Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

Who is Bushra Bano: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर राज्य में राजनीतिक और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक ‘हिंदू अधिकार समूह’ ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया ASP बनाया गया है।

दबाव में हुआ ट्रांसफर या रूटीन प्रक्रिया है?

विवाद के बीच बंगाल सरकार ने इस ट्रांसफर को रूटीन प्रक्रिया बताया है। हलांकि, यह फेरबदल बुशरा बानो द्वारा एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर हुई आलोचना के समय ही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में थीं। इस दौरान वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी में बिताए अपने समय के बारे में बात कर रही थीं। यहां उन्होंने UPSC परीक्षाओं की तैयारी की थी।

वीडियो में क्या है?

वीडियो में बुशरा बानो ने बताया कि UPSC की तैयारी के लिए सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौटी थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग एकेडमी की किताबों, लाइब्रेरी और मॉक टेस्ट को दिया। साथ ही छात्रों को वहां एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि और छात्र एकेडमी में दाखिला लेंगे और इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे ताकि मेरे जैसे और लोग आगे आ सकें।”

विवाद उनके संदेश से नहीं। बल्कि उसे देते समय उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से पैदा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलाम-अलैकुम’ से की। फिर अपनी बातचीत के दौरान ‘इंशाल्लाह’ का इस्तेमाल किया। साथ ही इसका अंत ‘जजाकल्लाह खैर’ से किया।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

‘हिंदू नेटवर्क फाउंडेशन’ की एक यूनिट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले ‘हिंदू लीगल फंड’ ने उनके शब्दों के चयन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में संगठन ने तर्क दिया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यरत अधिकारी को इसके बजाय ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

उन्होंने मामले की समीक्षा करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी, जो अपनी रैंक बता रही थी और यूनिफॉर्म में थी, वह आधिकारिक दिखने वाले सार्वजनिक संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यूज़र्स के बीच इसे लेकर मतभेद था। कछ लोग धार्मिक बातों का जिक्र करने के लिए बुशरा बानो की आलोचना कर रहे थे। जबकि दूसरे यह सवाल उठा रहे थे कि क्या सभी सरकारी अधिकारियों के लिए निष्पक्षता का नियम एक जैसा लागू किया जा रहा है।

किसने क्या कहा?

पूर्व सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है। उन्होंने लिखा, “भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। बुशरा बानो IPS की तारीफ़ होनी चाहिए। उन्होंने दो बार UPSC पास किया,।सऊदी अरब में एक आरामदायक नौकरी छोड़ी और अब पूरी लगन से देश की सेवा कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके शब्दों का चुनाव उनके निजी विश्वास को दिखाता है, न कि उस देश के प्रति अनादर को जिसकी वह रक्षा करती हैं। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में यह सह-अस्तित्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा गर्व है। आपकी सेवा के लिए धन्यवाद, बुशरा! जजाकल्लाह खैर!”

अन्य यूजर्स ने सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक नारों के इस्तेमाल से इसकी तुलना की। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सोशल मीडिया ग्रुप ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठन बुशरा बानो को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

बुशरा बानो!

इस विवाद ने उनके अनोखे करियर सफर पर भी असर डाला है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने सऊदी अरब में काम करने से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी PhD पूरी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखते हुए कोल इंडिया में नौकरी की।

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और शुरू में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए चुनी गईं। बाद में उन्होंने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। फिर दूसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS में जगह बनाई। उनकी उपलब्धि ने पहले भी लोगों का ध्यान खींचा था क्योंकि उन्होंने दो बच्चों की परवरिश करते हुए दो बार UPSC पास किया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी सिविल सेवा प्रणाली में दृढ़ता के उदाहरण के तौर पर अक्सर इस बात का ज़िक्र किया जाता है। ट्रांसफर और वीडियो विवाद ने अब एक खास सवाल को सामने ला दिया है। क्या आधिकारिक संदेश में किसी अधिकारी का निजी धार्मिक इजहार सरकारी सेवकों से अपेक्षित निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है? सुवेंदु अधिकारी सरकार अपने इस रुख पर कायम है कि तबादला एक सामान्य प्रक्रिया थी, जबकि धर्म, सार्वजनिक पद और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को लेकर बहस जारी है।

UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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Ganga Aarti in London: ब्रिटेन में टेम्स नदी पर पहली बार हुई गंगा आरती! लंदन में गूंजे मंत्र और भक्ति के स्वर, भारतीयों का जमावड़ा

Ganga Aarti in London: ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) की राजधानी लंदन में स्थित मशहूर टेम्स नदी के तट पर रविवार (13 सितंबर) को पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। ‘टेम्स तट पर गंगा आरती: प्रकाश उत्सव’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ‘चिन्मय मिशन यूके’ ने ‘टोटली टेम्स’ के वार्षिक उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन ‘चिन्मय मिशन’ की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दुनियाभर में हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था।

भारत में गंगा के तट पर होने वाली प्रसिद्ध आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन की परिकल्पना प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में की गई थी। ‘चिन्मय मिशन यूके’ की टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, “पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित कर मां गंगा की आराधना करते और प्रकृति एवं जीवन को संवारने वाली दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता दर्शाते आए हैं।”

श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, “टेम्स नदी के तट पर गंगा आरती भी इसी भावना को आगे बढ़ाती है और कृतज्ञता, आशा तथा एकता के साझा भाव में लोगों को एक साथ लाती है।। चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हमारे संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जीवन वेदांत के शाश्वत ज्ञान और आध्यात्मिक संदेश को हिमालय की पवित्र भूमि से जन-जन तक पहुंचाने और उसे उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए समर्पित कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदू धर्म की महान दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में से एक वेदांत की इस दिव्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की उस पवित्र धारा का उत्सव भी है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे निरंतर प्रवाहित हो रही है।”

गंगा आरती का महत्व

गंगा आरती हिंदू धर्म का एक प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें बड़ी संख्या में दीयों को प्रज्वलित कर प्रार्थना, भजन-संगीत और मंत्रोच्चार के माध्यम से मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह अनुष्ठान प्रकृति और उसके जीवनदायी स्वरूप के प्रति आस्था तथा सम्मान की भी अभिव्यक्ति है।

चिन्मय मिशन के एक प्रवक्ता ने कहा, “प्रकृति के प्रति श्रद्धा गंगा आरती का केवल एक हिस्सा नहीं, बल्कि इसकी आत्मा में निहित है। यह मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का माध्यम है। हिंदू परंपरा में मां गंगा को पवित्र, जीवनदायिनी और समस्त जीवों का पोषण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।”

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आरती में परंपरा की पवित्रता

टेम्स के तट पर आयोजित इस आरती में परंपरा की पवित्रता के साथ नदी की निर्मलता और पर्यावरण की मर्यादा का भी पूरा ध्यान रखा गया। पूरा अनुष्ठान नदी के तट पर जमीन पर ही संपन्न हुआ। आरती में प्रयुक्त किसी भी वस्तु को टेम्स में प्रवाहित नहीं किया गया। ‘टोटली टेम्स’ एक न्यास की ओर से आयोजित वार्षिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत 1997 में हुई थी। इस उत्सव के तहत कला, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से टेम्स नदी के महत्व और समृद्ध विरासत को रेखांकित किया जाता है।

Houthi attack Saudi: सऊदी अरब के तेल भंडार पर बड़ा संकट! कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है स्टॉक, हूती विद्रोहियों के हमलों से टेंशन में MBS

Houthi attack on Saudi Arabia: सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन अगर जल्द दोबारा शुरू नहीं हुई, तो अरब देश के पास निर्यात के लिए मौजूद कच्चे तेल का भंडार महज 5 से 7 दिनों में खत्म हो सकता है। ‘रॉयटर्स’ ने सऊदी तेल शिपमेंट से जुड़े तीन उद्योग सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

इस पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। सऊदी तेल खरीदारों और कारोबारियों के मुताबिक, इससे दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी, यानी लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन, बाजार से हट सकता है।

ड्रोन हमले के बाद बंद हुई पाइपलाइन

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को शुक्रवार को ड्रोन हमलों में नुकसान पहुंचने के बाद बंद कर दिया गया। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से में मौजूद तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। सऊदी सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत कब तक पूरी होगी। रॉ

