Champat Rai : राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी के दरवाजे बंद? नए महासचिव गोविंद देव गिरि का बड़ा खुलासा

Champat Rai : राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी के दरवाजे बंद? नए महासचिव गोविंद देव गिरि का बड़ा खुलासा

champat rai resigns from ram mandir trust

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने पूर्व महासचिव चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी या किसी नए पद पर नियुक्ति की अटकलों पर विराम लगा दिया है। ​पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या चंपत राय को ट्रस्ट में कोई नया पद दिया जाएगा, स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसी अभी कोई बात नहीं है। यदि हमें ऐसा करना होता तो हम अभी ही कर लेते। हमें तीन नए लोगों का चयन करना था, जिनमें हम दो लोग बाहर के चुन लेते और एक उन्हें (चंपत राय को) पद दे देते। लेकिन फिलहाल ऐसी कोई बात हमारे सामने विचाराधीन नहीं है। 

 

​स्वामी गोविंद देव गिरि के इस बयान के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि चंपत राय को फिलहाल ट्रस्ट में किसी नई जिम्मेदारी पर रखने की कोई योजना नहीं है। आपको बता दें की राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चम्पत राय का नाम राम मंदिर मे चढ़ावा चोरी व चंदा चोरी की घटना मे प्रमुख रूप से आया था जिसकी SIT जांच भी हुयी जिसमे चम्पत राय को क्लीन चिट दें दी गयी, जिसके बाद से चम्पत राय की अयोध्या के करसेवक पुरम डेरा डाले हुए है जहाँ राम मंदिर व ट्रस्ट के पदाधिकारी कार्यकर्त्ताओ का बराबर आवागमन बना हुआ है भाजपा के विधायकगण भी चरण वंदना कर रहे है जिससे उनका भौकाल अभी टाइट है। 

चंपत राय समेत 3 दिग्गजों की डिजिटल ID ब्लॉक, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?

Champat Rai digital ID blocked

Champat Rai digital ID blocked: अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण के बाद अब एक और बड़ा भूचाल आ गया है। राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल ID को तुरंत प्रभाव से डीएक्टिवेट (ब्लॉक) कर दिया है। अब अयोध्या में इन दिग्गजों की सिफारिश पर VIP या VVIP एंट्री नहीं मिल पाएगी। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा माजरा और क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला।

क्यों ब्लॉक हुई डिजिटल ID?

दरअसल, यह पूरा एक्शन राम मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच कर रही SIT (विशेष जांच दल) की तफ्तीश में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सूत्रों और SIT जांच के मुताबिक, ट्रस्ट के इन वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल ID का दुरुपयोग करके भारी संख्या में VIP और VVIP दर्शन पास जारी किए गए थे। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

 

डिजिटल ID का मुख्य काम मंदिर दर्शन के लिए विशेष पास बनाना था। पास जारी करने में किसी भी तरह की और अनियमितता या हेरफेर न हो, इसलिए ट्रस्ट ने यह 'डिजिटल स्ट्राइक' की है। दूसरी तरफ, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से SIT लगातार सघन पूछताछ कर रही है, जिससे कई और राज खुलने की उम्मीद है।

अब किसे मिली यह जिम्मेदारी?

ट्रस्ट में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब जिम्मेदारी के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यह सख्त फैसला ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी मिलने के ठीक बाद लिया गया है। अब चंपत राय और अनिल मिश्रा की जगह ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास को विशिष्ट (VIP) पास जारी करने का अधिकार सौंप दिया गया है। ALSO READ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में हेराफेरी (चोरी) का मामला सामने आया था। करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच SIT को सौंपी गई।

 

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें न सिर्फ पैसों की चोरी बल्कि VIP पास के काले खेल का भी पर्दाफाश हुआ। वीआईपी पास के जरिए अवैध रूप से लोगों को दर्शन कराने और उसमें इन डिजिटल आईडी के दुरुपयोग की आशंका सच साबित होती दिख रही है। इसी के बाद ट्रस्ट को अपनी साख बचाने और पारदर्शिता लाने के लिए अपने ही सबसे बड़े चेहरों (चंपत राय व अन्य) के खिलाफ इतना सख्त कदम उठाना पड़ा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

इस्तीफे के बाद चंपत राय ने किसकी तरफ किया इशारा! राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तोड़ी चुप्पी

अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। चढ़ावा चोरी के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इन खुलासों के बाद श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया था और उनके जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, अब इस विवाद और अपने इस्तीफे पर चंपत राय ने पहली बार बयान दिया है।

इस्तीफे के बाद पहली बार बोले चंपत राय

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में चंपत राय ने एक इमोशनल चिट्ठी लिखी है। चंपत राय की ओर से जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आएगी तब बोलूंगा। सोशल मीडिया पर हाथ से लिखा पत्र जारी कर अपना पक्ष रखा है। चंपत राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को अनर्गल बताते हुए कहा कि उन्होंने फिलहाल मौन धारण किया है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह सभी बिंदुओं पर जवाब देंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में उनका नाम नहीं है।

