यूएन में भारत ने उड़ाई पाकिस्तान के झूठ की धज्जियां, भारतीय डिप्लेमैट त्यागी ने दी अपनी डूबती इकॉनमी पर ध्यान देने की नसीहत

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल में कश्मीर पंडितों के पलायन का मुद्दा उठा कर भारत को घेरने की पाकिस्तान की कोशिश को एक बार फिर करारा झटका लगा है। काउंसिल में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान को नसीहत दी और कहा कि वह बॉर्डर पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के बजाय अपनी देश की डूबती अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे और सिर्फ बेलआउट पर ही निर्भर न रहे।

भारत ने गुरुवार को यूएन ह्यूमन राइट्स काउंसिल में कश्मीर और भारत में अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान की बातों पर कड़ा एतराज जताया। उसने इस्लामाबाद पर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर गैर-कानूनी कब्जा करने का आरोप लगाया और उससे इलाका खाली करने को कहा। भारतीय डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी ने काउंसिल में भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान से कहा कि वह इलाके पर कब्जा करने और बॉर्डर पार आतंकवाद को स्पॉन्सर करने के बजाय अपनी कर्ज में डूबी इकॉनमी और बेलआउट पर निर्भरता पर ध्यान दे।

त्यागी ने कहा, “क्योंकि पाकिस्तान को हर एजेंडा आइटम के तहत याद दिलाने की जरूरत लगती है, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। जम्मू-कश्मीर का एकमात्र हिस्सा जिस पर विदेशी कब्जा है, वह पाकिस्तान के पास है, जिसे हम फिर से खाली करने को कहते हैं।”

अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान की बातों का जवाब दिया

त्यागी ने अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान की बातों का जवाब देते हुए भारत की मुस्लिम आबादी और सार्वजनिक संस्थानों में प्रतिनिधित्व पर जोर दिया। साथ ही आरोप लगाया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय को बहुत अधिक जुल्म का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने आगे कहा, “भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में से एक है, और हमारे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग वोट देते हैं, कानून बनाते हैं, सबसे बड़ी अदालत में बैठते हैं और हमारे इंस्टीट्यूशन को लीड करते हैं। पाकिस्तान में, आजादी के बाद से हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय की आबादी बहुत कम हो गई है। उनकी बेटियों को किडनैप किया जाता है, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कर शादी कर दी जाती है।

भारत ने कश्मीरी पंडितों के पलायन को याद किया

त्यागी ने 1990 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इसके लिए पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादी जिम्मेदार थे। पड़ोसी देश के दोहरे रवैये को सामने लाते हुए, क्षितिज त्यागी ने कहा, “काउंसिल को पाकिस्तान को यह बताने की जरूरत नहीं है कि 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ था, जिन्हें पाकिस्तान के हथियारबंद, ट्रेंड और बॉर्डर पार भेजे गए आतंकवादियों ने उनके घरों से निकाल दिया था।”

उन्होंने कहा, “उन आतंकवादियों ने हर धर्म के कश्मीरियों को मारा है, जिनमें से कई मुस्लिम थे। जिस देश ने उन्हें प्रायोजित किया, वह अब इस काउंसिल से जांच की मांग कर रहा है। यह काउंसिल इस बात से अनजान नहीं रहेगी।”

