‘राम मंदिर में चंदा चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं’; पप्पू यादव और राहुल गांधी से SP ने बनाई दूरी! राम गोपाल यादव भड़के

Pappu Yadav News: संसद परिसर में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा कपड़े पहनकर राम मंदिर चंदा चोरी का नुक्कड़ नाटक करने पर समाजवादी पार्टी (SP) के सीनियर नेता राम गोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस नाटक को गलत ठहराते हुए कहा कि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि पप्पू यादव ने गलत किया। उन्हें संसद परिसर में ऐसा नहीं करना चाहिए था। यादव ने कहा कि संतों का चंदा चोरी से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के कई सांसद भी पप्पू यादव के साथ नाटक कर रहे थे।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा भगवा कपड़े पहनकर नुक्कड़ नाटक पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, “वो गलत था क्योंकि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। वो गलत चीज थी, ऐसा नहीं होना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “हम राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सदन में उठाएंगे। ये गंभीर मामला है।”

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शुक्रवार को भगवा कपड़े पहनकर संसद परिसर में मकर द्वार के सामने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ नाटक किया था। यह प्रदर्शन अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरोध में किया गया था। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस और सपा के विभिन्न सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि यादव ने राम मंदिर में हुई चोरी को दिखाने के लिए कथित रूप से पैसे अपनी जेब में रख लिए।

BJP ने विपक्ष से की माफी की मांग

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संसद परिसर में नाटक करके हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई। भगवा पार्टी ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। यादव ने हालांकि कहा कि वह सनातन की रक्षा के लिए विरोध कर रहे हैं। कितनी भी FIR दर्ज हो जाएं। लेकिन वह नहीं झुकेंगे।

BJP नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की तरफ ध्यान खींचने के लिए संसद परिसर में नाटक करने को लेकर पप्पू यादव, राहुल गांधी और अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ शनिवार को वाराणसी में शिकायत दर्ज करवाई। जबकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस को तहरीर दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी गांधी और यादव पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के जरिए सनातन धर्म का अपमान किया।

आखिर क्या हुआ था जिस पर मचा है बवाल?

दरअसल, भगवा कपड़े पहने पप्पू यादव ने शुक्रवार को संसद परिसर में ‘मकर द्वार’ के सामने विपक्ष के दूसरे सांसदों के साथ यह राम मंदिर चढ़ावा चोरी का नाटक किया। इस दौरान राहुल गांधी समेत अन्य सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को दिखाने के लिए अपनी जेब में पैसे डाले। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस तरह के विरोध से लाखों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का काम नहीं था। बल्कि एक सोचा-समझा अपराध था।

चुघ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “राहुल गांधी और इस काम में शामिल हर किसी को, चाहें वह समाजवादी पार्टी से हो या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से, पूरे देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सबके सामने माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था। राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

VHP नेता सुरेंदर गुप्ता ने भी गांधी और यादव की आलोचना की। इस विरोध को अश्लील प्रदर्शन बताया, जो सनातन धर्म और संतों का अपमान करता है। गुप्ता ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में संसद के बाहर ऐसा अश्लील प्रदर्शन किया गया। जिस तरह से दो ‘पप्पुओं’ ने सनातन और संतों का अपमान किया। उससे संतों के साथ-साथ हिंदू समुदाय में भी बहुत गुस्सा है।”

पप्पू यादव की सफाई

इस बीच, पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने न तो किसी संत को गाली दी और न ही उनका अपमान किया। यादव ने पीटीआई से कहा, “मैंने किसी को गाली नहीं दी। मैंने किसी संत का नाम नहीं लिया और न ही उनका अपमान किया। सनातन और इस देश के सौ करोड़ लोगों की आस्था की रक्षा के लिए हम एक लाख बार कुर्बानी देने को तैयार हैं। आप हमारे खिलाफ जितने चाहें मुकदमे कर लें और जितना चाहें हमला कर लें।” यादव बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं।

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‘सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल ₹18 करोड़ की चोरी’; राज ठाकरे का सनसनीखेज आरोप

Siddhivinayak Temple donations theft: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी होने का सनसनीखेज दावा किया है। MNS प्रमुख ने शनिवार 1 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं। मनसे की छात्र इकाई के एक कार्यक्रम में ठाकरे ने यह दावा भी किया कि अयोध्या के राम मंदिर में 1,400 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि निराश युवा मंदिरों में जाते हैं। लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को आठ न्यासियों द्वारा लिखा गया एक लेटर पढ़ते हुए ठाकरे ने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को न्यासियों की सतर्कता के कारण पकड़ लिया गया।

‘हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी’

