Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा को लेकर विवादित बयान पर विवादों में घिरे

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान एक्ट्रेस तृषा के बारे में विवादित टिप्पणी करने के आरोप में चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से विपक्षी DMK और सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब तंजावुर ईस्ट पुलिस ने एक विरोध सभा के दौरान DMK नेता की टिप्पणियों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। इसके बाद उनके घर के बाहर DMK कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। DMK ने सरकार पर उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें विधानसभा के चल रहे सत्र में हिस्सा लेने से रोकना था।

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को राष्ट्रीय महिला आयोग में DMK यूथ विंग के सेक्रेटरी और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 3 अगस्त को तंजावुर में DMK के एक प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। इसे फिल्म एक्ट्रेस पर निशाना साधकर कही गई बात माना जा रहा है।

विवादित बयान पर बवाल

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन सोमवार को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए। उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए।

पीटीआई के मुताबिक, उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

BJP ने बताया शर्मनाक बयान

तमिलनाडु की BJP इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने X पर कहा कि उदयनिधि की कथित द्विअर्थी टिप्पणी घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक है। BJP नेता ने कहा, “सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।”

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उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। तिरुपति ने कहा, “इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (DMK विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।”

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US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।

बांकीपुर में क्यों हारी भाजपा? प्रशांत किशोर की जीत के 5 बड़े कारण

Bihar assembly bypoll results Bankipur

Bihar assembly bypoll results Bankipur: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बिहार राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पटना की इस हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा (BJP) के 30 साल पुराने अभेद्य गढ़ में सेंध लगाते हुए 19 हजार 324 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस पारंपरिक सीट पर प्रशांत को मिली जीत ने बिहार के सियासी गणित को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। 1995 के बाद से कभी चुनाव न हारने वाली भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को पटखनी देकर प्रशांत किशोर न केवल जन सुराज के पहले विधायक बने हैं, बल्कि बिहार में एक नए 'तीसरे विकल्प' की नींव भी मजबूत कर दी है।  

क्या हैं भाजपा की हार के बड़े कारण?

PK का खुद मैदान में उतरना : 2025 के चुनावों में विफलता के बाद प्रशांत किशोर ने किसी अन्य प्रत्याशी पर दांव लगाने के बजाय खुद बांकीपुर से मैदान संभाला। उनकी इस रणनीति ने मतदाताओं को संदेश दिया कि वे इस चुनाव को लेकर बेहद गंभीर हैं। यही कारण रहा कि लोगों ने उन पर भरोसा किया। 

 

पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी दरार : बांकीपुर में भाजपा के मुख्य कैडर वोट बैंक (सवर्ण और शहरी मध्यम वर्ग) में भारी बिखराव देखने को मिला। प्रशांत किशोर ने BJP के साथ-साथ RJD के भी मुस्लिम-यादव व पिछड़ा वोट बैंक में जबरदस्त सेंधमारी की, जिससे पक्ष और विपक्ष दोनों का ही समीकरण ध्वस्त हो गया।

 

मुद्दों पर आधारित अभियान : प्रशांत किशोर ने पारंपरिक जाति-धर्म की राजनीति के बजाय शिक्षा, रोजगार, जलजमाव, नागरिक सुविधाओं और बिहार के विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने बड़े मंचों के बजाय मोहल्ला बैठकों और सीधी जन-चौपालों पर ध्यान केंद्रित किया। इस चुनाव परिणाम पर दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट का भी असर माना जा रहा है। युवा वोटर का एक बड़ा वर्ग भी प्रशांत के पक्ष में गया। 

 

अहंकार के खिलाफ जनआक्रोश : प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान यह संदेश आक्रामक तरीके से फैलाया कि 'किला जनता बनाती है, कोई पार्टी नहीं'। भाजपा के कैडर द्वारा सीट को 'सुरक्षित' मान लेने के रवैये का फायदा उठाते हुए PK ने बदलाव की चाहत रखने वाले तटस्थ वोटरों को साध लिया। उपचुनाव के माध्यम से वोटरों ने भाजपा के 'अहंकार' पर भी प्रहार किया, जिसे हमेशा लगता है कि वह कोई चुनाव नहीं हार सकती। 

 

तीसरे विकल्प की तलाश : मुख्य विपक्षी दल RJD की प्रत्याशी रेखा कुमारी का कमजोर प्रदर्शन यह दिखाता है कि जो मतदाता भाजपा से तो नाराज थे ही, उन्होंने RJD पर भी विश्वास नहीं किया। वोटर ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के 'जन सुराज' पर भरोसा जताया।  

कैसे ढहाया भाजपा का अभेद्य किला?

बांकीपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) सीट 1995 से भाजपा का सबसे सुरक्षित किला मानी जाती थी। नितिन नवीन यहां से लगातार 5 बार विधायक रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने एक कम प्रोफाइल वाले युवा चेहरे को उतारा। प्रशांत किशोर ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने बांकीपुर के हर वार्ड और मोहल्ले का डेटा-संचालित तरीके से विश्लेषित किया और असंतुष्ट गुटों को जोड़ा। पटना शहर का पढ़ा-लिखा और मध्यम वर्ग जो भाजपा का बंधुआ वोटर माना जाता था, उसने बदलाव के नाम पर प्रशांत किशोर को वोट दिया। प्रशांत किशोर ने अकेले 49.2% वोट हासिल किए, जो BJP (34.4%) और RJD (10.9%) के कुल मिलाकर मिले वोटों से भी ज्यादा है।

बिहार में 'तीसरे विकल्प' का उदय

NDA और महागठबंधन के दोहरे धुव्रीकरण के बीच जन सुराज ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में एक मजबूत और व्यावहारिक तीसरा विकल्प खड़ा हो चुका है। बांकीपुर के नतीजों ने सभी राजनीतिक दलों को यह कड़ा संदेश दिया है कि किसी भी सीट को 'टेकन फॉर ग्रांटेड' (जरूरी रूप से सुरक्षित) मानना चुनावी भूल साबित हो सकता है।

‘गंभीरता से करें विचार…’, बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने दी बीजेपी को बड़ी सलाह

Bankipur Bypoll Result 2026: बिहार की राजनीति में तीन अगस्त 2026 का दिन एक बड़े उलटफेर वाला साबित हुआ है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया है। बांकीपुर में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है तो वहीं जन सुराज पार्टी ने बिहार में अपना खाता खोल लिया है। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बीजेपी को करारी शिकस्त देते हुए बांकीपुर सीट से जीत हासिल कर ली है। चुनाव आयोग (ECI) की वेबसाइट के अनुसार, 32वें राउंड तक चले मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को 63,946 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा से 19246 वोटों से मात दी है। वहीं इस जीत के बाद प्रशांत किशोर का पहला रिएक्शन सामने आया है।

उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि वह चुनाव हारने वाले सभी उम्मीदवारों को भी बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों होती रहती हैं, इसलिए हर उम्मीदवार का सम्मान होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का यह चुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बिहार में बीजेपी और एनडीए सरकार के कामकाज पर जनता का फैसला भी था। उनका कहना है कि बांकीपुर के लोगों ने अपने वोट के जरिए एक साफ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को जनता के इस फैसले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और बिहार के हित में राज्य की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंपनी चाहिए, जो ईमानदारी से बिहार के विकास के लिए काम कर सके।

भाजपा के लिए बड़ा झटका

बिहार के बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट है। वे यहां से लगातार 5 बार विधायक रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। काउंटिंग के दौरान चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कुछ गड़बड़ देखने को मिली। सुबह से वेबसाइट पर 31 राउंड की काउंटिंग बताई जा रही थी। 31 राउंड पूरे होते ही पहले 36 राउंड काउंटिंग दिखाई जाने लगी। बाद में फिर 32 राउंड की काउंटिंग दिखा दी गई।

‘एक बेहतर मुख्यमंत्री की जरूरत…’, बांकीपुर में बढ़त के बाद प्रशांत किशोर का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा

बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलफेर देखने को मिल रहा है। जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में जीत की ओर बढ़ रहे हैं। इस सीट पर हार, बीजेपी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं मानी जा रही है। प्रशांत किशोर की बढ़त से जन सुराज पार्टी के समर्थक काफी उत्साहित हैं। इस बीच प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता को धन्यवाद दिया है और सीट पर बढ़त के बाद भाजपा और सीएम सम्राट चौधरी पर हमला बोला।

प्रशांत किशोर ने बोला हमला

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बढ़त मिलने के बाद जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता क्षेत्र की जनता के भरोसे और समर्थन का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे और आने वाले दो-तीन महीनों में लोगों को बदलाव भी नजर आने लगेगा। प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं बड़े-बड़े वादे नहीं करना चाहता। मेरे विधायक बनने से बांकीपुर एक रात में बेंगलुरु जैसा नहीं बन जाएगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में यहां कुछ अच्छे बदलाव जरूर दिखाई देंगे।”

उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने इस चुनाव के जरिए बीजेपी नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि बिहार को एक बेहतर मुख्यमंत्री की जरूरत है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर बीजेपी सम्राट चौधरी की जगह कुशवाहा समाज के किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है तो यह उनका अंदरूनी फैसला है। उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो ईमानदार, सक्षम और बिहार के विकास के लिए काम करने वाला हो। उन्होंने आगे कहा कि सबसे जरूरी बात बिहार का विकास है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि चुनाव कौन जीतता है या किस पार्टी की सरकार बनती है। लोकतंत्र में जीत और हार होती रहती है, लेकिन राज्य की तरक्की सबसे ज्यादा मायने रखती है।

जीत की ओर पीके

27वें राउंड के नतीजों में प्रशांत किशोर 50 हजार वोटों के आंकड़ा के पास पहुंच गए हैं। 27वें राउंड में उन्हें 55780 वोट मिले हैं। अभी 4 राउंड की गिनती और बची है। अब यह साफ हो गया है कि प्रशांत किशोर इस सीट पर बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। 27वें राउंड में बीजेपी को 38893 वोट मिले हैं। दोनों पार्टियों के बीच वोटों का अंतर 16887 है।

अगला मेजबान होने के कारण भारत को मिला कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल (Video)

राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारत देश को अब खेलों की मशाल भी मिल गई क्योंकि अगला  राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद में होने वाला है। भारत की ओर से नीरज चोपड़ा ने इस मशाल और ध्वज को थामा। इससे पहले संगीत और नृत्य के ताने बाने में तैयार किये गए अद्भुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में रखी जहां परंपरा और आधुनिकता साथ में बसते हैं।

किंग चार्ल्स तृतीय के प्रतिनिधि प्रिंस एडवर्ड (ड्यूक आफ एडिनबर्ग) ने खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की।उन्होंने कहा ,‘‘ जिस तरह से आपने प्रतिस्पर्धा की, खेलों का आयोजन किया और समर्थन किया , उसके लिये धन्यवाद। आपने आज एक बार फिर राष्ट्रमंडल की भावना और मूल्यों को जीवंत कर दिया। शुक्रिया ग्लास्गो। ’’उन्होंने कहा ,‘‘ मैं सभी देशों और प्रदेशों के खिलाड़ियों को भारत के अहमदाबाद आने का न्योता देता हूं जहां चार साल बाद 24वें राष्ट्रमंडल खेल होंगे जो इन खेलों का शताब्दी संस्करण भी है।’

बॉक्सिंग में भारत की स्वर्ण पदक विजेता महिलाओं की 57 किग्रा बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली जैस्मिन लैंबोरिया को  समापन समारोह के लिए भारत का ध्वजवाहक चुना गया था।भारत कुल 39 पदक -13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य – के साथ मेडल स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर काबिज है। इन गेम्स में खेलों की संख्या कम होने के बावजूद यह एक बड़ी उपलब्धि है।

मुकाबले खत्म होने के बाद ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स आधिकारिक तौर पर समापन समारोह के साथ समाप्त हो गया जो 3 अगस्त को तड़के 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार) प्रसारित किया गया।

Kangana Ranaut: क्या कंगना रनौत ने सोनाक्षी सिन्हा पर तंज कसा? एक्ट्रेस की ‘पॉकेटमार’ वाली कमेंट ने मचाई खलबली

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक स्क्रीनशॉट है, जिसने ऑनलाइन काफी बहस छेड़ दी है। इस तस्वीर में कंगना को एक इंस्टाग्राम पोस्ट लाइक करते हुए दिखाया गया है, जिसमें हालिया विरोध प्रदर्शनों पर एक अज्ञात एक्ट्रेस के ओवररिएक्ट करने की आलोचना की गई थी। हालांकि, ‘क्वीन’ फिल्म की एक्ट्रेस ने इस पोस्ट से किसी भी तरह के जुड़ाव से साफ इनकार किया है और स्क्रीनशॉट को मनगढ़ंत बताया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह स्क्रीनशॉट फैला। कई लोगों का दावा था कि कंगना ने उस पोस्ट को सपोर्ट किया है, जिसमें एक एक्ट्रेस पर निशाना साधा गया था—आरोप था कि वह एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तो बोलती है, लेकिन दूसरे पर चुप रहती है।

कंगना ने तुरंत स्थिति साफ करते हुए कहा कि वह तथाकथित “लाइक” उनके अकाउंट से कभी नहीं किया गया था। एक्ट्रेस ने क्रिप्टिक अंदाज़ में अपनी बात साफ़ की। वायरल हो रहे दावे को खारिज करते हुए, कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर कड़े शब्दों में एक मैसेज भी पोस्ट किया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों से जल्द ही नई अटकलें शुरू हो गईं।