आतंकी हाफिज पर सवाल से भागे पाकिस्तान PM:शहबाज UN में पत्रकारों ने पूछा- आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे; कोई जवाब नहीं दिया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे। यहां पत्रकारों ने उनसे लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किया, लेकिन शहबाज सवालों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। UN मुख्यालय में दाखिल होते समय पत्रकारों ने शहबाज से पूछा, “प्रधानमंत्री, आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” शहबाज ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। बाहर निकलते समय पत्रकारों ने फिर पूछा कि पाकिस्तान हाफिज सईद पर कार्रवाई कब करेगा, लेकिन शहबाज ने दोबारा कोई जवाब नहीं दिया। हाफिज सईद 26/11 मामले में आरोपी हाफिज सईद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का संस्थापक है। भारत ने उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में आरोपी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी सईद को आरोपी बनाया है। NIA ने उसे कथित साजिश में आरोपी नंबर 8 बताया है और पाकिस्तान स्थित LeT के आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है। भारत बोला- PAK आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने पर मजबूर किया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर और अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान के बयान पर भारत ने पलटवार किया। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग दी, उन्हीं ने 1990 में कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से निकलने पर मजबूर किया। पाकिस्तान ने भारत में कश्मीर और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर सवाल उठाने से पहले अपने यहां के हालात देखने चाहिए। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग देकर भारत भेजा। उन्होंने कहा कि यही आतंकी बाद में कश्मीर में अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाते रहे, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान ने इन आतंकियों को समर्थन दिया, वही अब UN में मानवाधिकारों की बात कर रहा है। भारत ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया भारत ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। त्यागी ने जबरन धर्म परिवर्तन और शादी, ईशनिंदा कानून और शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ भेदभाव का जिक्र किया। त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के उसके कब्जे वाले हिस्से को खाली करने को कहा। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को अपनी कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी। ————————

Kailash Kher: ‘तमीज में रहना चाहिए…’, कैलाश खेर ने समय रैना-शेरोन वर्मा के कश्मीरी पंडित-बिहारी जोक्स कॉन्ट्रोवर्सी पर किया रिएक्ट

Kailash Kher: गायक कैलाश खेर ने सार्वजनिक चर्चा में अधिक जागरूकता और शिष्टता बरतने की अपील की है और लोगों से आग्रह किया है कि वे ‘इंडियाज गॉट लेटेन्ट’ स्टैंड-अप कॉमेडी शो में बिहार और कश्मीर से जुड़े चुटकुलों पर हो रही आलोचना के बीच ‘चैतन्य’ (सतर्क) और ‘तमीज’ में रहें।

एएनआई से बात करते हुए, खेर से कश्मीरी पंडितों और बिहारियों से जुड़े बयानों का मजाक उड़ाने वाले हास्य कलाकारों और सोशल मीडिया पर स्टैंड-अप कॉमेडी को लेकर चल रही व्यापक बहस के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, “देखिए, अगर मैं आपको संगीत के संदर्भ में समझाऊं, तो संगीत सिर्फ एक धुन नहीं है, यह आपको हंसा भी सकता है, यह अनुशासन का एक रूप भी है। इसलिए, आपको संगीत से जुड़े रहना चाहिए। अगर आपकी संगीत की धुन सही नहीं है, तो आप किसी का मजाक उड़ा सकते हैं।”

इसके बाद खेर ने आचरण और शिष्टता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इसलिए मनुष्य को सतर्क रहना चाहिए, विनम्र रहना चाहिए और सभी से विनम्रता से बात करनी चाहिए। हर कोई जानता है कि कैसे जीना है, कैसे हंसना है और कैसे हंसना है, कैसे किसी का दिल जीतना है…”

उन्होंने अपनी फेम पर भी विचार किया और कहा कि उन्होंने हमेशा विनम्रता से व्यवहार करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा विनम्र रहा हूं,” साथ ही यह भी स्वीकार किया कि लोकप्रियता आलोचना, ईर्ष्या और शत्रुता ला सकती है। खेर ने कहा, “आलोचक होंगे, नफरत करने वाले होंगे, ईर्ष्यालु लोग होंगे। तब आपको एहसास होगा कि आप कितनी दूर आ गए हैं।”

कैलाश खेर के कमेंट कॉमेडियन समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के दूसरे सीज़न के दौरान हुई बहस की आलोचना के बीच आए हैं, जिसमें बिहार और कश्मीर से जुड़े चुटकुलों के कारण राजनीतिक ध्यान आकर्षित हुआ है।

