शासन प्रमुख के तौर पर लगातार तिरंगा फहराने का नया रिकॉर्ड बना गये मोदी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से आज तेरहवीं बार झंडा फहराया। इसी के साथ मोदी ने शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया, लगातार 25 बार झंडोत्तोलन करने का। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी पहले ही बारह बार राष्ट्र ध्वज राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में फहरा चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर आज तेरहवीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर वो सिल्वर जुबली का ऐसा रिकॉर्ड बना गये, जो जल्दी टूटने वाला नहीं है।

इससे पहले सबसे अधिक झंडोत्तोलन का रिकॉर्ड राज्य स्तर पर तीन मुख्यमंत्रियों के नाम था, ज्योति बसु, पवन कुमार चामलिंग और नवीन पटनायक ने लगातार चौबीस बार झंडोत्तोलन करने का रिकॉर्ड बनाया था। उन तीनों में सबसे पहले ये कीर्तिमान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर ज्योति बसु ने जून 1977 से लेकर नवंबर 2000 के बीच बनाया था। आगे चलकर सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दिसंबर 1994 से मई 2019 के बीच और ओडीशा के मुख्यमंत्री के तौर पर के नवीन पटनायक ने मार्च 2000 से जून 2024 के बीच इसकी बराबरी की। मोदी इन तीनों से अब आगे निकल गये हैं। न सिर्फ सीएम से लेकर पीएम तक सबसे अधिक समय तक प्रशासनिक प्रमुख बने रहने का, बल्कि सबसे अधिक बार झंडा फहराने का, जो रिकॉर्ड उन्होंने देश के अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर बनाया।

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राष्ट्र ध्वज फहराने के मामले में आज सिल्वर जुबली मनाने वाले मोदी अगले दो महीने के अंदर अपने प्रशासनिक कैरियर की भी सिल्वर जुबली मनाने जा रहे हैं। सात अक्टूबर के दिन उन्हें प्रशासन के शीर्ष पर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे, सात अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात का सीएम बनने वाले मोदी लगातार मिले जनसमर्थन के कारण सीएम से पीएम तक की अपनी प्रशासनिक यात्रा की निरंतरता को बनाए हुए हैं।

मोदी से पहले लगातार शासन के अगुआ बने रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जो सिक्किम के मुख्यमंत्री 24 साल 165 दिन लगातार रहे थे, 12 दिसंबर 1994 से लेकर 26 मई 2019 तक। मोदी चामलिंग का ये रिकॉर्ड पहले ही तोड़ चुके हैं, सिर्फ सीएम के तौर पर कौन कहे, सीएम- पीएम के तौर कुल मिलाकर सबसे लंबे समय तक प्रशासन के शीर्ष पर बने हुए हैं मोदी।

लेकिन अगर स्वतंत्रता दिवस समारोह की ही बात की जाए, तो मोदी ने इसे सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर जन उत्सव में बदल दिया है पिछले 25 वर्षों में। यही नहीं, इसे बड़े संकल्प लेने और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने का भी अवसर बना दिया है मोदी ने। आखिर प्रजातंत्र में जन प्रतिनिधि को अपना हिसाब देने और शासन की दशा- दिशा और बड़े लक्ष्यों को तय करने का स्वतंत्रता दिवस समारोह से बड़ा अवसर क्या हो सकता है।

बहुत कम लोगों को ध्यान में होगा कि सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले मोदी को पहली बार शासन प्रमुख के तौर पर झंडा फहराने का अवसर 15 अगस्त 2002 को मिला था। ये वो समय था, जब मोदी गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे थे। 27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड में 59 कारसेवकों को साजिशन जलाकर मार देने की घटना की वजह से गुजरात के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे और इसे लेकर मोदी पर विपक्ष हमलावर था।

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मोदी ने इसके सामने जनता की अदालत में जाने का फैसला किया था और 19 जुलाई 2002 को गुजरात विधानसभा को भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से करते हुए जल्दी चुनाव कराने की मांग की थी। लेकिन तब के मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स माइकल लिंगदोह ने गुजरात में शीघ्र चुनाव कराने से मना कर दिया था।