कंगना ने अपने नोट में लिखा कि वह किसी को भी ‘बॉडी-शेम’ करने में यकीन नहीं रखतीं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने “एक एक्ट्रेस” को देखा है, जिसके स्टाइल और पब्लिक अपीयरेंस में ज़बरदस्त बदलाव आया है। उन्होंने उस एक्ट्रेस का नाम लिए बिना कहा कि वह अब “जेबकतरे की तरह कपड़े पहनती और बात करती है” और हाल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान “गटरछाप व्यवहार” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

कंगना ने आगे कहा कि एक्ट्रेस के फ़ैशन से उनके पर्सनल रिश्ते की हालत का पता चलता है और ऐसा लगता है कि उनमें पहले जैसी ग्रेस (अदा) नहीं रही। अपनी बात को व्यंग्य के साथ खत्म करते हुए, कंगना ने ज़रूरत पड़ने पर उनकी स्टाइलिंग में मदद करने की पेशकश भी की। इतनी तीखी बातें कहने के बावजूद, कंगना ने उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया जिसके बारे में वह बात कर रही थीं।

हालांकि इंस्टाग्राम स्टोरी में किसी का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को यह अंदाज़ा लगाने में ज़्यादा समय नहीं लगा कि यह किसके बारे में कहा गया है। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने कंगना की बातों को एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा से जोड़ा; कई यूज़र्स का कहना था कि कंगना का बताया हुलिया सोनाक्षी के हालिया पब्लिक अपीयरेंस से मेल खाता है। हालाँकि, ये सिर्फ़ सोशल मीडिया के अंदाज़े हैं और कंगना ने खुद इस बात की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है कि उनकी बातें सोनाक्षी के बारे में थीं।

इसी तरह, सोनाक्षी ने वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट, कंगना की सफाई या पोस्ट को लेकर हो रही अटकलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक्ट्रेस की पहचान के बारे में कोई पुष्टि नहीं। फिलहाल, यह चर्चा मुख्य रूप से ऑनलाइन अटकलों तक ही सीमित है। हालांकि कंगना ने साफ तौर पर ओरिजिनल इंस्टाग्राम पोस्ट को लाइक करने से इनकार किया है, लेकिन उनके बाद के बयान ने बहस की एक नई लहर पैदा कर दी है, और यूज़र्स इसके अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।

चूंकि न तो कंगना और न ही सोनाक्षी ने सीधे तौर पर उन अटकलों पर बात की है जिनमें दोनों को जोड़ा जा रहा है, इसलिए इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि एक्टर का वह रहस्यमयी मैसेज किसके लिए था। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह बातचीत ज़ोर पकड़ रही है, जहां फैंस और आलोचक कंगना की पोस्ट की हर लाइन का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।

‘राम मंदिर में चंदा चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं’; पप्पू यादव और राहुल गांधी से SP ने बनाई दूरी! राम गोपाल यादव भड़के

Pappu Yadav News: संसद परिसर में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा कपड़े पहनकर राम मंदिर चंदा चोरी का नुक्कड़ नाटक करने पर समाजवादी पार्टी (SP) के सीनियर नेता राम गोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस नाटक को गलत ठहराते हुए कहा कि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि पप्पू यादव ने गलत किया। उन्हें संसद परिसर में ऐसा नहीं करना चाहिए था। यादव ने कहा कि संतों का चंदा चोरी से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के कई सांसद भी पप्पू यादव के साथ नाटक कर रहे थे।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा भगवा कपड़े पहनकर नुक्कड़ नाटक पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, “वो गलत था क्योंकि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। वो गलत चीज थी, ऐसा नहीं होना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “हम राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सदन में उठाएंगे। ये गंभीर मामला है।”

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शुक्रवार को भगवा कपड़े पहनकर संसद परिसर में मकर द्वार के सामने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ नाटक किया था। यह प्रदर्शन अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरोध में किया गया था। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस और सपा के विभिन्न सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि यादव ने राम मंदिर में हुई चोरी को दिखाने के लिए कथित रूप से पैसे अपनी जेब में रख लिए।

BJP ने विपक्ष से की माफी की मांग

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संसद परिसर में नाटक करके हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई। भगवा पार्टी ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। यादव ने हालांकि कहा कि वह सनातन की रक्षा के लिए विरोध कर रहे हैं। कितनी भी FIR दर्ज हो जाएं। लेकिन वह नहीं झुकेंगे।

BJP नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की तरफ ध्यान खींचने के लिए संसद परिसर में नाटक करने को लेकर पप्पू यादव, राहुल गांधी और अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ शनिवार को वाराणसी में शिकायत दर्ज करवाई। जबकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस को तहरीर दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी गांधी और यादव पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के जरिए सनातन धर्म का अपमान किया।

आखिर क्या हुआ था जिस पर मचा है बवाल?

