीम को नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना मिली। नीदरलैंड्स ने भारतीय टीम को 3-1 से हराया। नीदरलैंड से हारने के बाद भारत पूल ई से अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर ही हो गया था लेकिन अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के बाद तकनीकी तौर पर उसके रास्ते खुले थे । इसके लिये उसे कम से कम तीन गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी।  लेकिन भारत ने पहले छह मिनट में ही दो गोल गंवा दिये और इस दबाव से टीम निकल ही नहीं सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत 3-5 से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।

लेकिन निराशाजनक अभियान और ज्यादा निराशाजनक तब हो जब सातवें और आठवें पायदान के लिए भारत बेल्जियम से भिड़ा।भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

रोमांचक मैच में भारत बेल्जियम से पेनल्टी शूटआउट से हारकर रहा आठवें स्थान पर

भारत बेल्जियम का मैच किसी भी हॉकी प्रेमी के लिए बहुत रोमांचक मैच रहा लेकिन यह मैच कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ होता रहा। इसके साथ ही दोनों ही टीम के खिलाड़ियों को चोटों से जूझना पड़ा। खासकर मनप्रीत सिंह जिन्होंने अपने माथे पर चोट खा ली और खेल को काफी वक्त के लिए रोकना पड़ा उन्होंने स्ट्रेचर से जाने से मना कर दिया और चलकर मैदान छोड़ा। इसके बाद जरमनप्रीत की स्टिक बेल्जियम के खिलाड़ी के नाक पर लग गई। लेकिन भारत को रेड कार्ड नहीं मिला।

भारत ने इस मैच में पहले बढ़त बनाई। इसके बाद बेल्जियम ने दो गोल दागे। लेकिन भारत ने फिर से पलटवार कर बराबरी हासिल की। चौथे क्वार्टर में बेल्जियम ने मैदानी गोल दागा। भारत के लिए समय निकलता जा रहा था। लेकिन अंतिम 2.50 मिनट में भारत ने गोलकीपर सूरज करकेरा को बाहर बैठाकर दांव खेला जो अंतिम 30 सेकेंड में काम आया। पेनल्टी स्ट्रोक मिला जिस पर हरमनप्रीत सिंह ने गोल दागकर बराबरी की। हालांकि पेनल्टी शूटआउट की पटकथा भारत के खिलाफ रही।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

शूटआउट में भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने गोल किए, लेकिन यह टीम को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।इससे पहले निर्धारित समय में भारत के लिए अभिषेक ने शुरुआती गोल किया, जबकि हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल दागे। बेल्जियम की ओर से रोमन डुवेकोट, ह्यूगो लाबूशे और निकोलस डी केरपेल ने गोल किए।शूटआउट में बेल्जियम के खिलाड़ियों ने दबाव के बीच बेहतर संयम दिखाया और 4-3 से जीत दर्ज कर ली।

FIH World Cup में भारतीय हॉकी टीम भिड़ेगी बेल्जियम से

भारतीय पुरुष टीम कल (शुक्रवार) 7वें-8वें स्थान के लिए प्ले-ऑफ मैच में सह-मेजबान बेल्जियम का सामना करते हुए अपने हॉकी वर्ल्ड कप अभियान का सकारात्मक अंत करने की कोशिश करेगी।

नीदरलैंड (1-3) और अर्जेंटीना (3-5) से हारने के बाद भारतीय टीम दूसरे चरण में पूल ई में सबसे नीचे रही, जिससे सेमीफाइनल में पहुंचने की उनकी उम्मीदें खत्म हो गईं। इसलिए, यह क्लासिफिकेशन मैच भारत के लिए एक अच्छा प्रदर्शन करने और अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों पर ध्यान केंद्रित करने से पहले अपनी लय वापस पाने का मौका है।

वहीं, बेल्जियम भी अपने घरेलू वर्ल्ड कप अभियान का सुखद अंत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऑस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलने के बाद पूल ऍफ़ में सबसे नीचे रहने और सेमीफाइनल में जगह न बना पाने के कारण सह-मेजबान टीम निराश थी। वावरे में अपने घरेलू समर्थकों के सामने खेलने से ‘रेड लायंस’ (बेल्जियम टीम) का हौसला और बढ़ेगा, जिससे भारत के लिए यह मुकाबला चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