ऐसे में राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार अगस्त 2002 में झंडोत्तोलन किया था। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम गुजरात की राजधानी गांधीनगर की जगह अहमदाबाद में हुआ था। दरअसल ये किसी नई परंपरा की शुरूआत नहीं थी, बल्कि गुजरात की स्थापना के बाद से ही ये हो रहा था।

एक मई 1960 को अलग राज्य के तौर पर अस्तित्व में आये गुजरात की पहली राजधानी होने का गौरव राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद को ही हासिल हुआ था और इसलिए यहां के पुलिस स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होने लगा, जो 1961-62 के साल में बना था। बाद में गांधीनगर में राजधानी शिफ्ट हो जाने के बावजूद स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद में ही होता रहा, उसी पुलिस स्टेडियम में।

अहमदाबाद के पुलिस स्टेडियम में ही 15 अगस्त 2002 की सुबह जब मोदी ने सीएम के तौर पर पहली बार झंडोत्तोलन किया, तो इस अवसर को गुजरात को लेकर अपने बड़े सपने सामने रखने का अवसर बना दिया। गुरूवार की उस सुबह मोदी ने शिक्षा पर बल देते हुए ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए इंटरनेट के जरिये आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने की बात की। यही नहीं, अपनी नई शिक्षा नीति को सामने रखते हए मदरसों के आधुनिकीकरण के साथ ही सीमावर्ती इलाको के सैनिक स्कूलों को भी उन्नत करने की बात की।

मोदी ने तब राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या भी बढ़ाने की बात की, ताकि गुजराती और हिंदी के साथ ही अंग्रेजी सिखकर भी राज्य के बच्चे राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें, अपनी जगह बना सकें। जिस राज्य की स्थापना के साथ ही गुजराती भाषा के स्कूलों पर जोर था, वहां के लिए ये एक क्रांतिकारी, आधुनिक सोच थी, ‘त्रिभाषा फार्मूले’ को पूरी ईमानदारी के साथ लागू करने की शुरूआत थी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह शिक्षा से आगे बढ़कर सुशासन पर भी जोर दिया। मोदी का कहना था कि गुजरात के दो प्रमुख सपूतों- गांधी और सरदार की अगुआई में आजादी हासिल करने वाले भारत में ‘सुराज’ के बाद ‘सुशासन’ भी उतना ही जरूरी है, और इस मामले में गुजरात को पहल लेनी होगी।

मोदी ने 15 अगस्त 2002 की उस सुबह जिस सुशासन का संकल्प लिया था, अगले एक दशक में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर वही उनके शासन का मूल मंत्र रहा, जिसके आधार पर गुजरात मॉडल विकसित हुआ और पूरे देश में उनकी शोहरत हुई। इसी सुशासन के बल पर जनता के हृदय में अपनी जगह बनाकर मई 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

लेकिन देश का प्रधानमंत्री बनने से पहले करीब पौने तेरह साल लंबे अपने सीएम कैरियर में मोदी ने जो दर्जन भर अवसरों पर गुजरात में राष्ट्र ध्वज फहराया, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, मोदी ने उन अवसरों को फटाफट जन उत्सव में बदल दिया।

दिसंबर 2002 में राज्य विधानसभा का चुनाव अपनी अगुआई में जीताने के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह का जो पहला मौका मोदी को मिला, उन्होंने उस मौके को राज्य की जनता के लिए अनूठा बना दिया। गुजरात की स्थापना के बाद पहली बार हुआ, जब स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह अहमदाबाद की जगह पाटण में मना, जिस पाटण को गुजरात की प्राचीन राजधानी रहने का गौरव भी हासिल रहा है।