पहले सीजन की पूर्व प्रतियोगी शेरोन वर्मा, समय रैना, ओरी, अर्चना पूरन सिंह और निशांत सूरी के साथ पैनलिस्ट के रूप में दिखाई दीं। इस एपिसोड के दौरान, रैना ने वर्मा के बिहारी बैकग्राउंड और काम के लिए माइग्रेशन से जुड़े स्टीरियोटाइप्स पर मजाक किया। वर्मा ने रैना की कश्मीरी पहचान और “नशा करने” (stoned होने) पर मज़ाक में जवाब दिया और यह भी कहा कि उन्होंने “कम से कम अपनी मर्ज़ी से अपना राज्य छोड़ा था।”

यह बातचीत आपसी मज़ाक-मस्ती जैसी लग रही थी, जिसमें दोनों कॉमेडियन मजाक में शामिल थे। हालांकि, एपिसोड के क्लिप्स पर ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं और इन कमेंट्स ने राजनीतिक ध्यान भी खींचा है।

Manoj Bajpayee: मजाक…मजाक तक रहे तो कोई परेशानी नहीं, मनोज बाजपेयी ने ‘लेटेंट’ पर समय रैना के बिहारी जोक्स पर किया रिएक्ट

Manoj Bajpayee: मनोज बाजपेयी ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट सीज़न 2’ में समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच हुई बातचीत से जुड़े विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बिहार, कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन से जुड़े मज़ाक की वजह से इन कॉमेडियन्स की आलोचना हो रही है और इस सेगमेंट पर राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, बाजपेयी ने कहा कि उन्हें लोगों के एक-दूसरे की पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) पर मज़ाक करने से कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते बातचीत मज़ाक के तौर पर हो और इस दौरान सम्मान बना रहे।

समय रैना के बिहारी मज़ाक पर मनोज बाजपेयी की प्रतिक्रिया

इस विवाद के बारे में IANS से ​​बात करते हुए मनोज ने कहा कि लोगों को तुरंत बुरा माने बिना खुद पर भी हंसने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर यह सब मज़ाक में है, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। हमें खुद पर हंसना और साथ में हंसना सीखना चाहिए, एक-दूसरे पर हंसना चाहिए और फिर भी बुरा नहीं मानना ​​चाहिए या आहत नहीं होना चाहिए।”

एक्टर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खुद के बारे में मज़ाक करने की समझ के साथ-साथ दूसरे व्यक्ति और उनकी पृष्ठभूमि का सम्मान करना भी ज़रूरी है। मनोज के अनुसार, जब दो लोगों के बीच सहज संबंध होते हैं, तो एक-दूसरे के बारे में मज़ाक करना स्वाभाविक रूप से उनकी बातचीत का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, उन्होंने ऐसा करते समय आपसी सम्मान बनाए रखने पर ज़ोर दिया।

समय रैना और शेरोन वर्मा ने क्या कहा?

यह विवाद ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट सीज़न 2’ के हालिया एपिसोड में समय और शेरोन के बीच हुई बातचीत के बाद शुरू हुआ। इस सेगमेंट के दौरान, शेरोन ने समय की कश्मीरी पंडित पृष्ठभूमि को लेकर मज़ाक किया, जबकि समय ने शेरोन के बिहार से जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए मज़ाक में जवाब दिया। इसके बाद इस बातचीत के क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

कुछ दर्शकों को ये बातें पसंद नहीं आईं, खासकर इसलिए क्योंकि बातचीत में कश्मीरी पंडितों और उनके विस्थापन का ज़िक्र था। एपिसोड के क्लिप्स ऑनलाइन सामने आने के बाद कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने कॉमेडियन्स की आलोचना की। इस एपिसोड के बाद आई दूसरी प्रतिक्रियाओं से मनोज की प्रतिक्रिया अलग है। क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मज़ाक पर पूरी तरह आपत्ति जताने के बजाय, उन्होंने कहा कि मज़ाक करते समय सामने वाले व्यक्ति का ध्यान रखते हुए खुद पर भी हंसने की क्षमता होनी चाहिए।

नेताओं ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ की बातचीत की आलोचना की

इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। बीजेपी विधायक राम कदम ने इस सेगमेंट की आलोचना की और इसे समय (Samay) द्वारा पब्लिसिटी पाने की कोशिश बताया। IANS से ​​बात करते हुए कदम ने कहा कि सनातन हिंदू देवी-देवताओं और कश्मीरी पंडितों का मज़ाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी करने और बाद में माफ़ी मांगने के चलन पर भी आपत्ति जताई।

बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी इन टिप्पणियों की आलोचना की और ऐसी बातों को अस्वीकार्य बताया। तिवारी ने कहा, “हमारे देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी अस्वीकार्य है। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, वे देश को तोड़ने की बात कर रहे हैं। हम अखंड भारत का सपना देखने वाले लोग हैं और हमारे लिए राजा और आम नागरिक बराबर हैं।”

समय रैना ने अभी तक ताज़ा आलोचना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। शैरन के साथ हुई बातचीत को लेकर हो रही ताज़ा आलोचना पर समय ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ सीज़न 2 के इस सेगमेंट पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं; जहाँ राजनीतिक नेता मज़ाक पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं मनोज ने हास्य के बड़े सवाल पर एक अलग नज़रिया अपनाया है।

नेपाल बाढ़! मलबे के नीचे 2 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही 5 साल की बच्ची! रेस्क्यू टीम ने बिल्ली समझकर सुनी आवाज और फिर मिला ‘चमत्कार’

Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। इस बीच राहत और बचाव अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 5 साल की बच्ची मनीषा को शुक्रवार को दो दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मलबे और मिट्टी के नीचे से जिंदा बाहर निकाला गया। बच्ची करीब दो दिनों तक मलबे के नीचे फंसी रही। लेकिन उसने जिंदगी की जंग नहीं हारी।

मनीषा को नेपाल के रासुवा जिले के स्याब्रुबेसी के पास से रेस्क्यू किया गया। बाहर निकाले जाने के बाद उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। वहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बाद में उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। भीषण फ्लैश फ्लड की भारी तबाही के बीच मनीषा का जिंदा मिलना बचाव अभियान के सबसे उम्मीद भरे पलों में से एक माना जा रहा है।

बिल्ली समझकर मलबे में शुरू हुई तलाश 

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम स्याब्रुबेसी के पास मलबे में बचे लोगों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान टीम को मलबे के अंदर से कुछ आवाज सुनाई दी। बचावकर्मियों को पहले लगा कि शायद कोई बिल्ली मलबे में फंसी हुई है। फिर टीम ने आवाज की दिशा में तलाश शुरू की। धीरे-धीरे मिट्टी और मलबा हटाना शुरू किया। कुछ देर बाद जो सामने आया, उसे देखकर बचावकर्मी भी हैरान रह गए। मलबे के नीचे 5 साल की मनीषा दो दिन से जिंदा फंसी हुई थी। बच्ची को मलबे से बाहर निकालने में करीब दो घंटे का समय लगा।

रेस्क्यू के दौरान बनाए गए वीडियो में वह पल भी दिखाई देता है, जब बचावकर्मी बच्ची को मलबे के भीतर से जिंदा बाहर निकालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब मनीषा को बाहर निकाला गया तो वह जिंदा थी। लेकिन वह बेहोशी जैसी हालत में थी। वह बहुत कम प्रतिक्रिया दे रही थी। दो दिनों तक मिट्टी और मलबे के नीचे फंसे रहने के कारण उसकी हालत काफी कमजोर हो गई थी। रेस्क्यू टीम ने तुरंत बच्ची को संभाला और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश शुरू की।

हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंची मनीषा

शनिवार दोपहर मनीषा को हेलीकॉप्टर से काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया गया। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची की हालत स्थिर है। रविवार को अस्पताल की ओर से जारी अपडेट में भी कहा गया कि मनीषा की हालत में सुधार हो रहा है। वह तेजी से रिकवर कर रही है।

