Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

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यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR दर्ज! इन 8 लोगों के नाम शामिल, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

Ram Mandir donation row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा एवं चंदा चोरी से जुड़े मामले में गुरुवार (25 जून) को पहली FIR दर्ज की गई। इससे दो दिन पहले मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी थी। पुलिस के एक अधिकारी ने पीटीआई से गुरुवार को पुष्टि की है कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह केस अयोध्या थाने में दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

किसके खिलाफ दर्ज हुआ है केस?

सूत्रों के मुताबिक, इस FIR में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है कि उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम शामिल किया गया है। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, अभी यह दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। यूपी सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार है।

पुलिस सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रमाशंकर यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि एसआईटी ने कुछ कठोर सिफारिशें की हैं। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर बहुत गंभीर हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की गई थी।

यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

पुलिस के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर BNS की धारा 306, 316 (5) , 317 (4) और 317 (5) लगाई गई हैं। मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने SIT की शुरुआती जांच के आधार पर यह FIR कराई है।

किसने दर्ज कराई FIR?

न्यूज 18 के मुताबिक, यह FIR श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर अयोध्या में दर्ज की गई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर यह मामला दर्ज किया है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 306, 316(5) और 317 शामिल हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ जब दान में मिली रकम की चोरी के आरोपों की जांच कर रही SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी, जो ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं।

राम मंदिर के लिए भक्तों द्वारा दिए गए दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर विवाद इस महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि रिपोर्टों से पता चलता है कि दान के करोड़ों रुपये गायब हैं।

VHP ने की थी केस दर्ज करने की मांग

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में राम मंदिर को मिले चढ़ावे की कथित हेराफेरी मामले में FIR दर्ज करने और समयबद्ध जांच करने की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक कुमार ने पीटीआई से कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और और आरोपियों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में FIR दर्ज होनी चाहिए, जांच में तेजी लाई जानी चाहिए, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” कुमार ने कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए ताकि दोषियों को बिना विलंब के सजा मिल सके।

VHP की यह मांग ऐसे समय में आई है जब दान राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। एसआईटी की यह रिपोर्ट लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी।

SIR जांच जारी

अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े तथ्यों का संकलन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर दान में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पंत ने कहा कि टीम अगले 10 से 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को आरोपों से जुड़ी खबरों का हवाला देते हुए कहा था कि राम मंदिर को चंदे में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने की अपील की थी।

FIR पर अखिलेश का रिएक्शन

अयोध्या मामले में केस दर्ज होने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। अखिलेश ने X पर लिखा, “भाजपा राज में नाइंसाफी की दिखेगी ये झांकी… फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी माफी! जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है, उसके बाद FIR हो  रही है। लगता है SIT को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जांच की गई होगी मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।”

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Ram Mandir: ‘प्रोफेशनल सिस्टम ही समाधान…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। वहीं मामले में निर्माण समिति के अध्यक्ष और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, मंदिर प्रबंधन का पूरा मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाए।

मंदिर की व्यवस्था को बदलने की मांग

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि अब मंदिर के संचालन में केवल वॉलंटियर्स पर आधारित व्यवस्था के बजाय प्रोफेशनल और व्यवस्थित प्रबंधन अपनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि राम मंदिर में दान को लेकर सामने आए कथित विवाद ने प्रशासन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई अहम चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं बड़ी मात्रा में लोगों का दान और रोजमर्रा के कामकाज संभालती हैं, वे लंबे समय तक अनौपचारिक तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। ऐसी संस्थाओं में स्पष्ट जिम्मेदारियां, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही का साफ सिस्टम होना बेहद जरूरी है, ताकि कामकाज पारदर्शी और प्रभावी तरीके से चल सके।

की जाए मजबूत निगरानी व्यवस्था 

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर की पूरी प्रबंधन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस बारे में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है। उनका मानना है कि मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और प्रोफेशनल लोगों को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में गतिविधियां होती हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में जिम्मेदारियों का स्पष्ट और व्यवस्थित बंटवारा नहीं है। ऐसे में बेहतर प्रबंधन, स्पष्ट भूमिकाओं और मजबूत निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि सभी काम सुचारू और पारदर्शी तरीके से चल सकें।

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि फिलहाल मंदिर का प्रबंधन काफी हद तक वॉलंटियर्स के भरोसे चल रहा है। उन्होंने बताया कि वहां काम करने वाले लोगों को मौखिक रूप से उनकी जिम्मेदारियां समझा दी जाती हैं, लेकिन उनके लिए कोई लिखित आदेश, स्पष्ट जिम्मेदारियां बताई नहीं जाती। उन्होंने कहा कि मंदिर में विभिन्न कार्यों के लिए करीब 1,500 लोग काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक औपचारिक प्रबंधन प्रणाली और मजबूत निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, हाल ही में सामने आया विवाद उनके लिए भी निराशाजनक है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर का निर्माण अपने अंतिम चरण में है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं भक्तों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है और इससे लोगों को दुख पहुंचा है।

यह बयान राम मंदिर में दान के पैसों के हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच आया है। मंदिर के एक कर्मचारी के घर से नकदी मिलने के बाद 7 करोड़ रुपये और उससे भी बड़ी रकम से जुड़े कई दावे सामने आए, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया और जांच की मांग तेज हो गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।