पाटण में तब पूरे शहर को सजाया- संवारा गया, भांति- भांति के कार्यक्रम किये गये।

पूरे शहर में लाइटिंग ऐसी, मानो पूरा पाटण दीपावली मना रहा हो। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। न सिर्फ पाटण शहर के लोग, बल्कि राज्य के कई हिस्सो से यहां लोग पहुंचे। सबके लिए ये सुखद आश्चर्य था, किसी ने कल्पना नहीं की थी कि जिले स्तर पर कभी राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह होगा, अमूमन होता तो ये था कि ऐसे कार्यक्रम या तो राज्य की राजधानी में होते थे या फिर सबसे बड़े शहर में। लेकिन मोदी तो लीक से हटकर चलने के आदी रहे हैं, उन्हें कहां रूटीन चीजों में भरोसा।

15 अगस्त 2003 से पाटण में जो सिलसिला शुरु हुआ, वो मोदी के कार्यकाल के दौरान तो रहा ही, उनके राज्य छोड़ने के बाद भी कोविड की महामारी से आए व्यवधान को छोड़ दें, तो ये सिलसिला अब भी जारी है। मोदी जब आज लाल किले से झंडा फहरा रहे थे, उनके गृह राज्य गुजरात में उनकी शुरू की गई परंपरा के तहत ही राज्य स्तरीय 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अहमदाबाद या गांधीनगर की जगह अमरेली में मनाया जा रहा था।

खुद मोदी ने गुजरात में राज्य सरकार के मुखिया के तौर पर जो आखिरी झंडोत्तोलन किया था, वो कच्छ जिले के मुख्यालय भुज में। भुज के लालन कॉलेज से ही 15 अगस्त 2013 के दिन मोदी ने लाल किले की तरफ बढ़ने की हुंकार भरी थी। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल के चारों तरफ भी लालन कॉलेज से लाल किले की तरफ बढ़ते मोदी के ढेरों पोस्टर- बैनर और होर्डिंग्स लगे थे।

हुआ भी वही, अगले साल मोदी लालन कॉलेज की जगह लाल किले से झंडोत्तोलन करते नजर आए। 15 अगस्त 2014 की सुबह जब देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने पहली बार तिरंगा फहराया, लगे हाथों अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र किया, जिसमें स्वच्छ भारत अभियान की बात की थी, सबके लिए शौचालय की बात थी। तब ज्यादातर लोगों को आश्चर्य हुआ था, एक तो लाल किले से कभी किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की बात नहीं की थी, विपक्ष ने माखौल भी उड़ाया था। लेकिन ये मोदी की प्राथमिकताओं का संकेत था, जिसके केंद्र में देश का आम आदमी रहा है।

वहां से मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है, हर बार लाल किले की प्राचीर से बड़े लक्ष्य का ऐलान करते हुए और उसे पाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ने की योजना और उसका रोड मैप रखते आए हैं वो। बतौर पीएम तेरहवीं बार भी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी आज ऐसा ही करते नजर आए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए शक्ति की सप्तधारा बहाने की बात की, एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों की सामूहिक ताकत के साथ इस सपने को हकीकत में बदलने की बात की।

मोदी खुली आंखों से सपने देखते हैं, ऐसा वो खुद बार- बार कहते हैं, गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी ये बात कहते थे, 2014 से देश के प्रधानमंत्री हैं, तब भी ये बात करते हैं। मोदी का मानना है कि खुली आंखों से देखे हुए सपने पूरे होते हैं, जरूरत होती है इसके लिए तनतोड़ मेहनत की और अहर्निश प्रयासों की। मोदी को इन दोनों चीजों से कभी परहेज नहीं रहा है, तभी बिना रूके, बिना थके, पचीस वर्षों की प्रशासनिक यात्रा को जल्दी ही पूरा करने जा रहे हैं, विकसित भारत की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं, Gen-Z से लेकर नौजवानों, किसानों और महिलाओं को भी इस लक्ष्य को पाने में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

IND vs SL: गॉल टेस्ट में गरजा देवदत्त पडिक्कल का बल्ला, ठोका करियर का पहला शतक, विराट कोहली के इस एलीट क्लब में हुए शामिल

भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया था। वहीं पहले बल्लेबाजी करने आई भारतीय टीम पहले दिन 2 विकेट पर 288 रन बनाए। पहले दिन का खेल खत्म होने तक देवदत्‍त पडिक्‍कल 131 और ऋषभ पंत 27 रन पर क्रीज पर हैं। देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ दिया।