मृतक संख्या 781 हुई, 2,500 लोग अब भी लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर 781 हो गई। जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। आपदा के पांचवें दिन भी बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में लगे हैं। मलबे में फंसे हुए लोगों को निकालने का अभियान भी जारी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने के बाद 26 अगस्त को हिमस्खलन (पहाड़ से बर्फ खिसकना) जैसी घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। इसने मध्य नेपाल में कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया।

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नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार बताया कि इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है। NDRRMA के अनुसार, अबतक चितवन जिले से 272 शव, नवलपरासी पूर्व से 199, नवलपरासी पश्चिम से 100 और गोरखा जिले से 58 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 37 और रसुवा से 13 शव मिले हैं। एनडीआरआरएमए ने बताया कि इस आपदा के बाद अब भी 2,502 लोग लापता हैं। जबकि 9435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

A young girl was buried under debris during the Nepal floods but was miraculously rescued alive. https://t.co/HdA8MurHEz

VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया ‘लेटे हनुमान जी’ को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरल

Prayagraj Floods: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी प्रयागराज में बीते कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गंगा किनारे बसे शहरों में नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर फैलने लगा है। इसी बीच प्रयागराज में एक बेहद भावुक और आस्था से जुड़ा दृश्य सामने आया है, जहां मां गंगा का पानी प्रसिद्ध ‘लेटे हुए हनुमान’ यानी बड़े हनुमान जी मंदिर तक पहुंच गया।

संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर में मां गंगा का पानी गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी मंदिर की सीढ़ियों से होते हुए अंदर तक पहुंचा और वहां विराजमान भगवान हनुमान की प्रतिमा को स्पर्श करने लगा। इस दौरान ऐसा दृश्य बना मानो मां गंगा स्वयं संगम तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी का अभिषेक करने पहुंची हों। मंदिर में पानी सीढ़ियों से नीचे की ओर बहता दिखाई दिया। गर्भगृह में स्थापित लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा तक पहुंच गया, जिसे देखकर सबलोग भावुक हो गए।

पूजा-पाठ के बीच मंदिर में पहुंचा गंगा का पानी

गंगा का पानी मंदिर परिसर में एंट्री करने के बावजूद पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना जारी रखी। पुजारी ने धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास ‘बड़े हनुमान जी महाराज’ और ‘मां गंगा’ के जयकारे गूंजते रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों से बहता हुआ दिखाई देता है। जबकि आगे बढ़कर भगवान हनुमान की प्रतिमा तक पहुंचता नजर आता है।

मंदिर के सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर हुई तस्वीरें

इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (संगम प्रयाग), प्रयागराज के फेसबुक पेज पर भी शेयर किए गए हैं। पोस्ट में इस दिन को प्रयागराज और हनुमान भक्तों के लिए बेहद शुभ और सौभाग्यशाली बताया गया। पोस्ट में धार्मिक भावनाओं के अनुरूप कहा गया कि प्रयागराज के पवित्र संगम पर, जहां संगम तट पर श्री बड़े हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां ‘पतित पावनी मां गंगा’ ने स्वयं भगवान हनुमान का भव्य जलाभिषेक किया।

लगातार बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर

दरअसल, नेपाल में बाढ़ की स्थिति और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी और प्रयागराज सहित गंगा किनारे के इलाकों में नदी का पानी फैलने लगा है। वहीं, बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर जैसे जिलों में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है। गंगा का पानी मंदिर तक पहुंचने और प्रतिमा को स्पर्श करने के इस दृश्य को श्रद्धालु आस्था और धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष क्षण मान रहे हैं।

हर साल दिख जाता है ये मनमोहक दृश्य

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह दृश्य तेजी से चर्चा में है। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने गंगा और बड़े हनुमान जी दोनों की श्रद्धा के साथ पूजा की और जयकारे लगाए। हिंदू धर्म में आस्था है कि जब हनुमान जी ने लंका दहन किया था तो उसके बाद उनका शरीर भी आग की चपेट में आकर जलनशील हो गया था। फिर बजरंगबली संगम के तट पर आकर लेट गए थे।

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बताया जाता है कि इस दौरान मां गंगा ने अपना रूप बढ़ाकर अपने जल से हनुमान जी को स्पर्श किया था। पुजारियों का कहना है कि आज भी प्रयागराज में वैसे ही मां गंगा हर साल ‘लेटे हुए हनुमान’ जी को प्रणाम करने जरूर आती है।

Tukaram Mundhe: “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?” बॉम्बे हाई कोर्ट ने IAS तुकाराम मुंढे के FDI को क्यों लगाई फटकार?

