7,100mAh बैटरी, Snapdragon 8 Gen 5 और 144Hz डिस्प्ले Motorola Edge 70 Max लॉन्च से पहले सामने आए बड़े फीचर्स

Motorola ने अपने आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Max की लॉन्च डेट की आधिकारिक घोषणा कर दी है। कंपनी इस स्मार्टफोन को 15 जुलाई दोपहर 12 बजे लॉन्च करेगी। लॉन्च के तुरंत बाद यह डिवाइस Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। लॉन्च से पहले ही कंपनी ने फोन के कई अहम फीचर्स का खुलासा कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि Motorola इस बार प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। हालांकि, कैमरा स्पेसिफिकेशन और कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है। इनकी जानकारी लॉन्च इवेंट के दौरान सामने आएगी।

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प्रीमियम डिजाइन के साथ मिलेगा फ्लैट डिस्प्ले

Motorola Edge 70 Max में स्लिम बेज़ल वाला फ्लैट डिस्प्ले और पीछे की तरफ स्क्वायर शेप कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। Flipkart पर फिलहाल इसे लाइट ब्लू और ग्रीन कलर ऑप्शन में दिखाया गया है। कंपनी ने इसे हल्का और प्रीमियम डिजाइन देने पर खास ध्यान दिया है।

 

Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर के साथ मिलेगी AI पावर

Motorola Edge 70 Max में Qualcomm का लेटेस्ट Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर मिलेगा। कंपनी का दावा है कि इसमें पिछले मॉडल्स की तुलना में 46% बेहतर AI NPU परफॉर्मेंस मिलेगी। फोन में 12GB LPDDR5X RAM का सपोर्ट होगा और ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक होगी। Motorola के अनुसार, इस स्मार्टफोन का AnTuTu स्कोर 30 लाख (3 Million) से ज्यादा है, जो इसे फ्लैगशिप कैटेगरी का बेहद दमदार डिवाइस बनाता है।

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144Hz LTPO डिस्प्ले, 7,000 निट्स ब्राइटनेस

Motorola Edge 70 Max में Quad HD+ LTPO डिस्प्ले दिया जाएगा, जो 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा।

 

  • डिस्प्ले की प्रमुख खूबियां
  • 7,000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस
  • Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन
  • 95.12% स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो
  • DCI-P3 कलर गैमट सपोर्ट
  • 10-बिट कलर आउटपुट
  • BGMI में 120FPS गेमिंग सपोर्ट

 

रिपोर्ट्स के अनुसार फोन में 6.82 इंच का डिस्प्ले हो सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

गेमिंग के लिए मिलेगा एडवांस कूलिंग सिस्टम

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Motorola ने इस स्मार्टफोन में ArcticMesh Cooling System दिया है, जिसमें 5,500 वर्ग मिमी का Vapor Chamber शामिल है। यह सिस्टम लंबे समय तक गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और AI आधारित टास्क के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद करेगा।

7,100mAh बैटरी और 90W TurboPower चार्जिंग

Motorola Edge 70 Max में 7,100mAh की बड़ी बैटरी मिलेगी। कंपनी का दावा है कि यह फोन एक बार चार्ज करने पर 58 घंटे तक का बैटरी बैकअप देने में सक्षम होगा। चार्जिंग के लिए इसमें 90W TurboPower वायर्ड फास्ट चार्जिंग Magnetic Wireless Charging का सपोर्ट मिलेगा। Motorola का दावा है कि अपने सेगमेंट में मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग देने वाला यह पहला स्मार्टफोन होगा। कैमरा फीचर्स, कीमत और उपलब्धता से जुड़ी बाकी जानकारी 15 जुलाई को आयोजित लॉन्च इवेंट में सामने आएगी।

दिल्ली में महिलाओं को 2500 रुपये देने वाली सरकारी स्कीम के लिए आया नया अपडेट, पोर्टल तैयार और अब होगा ये काम

Delhi Mahila Samridhi Yojna: दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता देने वाली सरकारी योजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार अपनी इस बहुप्रतीक्षित महिला समृद्धि योजना को धरातल पर उतारने से पहले इसका नाम बदलने की तैयारी कर रही है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब इस योजना को दिल्ली लक्ष्मी योजना (Delhi Laxmi Yojna) के नए नाम से शुरू किया जा सकता है। सरकार ने इस योजना के सुचारू संचालन के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