कर्नाटक के इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने दो मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में धैर्य के साथ खेलते हुए बड़ी पारी खेली और टीम के लिए अहम योगदान दिया। यह शतक पडिक्कल के टेस्ट करियर की एक खास उपलब्धि बन गया। इस शतक के साथ पडिक्कल विराट कोहली के साथ एक खास क्लब में शामिल हो गए।

पडिक्कल ने बनाया रिकॉर्ड

देवदत्त पडिक्कल ने अपने शतक के साथ एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। वह स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि विराट कोहली ने हासिल की थी। कोहली ने 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे मैच में नाबाद 114 रन की पारी खेलकर यह रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने पोर्ट ऑफ स्पेन में टीम को मुश्किल टारगेट का पीछा करने में अहम मदद की थी।

कैसा था मुकाबला

ये मुकाबला मैच 14 अगस्त को शुरू हुआ था, लेकिन भारतीय समय के मुताबिक कोहली ने अपना शतक 15 अगस्त की रात लगाया। बारिश के कारण मैच 35 ओवर का कर दिया गया और भारत को 255 रन का लक्ष्य मिला। 92 रन पर 3 विकेट गिरने के बाद कोहली ने पारी संभाली और टीम को जीत के करीब पहुंचाया। भारत 32.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर मैच अपने नाम कर लिया। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अपना 43वां वनडे शतक लगाया।

गणतंत्र दिवस- स्वतंत्रता दिवस पर लगा चुके हैं शतक

इसके साथ ही विराट कोहली स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस दोनों मौकों पर शतक लगाने वाले इकलौते भारतीय पुरुष क्रिकेटर हैं। गणतंत्र दिवस पर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड ओवल में 116 रन की पारी खेली थी, जो उनके टेस्ट करियर का पहला शतक भी था।

पडिक्कल ने 134 गेंदों में ठोका शतक

देवदत्त पडिक्कल ने 134 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया। पडिक्कल को चोटिल बी साई सुदर्शन की जगह टीम में शामिल किया गया था और उन्होंने नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। पडिक्कल ने पारी के दौरान धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और स्पिन गेंदबाजों का भी अच्छी तरह सामना किया।

Bihar: प्रशांत किशोर की राजनीति के मुरीद हुए चिराग पासवान! शराबबंदी पर सरकार को घेरा

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने शनिवार को जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किशोर धर्म और जाति के आधार पर लोगों को जोड़ने की कोशिश करने के बजाय विकास की बात करते हैं, इसलिए वह उनकी राजनीति से सहमत हैं। चिराग पासवान ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी पार्टी के कार्यालय में तिरंगा फहराया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रशांत किशोर को लेकर अपनी राय रखी।

PK की राजनीति को चिराग का समर्थन!

इससे एक दिन पहले चिराग पासवान ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मौजूदा रूप में यह कानून अपने मकसद को पूरा करने में सफल नहीं रहा है और इसकी समीक्षा की जरूरत है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून राज्य में अवैध शराब के कारोबार को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने इसी वजह से कानून की समीक्षा किए जाने की बात कही।

शराबबंदी पर सरकार को घेरा

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, “शराबबंदी लागू होने के बाद भी शराब की खरीद-बिक्री और बनाने की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। इनमें नकली शराब के मामले भी शामिल हैं। ऐसे में इस नीति का मकसद पूरा नहीं हो रहा है। इसलिए कानून की समीक्षा करके इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि जब 2016 में बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया गया था, तब उनकी पार्टी विपक्ष में थी, फिर भी उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि अब लोगों को शराब पीने से होने वाले नुकसान के बारे में बड़े स्तर पर जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार और समाज, दोनों को मिलकर काम करना चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) बिहार और केंद्र, दोनों जगह एनडीए की सहयोगी पार्टी है। चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी बिहार की शराबबंदी व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। मांझी ने कहा था कि राज्य में शराबबंदी कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने गुजरात की तरह बिहार में भी शराबबंदी कानून लागू करने की मांग की थी। मांझी के इन बयानों के कुछ दिनों बाद चिराग पासवान ने भी बिहार की शराबबंदी नीति की समीक्षा करने की जरूरत बताई है। इससे एनडीए के सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

