विपक्षी पार्टियां अलग अलग लड़ रही हैं

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को स्थगित कराने के लिए विपक्ष ने साझा कार्य योजना बनाई थी लेकिन तीन दिन के बाद ऐसा दिख रहा है कि सब अलग अलग लड़ रहे हैं। सबके प्रदर्शन अलग अलग हो रहे हैं। पहले दिन यानी दो अक्टूबर को कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के छात्रों ने जंतर मंतर पर लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन का समर्थन किया लेकिन किसी ने उनका नाम नहीं लिया। इसलिए अगले दिन यानी तीन अक्टूबर को एनएसयूआई ने जगह बदल दी। लेफ्ट और आप के नेता कुछ सिविल सोसायटी के लोगों के साथ जंतर मंतर पहुंचे तो एनएसयूआई के छात्र और नेता इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। तभी ने तो जंतर मंतर के प्रदर्शन का कोई माहौल बना और न इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन को किसी ने तवज्जो दी। ऐसे ही मुंबई में रविवार, चार अक्टूबर को उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे के साथ मिल कर प्रदर्शन किया। दो अक्टूबर को उद्धव सीजेपी के प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे।

सोचें, 30 सितंबर को दिल्ली में हुई ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस और लेफ्ट दोनों के नेता शामिल थे। उसमें एक साथ दो से आठ अक्टूबर तक प्रदर्शन करने का फैसला किया। यह भी तय किया गया कि छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा, जिसमें सभी पार्टियों के सभी बड़े नेता शामिल होंगे। इस बैठक में जो पार्टियां नहीं शामिल हुईं या जिनको नहीं बुलाया गया। उनकी बात अलग है। आम आदमी पार्टी को नहीं बुलाया गया था। इसलिए अगर उसके नेता अलग प्रदर्शन करते हैं तो कांग्रेस को आपत्ति नहीं है। इसी तरह कॉकरोच जनता पार्टी तो अभी पार्टी भी नहीं है। इसलिए उसके लिए लोग अलग प्रदर्शन कर रहे हैं तो उससे भी कांग्रेस को समस्या नहीं है।

लेकिन अगर लेफ्ट पार्टियों के नेता अलग प्रदर्शन करते हैं या उद्धव ठाकरे की शिव सेना अलग प्रदर्शन करती है तो यह विपक्षी एकता के लिए ठीक नहीं है। कांग्रेस नेता इस बात से आहत हैं कि लेफ्ट के बड़े नेता आम आदमी पार्टी के साथ मिल कर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं तो उद्धव व आदित्य ठाकरे ने सीजेपी के आंदोलन में हिस्सा लिया। उद्धव और आदित्य ठाकरे दो अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब तक कांग्रेस का साथ देने वाले सिविल सोसायटी और फिल्म बिरादरी के लोग भी सीजेपी या लेफ्ट के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस के प्रदर्शन में उसकी सहयोगी राजद के नेता भी नहीं शामिल हो रहे हैं।

ज्ञानेश है भाजपा का हथियारः उद्धव

मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ‘हथियार’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की।

सीईसी और एसआईआर के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में हजारों लोग शामिल हुए। मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि अगर एसआईआर मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए कराया गया था तो सरकार बताए कि देश में अवैध रूप से रह रहे कितने बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘ज्ञानेश कुमार भाजपा का हथियार हैं।’

निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कवायद में पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोजन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।’

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने दावा किया, ‘भाजपा को समझ लेना चाहिए कि लोग आज शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए तो वे उसका सिंहासन जला देंगे।’

उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को ‘चुराने’ का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी ‘चुराने’ का आरोप लगाया।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करने को लेकर उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।

उद्धव ने दावा किया, ‘यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।’ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश में भविष्य के चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से ही राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित ‘अनियमितताओं’ के बारे में बताते रहे हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से इन मुद्दों के स्पष्ट होने तक चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह भी किया था।

दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च कुछ ही दूरी तय कर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय पहुंचा। एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।

मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए दीपके ने कहा, ‘अब या कभी नहीं।’