ठाकरे ने कहा कि इस चोरी के पकड़े जाने से पहले मंदिर में दान से होने वाली साप्ताहिक आय 50 लाख रुपये से भी कम थी। लेकिन इसके बाद दान की राशि बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ठाकरे ने दावा किया, “हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी की गई है।”

9 कर्मचारी गिरफ्तार

इस बीच सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सदा सरवणकर ने पत्रकारों से कहा कि इस मामले में 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जहां भी आवश्यक था, हमने मामले दर्ज कर दिए हैं।” सरवणकर ने कहा कि दान में वृद्धि न्यास द्वारा किए गए प्रयासों के कारण हुई।

‘आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं’

अपनी पार्टी के छात्र विंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा, “आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं।” राज ठाकरे ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर बात करें। उन्होंने यह भी कहा, “निराश युवा मंदिरों में जाते हैं, लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से सुरक्षित नहीं हैं।”

सिद्धिविनायक मंदिर का ज़िक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण पकड़ा गया था। आठ ट्रस्टियों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए एक पत्र को पढ़कर उन्होंने बताया कि चोरी का पता चलने से पहले मंदिर की साप्ताहिक दान आय 50 लाख रुपये से कम थी। बाद में यह बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई।

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ठाकरे ने यह दावा अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चारी केारोपों के बाद आया है। अयोध्या में पुलिस ने राम मंदिर में दान की चोरी के मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभी जांच चल रही है। मुंबई में दिए गए इन बयानों ने मंदिर के दान को लेकर ठाकरे के आरोपों, सिद्धिविनायक मामले में की गई कार्रवाई और प्रधानमंत्री से जवाब की उनकी मांग पर ध्यान केंद्रित किया है।

Badrinath temple donation case: बद्रीनाथ दान घोटाला मामले में पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान गिरफ्तार, CCTV फुटेज में जेब में कैश रखते दिखने का दावा

Badrinath temple donation case: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने करीब चार घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन की जांच के बीच हुई है।

जांच एजेंसियां मंदिर प्रशासन से जुड़े कई लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। राजेंद्र चौहान इस मामले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल हैं। जांच के दौरान जुटाए गए CCTV फुटेज के आधार पर एसआईटी ने चौहान से पूछताछ की। जांचकर्ताओं का दावा है कि 22 जून, 25 जून और 29 जून की रिकॉर्डिंग में चौहान कथित तौर पर कैश के बंडल उठाकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी फुटेज के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

CCTV फुटेज से खुलासा

पुलिस ने बताया कि 25 जून और 29 जून के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कुछ और लोगों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। इन फुटेज के आधार पर एसआईटी ने अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान की है और जल्द ही उनसे भी पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है।

एसआईटी सभी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। फिलहाल, जांच एजेंसी ने किसी अन्य आरोपी के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन नए साक्ष्यों के सामने आने के बाद आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

SIT ने सौंपी रिपोर्ट

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की पड़ताल के लिए श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से गठित जांच दल ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। बीकेटीसी के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि चार-सदस्यीय दल ने 18 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

मंदिर समिति के सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें गणना के दौरान ड्रेस कोड लागू करना, मंदिर परिसर तथा गणना केंद्र के अछूते स्थानों को चिन्हित कर वहां नये सीसीटीवी कैमरे लगाना, निगरानी व्यवस्था को बेहतर एवं जवाबदेह बनाना और श्रद्धालुओं को गणना कार्य से जोड़ने की निश्चित प्रक्रिया तय करना शामिल है।

दो जुलाई को हेराफेरी का हुआ खुलासा

दो जुलाई को सोशल मीडिया पर मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद बीकेटीसी ने इस समिति का गठन किया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष कार्यालय में वैयक्तिक सहायक के तौर पर तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस में नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसकी जांच में साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफतार कर लिया गया।

मंदिर के चढ़ावे के रिकॉर्ड वाले रजिस्टर में ओवरराइटिंग पाए जाने के बाद इस काम में लगे खजांची संदेश मेहता को भी वहां से हटाकर अन्यत्र तबादला किया जा चुका है। इस बीच, मामले की पड़ताल कर रहा पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) बीकेटीसी के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के साथ ही अन्य लोगों के भी इसमें शामिल होने की आशंका का बारीकी से पता लगा रहा है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि चमोली के पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी सीसीटीवी कैमरों में दर्ज नौटियाल की पूर्व की संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। इसके अलावा, आरोपी के साथ ही इस मामले में अन्य लोगों के शामिल होने के पहलू की भी जांच की जा रही है, जिसके लिए पुराने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरों के पूर्व में डिलीट हो चुके रिकॉर्ड को रिकवर करने की दिशा में भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल के कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की जांच भी जारी है।

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Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

80 लाख रुपये, डॉलर, सोना और बाथरूम में छिपाया जाता था कैश…राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में बड़ा खुलासा!