दुबई में HR ने ऑफिस में भारतीय और पाकिस्तानी कर्मचारियों के साथ एक ही दिन मनाया स्वतंत्रता दिवस, वायरल हुई पोस्ट

दुबई के एक ऑफिस में भारतीय और पाकिस्तानी कर्मचारियों के लिए स्वतंत्रता दिवस का संयुक्त जश्न मनाने के बारे में एक भारतीय व्यक्ति का मज़ेदार किस्सा वायरल हो गया है। अब वायरल हो चुके इस वीडियो में, उस व्यक्ति ने बताया कि उन्हें कंपनी के HR विभाग से एक ईमेल मिला था, जिसमें कर्मचारियों को भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का संयुक्त जश्न मनाने के लिए पैंट्री में इकट्ठा होने के लिए बुलाया गया था। चूंकि दोनों देश अपनी आज़ादी का जश्न लगातार दो दिनों—14 अगस्त और 15 अगस्त—को मनाते हैं, इसलिए कंपनी को लगा कि यह सभी को एक साथ लाने का एक अच्छा मौका होगा।

कॉमेडियन ने मजाक में कहा कि यह विचार ऐसा लगा जैसे “दो तलाकशुदा लोगों को उनके अलग होने का जश्न मनाने के लिए एक साथ लाया जा रहा हो।” उन्होंने बताया कि भारतीय और पाकिस्तानी कर्मचारी पैंट्री की ओर गए, जबकि कुछ बांग्लादेशी सहकर्मी भी उनके पीछे-पीछे चल दिए, जिससे एक और मज़ाकिया टिप्पणी सामने आई कि वे किसी काल्पनिक “CSR बचाव अभियान” का हिस्सा थे।

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कहानी सुनाने वाले के मुताबिक, पैंट्री को एक बड़े केक से सजाया गया था, जिसके आमने-सामने के कोनों पर भारत और पाकिस्तान के झंडे लगे थे। उन्होंने मज़ाक में सोचा कि क्या केक का भूरा रंग इस कार्यक्रम में इकट्ठा हुए सभी दक्षिण एशियाई लोगों को दिखाने के लिए था।

उन्होंने बताया कि सबसे अजीब पल तब आया जब ब्रिटिश HR मैनेजर ने उन्हें और उनके पाकिस्तानी साथी का हाथ पकड़ा, उन्हें एक साथ खड़ा किया, उनके हाथ में चाकू थमाया और केक को ठीक बीच से काटने के लिए कहा। इस अप्रत्याशित संकेत ने सभी को उलझन में डाल दिया।

मज़ाक को और बढ़ाते हुए, उन्होंने कहा कि कर्मचारी चुपचाप सोच रहे थे कि ब्रिटिश शासन से आज़ादी के जश्न को एक ब्रिटिश व्यक्ति क्यों लीड कर रहा है। वीडियो में उन्होंने लोगों के मन में चल रही बातों का अंदाज़ा लगाते हुए कहा, “तुमने ही तो हमारे साथ ऐसा किया था। अब तुम हमारे साथ जश्न क्यों मना रहे हो?”

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे एक उलझन में पड़े नेपाली साथी, जिन्हें शायद इस मौके के बारे में पता नहीं था, ने केक देखा और “हैप्पी बर्थडे” गाना शुरू कर दिया, जिससे एक और मज़ेदार पल बन गया। यह मज़ाक पूरी कहानी में बार-बार आता रहा। उन्होंने बताया कि जब बाकी सब लोग इस कार्यक्रम का मतलब समझने की कोशिश कर रहे थे, तब भी वह साथी गाना गाता रहा।

वीडियो में केक के लिए पेपर प्लेट लेकर लाइन में खड़े कर्मचारियों का मज़ाक भी उड़ाया गया। बनाने वाले ने इस नज़ारे की तुलना आज़ादी की लड़ाई के समय राशन की लाइन से की। उन्होंने HR मैनेजर के बार-बार यह याद दिलाने पर भी मज़ाक किया कि वे “एक परिवार” हैं और उन्हें लड़ना नहीं चाहिए। साथ ही, उन्होंने भारत के बंटवारे से जुड़े लोगों का मज़ाकिया अंदाज़ में ज़िक्र भी किया।