Tukaram Mundhe: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई के दौरान जमकर फटकार लगाई। इसके बाद रेगुलेटर को पुणे में सिप्ला (Cipla) की एक फैसिलिटी और मुंबई में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) परिसर में चल रहे पांच रेस्टोरेंट के खिलाफ जारी आदेश वापस लेने पड़े। कोर्ट ने FDA की आलोचना करते हुए कहा कि उसने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में काम किया।

अदालत ने कहा कि कानून का ठीक से विश्लेषण नहीं किया गया। कोर्ट के मुताबिक एक मामले में तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया। MCA मामले में बेंच ने रेगुलेटर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने के बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला नजरिया अपनाने का आरोप भी लगाया।

‘क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?’

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबसे तीखी टिप्पणी बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में MCA परिसर के पांच रेस्टोरेंट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने FDA के रवैये पर सवाल उठाए। इस दौरान यह बात सामने आई कि एक नए जांच में पाया गया कि ये रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे। कोर्ट ने FDA से पूछा, “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं। आप कुछ भी कर सकते हैं?” साथ ही यह भी पूछा कि विभाग बार-बार बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में क्यों काम करता है।

‘न्यूज 18’ के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी FDA से मामले पर सोच-समझकर और व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। लेकिन आरोप लगाया कि विभाग ने इसके बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला रवैया अपनाया। अदालत ने कहा, “हम हर समय विभाग और अधिकारियों को फटकार लगाकर थक चुके हैं। अब कड़े आदेश जारी करने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझाएं या जेल जाएं।”

कामकाज रोकने का आदेश वापस

इसके बाद FDA ने हाई कोर्ट को बताया कि वह पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोकने का अपना आदेश वापस ले लेगा। साथ ही MCA को नया नोटिस जारी करेगा, ताकि उसे M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट के बारे में जवाब देने का मौका मिल सके। कोर्ट ने इस कदम को मंजूरी देते हुए कहा कि चूंकि रेस्टोरेंट अब फूड सेफ्टी नियमों का पालन कर रहे हैं, इसलिए कामकाज रोकने का आदेश रद्द माना जाएगा। अदालत ने कहा कि अब रेस्टोरेंट फिर से खुल सकते हैं।

‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’

यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। जबकि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसी व्यवस्था को रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है। FDA के फैसला लेने के तरीके पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, “हमें कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि विभाग का हौसला न टूटे? हम क्यों कहते हैं, ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि FDA लागू कानून का ठीक से विश्लेषण किए बिना आदेश क्यों जारी कर रहा था?

सिपला का लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस

दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने FDA को पुणे के वाडकी में सिपला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग सुविधा के दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने के लिए मजबूर किया। ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग और उन्हें वापस मंगाने (रिकॉल) की फॉलो-अप जांच के दौरान कथित उल्लंघन पाए जाने के बाद 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।

कोर्ट ने FDA द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसमें राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक छुट्टी के दिन सुनवाई के लिए कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाने वाला ईमेल भी शामिल था। अदालत ने FDA से कहा, “आप सराहनीय काम कर रहे हैं। लेकिन अब आप हद से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपने गलत किया है, और अब आपको इस मामले को सुलझाना होगा।”

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मुंढे पिछले कुछ दिनों से एफडीए द्वारा मुंबई में खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां (जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं) के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में, एफडीए कमिश्नर ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी।

Kashmiri Pandits: दशकों बाद कश्मीर में लौटी उम्मीद! शोपियां में कश्मीरी पंडितों ने रखी राम मंदिर की नींव, लोगों की यादों से जुड़ा है पूरा इतिहास