दरअसल, भगवा कपड़े पहने पप्पू यादव ने शुक्रवार को संसद परिसर में ‘मकर द्वार’ के सामने विपक्ष के दूसरे सांसदों के साथ यह राम मंदिर चढ़ावा चोरी का नाटक किया। इस दौरान राहुल गांधी समेत अन्य सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को दिखाने के लिए अपनी जेब में पैसे डाले। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस तरह के विरोध से लाखों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का काम नहीं था। बल्कि एक सोचा-समझा अपराध था।

चुघ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “राहुल गांधी और इस काम में शामिल हर किसी को, चाहें वह समाजवादी पार्टी से हो या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से, पूरे देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सबके सामने माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था। राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

VHP नेता सुरेंदर गुप्ता ने भी गांधी और यादव की आलोचना की। इस विरोध को अश्लील प्रदर्शन बताया, जो सनातन धर्म और संतों का अपमान करता है। गुप्ता ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में संसद के बाहर ऐसा अश्लील प्रदर्शन किया गया। जिस तरह से दो ‘पप्पुओं’ ने सनातन और संतों का अपमान किया। उससे संतों के साथ-साथ हिंदू समुदाय में भी बहुत गुस्सा है।”

पप्पू यादव की सफाई

इस बीच, पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने न तो किसी संत को गाली दी और न ही उनका अपमान किया। यादव ने पीटीआई से कहा, “मैंने किसी को गाली नहीं दी। मैंने किसी संत का नाम नहीं लिया और न ही उनका अपमान किया। सनातन और इस देश के सौ करोड़ लोगों की आस्था की रक्षा के लिए हम एक लाख बार कुर्बानी देने को तैयार हैं। आप हमारे खिलाफ जितने चाहें मुकदमे कर लें और जितना चाहें हमला कर लें।” यादव बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं।

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भगवा पहन ‘चोरी’ का ड्रामा पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश पर बनारस में FIR दर्ज

Congress Ayodhya Drama

FIR against Rahul and Pappu Yadav: संसद परिसर में किया गया एक 'प्रतीकात्मक ड्रामा' अब सियासी और कानूनी गले की फांस बनता नजर आ रहा है। अयोध्या राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के विरोध में भगवा वस्त्र पहनकर दानपात्र के साथ प्रदर्शन करना निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भारी पड़ गया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में धर्मनगरी वाराणसी के कोतवाली थाने में संतों की शिकायत पर इन तीनों दिग्गज नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पूरा विवाद संसद भवन परिसर में हुए एक अनोखे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि सांसद पप्पू यादव भगवा वेश धारण कर हाथ में एक सांकेतिक 'दानपात्र' लेकर बैठे थे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उस दानपात्र में कुछ पैसे डाले, जिसके तुरंत बाद पप्पू यादव दानपात्र लेकर भागते हुए दिखाई दिए। इस पूरे ड्रामे के जरिए विपक्षी नेताओं का मकसद अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाना था, लेकिन विरोध जताने का यह अंदाज अब एक नए विवाद की वजह बन गया है।  ALSO READ: अयोध्या की आड़ में देश की अस्मिता और आस्था पर हो रहा प्रहार : योगी आदित्यनाथ

संतों का गुस्सा और दर्ज हुई FIR

भगवा कपड़ों में 'चोरी' का सीन फिल्माने पर हिंदू संगठनों और साधु-संतों का गुस्सा भड़क उठा है। बनारस के संतों का कहना है कि पवित्र भगवा वस्त्रों को चोरी जैसे कृत्य से जोड़कर पूरे हिंदू समाज और सनातन धर्म का अपमान किया गया है। संतों की इसी नाराजगी के बाद वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी और VHP आक्रामक

इस घटना के बाद से भाजपा (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हमला बोलते हुए पूछा कि क्या विपक्षी नेता किसी अन्य धर्म के प्रतीकात्मक कपड़ों में चोरी का ऐसा कोई नाटक करने की हिम्मत कर सकते थे? वीएचपी नेता आलोक कुमार ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। दूसरी ओर, लखनऊ में विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पुतले भी फूंके। ALSO READ: अयोध्या में आस्था बरकरार, रामलला दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

इस ड्रामे के सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में किया गया यह विरोध प्रदर्शन 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर ही भारी पड़ सकता है। इसे भाजपा और हिंदू संगठन 'हिंदुत्व और सनातन के अपमान' के तौर पर भुनाने में जुट गए हैं। ऐसे में रक्षात्मक मुद्रा में आई कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए इस विवाद से पार पाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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