Ram Mandir Donation Theft Row   :  अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दानपात्र में गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोपों ने राजनीतिक व धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। वहीं राम मंदिर चंदा चोरी के मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने तेज कर दी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकदी को कैसे छिपाया गया और मंदिर परिसर से बाहर कैसे ले जाया गया। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और  फॉरेन करेंसी बरामद हुई है।

बाथरूम में छिपाया चोरी की रकम

जांच में सामने आया है कि चोरी की रकम को छिपाने के लिए बाथरूम जैसी जगहों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद नकदी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला जाता था, ताकि किसी को शक न हो। जांच एजेंसियां अब तक करीब 80 लाख रुपये बरामद कर चुकी हैं। जांच के दौरान सबसे बड़ी बरामदगी अविनाश शुक्ला से जुड़े ठिकानों से हुई। पुलिस को उसके कमरे से 12 लाख रुपये नकद मिले, जबकि उसके भाई ने 8.40 लाख रुपये वापस जमा कराए।

पुलिस को अमेरिकी डॉलकर भी बरामद

इसके अलावा पुलिस ने 1,121 अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए। इनमें 100, 50, 20, 10, 5 और 1 डॉलर के नोट शामिल हैं। साथ ही करीब 159.54 ग्राम, 11.14 ग्राम और 3.44 ग्राम वजन के सोने और चांदी के गहने भी मिले हैं। पुलिस की बरामदगी सूची के अनुसार, अनुकल्प मिश्र के पास से 16.82 लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, लवकुश मिश्र के एसके लॉकर से 14.25 लाख रुपये नकद मिले।

आरोपियों के पास से ये चीजें बरामद

पुलिस ने रमाशंकर मिश्र के पास से 7.32 लाख रुपये नकद, सफेद धातु के दो सिक्के और चांदी की बिछिया बरामद की। वहीं, मनीष कुमार यादव से 2 लाख रुपये और करुणेश पांडे के पास से 18.07 लाख रुपये जब्त किए गए। जांच के दस्तावेजों के अनुसार, टिन्नू यादव के हॉस्टल के कमरे से नकदी सीधे बरामद हुई। वहीं, दूसरे आरोपियों से मिली रकम को शिकायतकर्ता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने पुलिस की औपचारिक कार्रवाई से पहले अपने लॉकर में सुरक्षित रख दिया था। टिन्नू यादव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रहे हैं।

अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।

 

Ram Mandir Donation Scam: कुंभ में लूटा गया सबसे ज्यादा राम मंदिर का चढ़ावा! जीजा-साले की जोड़ी ने उड़ाई बड़ी रकम

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अयोध्या पुलिस की जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी 2025 की शुरुआत में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ कुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरियों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसका फायदा उठाया और मिलीभगत करके एक बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

फिलहाल इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (जिन्हें टिन्नू यादव भी कहा जाता है) शामिल हैं। इन सभी से मंगलवार को कई घंटों तक पूछताछ की गई।

वहीं, पुलिस का दावा है कि पूरी साजिश सभी आठों आरोपियों ने मिलकर रची थी।

जीजा-साले की जोड़ी ने सबसे ज्यादा कैश चुराया

जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस जोड़ी ने चोरी के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। अब तक पुलिस ने इन दोनों से जुड़ी आधी दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी का पता लगाया है।

पैसे के लेन-देन की जांच के लिए, अयोध्या पुलिस अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर आरोपी की संपत्ति और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की विस्तृत जांच के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती SBI की देखरेख में होती है, जो इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को नियुक्त करता है। मंदिर में आने वाले दान को चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और इसकी गिनती 14 लोगों की एक टीम करती है, जिसमें बैंक के 11 कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन सदस्य शामिल होते हैं।

इस बीच, पुलिस ने बताया कि इस मामले में सबसे ज्यादा नकद राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी कौशालपुरी की एक जगह से बरामद की गई थी। यह जगह उसके भाई अभिषेक से जुड़े एक योग केंद्र की है।

योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को सेंटर की तलाशी ली और भारी मात्रा में कैश बरामद किया। उन्होंने कहा कि वहां अभिषेक के चार बक्से रखे हुए थे, जिनमें कंबल के अंदर पैसे छिपाकर रखे गए थे। एक बक्से पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

सीमा तिवारी के मुताबिक, जब अभिषेक से छापेमारी और कैश के बारे में पूछताछ की गई, तो उसने दावा किया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला ड्रग्स के धंधे में शामिल है और इसी वजह से छापेमारी हुई।