कांग्रेस को अकेला छोड़ रहे हैं सहयोगी

दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर देश के अलग अलग हिस्सो में खूब प्रदर्शन और आंदोलन हुए। दिल्ली से लेकर मुंबई तक हजारों लोग सड़कों पर उतरे। महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन कर और तिरंगा हाथ में लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया। लेकिन गांधी की विरासत का दावा करने वाली कांग्रेस इससे नदारद रही। कांग्रेस ने अपनी कार्य समिति की बैठक में और उसके अगले दिन विपक्षी गठबंधन की बैठक में यह तय जरूर किया कि दो अक्टूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होगा, जो आठ अक्टूबर तक चलेगा। लेकिन कांग्रेस ने दो अक्टूबर के लिए कोई निश्चित योजना नहीं बनाई। कांग्रेस ने तय कराया कि छह अक्टूबर को दिल्ली में निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा। हो सकता है कि छह अक्टूबर को भी भीड़ जुटे और कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियां अपने संसाधनों से आंदोलन को सफल बनाने का प्रयास करें। लेकिन दो अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन ज्यादा व्यस्थित और स्वंयस्फूर्त दिख रहा था। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों ने दो अक्टूबर के आंदोलन को कामयाब बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता जरूर सक्रियता दिखा रहे थे लेकिन मूल रूप से आंदोलन लेफ्ट का था। लेफ्ट की तीनों पार्टियों सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई माले के छात्र संगठनों ने आंदोलन की प्लानिंग की थी। एक दिन पहले एक अक्टूबर को जंतर मंतर पर जाकर नेहा बोरा ने वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाला। उसके बाद लेफ्ट के छात्र संघों एआईएसएफ, एसएफआई और आईसा ने लोग जुटाए। यह अलग बात है कि आम आदमी पार्टी के सौरव भारद्वाज, संजीव झा आदि सुबह ही जंतर मंतर पहुंच गए और क्रेडिट लेने का प्रयास किया। हो सकता है कि आप के लोग भी जंतर मंतर के आसपास या कनॉट प्लेस में जुटे हों लेकिन मूल रूप से लेफ्ट औऱ सिविल सोसायटी का आंदोलन था। कांग्रेस के छात्र संघ एनएसयूआई के छात्र भी इसमें शामिल थे लेकिन किसी ने उनको क्रेडिट नहीं दिया। इसे सीपीएम महासचिव एमए बेबी की अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाकात से भी जोड़ कर देख सकते हैं। आप और लेफ्ट इस समय ज्यादा बॉन्डिंग दिखा रहे हैं।

ऐसे ही मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने आंदोलन का ऐलान किया तो उद्धव ठाकरे की पार्टी उसमें शामिल हो गई। शिवाजी पार्क में सीजेपी ने उद्धव की पार्टी की मदद से अच्छी भीड़ जुटा ली। सुबह दिल्ली में आंदोलन शुरू हुआ तो शाम चार बजे से मुंबई में सीजेपी ने प्रदर्शन किया। उसमें शामिल होने के लिए आदित्य़ ठाकरे कुछ फिल्मी कलाकारों के साथ पहुंचे तो बाद में उद्धव ठाकरे भी पहुंचे। बड़ी संख्या में फिल्मी कलाकार भी आंदोलन का हिस्सा बने। ध्यान रहे 30 सितंबर की बैठक में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को नसीहत दी थी कि वह एकला चलो का रवैया छोड़े लेकिन दो अक्टूबर को खुद ही कांग्रेस से अलग सीजेपी के आंदोलन में शामिल हो गए। उनका अपना आंदोलन चार अक्टूबर को होना है, जिसकी घोषणा उन्होंने कांग्रेस के साथ मिल कर नहीं की है, बल्कि मनसे के नेता और अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ मिल कर की है। यह आंदोलन भी विपक्ष की बैठक में तय हुए प्रदर्शन से अलग है। कांग्रेस ने विपक्ष की बैठक में बनी सहमति के आधार पर कई राज्यों में प्रदर्शन किए लेकिन हर जगह वह अकेले ही दिखी। पटना में महागठबंधन के नाम पर प्रदर्शन हुआ, जिसमें कांग्रेस के सारे बड़े नेता शामिल हुए पर राजद के प्रमुख तेजस्वी यादव नदारद रहे।

उद्धव और राज ठाकरे करेंगे प्रदर्शन

मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानियों और एसआईआर में गड़बड़ी के खिलाफ महाराष्ट्र में रविवार, चार अक्टूबर को एक बड़ा प्रदर्शन होगा। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मंगलवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। चुनाव आयोग के खिलाफ यह प्रदर्शन रविवार को भायखाला से शुरू होगा और बीएमसी मुख्यालय तक जाएगा। उद्धव ठाकरे की शिव सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बताया है कि इस प्रदर्शन की तैयारियों के कारण उद्धव बुधवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली नहीं जा रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़ेंगे।

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में 18 करोड़ की दान चोरी! जांच के लिए सरकार के पास पहुंची मंदिर ट्रस्ट

मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मंदिर के दान-पात्रों से कथित नकदी चोरी की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि इस मामले से मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हो सकता है। 21 अप्रैल 2026 को लिखे गए इस पत्र में मंदिर ट्रस्ट के लोगों ने कहा है कि कैश चोरी के आरोप में कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर के दान-पात्रों में हर सप्ताह जमा होने वाली रकम में अचानक बड़ी बढ़ोतरी हुई। उनका कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से दान की रकम में गड़बड़ी की जा रही थी।

जांच के दिए  गए आदेश

ट्रस्टियों ने यह भी मांग की है कि इस मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। उनका कहना है कि उन्हें यह मानने के ठोस कारण हैं कि यह मामला केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता। वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन ने कहा कि, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दान की ऑडिट की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर ट्रस्ट ने सरकार ने मांग