17 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ, सुरक्षा ऐप भी होगा लॉन्च

यह योजना 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। दिल्ली में इस योजना से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की करीब 17 लाख महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाला महिला एवं बाल विकास विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करेगा। एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि पहले इस योजना की घोषणा 1 जून को होने की उम्मीद थी लेकिन सरकार द्वारा इसका नाम बदलने का निर्णय लेने के कारण इसके लॉन्च को टाल दिया गया था। अब इसका रजिस्ट्रेशन पोर्टल तैयार है और योजना के औपचारिक शुभारंभ के तुरंत बाद इसे चालू कर दिया जाएगा।

बजट में 5100 करोड़ रुपये का आवंटन, प्रमाणन के चलते हुई थी देरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मार्च में पेश किए गए साल 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 5100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इससे पिछले वित्तीय वर्ष में भी ऐसा ही बजटीय आवंटन किया गया था लेकिन पात्र लाभार्थियों के सत्यापन के लिए प्रमाणित और सटीक डेटा की कमी के कारण इसे लागू करने में देरी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने बार-बार स्पष्ट किया है कि इस योजना को एक ऐसी अचूक प्रणाली स्थापित करने के बाद ही लॉन्च किया जाएगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और सही लाभार्थियों तक ही पहुंचे। इस योजना के क्रियान्वयन और देखरेख के लिए पिछले साल मार्च में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इसमें कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं।

कौन होगा पात्र? पात्रता के नियम हुए फाइनल

सूत्रों के अनुसार, योजना के लिए पात्रता के मानदंडों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है-

  • दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य: सिर्फ वही महिलाएं इस मासिक वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने की पात्र होंगी जिनके पास दिल्ली का प्रामाणिक आधार नंबर होगा।
  • आर्थिक मानदंड: इसके साथ ही आवेदन करने वाली महिला का गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी से संबंधित होना अनिवार्य है।
  • पोर्टल के लाइव होते ही इन तय मानकों को पूरा करने वाली महिलाएं हर महीने 2500 रुपये की सहायता राशि के लिए आवेदन कर सकेंगी।

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के बारे में 10 रोचक तथ्य

A photograph of Dr. Syama Prasad Mookerjee, a renowned educationist and the founder of the Bharatiya Jana Sangh

Dr Syama Prasad Mukherjee History: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद, विधिवेत्ता, सांसद और दूरदर्शी राजनीतिक नेता थे। कम आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से लेकर स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करने तक, उनका सार्वजनिक जीवन अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा। 

 

वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास किया, जिसका प्रभाव आगे के दशकों में भी दिखाई दिया। आज भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके राष्ट्रसेवा के संकल्प, शिक्षा के प्रति समर्पण, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक योगदान के लिए याद किया जाता है। 

 

1. सबसे कम उम्र के कुलपति

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेधावी छात्र थे। उन्होंने केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला था। वह इस पद पर बैठने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।

 

2. स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री

जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। वे देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। सन् 1943 से 1946 तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे थे।

 

3. नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा

जब नेहरू सरकार ने 1950 में पाकिस्तान के साथ 'नेहरू-लियाकत समझौते' पर हस्ताक्षर किए, तो डॉ. मुखर्जी इसके सख्त खिलाफ थे। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

 

4. भारतीय जनसंघ की स्थापना

मंत्रिमंडल से हटने के बाद, उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की। यही संगठन आगे चलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में पुनर्गठित हुआ।

 

5. एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे

वे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 के घोर विरोधी थे। उन्होंने कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और वहां जाने के लिए परमिट (Permit) की व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का यह प्रसिद्ध नारा दिया।

 

6. बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश और गिरफ्तारी

उस समय भारत के नागरिकों को भी कश्मीर जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी। डॉ. मुखर्जी ने इस कानून को चुनौती देने के लिए मई 1953 में बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें वहां की सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

 