यटर्स से बातचीत में उद्योग से जुड़े सूत्रों ने मरम्मत की अलग-अलग समयसीमा बताई है। एक सूत्र के मुताबिक, इसे ठीक करने में 5 से 6 सप्ताह लग सकते हैं। जबकि दूसरे का कहना है कि पाइपलाइन इससे पहले भी चालू हो सकती है। मरम्मत के दौरान पाइपलाइन से आंशिक रूप से तेल पंपिंग शुरू किए जाने की संभावना भी बताई गई है।

यानबू में सिर्फ कुछ दिनों का तेल भंडार

सूत्रों के मुताबिक, यानबू बंदरगाह पर मौजूद कच्चे तेल का स्टॉक मौजूदा निर्यात को केवल 5 से 7 दिनों तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो यह भंडार भी खत्म हो सकता है। सऊदी अरब के पास मिस्र के कुछ बंदरगाहों पर भी एक्स्ट्रा तेल स्टॉक मौजूद है। इनमें लाल सागर पर स्थित ऐन सुखना और भूमध्य सागर पर स्थित सिदी केरिर शामिल हैं। एक अन्य उद्योग सूत्र के अनुसार, इन भंडारों से ग्राहकों को कुछ और दिनों तक तेल की आपूर्ति की जा सकती है।

भंडारण क्षमता की बात करें तो:

यानबू: करीब 3.5 करोड़ बैरल

ऐन सुखना: करीब 1.8 करोड़ बैरल

सिदी केरिर: करीब 2 करोड़ बैरल

हालांकि ये सभी भंडारण सुविधाएं पूरी क्षमता तक भरी हुई नहीं हैं। ऐसे में पाइपलाइन दोबारा शुरू नहीं होने पर इन भंडारों के भी धीरे-धीरे खत्म होने का खतरा है।

सऊदी अरब का तेल उत्पादन 30 साल के निचले स्तर पर

पाइपलाइन संकट ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब का तेल उत्पादन पहले ही काफी गिर चुका है। सऊदी अरब ने OPEC को बताया कि अगस्त में उसका तेल उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि फरवरी में यह करीब 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब की तेल आपूर्ति तीन दशकों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

इसके पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते तेल की आवाजाही में आई बाधा को प्रमुख कारण बताया गया है। IEA का अनुमान है कि इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 57 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट आ सकती है, जो दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 6 फीसदी है।

होर्मुज संकट के बीच पाइपलाइन थी सऊदी अरब का अहम रास्ता

पिछले करीब छह महीनों से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी। इसकी मदद से सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात कर पा रहा था। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल तेल यानबू पहुंचाया जाता था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग 4 फीसदी के बराबर है। अब पाइपलाइन बंद होने से सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों का संकट बढ़ गया है।

लाल सागर में हूतियों से भी बढ़ा खतरा

सऊदी अरब को लाल सागर क्षेत्र में एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यमन के हूती लड़ाकों ने युद्ध के बीच सऊदी तेल शिपमेंट को निशाना बनाने की धमकी दी है। शुक्रवार को उन्होंने लाल सागर के मुहाने पर स्थित एक द्वीप पर कब्जा करने का भी दावा किया।

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए इसलिए भी अहम थी क्योंकि यह देश को होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने का रास्ता देती थी। इसके लंबे समय तक बंद रहने से सऊदी अरब को अपने स्टोरेज में मौजूद तेल और दूसरे सीमित निर्यात मार्गों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है।

दुनिया भर में तेल कीमतों पर और बढ़ सकता है दबाव

अगर पाइपलाइन की मरम्मत में कई सप्ताह लगते हैं, तो सऊदी अरब के लिए विदेशी ग्राहकों को नियमित तेल आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक बंदी का मतलब वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल सऊदी कच्चे तेल की कमी हो सकता है।