यह इंस्टाग्राम क्लिप दर्शकों के बीच वायरल हो गई है और इसे हज़ारों रिएक्शन और कमेंट्स मिले हैं। कई यूज़र्स ने कॉमेडियन के कहानी कहने के अंदाज़ की तारीफ़ की, जबकि दूसरों को सांस्कृतिक गलतफहमियां और ऐतिहासिक संदर्भ खास तौर पर मज़ेदार लगे।

तिरंगा यात्रा में जाने से रोके गए देवेंद्र महतो, पुलिस पर मारपीट का आरोप…सामने आया वीडियो

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने शनिवार को पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में होने वाली तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए जब वह अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। रिपोर्ट के मुताबिक, महतो पिछले 14 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

महतो का दावा है कि पुलिस के साथ हुई झड़प में उनके सीने पर चोट लगी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस समय प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और गड़बड़ी की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। महतो ने 2 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले रांची विधानसभा का घेराव करने के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ गई थी। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले व पानी की बौछार का भी इस्तेमाल किया था।

महतो का पुलिस पर मारपीट का आरोप

महतो ने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होना चाहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों रोका जा रहा है। महतो ने कहा, “80 साल बाद हमें एहसास हुआ है कि हमें सिर्फ नाम की आजादी मिली है। संविधान के किस नियम के तहत मुझे रोका जा रहा है?”

महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अन्य पोस्ट में बताया कि जैसे ही उन्होंने तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई, उनके अस्पताल के कमरे के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के नागरिकों को अपने ही देश में तिरंगा यात्रा में शामिल होने की आजादी नहीं है।

घटना के एक वीडियो में एक सुरक्षा अधिकारी महतो को अस्पताल से बाहर जाने से रोकता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में कई जेएलकेएम कार्यकर्ता अधिकारी से महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने देने की अपील करते नजर आ रहे हैं। वहीं, अधिकारी उन्हें भूख हड़ताल कर रहे महतो को आराम करने देने के लिए कहता हुआ दिखाई देता है। महतो ने अस्पताल के बिस्तर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग छात्र आंदोलन को भटकाने और उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने और आपसी एकता बनाए रखने की भी अपील की।

हेमंत सोरेन ने पारदर्शिता का भरोसा दिलाया

इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने खास तौर पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा, “मेरे लिए राज्य के युवा और उनका हम पर भरोसा बहुत महत्वपूर्ण है। हमने व्यवस्था में बदलाव लाने का फैसला किया है। पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित की जाएगी।”

उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए छात्रों से सुझाव लेने की पहल शुरू की है। इसका नाम ‘छात्रों की बात – छात्रों के साथ’ रखा गया है। इससे पहले छात्र नेता रविंदर पासवान ने कहा था कि प्रदर्शनकारी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आजादी और उसके महत्व पर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि शनिवार को प्रदर्शनकारी सरकार के सामने अपनी मांगें नहीं रखेंगे।

क्या स्वतंत्रता दिवस पर 5 हजार रुपये कैश दे रही मोदी सरकार? वायरल दावे का Fact Check

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Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

pushkar singh dhami

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देहरादून में ध्वजारोहण किया। उन्होंने युवाओं के रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवा आयोग के गठन का ऐलान किया। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

 

सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने युवाओं को हमेशा ही सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। युवाओं से संबंधित निर्णय, रोजगार से संबंधित बातें, युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलने की बात हो, बिना पर्ची, बिना किसी खर्ची के या बिना भ्रष्टाचार या नकल के, हमने युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी काम किए हैं जो राज्य के हित में जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के निर्माण के लिए, रोजगार-स्वरोजगार की दिशा में वे आगे बढ़ें, उनका प्रशिक्षण हों, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, युवा आयोग का गठन किया जाएगा। इसकी हमने घोषणा की है। जल्द ही युवा आयोग युवाओं के विकास की दिशा में काम करेगा।