Kashmiri Pandits News: कश्मीर घाटी से विस्थापन के दशकों बाद कश्मीरी पंडित समुदाय ने शनिवार (29 अगस्त) को शोपियां के एक मोहल्ला में राम मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। यहां समुदाय के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवान राम मंदिर की आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम कश्मीरी पंडितों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी पुरानी जड़ों और विरासत से जुड़ने का बेहद भावुक क्षण रहा।

दशकों तक विस्थापन झेलने के बाद, कश्मीरी पंडितों ने पारंपरिक पूजा और हवन के साथ जम्मू-कश्मीर के शोपियां के टाक मोहल्ले में ऐतिहासिक राम मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखी। 1989 में आगजनी से क्षतिग्रस्त और बाद में अतिक्रमण का शिकार हुई इस जगह को स्थानीय प्रशासन की कोशिशों से समुदाय को वापस सौंपा गया। जबकि पुरातत्व और विरासत विभाग ने पुनर्निर्माण के लिए फंड मंजूर किया।

समुदाय और स्थानीय निवासियों ने इस पहल को सिर्फ एक मंदिर के निर्माण के तौर पर नहीं। बल्कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के पुनरुद्धार और कश्मीर की साझा सांस्कृतिक पहचान की बहाली की उम्मीद के प्रतीक के तौर पर देखा।

1989 में जला दिया गया था राम मंदिर

इस मंदिर का इतिहास कश्मीर के बेहद संवेदनशील दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1989 में घाटी में उग्रवाद के दौर के बीच शोपियां में मौजूद राम मंदिर को जला दिया गया था। इसके बाद मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण भी किया गया। समय बीतने के साथ कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर घाटी से विस्थापन हुआ। इसके बाद यह धार्मिक स्थल भी समुदाय की स्मृतियों का हिस्सा बनकर रह गया। लेकिन अब करीब साढ़े तीन दशक बाद अब उसी जमीन पर मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है।

सैकड़ों लोग हुए धार्मिक कार्यक्रम में शामिल

राम मंदिर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में कश्मीरी पंडित समुदाय के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किया गया। राम मंदिर के पुनर्निर्माण की औपचारिक शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था। बल्कि उन पुरानी यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर था, जो विस्थापन के कारण उनसे दूर हो गई थीं।

प्रशासन की पहल से पुनर्निर्माण का रास्ता साफ

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडिया टुडे के मुताबिक, पुरातत्व एवं विरासत विभाग ने अपनी विरासत संरक्षण पहल के तहत इस परियोजना के लिए धनराशि स्वीकृत की है। इस कदम से शोपियां के इस पुराने धार्मिक स्थल को दोबारा विकसित करने और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘यह सिर्फ मंदिर का निर्माण नहीं, हमारी जड़ों से जुड़ने का प्रयास’

कार्यक्रम में शामिल कुछ कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यह मंदिर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर से बनने वाली कोई इमारत नहीं है। यह शोपियां के साथ उनके पैतृक संबंध, उनकी धार्मिक आस्था और कश्मीर की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में समुदाय की मौजूदगी की याद है। उनका कहना था कि मंदिर का दोबारा निर्माण उस विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। इससे कश्मीरी पंडित विस्थापन के कारण लंबे समय से दूर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने भी किया स्वागत

मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और साझा विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समुदाय से जुड़े पुराने धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार घाटी की साझी और समावेशी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “दशकों पहले यहां एक मंदिर हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे वह जर्जर हो गया। फिर उसका अस्तित्व खत्म हो गया। लेकिन अब हालात बेहतर हुए हैं। सरकार ने इसे फिर से बनाने की पहल की है। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इसके लिए बहुत मेहनत की है। आज यहां मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है। हम इस प्रयास की सराहना करते हैं।”

अन्य लोगों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब 35 साल से अधिक समय बाद शोपियां में राम मंदिर की आधारशिला रखा जाना कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं। बल्कि विस्थापन, पीड़ा और पुरानी यादों के बीच अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

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