भारत के लिए प्राथमिकता अपनी लय और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करना होगा। हालांकि टीम ने आक्रामक इरादे और मौके बनाने की क्षमता दिखाई है, लेकिन बेल्जियम की टीम के खिलाफ – जो जीत के साथ अपना अभियान खत्म करने के लिए उतनी ही दृढ़ होगी – खेल के चारों क्वार्टर में निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

भारत के लिए ध्यान देने वाली एक मुख्य बात डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक के बीच तालमेल होगी। बेल्जियम के खिलाफ, टीम को पीछे से अधिक उद्देश्यपूर्ण तरीके से गेंद को आगे बढ़ाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि आक्रामक खिलाड़ियों को मिडफील्ड से अच्छी सप्लाई मिले, और फिर फिनिशिंग टच देना स्ट्राइकरों का काम होगा।

कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में भारत की पेनल्टी-कॉर्नर बैटरी फिर से एक महत्वपूर्ण हथियार होगी; लेकिन टीम ओपन प्ले से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। बेल्जियम के सर्कल के अंदर लगातार दबाव बनाना और सर्कल में प्रवेश को गोल करने के मौकों में बदलना जरूरी होगा।

बेल्जियम के पास ट्रांजिशन (खेल के दौरान स्थिति बदलने) के समय खाली जगहों का फायदा उठाने की क्षमता है, और भारत डिफेंसिव ढांचे में कोई चूक नहीं कर सकता या खतरनाक इलाकों में आसानी से गेंद नहीं गंवा सकता। खेल की गति को नियंत्रित करने और टीम के बीच तालमेल बनाए रखने में मिडफील्ड की अहम भूमिका होगी। जीत से भारत को सातवां स्थान मिलेगा और, इससे भी ज़रूरी बात यह है कि अगले बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, “टूर्नामेंट में जितना हो सके बेहतर स्थान पर रहने का यह एक शानदार मौका है। टूर्नामेंट में हमारा कुछ काम अभी बाकी है और हम ऐसा अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे जिस पर हमें गर्व हो सके।”

उन्होंने आगे कहा, “बेल्जियम की टीम के खेलने का तरीका बहुत खास है। हमने उनके साथ काफी मैच खेले हैं। उनके पास कुछ अहम खिलाड़ी हैं जो उनकी टीम के ढांचे को सही ढंग से चलाते हैं, इसलिए हमें बहुत व्यवस्थित रहना होगा और बॉल पर अच्छी पकड़ बनाए रखनी होगी।”

वर्ल्ड कप के तुरंत बाद जापान में एशियाई खेल होने हैं, और भारत बेल्जियम के खिलाफ़ खेले गए मैच से मिली सीख को आगे ले जाना चाहेगा, साथ ही उन कमियों को भी दूर करना चाहेगा जिनकी वजह से उन्हें दूसरे चरण में नुकसान उठाना पड़ा था।

भारतीय हॉकी टीम सिर्फ पाक से बेहतर, श्रीजेश समेत इन दिग्गजों ने की आलोचना

विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाये हैं।अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी।

पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

भारतीय टीम विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में मानसिक दृढता बढाने के लिये बूट कैंप में गई लेकिन टूर्नामेंट में दबाव का सामना नहीं कर सकी। ड्रैग फ्लिकर और कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर अधिक निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे। मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे सीनियर अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।नतीजा यह हुआ कि अंकतालिका में भारतीय टीम फिलहाल सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर है और 8वें स्थान पर है।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने कहा ,‘‘सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा । क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिये इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। नहीं।’’उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।’’

पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे।उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिये । कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।’’

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा ,‘‘ मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किये और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।’उन्होंने कहा ,‘‘ हमने नये खिलाड़ियों को मौके ही नहीं दिये। नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक टीम के छह स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी विश्व कप टीम में नहीं थे। हम हमदर्दी, पिछले रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ही टीम चुन लेते हैं। कम से कम छह जूनियर खिलाड़ियों को प्रो लीग में आजमाना चाहिये था।’’

वहीं एक और दिग्गज परगट सिंह का मानना है कि भारतीय हॉकी का आंतरिक ढांचा इतना कमजोर है कि प्रतिभायें निकलती ही नहीं है।उन्होंने कहा ,‘‘ अच्छी घरेलू स्पर्धायें नहीं होने से हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ नहीं है। यूरोप में कई डिविजन की लीग होती है जो हमारे यहां नहीं है। पहले बेटन कप, आगा खान कप, बांबे गोल्ड कप, मुरूगप्पा कप, नेहरू हॉकी से अच्छी प्रतिभायें निकलती थी। सारा ढांचा ही खराब कर दिया है। इसके अलावा नये खिलाड़ियों को मौका देना था तो दो साल पहले ही बदलाव की शुरूआत कर देनी चाहिये थी।’’