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इससे पहले ही सीमित वैश्विक सप्लाई पर दबाव और बढ़ेगा और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब की यह पाइपलाइन सिर्फ एक देश की तेल सप्लाई का मामला नहीं है। इसके लंबे समय तक बंद रहने पर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Rajasthan Nikay Chunav Result: राजस्थान निकाय चुनाव में लहराया भगवा! नगर निगम के रुझानों में BJP 37 सीटों के साथ आगे, जानें- कांग्रेस का हाल

Jaipur Election Results 2026 News: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) बढ़त बनाए हुए है। भगवा पार्टी को कांग्रेस भी कड़ी टक्कर दे रही है। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई। इसके लिए व्यापक सुरक्षा इंतजामों के साथ अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। 11 बजकर 45 मिनट तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 10,245 वार्डों के घोषित परिणामों में BJP ने 1,937, कांग्रेस ने 1,646 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 1,040 वार्डों में जीत दर्ज की है।

इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने 42, भारत आदिवासी पार्टी ने आठ, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने छह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने छह और आम आदमी पार्टी (AAP) ने पांच वार्डों में जीत हासिल की है।

इन आंकड़ों में निर्विरोध चुने गए 77 उम्मीदवार भी शामिल हैं। राज्य में जिन 309 नगरीय निकायों के चुनाव की घोषणा की गई है। उनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 200 से अधिक नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन सभी निकायों में कुल 10,245 वार्ड हैं। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए वोटों की गिनती चल रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) शुरुआती बढ़त बनाए हुए है।

यहां- देखें लाइव अपडेट्स

11 बजकर 45 मिनट का अपडेट:- सोमवार सुबह 11 बजकर 45 मिनट तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 10,245 वार्डों के घोषित परिणामों में BJP ने 1,937, कांग्रेस ने 1,646 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 1,040 वार्डों में जीत दर्ज की है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने 42, भारत आदिवासी पार्टी ने आठ, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने छह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने छह और आम आदमी पार्टी (AAP) ने पांच वार्डों में जीत हासिल की है।

इन आंकड़ों में निर्विरोध चुने गए 77 उम्मीदवार भी शामिल हैं। राज्य में जिन 309 नगरीय निकायों के चुनाव की घोषणा की गई है, उनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 200 से अधिक नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन सभी निकायों में कुल 10,245 वार्ड हैं।

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Amit Shah UCC: ‘2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC’: अमित शाह का बड़ा ऐलान, बोले- घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्ट करेंगे

Amit Shah UCC: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार (13) को कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP की 25 साल की यात्रा का उल्लेख किया।

‘मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए’

अमित शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि भाजपा-राजग शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”आपको बता दें कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35A को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। गृह मंत्री ने दावा किया कि कश्मीर अब भारत के साथ पूरी तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है और देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

90000 लोगों ने किया सरेंडर

शाह ने कहा, “नौ हजार से अधिक लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। आज हम पूर्वोत्तर को विकास के रास्ते पर लाए हैं।” उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति स्थापित की है। मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने के लिए क्या 1951 को आधार वर्ष माना जाएगा? इस सवाल पर शाह ने कहा कि केंद्र इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों और राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इन मुद्दों पर अपने सहयोगियों और मणिपुर के राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जो भी फैसला होगा, हम आपको बताएंगे।” अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुंबई जैसे शहरों में उनकी पहचान किए जाने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि सरकार उन्हें चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का खुलासा नहीं करेगी।

शाह ने चुटकी लेते हुए कहा, “आप गृहमंत्री से कह रहे हैं कि वह तरीकों को सार्वजनिक कर दें और आपको बता दें कि यह कैसे किया जाएगा। फिर हम उन्हें कैसे पकड़ेंगे? उन्हें भी पता चल जाएगा।”

अवैध घुसपैठियों पर एक्शन

शाह ने देश से अवैध घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें बाहर निकालने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “मैं अपने संकल्प को दोहराता हूं कि हम इस देश के एक-एक अवैध घुसपैठिये की पहचान करेंगे और एक-एक करके उन्हें देश से बाहर भेजेंगे।”

इस दौरान सरकार के एंटी ड्रग्स अभियान पर शाह ने कहा कि उन्होंने हाल में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है।इस अभियान के तहत हर राज्य का दौरा करेंगे। शाह ने कहा कि उन्होंने पिछले दिन एक मुख्यमंत्री से बात की थी। अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए पूरे दिन बैठक की जाएगी।

क्या है UCC?