पत्र में ट्रस्टियों ने कहा है कि आरोपी कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पहले मंदिर के दान-पात्रों से हर सप्ताह 50 लाख रुपये से भी कम दान मिलता था। लेकिन कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद लगातार तीन हफ्तों तक हर बुधवार को दान की राशि बढ़कर करीब 1.5 करोड़ रुपये पहुंच गई। ट्रस्ट के लोगों का आरोप है कि इससे यह संकेत मिलता है कि दान-पात्रों में जमा होने वाली रकम का बड़ा हिस्सा गिनती से पहले ही निकाल लिया जाता था। उनका कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हो सकता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका होने की भी आशंका है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जानी चाहिए।

ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से पूरे मामले की उच्च स्तरीय सरकारी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में मंदिर प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जानी चाहिए। अतुल लोधे, भास्कर राउत, महेश मुरलीधर, जितेंद्र राउत, मीना कांबले, मंगला तुपे, गोपाल दलवी और सुदर्शन सांगले के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कहा गया है कि पिछले करीब डेढ़ साल में ट्रस्ट बोर्ड ने कई प्रशासनिक सुधार किए हैं। इन कदमों की वजह से मंदिर की आय में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

राज ठाकरे ने उठाया मुद्दा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी सिद्धिविनायक मंदिर में दान की कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने शनिवार को पार्टी की छात्र शाखा के एक कार्यक्रम में ट्रस्टियों के पत्र के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की दान राशि की कथित हेराफेरी हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में भी 1,400 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए। राज ठाकरे ने कहा, “कई निराश और परेशान लोग आस्था के साथ मंदिरों में जाते हैं, लेकिन अगर मंदिरों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगें, तो यह बेहद गंभीर बात है।”

अबतक 9 लोगों की हुई गिरफ्तारी

सिद्धिविनायक मंदिर में दान की कथित गड़बड़ी के मामले में अब तक नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इस बात की पुष्टि मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने की है। सदा सरवणकर ने पत्रकारों से कहा कि जहां-जहां जरूरत थी, वहां मामले दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दान की कथित हेराफेरी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

‘सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल ₹18 करोड़ की चोरी’; राज ठाकरे का सनसनीखेज आरोप

Siddhivinayak Temple donations theft: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी होने का सनसनीखेज दावा किया है। MNS प्रमुख ने शनिवार 1 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं। मनसे की छात्र इकाई के एक कार्यक्रम में ठाकरे ने यह दावा भी किया कि अयोध्या के राम मंदिर में 1,400 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि निराश युवा मंदिरों में जाते हैं। लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को आठ न्यासियों द्वारा लिखा गया एक लेटर पढ़ते हुए ठाकरे ने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को न्यासियों की सतर्कता के कारण पकड़ लिया गया।

‘हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी’

ठाकरे ने कहा कि इस चोरी के पकड़े जाने से पहले मंदिर में दान से होने वाली साप्ताहिक आय 50 लाख रुपये से भी कम थी। लेकिन इसके बाद दान की राशि बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ठाकरे ने दावा किया, “हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी की गई है।”

9 कर्मचारी गिरफ्तार

इस बीच सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सदा सरवणकर ने पत्रकारों से कहा कि इस मामले में 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जहां भी आवश्यक था, हमने मामले दर्ज कर दिए हैं।” सरवणकर ने कहा कि दान में वृद्धि न्यास द्वारा किए गए प्रयासों के कारण हुई।

‘आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं’

अपनी पार्टी के छात्र विंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा, “आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं।” राज ठाकरे ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर बात करें। उन्होंने यह भी कहा, “निराश युवा मंदिरों में जाते हैं, लेकिन मंदिर भी भ्रष्टाचार से सुरक्षित नहीं हैं।”

सिद्धिविनायक मंदिर का ज़िक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि दान पेटी से पैसे चुराने वाले कुछ कर्मचारियों को ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण पकड़ा गया था। आठ ट्रस्टियों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए एक पत्र को पढ़कर उन्होंने बताया कि चोरी का पता चलने से पहले मंदिर की साप्ताहिक दान आय 50 लाख रुपये से कम थी। बाद में यह बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई।

ये भी पढ़ें- रेप की धमकियों से डरी नोएडा की लड़की की मां, पीएम मोदी से की भावुक अपील, बोलीं- ‘मेरी बेटी को गोद ले लीजिए’

ठाकरे ने यह दावा अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चारी केारोपों के बाद आया है। अयोध्या में पुलिस ने राम मंदिर में दान की चोरी के मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभी जांच चल रही है। मुंबई में दिए गए इन बयानों ने मंदिर के दान को लेकर ठाकरे के आरोपों, सिद्धिविनायक मामले में की गई कार्रवाई और प्रधानमंत्री से जवाब की उनकी मांग पर ध्यान केंद्रित किया है।