10 साल लगातर जीत, श्रीजेश ने कहा कि पाक अब कोई मुकाबला नहीं देती

भारत की पाकिस्तान की हॉकी टीम पर लगातार दसवीं जीत के बाद पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि यह अब सांसो को थाम देने वाला मुकाबला नहीं रहा। गौरतलब है कि भारतीय टीम आखिरी बार पाकिस्तान से साल 2016 में खेली गई चैंपियन्स ट्रॉफी में हारी थी। वहीं आखिरी बार विश्वकप में पाकिस्तान ने भारत को साल 1986 में हराया था।

भारत के पूर्व कप्तान और गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता, भारत के डिफेंसिव अप्रोच और दबाव वाली स्थितियों में शांत रहने की अहमियत पर अपनी राय रखी। पूर्व कप्तान पीआर श्रीजेश ने कहा, “भारतीय पुरुष हॉकी टीम पिछले डेढ़ साल से एक नए फॉर्मेशन के साथ खेल रही है। वह फॉर्मेशन ज़्यादातर हमें डिफेंस करने पर मजबूर करता है, लेकिन हाल ही में प्रो लीग में, हमने कई मैचों में आगे बढ़कर ज़ोरदार दबाव बनाया।

एक ज़रूरी बात यह है कि यूरोपीय टीमों के खिलाफ़ खेलते समय हमें डिफेंस में एकजुट रहना होगा। इसके अलावा, हमें विश्व कप में अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहिए। डिफेंस में, हमने ज़ोनल मार्किंग का इस्तेमाल किया, इसलिए हमें उस क्षेत्र में अपनी समझ को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। हमें बहुत पीछे नहीं हटना चाहिए। हमें आगे बढ़कर, हाई प्रेसिंग करनी चाहिए और सेंटर लाइन के आगे भी डिफेंस करना चाहिए।” हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी पर श्रीजेश ने कहा, “हरमनप्रीत एक बहुत अच्छे कप्तान हैं। पिच पर कप्तान का असर सीमित होता है क्योंकि आप हर चाल या खिलाड़ी को कंट्रोल नहीं कर सकते। जिसके पास गेंद होती है, उसे ही फ़ैसला लेना होता है।

कप्तान का ज़्यादातर काम पिच के बाहर होता है – टीम को एकजुट रखना, युवा खिलाड़ियों का समर्थन करना, उन्हें जमने में मदद करना, टीम का सकारात्मक माहौल बनाना, खिलाड़ियों की चिंताओं को कोच तक पहुँचाना, संदेह दूर करना और यह पक्का करना कि हर कोई कोच के निर्देशों को समझे। इसलिए, हॉकी कप्तान के लिए मैदान के बाहर का काम मैदान पर किए जाने वाले काम से कहीं ज़्यादा अहम होता है।” श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीम के विकास और भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता पर कहा, “आखिरी क्वार्टर या आखिरी मिनटों में गोल खाना हमारे लिए एक समस्या हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अब, हम मैच जीतने के लिए देर से गोल करते हैं। पहले, 35 मिनट के हाफ के दौरान, हम फिटनेस या खराब फैसले लेने की वजह से गलतियां करते थे और गोल खा जाते थे। लेकिन जब से चार-क्वार्टर वाला सिस्टम आया है, और उससे पहले भी, हमने अपनी फिटनेस, ताकत, खेल की समझ और फैसले लेने की क्षमता में काफी सुधार किया है। इसी वजह से, पाकिस्तान के खिलाफ मैच अब उतने मुश्किल नहीं रहे जितने पहले हुआ करते थे। पहले, भारत बनाम पाकिस्तान के मैच बहुत कड़े मुकाबले वाले होते थे, जो अक्सर 1-0 या 2-1 पर खत्म होते थे। पाकिस्तान की मौजूदा टीम का स्तर पहले जैसा नहीं रहा है, उनके द्वारा किए गए 3 गोलों में भारतीय रक्षापंक्ति की गलतियां ज्यादा रही।”