समान नागरिक संहिता (UCC) का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े समान नागरिक कानूनों की व्यवस्था से है। वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। UCC का उद्देश्य इन व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

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अमेठी हार को स्मृति ईरानी ने किया याद, टीवी पर वापसी का किया खुलासा, जानें किसे फोन कर कहा था- मैं बेरोजगार हूं…

अमेठी हार को स्मृति ईरानी ने किया याद, टीवी पर वापसी का किया खुलासा, जानें किसे फोन कर कहा था- मैं बेरोजगार हूं...

Smriti Irani reveals plans for a TV comeback

Smriti Irani News : पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में अमेठी में साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार को याद करते हुए टीवी पर अपनी वापसी का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि फर्क सिर्फ इतना था कि 2019 की जीत के बाद लोग मुझे तलाश रहे थे, लेकिन 2024 में हारने के बाद कोई ढूंढ नहीं रहा था। स्मृति ने अमेठी में हार के बाद एक्टिंग से दूरी बनाने के बजाय फिर से टीवी की दुनिया में लौटने का फैसला किया। स्मृति ने कहा, मैंने फोन उठाया और मीडिया और एंटरटेनमेंट में काम मांगा। स्मृति ने जिन लोगों को फोन किया, उनमें उदय शंकर भी शामिल थे।

खबरों के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में अमेठी में साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार को याद करते हुए टीवी पर अपनी वापसी का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि फर्क सिर्फ इतना था कि 2019 की जीत के बाद लोग मुझे तलाश रहे थे, लेकिन 2024 में हारने के बाद कोई ढूंढ नहीं रहा था। स्मृति ने अमेठी में हार के बाद एक्टिंग से दूरी बनाने के बजाय फिर से टीवी की दुनिया में लौटने का फैसला किया।

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स्मृति ने कहा, मैंने फोन उठाया और मीडिया और एंटरटेनमेंट में काम मांगा। स्मृति ने जिन लोगों को फोन किया, उनमें उदय शंकर भी शामिल थे। स्मृति ने कहा, मैं बेरोजगार हूं, क्या आप मुझे कोई काम दे सकते हैं? उन्होंने उदय शंकर से साफ शब्दों में कहा था कि उन्हें काम चाहिए। स्मृति ने कहा, वो वही शख्स थे, जिसकी वजह से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मेरी नौकरी गई थी और बाद में वही मेरी दोबारा वापसी की वजह भी बने।

उदय शंकर को भी हैरानी हुई कि एक समय केंद्रीय मंत्री रह चुकीं स्मृति अब उनसे काम मांगने के लिए फोन कर रही हैं। उदय शंकर फिलहाल जियोहॉटस्टार और स्टार के वाइस चेयरमैन हैं और ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के ऑफ एयर होने के दौर में टेलीविजन से जुड़े रहे थे।

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कभी छोटे पर्दे के सबसे बड़े चेहरों में शुमार रहीं स्मृति ईरानी कई साल बाद जब वो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के सेट पर वापस पहुंचीं तो उनके लिए ये काफी अलग एक्सपीरियंस था। स्मृति ने कहा, मैंने अमेठी में अपनी जिंदगी के 10 साल दिए। स्मृति ने अमेठी में किए गए अपने विकास कार्यों को भी याद किया।

Delhi Building Collapse: ‘मलबे के अंदर से फोन कर रहे छात्र’, दिल्ली बिल्डिंग हादसे की हैरान कर देने वाली कहानी आई सामने

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक पीजी इमारत के अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत गिरने के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस घटना में अब तक एक व्यक्ति की मौत की खबर है, वहीं कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल ने अब तक छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सत्य निकेतन में हुए हादसे पर चिंता जताई। वहीं BJP विधायक अनिल शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। BJP विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि, इस बिल्डिंग में कई छात्र PG के तौर पर रह रहे थे। इस हादसे के समय कुछ स्टूडेंट्स बिल्डिंग के अंदर मौजूद थे।