 

उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में औद्योगिकरण के लिए काफी बड़ी इंडस्ट्रियां हमारे यहां आ गई हैं। पर्वती क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित हो, रोजगार मिले, वहां भी इंडस्ट्री का विस्तार हो इस दिशा में चमोली, पौढ़ी और अलमोड़ा जनपदों को पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। उद्योग से संबंधित गतिविधियां यहां पर प्रारंभ की जाएंगी।

 

मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर राष्ट्र के गौरव, शौर्य और असंख्य बलिदानों को स्मरण करने का विशेष दिवस है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर शासकीय आवास परिसर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर वीर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

vande matram

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन पर सियासी बवाल मच गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से के बाद भी गायन जारी रखा। इसी दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ओर से गायन रोकने का इशारा किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इसे नहीं रोका। ALSO READ: लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

 

कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष लालजी देसाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए गायन पूरा कराया। कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी की देसाई के साथ बातचीत भी हुई।

 

राहुल-सोनिया ने रूकने का इशारा किया

कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन तय हिस्से से आगे बढ़ने पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का संकेत दिया। हालांकि, लालजी देसाई ने दोनों नेताओं को समझाया कि गायन जारी रखा जाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया। बाद में राहुल गांधी और सोनिया गांधी देसाई से इस मुद्दे पर चर्चा करते नजर आए।

 

भाजपा ने मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया 

भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के शासनकाल में भी ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद सामने आए हैं। पार्टी ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए।

 

सोनिया गांधी गीत नहीं, खरगे के लिए कह रही थीं

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठने के लिए कह रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को गलत तरीके से पेश किया गया घटनाक्रम बताया।

‘वैचारिक नक्सलवादियों की पहचान कर अलग-थलग करना होगा’ लाल किले से PM मोदी की बड़ी चेतावनी

PM Modi Red Fort Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद को कमजोर करने में बड़ी सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि “वैचारिक नक्सलवाद” या “दिमागी नक्सलवाद” अभी भी हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने भारत को नक्सली हिंसा से मुक्त करने का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि माओवादी विद्रोहियों में अब उन इलाकों में टिके रहने की ताकत नहीं बची है, जो कभी हथियारबंद संघर्ष से प्रभावित थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने को याद करते हुए कहा, “नक्सलवाद ने धरती को खून से सराबोर कर दिया था।” तब उस समय सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि जो इलाके कभी नक्सली हिंसा के लिए जाने जाते थे, वहां अब विकास हो रहा है और लोगों में भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “जहां कभी नक्सली गोलियां चलती थीं, जहां कभी धरती खून से सनी रहती थी, आज उन्हीं नक्सल प्रभावित इलाकों में… विकास, भरोसे और कोशिशों का तिरंगा लहरा रहा है।”

“वैचारिक नक्सलवाद” को लेकर पीएम मोदी की चेतावनी

हालांकि, पीएम मोदी की सबसे कड़ी चेतावनी उस चीज के लिए थी जिसे उन्होंने “वैचारिक नक्सलवाद” कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “सालों तक, माओवादी सोच वाले लोग देश में सत्ता के गलियारों में जमे रहे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के तौर पर भी, इस माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया।”

उन्होंने हथियारबंद माओवादी विद्रोहियों और उन लोगों के बीच फर्क बताया जो माओवादी विचारधारा को मानते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “हम जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल रहे। हथियारबंद नक्सली तो चले गए हैं, लेकिन वैचारिक नक्सलवाद यानी दिमागी नक्सलवाद अभी भी मौके की तलाश में है।”

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि यह वैचारिक धारा “हिंसा और अराजकता का रास्ता बनाने” की कोशिश कर रही है और उन्होंने इसे मानने वाले लोगों की पहचान करके उन्हें अलग-थलग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “इन वैचारिक नक्सलियों की पहचान की जानी चाहिए। इन वैचारिक नक्सलियों को अलग-थलग किया जाना चाहिए।”

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