Kashmiri Pandits: दशकों बाद कश्मीर में लौटी उम्मीद! शोपियां में कश्मीरी पंडितों ने रखी राम मंदिर की नींव, लोगों की यादों से जुड़ा है पूरा इतिहास

Kashmiri Pandits News: कश्मीर घाटी से विस्थापन के दशकों बाद कश्मीरी पंडित समुदाय ने शनिवार (29 अगस्त) को शोपियां के एक मोहल्ला में राम मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। यहां समुदाय के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवान राम मंदिर की आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम कश्मीरी पंडितों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी पुरानी जड़ों और विरासत से जुड़ने का बेहद भावुक क्षण रहा।

दशकों तक विस्थापन झेलने के बाद, कश्मीरी पंडितों ने पारंपरिक पूजा और हवन के साथ जम्मू-कश्मीर के शोपियां के टाक मोहल्ले में ऐतिहासिक राम मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखी। 1989 में आगजनी से क्षतिग्रस्त और बाद में अतिक्रमण का शिकार हुई इस जगह को स्थानीय प्रशासन की कोशिशों से समुदाय को वापस सौंपा गया। जबकि पुरातत्व और विरासत विभाग ने पुनर्निर्माण के लिए फंड मंजूर किया।

समुदाय और स्थानीय निवासियों ने इस पहल को सिर्फ एक मंदिर के निर्माण के तौर पर नहीं। बल्कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के पुनरुद्धार और कश्मीर की साझा सांस्कृतिक पहचान की बहाली की उम्मीद के प्रतीक के तौर पर देखा।

1989 में जला दिया गया था राम मंदिर

इस मंदिर का इतिहास कश्मीर के बेहद संवेदनशील दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1989 में घाटी में उग्रवाद के दौर के बीच शोपियां में मौजूद राम मंदिर को जला दिया गया था। इसके बाद मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण भी किया गया। समय बीतने के साथ कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर घाटी से विस्थापन हुआ। इसके बाद यह धार्मिक स्थल भी समुदाय की स्मृतियों का हिस्सा बनकर रह गया। लेकिन अब करीब साढ़े तीन दशक बाद अब उसी जमीन पर मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है।

सैकड़ों लोग हुए धार्मिक कार्यक्रम में शामिल

राम मंदिर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में कश्मीरी पंडित समुदाय के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किया गया। राम मंदिर के पुनर्निर्माण की औपचारिक शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था। बल्कि उन पुरानी यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर था, जो विस्थापन के कारण उनसे दूर हो गई थीं।

प्रशासन की पहल से पुनर्निर्माण का रास्ता साफ

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडिया टुडे के मुताबिक, पुरातत्व एवं विरासत विभाग ने अपनी विरासत संरक्षण पहल के तहत इस परियोजना के लिए धनराशि स्वीकृत की है। इस कदम से शोपियां के इस पुराने धार्मिक स्थल को दोबारा विकसित करने और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘यह सिर्फ मंदिर का निर्माण नहीं, हमारी जड़ों से जुड़ने का प्रयास’

कार्यक्रम में शामिल कुछ कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यह मंदिर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर से बनने वाली कोई इमारत नहीं है। यह शोपियां के साथ उनके पैतृक संबंध, उनकी धार्मिक आस्था और कश्मीर की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में समुदाय की मौजूदगी की याद है। उनका कहना था कि मंदिर का दोबारा निर्माण उस विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। इससे कश्मीरी पंडित विस्थापन के कारण लंबे समय से दूर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने भी किया स्वागत

मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और साझा विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समुदाय से जुड़े पुराने धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार घाटी की साझी और समावेशी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “दशकों पहले यहां एक मंदिर हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे वह जर्जर हो गया। फिर उसका अस्तित्व खत्म हो गया। लेकिन अब हालात बेहतर हुए हैं। सरकार ने इसे फिर से बनाने की पहल की है। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इसके लिए बहुत मेहनत की है। आज यहां मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है। हम इस प्रयास की सराहना करते हैं।”

अन्य लोगों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब 35 साल से अधिक समय बाद शोपियां में राम मंदिर की आधारशिला रखा जाना कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं। बल्कि विस्थापन, पीड़ा और पुरानी यादों के बीच अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

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Nepal Flood Update: नेपाल में फिर विनाशकारी त्रासदी का खतरा! भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ा, रसुवा में हाई अलर्ट

Nepal-Tibet Flood Update: पड़ोसी देश नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ की त्रासदी के बीच एक बार फिर भोटे कोशी नदी को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार (20 अगस्त) सुबह बताया कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में बाढ़ का बहाव फिर बढ़ गया है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। NDRRMA के अनुसार, रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली है कि भोटे कोशी नदी में बढ़े हुए बाढ़ प्रवाह की आवाज सुनाई दे रही है। इसके बाद नदी के आसपास के इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में हाई अलर्ट

NDRRMA ने खास तौर पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय को जानकारी मिली है कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाज सुनी गई है। इसलिए, हम रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग तक नदी के आस-पास के इलाकों में सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, हम आगे की अपडेट देंगे।”