कही ये बात

उन्होंने कहा कि मंदिर के दान-पात्रों में मिले पैसे की गिनती को लेकर कई तरह के आरोप और दावे किए गए। उनके ऊपर भी कई बेबुनियाद आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने पिछले दो महीने तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चंपत राय ने कहा कि इस मुद्दे पर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की शुरुआती जांच रिपोर्ट तैयार होकर सार्वजनिक की जा चुकी है। अब सभी लोगों को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वह वर्ष 1991 से अयोध्या में संगठन के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं और पिछले 45 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।

बता दें कि, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद बीते सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। कृष्ण मोहन दलित समाज से हैं। चढ़ावा चोरी के बाद सोमवार ट्रस्ट की पहली और अहम बैठक हुई थी।

Ram Mandir : चंदा चोरी मामले में FIR दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन को ट्रस्ट की कमान, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। वहीं बैठक के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के  कोषाध्यक्ष  गोविंद देव गिरी महराज ने कई अहम जानकारियां दी हैं।  गोविंग देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। कृष्ण मोहन को अब ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है। बता दें कि, चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

कौन हैं कृष्ण मोहन 

बता दें कि, कृष्ण मोहन ने राम मंदिर में दान चोरी को लेकर एफआईआर कराई थी। इन्हीं की एफआईआर पर आज पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही हैं, साथ ही इन्हीं के एफआईआर के आधार पर अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और उनसे दान चोरी की रकम वसूली जा रही है।

बैठक के बाद सामने आई ये बड़ी जानकारी

बता दें कि, चाढ़ावा चोरी का मामले सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक करीब 3 घंटे तक चली। इस बैठक में क्या कुछ फैसले हुए इसकी जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि, चंपत राय और अनिल मिश्रा की श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से छुट्टी हो गई है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में दोनों का त्यागपत्र मंजूर कर लिया है। चंपत राय की जगह ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव होंगे।

राम मंदिर की सबसे अहम मीटिंग

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर परिसर मीटिंग की शुरुआत होते ही सबसे पहले राम मंदिर से जुड़ी हालिया घटना पर गहरा दुख जताया गया। इसके ठीक बाद, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक के मुख्य एजेंडा को सबके सामने रखा। राम मंदिर ट्रस्ट के साल 2020 में गठन के बाद से अब तक की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मंदिर के चंदे में कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों की जांच चल रही है।

मामले की चल रही है जांच

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।

Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

ये भी पढ़ें- चीन हो या पाकिस्तान… अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा ‘100 किमी की चक्रव्यूह’ दीवार

वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे से ज्यादा पूछताछ, गबन के आरोपों में अपनी भूमिका से किया इनकार

Ram Temple Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने सोमवार (29 जून) को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान तीन घंटे से ज्यादा समय तक दर्ज किया। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक पूछताछ के दौरान राय ने कथित घोटाले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मंदिर का चंदा संभालने वाले कर्मचारी ऐसा अपराध कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने मंदिर के चंदे के मैनेजमेंट में कथित अनियमितताओं को लेकर राय से विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने कहा कि कथित गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने हैरानी जताई कि ट्रस्ट के साथ काम करने वाले लोग ऐसे घोटाले में शामिल हो सकते हैं।

अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस

पुलिस ने चल रही जांच के तहत ट्रस्ट के सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी सवाल-जवाब के लिए नोटिस जारी किए हैं। इस बीच, ट्रस्ट ने अपनी बैठक 6 जुलाई को करने का फैसला किया है। इस बैठक में राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है।

यह मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में मिले चंदे में बड़े पैमाने पर गबन के आरोप लगे। इसके बाद FIR दर्ज की गई। राम भक्तों द्वारा दान किए गए कैश और कीमती सामान की गिनती में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव के तौर पर हुई है।

आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट के विशेष जज रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी।

आरोपियों को नहीं मिल रहे हैं वकील

अयोध्या में वकीलों ने सोमवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक में लिया गया।

सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

ये भी पढ़ें- राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

बैठक के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका शरण मिश्र ने पत्रकारों को बताया कि सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि एसोसिएशन का कोई भी वकील आरोपियों की ओर से पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई वकील फिर भी आरोपियों का मुकदमा लड़ना चाहता है, तो उसे पहले एक आवेदन देना होगा और प्रति आरोपी पांच लाख रुपये बार एसोसिएशन में योगदान के तौर पर जमा करने होंगे। इस राशि का इस्तेमाल एसोसिएशन मामले में मुकदमा चलाने के लिए करेगी।”

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

ये भी पढ़ें- राम मंदिर दान चोरी केस में SBI स्टाफ से क्यों हो रही पूछताछ, बैंक अधिकारी कैसे आए निशाने पर? पढ़ें- इनसाइड स्टोरी

वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।