7. बैरिस्टर की उपाधि और राजनीति में प्रवेश

उन्होंने इंग्लैंड (लंदन) के 'द ऑनरेबल सोसाइटी ऑफ लिंक्न्स इन' से कानून की पढ़ाई की और 1927 में बैरिस्टर बने। भारत लौटने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए।

 

8. बंगाल विभाजन में अहम भूमिका

जब 1947 में भारत का विभाजन हो रहा था, तब उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संघर्ष किया कि मुस्लिम लीग पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल न कर पाए। उन्हीं के प्रयासों के कारण हिंदू बहुल पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा।

 

9. 'महाबोधि सोसाइटी' के अध्यक्ष

वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे। वे बौद्ध धर्म और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। वे महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने सांची में बौद्ध अवशेषों को सुरक्षित रखने और एशियाई देशों में इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

 

10. रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन

23 जून 1953 को कश्मीर में नजरबंदी के दौरान ही अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है, क्योंकि उनकी मां और कई बड़े नेताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। उन्हें 'महान देशभक्त और शहीद' के रूप में याद किया जाता है।

 

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Mumbai Rains: मुंबई में आसमान से बरसी आफत! 6 लोगों की मौत, आज बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

Mumbai Rains: मुंबई के मानखुर्द इलाके में रविवार (5 जुलाई) रात भारी बारिश के बीच तीन मंजिला चॉल ढह जाने से कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि मलबे के नीचे एक व्यक्ति के फंसे होने की आशंका है। उसे खोजने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के कर्मियों सहित कई एजेंसियों द्वारा एक संयुक्त बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों के अनुसार, चार महिलाओं और एक पुरुष को नगर निकाय द्वारा संचालित शताब्दी अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया। एक अन्य पुरुष को राजावाड़ी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

उन्होंने बताया कि एक घायल पुरुष का इलाज बीएमसी द्वारा संचालित राजावाड़ी अस्पताल में किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा रात करीब साढ़े आठ बजे हनुमान मंदिर के पीछे स्थित जनता नगर की चॉल नंबर-5 में हुआ। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ग्राउंड सहित तीन मंजिला इमारत के दो-तीन कमरे अचानक ढह गए। इसके बाद, मुंबई अग्निशमन दल (एमएफबी), पुलिस, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के वार्ड कार्यालय तथा 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया।

एक व्यक्ति के फंसे होने की आशंका

अधिकारियों ने बताया कि मलबे में एक व्यक्ति के फंसे होने की आशंका है। उसे बाहर निकालने के लिए खोज और बचाव अभियान जारी है तथा एनडीआरएफ की एक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे के नीचे और लोगों के फंसे होने का पता लगाने के लिए खोज और बचाव अभियान जारी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय पार्षद नवनाथ बान ने भी कहा कि एक और व्यक्ति लापता है। उन्होंने बताया कि चॉल का हिस्सा पास की एक झोपड़ी पर गिर गया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश की वजह से बचाव कार्य में व्यवधान आ रहा है।

आज बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

मुंबई, पुणे, ठाणे और पालघर में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सोमवार 6 जुलाई को सभी सरकारी, निजी और नगर निगम के स्कूलों तथा कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने रविवार शाम एक बयान में कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबई के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसके मद्देनजर छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। आईएमडी ने भारी बारिश के अलावा तेज हवा चलने का भी पूर्वानुमान व्यक्त किया है।

अब तक बारिश से 3 की मौत

बयान में कहा गया है कि सरकारी और निजी दफ्तर सामान्य रूप से काम करेंगे। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलें। मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बहुत भारी बारिश हो रही है जिससे सड़कों पर जलभराव हो गया है। पेड़ गिरने की घटनाएं हुई हैं। 30 जून से अब तक इन घटनाओं में एक स्कूली छात्र समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि पुणे, ठाणे और पालघर जिलों के शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी इसी तरह का एडवाइजरी जारी किया गया है। मौसम विभाग द्वारा भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ‘रेड’ अलर्ट जारी किए जाने के बाद पुणे जिला प्रशासन ने सोमवार को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने यह जानकारी दी।

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इस बीच, IMD द्वारा भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुंबई विश्वविद्यालय ने छह जुलाई को निर्धारित सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। विश्वविद्यालय के परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड द्वारा रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जल्द ही यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।

Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा, इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को बिहार से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 में जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दोषी करार देते हुए चार साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। इस घटना में दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी के दौरान डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी मानते हुए चार साल की सजा सुनाई। इसके अलावा हथियार के लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की अतिरिक्त कैद की सजा भी दी गई।

बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा

सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के लिए दो महीने की कैद की सजा दी जाती है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राजू कुमार सिंह पीड़िता के पति को मुआवज़े के रूप में 25 लाख रुपये देंगे। अगर वह यह रकम नहीं देते हैं, तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। 56 वर्षीय राजू कुमार सिंह को पिछले महीने इस मामले में दोषी ठहराया गया था। यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई थी, जब हर्ष फायरिंग में 45 वर्षीय डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी।

इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने अदालत से उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने की अपील की।  उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और साफ रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। उनके वकील नंदिता राव ने अदालत में कहा कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और लगातार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं। वह एक शिक्षित व्यक्ति हैं और पहले कभी किसी मामले में दोषी नहीं ठहराए गए। इसलिए उनके साथ नरमी बरतते हुए उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए।

राजू कुमार सिंह की ओर से वकील राजीव मोहन ने भी अदालत से कहा कि भले ही उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना गया है, लेकिन सजा तय करते समय यह भी देखा जाना चाहिए कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और लापरवाही कितनी गंभीर थी। वहीं, सरकारी वकील चिरंजीत सिंह ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामले में प्रोबेशन दिया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा, खासकर जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं को लेकर। उन्होंने यह भी बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाली डॉक्टर अर्चना गुप्ता 45 साल की थीं और उनकी 12 साल की बेटी ने पूरी घटना अपनी आंखों के सामने देखी थी। उनके परिवार को जो सदमा पहुंचा, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में नितिन नबीन और खड़गे को न्योता, भारत के कई नेताओं को भी मिला आमंत्रण

ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारत की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों से संपर्क किया है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण भेजा है।

सूत्रों ने बताया कि, यह निमंत्रण BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो वर्तमान में कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख हैं, को भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे निमंत्रण स्वीकार करेंगे या नहीं। साथ ही, वे कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल के गठन पर भी फैसला लेंगे जो अंतिम संस्कार के लिए तेहरान जा सकता है।

इसके अलावा, ईरान ने BJP और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी

यह निमंत्रण भारत के सभी राजनीतिक दलों तक तेहरान की पहुंच को दर्शाता है। बता दें कि ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक की तैयारी कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दौरान खामेनेई की मौत के बाद आयोजित किया जा रहा है।

वहीं, भारत सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि वह तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) करेंगे। उम्मीद है कि वे कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी यह यात्रा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण देने के अलावा, ईरान ने शिया समुदाय के कई भारतीय सांसदों को भी अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।

बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते के आखिर से कई अंतिम संस्कार समारोहों की योजना बनाई है। खमेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद दूसरे शहरों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, ईरान के अधिकारियों का अनुमान है कि सार्वजनिक अंतिम संस्कार में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन सकता है।

ईरान में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज

फिलहाल, ईरान की राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं, समारोह से पहले ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास खामेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं, सड़कों को कुछ हद तक बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकारी टेलीविजन ने अंतिम संस्कार में आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है और अंतिम संस्कार के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सार्वजनिक समारोहों के अलावा, तेहरान शुक्रवार को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक अलग कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

ईरान ने नहीं दिया यूरोपीय देशों को निमंत्रण 

हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने यूरोपीय देशों को आधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हालिया संघर्ष के दौरान यूरोपीय सरकारों पर “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े होने का आरोप लगाया और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान पर उनके रुख की आलोचना की।

गौरतलब है कि यह अंतिम संस्कार पहले युद्ध की वजह से टाल दिया गया था। अब यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते को लागू करने को लेकर दोनों देश अब भी एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं।

अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान के साथ-साथ पवित्र शहर कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों के बाद, खमेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके बाद, 9 जुलाई को मशहद में स्थित इमाम रजा के मकबरे में उन्हें दफनाया जाएगा, जो उनका जन्मस्थान भी है।

फिलहाल यह अभी स्पष्ट नहीं है कि खमेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खमेनेई, अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे या नहीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई भी घोषणा ‘सर्वोच्च नेता’ के कार्यालय से की जाएगी।

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Annapurna Yojana: अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने महिलाओं को मिलेंगे ₹3,000! जानें कौन होगा पात्र और कैसे चेक करें स्टेटस

Annapurna Yojana: पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को बुधवार, 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके तहत 25 से 60 साल की उम्र की लगभग 1.2 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में हर महीने ₹3,000 भेजे जाएंगे। इस योजना का मकसद राज्य भर की महिलाओं को आर्थिक मदद देना और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है।

इस दौरान बुधवार को एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई जिलों से आई सैकड़ों लाभार्थी महिलाओं की मौजूदगी में इस योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत पैसे सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जिससे इसका औपचारिक रूप से शुभारंभ हुआ।

इससे पहले, सरकार ने बताया था कि उसे इस योजना के लिए अब तक लगभग 1.5 करोड़ आवेदन मिले हैं। जांच-पड़ताल के बाद, कुल 1.2 करोड़ आवेदन सही पाए गए। इनमें लगभग 5 लाख आदिवासी महिलाएं शामिल थीं।

अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी कौन हैं?

इस योजना के लाभार्थी वे महिलाएं हैं जो सरकार द्वारा तय किए गए मानदंडों को पूरा करती हैं। इसमें मुख्य रूप से 25 से 60 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी।

‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का नया रूप है अन्नपूर्णा योजना 

सरकार ने अन्नपूर्णा योजना के लिए कुल ₹36,000 करोड़ का बजट तय किया है। यह पहले से चल रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का ही नया रूप है, जिसके तहत लगभग 2.4 करोड़ लोग लाभ उठा रहे थे।

इस बदलाव के कारण महिलाओं में अपनी पात्रता (eligibility) को लेकर कुछ भ्रम हो सकता है कि उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार ने बताया है कि लक्ष्मी भंडार योजना के योग्य पुराने लाभार्थियों को नई अन्नपूर्णा योजना में शामिल कर दिया गया है। वहीं, मई से नए आवेदन जमा किए गए थे।

स्टेटस चेक करने के स्टेप्स

अगर आपने अन्नपूर्णा योजना के लिए आवेदन किया है और अपना लाभार्थी स्टेटस देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें:

  1. सबसे पहले पश्चिम बंगाल सोशल सिक्योरिटी पोर्टल पर जाएं:

    https://socialregistry.wb.gov.in/

  2. फिर Citizen Access सेक्शन पर क्लिक करें, जो आपको इस लिंक पर ले जाएगा:

    https://socialregistry.wb.gov.in/citizen/

  3. अब अपने जिले (District) का चयन करें और मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन डिटेल्स भरें।
  4. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा।
  5. OTP और कैप्चा (Captcha) भरकर लॉगिन करें।
  6. लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड में जाकर “Application Status” पर क्लिक करें।
  7. यहां आपको आपकी आवेदन स्थिति और लाभार्थी जानकारी दिख जाएगी।

कौन पात्र नहीं है

मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ किया था कि लक्ष्मी भंडार योजना नई अन्नपूर्णा योजना में पूरी तरह शामिल होने तक जारी रहेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनकम टैक्स भरने वाले, सरकारी कर्मचारी, नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। हालांकि, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) प्रक्रिया के तहत आने वाले आवेदक या SIR प्रक्रिया में न्यायिक समीक्षा का सामना कर रहे लोग इस योजना के लाभ के पात्र बने रहेंगे।

सरकार ने बताया कि जून महीने में भी लाखों लाभार्थियों के खातों में पैसे भेजे गए थे, लेकिन आने वाले चरणों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया 1 जून से शुरू होकर 90 दिनों तक चलेगी। इस दौरान हर नगर पालिका (Municipality) में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन और सत्यापन का काम किया जाएगा, ताकि सभी पात्र लोगों को इस योजना का लाभ मिल सके।