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। फिलहाल, राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है। रविवार को बचाव अभियान का पांचवां दिन है। नेपाल-चीन सीमा के इलाकों में भयानक अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव से हुई तबाही के बाद टीमें बचे हुए लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

आगे की जानकारी का इंतजार

NDRRMA ने कहा है कि जैसे-जैसे अतिरिक्त जानकारी प्राप्त होगी, लोगों को आगे अपडेट किया जाएगा। हालांकि, नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने बाद में कहा कि भोटे कोशी क्षेत्र में बड़े स्तर की बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन नदी के आसपास सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की अपील है कि नदी किनारे रहने वाले लोग किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।

मरने वालों की संख्या 691 हुई

अधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके में मरने वालों की कुल संख्या 691 हो गई है। जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने 675 मौतों और 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना दी है। जबकि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब तक नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। यह भयानक आपदा 26 अगस्त को आई थी। पहाड़ी सीमावर्ती इलाके में मलबे का भारी बहाव और अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य चीजों को नष्ट कर दिया था।

बचाव अभियान जारी

खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद नेपाली अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान फिर से शुरू किया। बचे हुए लोगों को निकालने और अलग-थलग पड़े समुदायों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। बचाव दल कई अहम जगहों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें रसुवा में अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना भी शामिल है, जहां अधिकारियों का मानना ​​है कि 100 से ज्यादा लोग कीचड़ से भरी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं।

चीनी तरफ बुरी तरह क्षतिग्रस्त ग्यिरोंग सीमा क्रॉसिंग के आसपास भी खोज अभियान जारी है। इस बीच, भारत ने भोजन, दवाइयों और कंबल जैसी राहत सामग्री भेजी है। उन इलाकों में संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमें और पहले से तैयार पुल (प्री-फैब्रिकेटेड ब्रिज) देने की भी पेशकश की है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर बह गया है।

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Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ (एक दुनिया: एक मानवता) नाम के धर्म गुरुओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच एकता और सद्भाव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि आज धर्मों की पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों से होती है। उन्होंने कहा, “धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता की राह पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है। लेकिन धर्म का मकसद क्या है? यह हमें सच्चाई की ओर ले जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता एक है। सच्चाई एक है और मानवता उसी सच्चाई का नतीजा है।” भागवत ने कहा, “हिंदुत्व का मतलब मुस्लिम को बाहर (देश से) करना नहीं है। मुस्लिम नहीं होने चाहिए ऐसा सोचना हिंदुत्व नहीं हो सकता। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।” भागवत ने कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।

भागवत ने अपने संबोधन में समाज को प्राचीन परंपराओं के बारे में शिक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं विदेशी आक्रमणों के बावजूद बची हुई हैं। इन परंपराओं ने लोगों को ‘एक दुनिया, एक मानवता’ का पाठ पढ़ाया है।

‘इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता’

मोहन भागवत ने कहा, “असल में मैंने 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी। वहां मुस्लिम भाई भी मौजूद थे। उन्होंने मुझसे सवाल पूछा, “आप एक हिंदू संगठन हैं, आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे?” मैंने उनसे कहा, “नहीं…, हिंदुत्व यह नहीं है। अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।” अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता।”

RSS चीफ ने आगे कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, न ही आपकी तरह कोई धार्मिक अथॉरिटी हूं। लेकिन मैं एक ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो ट्रेडिशनली कहता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच एक है, और इंसानियत उस सच का उत्पाद है। इसलिए इंसानियत एक है। वह सच एक सच है, लेकिन उसे बताने वाले के हिसाब से कई तरीकों से बताया गया है। क्योंकि इंसान होने के नाते, हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बनाया गया है।”

हिंदू धर्म पर मोहन भागवत का संदेश

अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि हिंदू जीवन शैली का पालन करने के कई रास्ते हैं। लेकिन वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसानों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है। हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

भागवत ने यह भी कहा कि संगठन ने भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ बातचीत शुरू की है। उन्होंने कहा, “बातचीत पहला कदम है। सेवा एक और कदम है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बातचीत के बाद ही हो। ये दोनों काम साथ-साथ होने चाहिए। हम सेवा कर रहे हैं। और जब हम सेवा करते हैं, तो कोई भेदभाव नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत नैरेटिव (धारणाओं) की वजह से एक गलत सोच बन गई है। लेकिन जब लोग असल में आकर और समझदारी के साथ हमारे काम को देखते हैं, तो वे गलत धारणाएं बहुत तेज़ी से खत्म हो सकती हैं।”

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आधुनिक राजनीति पर भागवत के विचार!

RSS प्रमुख ने आधुनिक राजनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति काफी हद तक जनमत पर निर्भर करती है। खासकर लोकतंत्र में कोई भी राजनेता आसानी से इसके खिलाफ नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि घटनाओं के होने से पहले ही राजनीति को बदलें और उसे सही दिशा में प्रभावित करें। हम युद्ध रोकना चाहते हैं। हम ये सभी काम करना चाहते हैं। इसलिए किसी न किसी समय हमें राजनीति को प्रभावित करना ही होगा।” हालांकि, भागवत ने संकेत दिया कि राजनीति के कारण धार्मिक सद्भाव नहीं बन पा रहा है।