आरोपियों के घरों से कैश बरामद

वहीं, जांच अब सभी आरोपियों के घरों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने तीन दिन पहले तलाशी ली और टिन्नू यादव के घर से कैश बरामद किया, जो पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है।

सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर में मिले दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक स्टाफ के पास रहती थी। सूत्रों ने आगे बताया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फंड का कथित तौर पर गबन किया गया और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे आपस में बांट लिए गए।

इसके साथ ही, पुलिस ने सभी आरोपियों की चल और अचल संपत्ति से जुड़े बैंक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी इकट्ठा किए हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले एक साल के उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से कथित तौर पर ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी ज्ञात आय से कहीं ज़्यादा थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि, इस मामले में सबसे ज्यादा कैश की बरामदगी 89 लाख रुपये की हुई, जो आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा कथित तौर पर जगह बताने के बाद की गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने यह रकम बरामद कर ली थी।

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फार्महाउस, स्कॉर्पियो और 65 लाख का घर….कौन है अनुकल्प मिश्रा? जिसपर है राम मंदिर चढ़ावे में घपला करने का आरोप

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एक और नया मामला सामने आया है। पुलिस अब अनुकल्प मिश्रा की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को शक है कि भक्तों के चढ़ावे की कथित चोरी में वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अनुकल्प की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी और हाल की खरीदारी के लिए मंदिर के दान का पैसा इस्तेमाल किया गया था। गौरतलब है कि इस वित्तीय जांच का मकसद आरोपी से जुड़े संदिग्ध पैसों के लेन-देन का पता लगाना है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मंदिर में नकद दान की गिनती करने वाली आउटसोर्स टीम का हिस्सा था और कथित तौर पर उसने इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई थी।

फार्महाउस, मकान और एसयूवी की जांच जारी

जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अनुकल्प ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अपने साले लवकुश मिश्रा को भी उसी नकदी गिनती टीम में शामिल करवाया था। ये दोनों इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में शामिल हैं।

बता दें कि जांच के सिलसिले में पुलिस अयोध्या जिले में अनुकल्प के पैतृक गांव बसावा गई।अधिकारियों ने पाया कि उसका घर आस-पास के घरों की तुलना में काफी आलीशान था। गांव वालों ने जांचकर्ताओं को बताया कि पिछले कुछ सालों में परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई है।

पुलिस इस बाद की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या अनुकल्प ने हाल ही में गांव के बाहरी इलाके में एक फार्महाउस बनवाया था और पिछले साल अयोध्या में एक घर खरीदा था, जिसकी कीमत कथित तौर पर लगभग 65 लाख रुपये थी। साथ ही उन दावों की भी जांच की जा रही है वह महिंद्रा स्कॉर्पियो SUV खरीदने की प्रक्रिया में था।

जांच का एक अहम हिस्सा 30 अप्रैल को अनुकल्प द्वारा अपने गांव में कथित तौर पर आयोजित सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम भी है। पुलिस इस कार्यक्रम में हुए खर्च और इस्तेमाल किए गए फंड के स्रोत की पुष्टि कर रही है, क्योंकि राम मंदिर प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ लोगों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों सहित कई प्रमुख हस्तियां इस कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।

वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी

जांचकर्ता लवकुश मिश्रा के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा की सिफारिश पर राम मंदिर में दान गिनने वाली टीम में शामिल हुआ था। इसके अलावा, पुलिस उन दावों की भी जांच कर रही है कि लवकुश ने हाल ही में 1 लाख रुपये से ज्यादा की मोटरसाइकिल खरीदी थी, जबकि बताया जाता है कि वह किराए के मकान में रहता है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों के बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड, निवेश, संपत्ति और खर्च करने के तरीकों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से ज्यादा हैं।

जांच करने वालों ने कहा कि यह कवायद इस बात का पता लगाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है कि क्या कथित तौर पर दान की चोरी से मिली रकम को चल या अचल संपत्ति में निवेश किया गया था। पुलिस ने संकेत दिया है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया इस बात का पता लगाने के लिए की जा रही है कि क्या कथित दान चोरी से मिले पैसे को चल या अचल संपत्तियों में लगाया गया था। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में राम शंकर यादव उर्फ ​​टीनू यादव, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, राम शंकर यादव (उर्फ टिन्नू) राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी और पूर्व ड्राइवर रहे हैं। मनीष यादव, टिन्नू का भतीजा बताया जाता है और वह दान गिनने के काम में शामिल था।