‘अंदर से कर रहे फोन’

BJP विधायक ने आगे कहा कि, फिलहाल ये बताना मुश्किल है कि इमारत के अंदर कितने लोग फंसे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि, मलबे में फंसे कुछ छात्र अभी भी फोन के जरिए संपर्क कर रहे थे। इससे आशंका है कि हादसे के बाद भी कई लोग अंदर फंसे हो सकते हैं। राहत और बचाव टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। शर्मा ने कहा, “कुछ स्टूडेंट्स अभी भी अंदर से फोन कर रहे हैं। इससे लगता है कि कुछ और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं, इसलिए बचाव अभियान लगातार जारी है।”

 

‘छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए’

विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इमारत के मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मौके पर पूरी टीम भेजी है और सरकार इस घटना को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा, “हम भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मौके पर पूरी टीम भेजी है। पूरी सरकार इस घटना को लेकर चिंतित है और हमारा सबसे बड़ा मकसद यही है कि अंदर फंसे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए।”

40-50 साल पुरानी है इमारत

दिल्ली पुलिस ने बताया कि, साउथ कैंपस थाने में दोपहर करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही पुलिस, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और DDMA की टीमें फायर टेंडर और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। वहीं जांच के दौरान सामने आया कि सत्य निकेतन की यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी और इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं। बिल्डिंग का इस्तेमाल PG के रूप में किया जा रहा था और हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।

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SRCC में PM मोदी का Gen Z कनेक्ट, ‘OG’ और ‘धुरंधर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को दिया संदेश

PM Modi SRCC Speech: शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘Gen Z’ (आज की युवा पीढ़ी) की भाषा में ‘OG’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही, 2013 में दिए गए अपने भाषण के 13 साल बाद कॉलेज लौटने पर उन्होंने हाल ही में लोकप्रिय हुई फिल्म ‘धुरंधर’ का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने अपनी बात की शुरुआत अपने पुराने भाषण का जिक्र करते हुए किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके 2013 के भाषण की काफी चर्चा हुई और लोगों ने उसे दोबारा देखा। उन्होंने छात्रों से कहा, “2013 में मैंने जो कहा था, वह मेरा पक्का विश्वास था।”

‘धुरंधर’ से ‘रीविजिट’ तक

हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हुए पीएम मोदी ने छात्रों से कहा, “हो सकता है कि आप ‘धुरंधर’ न हों, लेकिन अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर कराएं।” अपनी छाप जरूर छोड़ें। उन्होंने ‘रीविजिट’ (फिर से देखना/याद करना) शब्द का इस्तेमाल करते हुए युवा पीढ़ी से कहा कि वे उस समय की स्थिति पर नजर डालें जब उन्होंने 2013 में आखिरी बार SRCC को संबोधित किया था।

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वे ऑनलाइन जाकर देखें कि उस समय अखबारों में क्या खबरें छप रही थीं, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी और वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

SRCC के जाने-माने पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “SRCC के पूर्व छात्र भी बहुत खास रहे हैं। अगर मैं आपकी भाषा में कहूं, तो यहां के पूर्व छात्र ‘OGs’ (असली दिग्गज) हैं।”

दोनों दौर की तुलना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2013 में भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिनमें आतंकी हमले, महंगाई और भ्रष्टाचार शामिल थे।

उन्होंने कहा, “विकास दर बहुत नीचे थी और महंगाई चरम पर थी,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घोटाले और भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर थे।

उस समय के माहौल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हर तरफ निराशा और मायूसी ही थी।”

इस दौरान पीएम मोदी ने सुरक्षा चुनौतियों और ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LoC) पर हालात का भी जिक्र किया और 2014 से पहले की स्थिति की तुलना अपनी सरकार के जवाब से की।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर साधा निशाना

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए, पीएम मोदी ने सीमा पार से होने वाले हमलों पर उस समय और अब के रवैये की तुलना की।

उन्होंने कहा, “आज जब पाकिस्तान कोई हरकत करता है, तो हम उनके घर में घुसकर हमला करते हैं।” उन्होंने अपनी सरकार के दौरान पाकिस्तान के प्रति भारत के रुख का जिक्र करते हुए यह बात कही।

उन्होंने उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि का भी जिक्र किया और बताया कि 2013 में देश को “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक) कहा जाता था। उन्होंने 2013 में भारत की स्थिति और आज की स्थिति की तुलना करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर पहचाना जा रहा है। उन्होंने हाल के GDP आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

क्या Gen Z तक पहुंचने की नई कोशिश है?