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Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

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यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

पश्चिम बंगाल में OBC बिल पास! TMC के समय की रिजर्वेशन लिस्ट से 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स बाहर

West Bengal OBC Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित किए। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय तैयार की गई OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से बाहर की 66 समुदायों को OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय शामिल हैं।

नई व्यवस्था में पहले की लिस्ट की तुलना में 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स और 9 हिंदू सब-ग्रुप्स को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) की पिछली लिस्ट में 113 सब-ग्रुप्स थे। इनमें से 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम थे। हाई कोर्ट ने मई 2024 में इस लिस्ट को रद्द कर दिया था। OBC रिजर्वेशन को 17% से घटाकर 7% कर दिया था।

क्या बदला है?

पहले राज्य की OBC सूची में कुल 113 उप-समुदाय शामिल थे, जिनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय थे। मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस लिस्ट को कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया गया था।

नई व्यवस्था में क्या होगा?

संशोधित कानून के तहत राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी और समय-समय पर उसमें संशोधन भी कर सकेगी। हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत करे।

आयोग की भूमिका बढ़ी

संशोधन के तहत अब कोई भी व्यक्ति OBC सूची में शामिल किए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा। यदि किसी समुदाय को सूची में गलत तरीके से शामिल या बाहर रखा गया है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी होंगी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव

मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करते हुए कहा था कि समुदायों को OBC लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 66 OBC वर्गों को अधिसूचित करते हुए आरक्षण को 7% कर दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि अब OBC सूची में किसी भी नए समुदाय को शामिल करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग विस्तृत जांच करेगा। उसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

विधानसभा में जोरदार बहस

बहस के दौरान, BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करके जानबूझकर एक पक्षपाती OBC लिस्ट तैयार की थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि संशोधित लिस्ट में हिंदू समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया था।

फिलहाल, TMC सरकार के समय संशोधित कानून के तहत OBC आरक्षण के लिए कैटेगरी A में 65 समुदाय और कैटेगरी B में 78 समुदाय शामिल हैं। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी रही BJP ने TMC सरकार के समय तैयार की गई नई लिस्ट पर आपत्ति जताई थी। साथ ही दावा किया था कि उस लिस्ट में मुस्लिम पृष्ठभूमि वाले समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया, जिससे ‘हिंदू’ पृष्ठभूमि वाले समुदाय वंचित रह गए।

अब आगे क्या होगा?

इन दो बिलों के पास होने से शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा तैयार OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। ये संशोधन पिछड़ा वर्ग आयोग को OBC लिस्ट में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देते हैं।

नए बिल में क्या है?

बिल में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। हालांकि आरक्षण कोटा समय-समय पर बदला जा सकता है। लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

सरकार के पास आयोग की सलाह से OBC समुदायों को उनके पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटने का अधिकार भी होगा। नया कानून, पहले की लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा लाए गए आरक्षण कानून के ढांचे को फिर से लागू करता है। पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद 2010 में शुरू किया गया था।

तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने (जिसका नेतृत्व स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे) तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा पेश किए गए एक बिल के ज़रिए यह कानून बनाया था। इसमें कैटेगरी A समुदायों के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B समुदायों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

ममता सरकार ने किया था बदलाव

2011 में सत्ता में आने के बाद TMC सरकार ने 2012 में कानून में संशोधन किया और कैटेगरी A में 65 समुदायों तथा कैटेगरी B में 78 समुदायों को बनाए रखा। अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोगों को भी कैटेगरी B में शामिल किया गया था। इन संशोधनों के तहत मूल कानून की अनुसूचियों (schedules) को भी फिर से व्यवस्थित किया गया, जिसमें पहले की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को क्रमशः अनुसूची 2 और अनुसूची 3 में बदल दिया गया।

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सोमवार को पारित बिलों के तहत BJP सरकार ने लेफ्ट फ्रंट के समय की मूल अनुसूची 1 को फिर से लागू कर दिया है (जो TMC कानून के तहत अनुसूची 2 के बराबर थी)। जबकि TMC के समय की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को खत्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा सोमवार को पारित बिलों के तहत, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके तय किया जाएगा।