सुभाष श्रीवास्तव बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं जिन्होंने कैश की गिनती की देखरेख की थी, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जो मंदिर के दान और कीमती सामान का काम संभालते थे।

पुलिस ने बताया कि राम मंदिर के दान (जिसमें कैश और कीमती सामान शामिल था) की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद इन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं ने कहा कि जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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Who is Champat Rai: प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के पावरफुल सेक्रेटरी बनने तक, जानें चंदा चोरी विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले चंपत राय की पूरी कहानी

Ram Mandir Donation Theft Controversy: अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर दान चोरी विवाद के तूल पकड़ने के बाद उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।

इस विवाद को लेकर अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक हुई, जिसके ठीक बाद चंपत राय के इस्तीफे की खबर आई। वीएचपी इस पूरे विवाद से संगठन की छवि को हो रहे नुकसान को लेकर बेहद चिंतित थी। आइए जानते हैं चंपत राय के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी और एक केमिस्ट्री टीचर से राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचने का उनका पूरा सफरनामा।

क्यों देना पड़ा चंपत राय को इस्तीफा?

सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में दान विवाद को लेकर FIR दर्ज होने से ठीक पहले वीएचपी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव के साथ-साथ वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बागरा और केंद्रीय संगठनात्मक सचिव मिलिंद परांडे समेत कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए थे।

इस बैठक में एसआईटी जांच और दान विवाद से उपजे हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। चूंकि चंपत राय वीएचपी और राम मंदिर आंदोलन का एक बेहद प्रभावशाली चेहरा रहे हैं, इसलिए उनके इर्द-गिर्द खड़े हुए इस विवाद से संगठन की साख पर आंच आ रही थी। मामले में आरोपी टीनू यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी लवकुश और अनुकल्प, अनिल मिश्रा के करीबी माने जा रहे हैं। इसी दबाव के बीच चंपत राय ने पद छोड़ने का फैसला किया।

कौन हैं चंपत राय? केमिस्ट्री टीचर से ट्रस्ट के महासचिव बनने का सफर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल चंपत राय की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है।

चंपत राय का जन्म वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। वह बचपन के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित थे और संघ से जुड़ गए थे। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना और बिजनौर के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।

साल 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब चंपत राय को 1977 में उनके कॉलेज से ही गिरफ्तार कर लिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन और संघ की गतिविधियों से जुड़ाव के कारण उन्हें 18 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने वापस कॉलेज जाने के बजाय पूरी तरह समाज सेवा और संगठन को अपना जीवन समर्पित कर दिया और साल 1980 में आधिकारिक रूप से वीएचपी में शामिल हो गए।

शंकराचार्य ने भी की थी हटाने की मांग, खड़ा हुआ था विवाद

यह पहली बार नहीं है जब चंपत राय विवादों या चर्चाओं में रहे हैं। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी वह तब विवादों में आए थे जब उत्तर पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की थी।

शंकराचार्य का तर्क था कि चंपत राय ‘रामानंदी’ संप्रदाय से नहीं आते हैं, इसलिए वह इस धार्मिक ट्रस्ट के प्रमुख या महासचिव पद पर रहने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने ट्रस्ट पर रामानंदी संप्रदाय की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया था।

चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एसआईटी (SIT) इस समय दान चोरी मामले की बारीकी से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की हो सकती है गिरफ्तारी!

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।

सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) टिन्नू यादव, दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर सकती है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ केस दर्ज होने की संभावना है और आगे चलकर गिरफ्तारी भी हो सकती है।

पत्नी ने आरोपों को बताया साजिश

टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनके पति की छवि खराब करने की साजिश बताया है।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार को पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और बिना किसी ठोस सबूत के तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पूनम यादव के मुताबिक, उनके पास मौजूद संपत्तियों और घर को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनका घर 2008 में खरीदा गया था और 2015 में बनाया गया था, जब राम मंदिर पर फैसला भी नहीं आया था।

क्या चंपत राय ट्रस्ट से हट सकते हैं?

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय समेत ट्रस्ट के कुछ अन्य पदाधिकारी स्वेच्छा से अपनी जिम्मेदारियों से अलग होने पर विचार कर सकते हैं। इसमें ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

इसके अलावा, जिन पदाधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण दान चोरी का मामला सामने आया, उन्हें ट्रस्ट से हटाया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर दान चोरी मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को कथित तौर पर नकली वस्तुओं से बदल दिया गया। साथ ही नकदी में भी गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगे हैं।

जांच एजेंसियां दान के रिकॉर्ड, आभूषणों के रखरखाव और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े होने के कारण इस मामले ने व्यापक जनचर्चा और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों की ओर से अभी अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को कथित माना जा रहा है।