हाल ही में जंतर-मंतर पर Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, BJP और उसके नेता युवा दर्शकों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में PM मोदी ने SRCC में खास तरह की भाषा का इस्तेमाल किया। हाल ही में BJP सांसदों ने संसद में “MIA”, “FOMO” और “Delulu” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जबकि खुद प्रधानमंत्री भी इंस्टाग्राम-स्टाइल वीडियो और युवाओं को ध्यान में रखकर संदेश देने का तरीका अपना रहे हैं।

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से मीम्स, रील्स और इंटरनेट कल्चर से प्रेरित थे। इनसे पता चला कि Gen Z किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को एकजुट कर सकता है और राजनीतिक चर्चा को दिशा दे सकता है। बता दें कि इस आंदोलन के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

इसलिए, PM मोदी का SRCC का दौरा सिर्फ 2013 में दिए गए भाषण को दोहराना नहीं था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब राजनीतिक पार्टियां उस पीढ़ी की भाषा को समझने और बोलने की कोशिश कर रही हैं जो रील्स, मीम्स और इंटरनेट स्लैंग के जरिए बातचीत करती है।

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‘आप तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं…’ सांसद कंगना रनौत ने MPLADS फंड खर्च न होने पर अफसरों को लगाई फटकार

Kangana Ranaut: हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर, शनिवार को BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई।

BJP सांसद ने सांसद निधि (MPLADS) के तहत उपलब्ध फंड का पूरा इस्तेमाल न किए जाने को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। X पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उनके MP फंड में करोड़ों रुपये उपलब्ध थे, लेकिन उनमें से केवल आधी रकम का ही इस्तेमाल किया गया है।

DISHA मीटिंग में कंगना रनौत का गुस्सा: वीडियो

रनौत ने अधिकारियों से कहा, “मुझे ये बेकार के जुमले (झूठे वादे) मत सुनाइए। मुझे हर DISHA कमिटी मीटिंग में यही सुनने को मिलता है।”

उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDOs) से खर्च की रिपोर्ट मांगी। कंगना ने कहा कि इससे पहले अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि काम में कोई रुकावट नहीं है और सांसद निधि की करीब 90 फीसदी रकम खर्च की जा चुकी है।

कंगना ने आगे कहा, “अब बस काम पूरा करके दिखाइए। अब सिर्फ बातें करने का समय नहीं रहा। ये मामले दो साल पुराने हैं। कुछ डेढ़-दो साल पुराने मामले हैं। अब काम पूरा कीजिए और मुझे रिपोर्ट दीजिए कि काम हो गया है! कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए, फिर भी एक भी काम नहीं हुआ। यह कितनी अक्षमता और शर्मनाक बात है।”

रनौत ने आरोप लगाया कि बैठकों में दिखाए गए खर्च के आंकड़े असल खर्च से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने एजेंसी की उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें दावा किया गया था कि MPLADS फंड का 30-40 प्रतिशत हिस्सा धोखाधड़ी करने वाले लाभार्थियों को दिया गया था और उसे वापस नहीं पाया जा सका।

‘अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं’

एक्टर से नेता बनीं रनौत ने कहा कि एक सांसद के तौर पर उनके काम को लेकर नेशनल मीडिया में उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंडी के लोग रुके हुए प्रोजेक्ट्स के बारे में लगातार रील्स पोस्ट कर रहे हैं, जबकि अधिकारी अपने दफ्तरों में उन पर हंस रहे हैं और उन्हें “कोस” रहे हैं।

कंगना ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करें और उपलब्ध MPLADS फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें।

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