Badrinath temple donation case: बद्रीनाथ दान घोटाला मामले में पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान गिरफ्तार, CCTV फुटेज में जेब में कैश रखते दिखने का दावा

Badrinath temple donation case: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने करीब चार घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन की जांच के बीच हुई है।

जांच एजेंसियां मंदिर प्रशासन से जुड़े कई लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। राजेंद्र चौहान इस मामले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल हैं। जांच के दौरान जुटाए गए CCTV फुटेज के आधार पर एसआईटी ने चौहान से पूछताछ की। जांचकर्ताओं का दावा है कि 22 जून, 25 जून और 29 जून की रिकॉर्डिंग में चौहान कथित तौर पर कैश के बंडल उठाकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी फुटेज के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

CCTV फुटेज से खुलासा

पुलिस ने बताया कि 25 जून और 29 जून के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कुछ और लोगों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। इन फुटेज के आधार पर एसआईटी ने अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान की है और जल्द ही उनसे भी पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है।

एसआईटी सभी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। फिलहाल, जांच एजेंसी ने किसी अन्य आरोपी के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन नए साक्ष्यों के सामने आने के बाद आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

SIT ने सौंपी रिपोर्ट

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की पड़ताल के लिए श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से गठित जांच दल ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। बीकेटीसी के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि चार-सदस्यीय दल ने 18 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

मंदिर समिति के सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें गणना के दौरान ड्रेस कोड लागू करना, मंदिर परिसर तथा गणना केंद्र के अछूते स्थानों को चिन्हित कर वहां नये सीसीटीवी कैमरे लगाना, निगरानी व्यवस्था को बेहतर एवं जवाबदेह बनाना और श्रद्धालुओं को गणना कार्य से जोड़ने की निश्चित प्रक्रिया तय करना शामिल है।

दो जुलाई को हेराफेरी का हुआ खुलासा

दो जुलाई को सोशल मीडिया पर मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद बीकेटीसी ने इस समिति का गठन किया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष कार्यालय में वैयक्तिक सहायक के तौर पर तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस में नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसकी जांच में साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफतार कर लिया गया।

मंदिर के चढ़ावे के रिकॉर्ड वाले रजिस्टर में ओवरराइटिंग पाए जाने के बाद इस काम में लगे खजांची संदेश मेहता को भी वहां से हटाकर अन्यत्र तबादला किया जा चुका है। इस बीच, मामले की पड़ताल कर रहा पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) बीकेटीसी के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के साथ ही अन्य लोगों के भी इसमें शामिल होने की आशंका का बारीकी से पता लगा रहा है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि चमोली के पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी सीसीटीवी कैमरों में दर्ज नौटियाल की पूर्व की संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। इसके अलावा, आरोपी के साथ ही इस मामले में अन्य लोगों के शामिल होने के पहलू की भी जांच की जा रही है, जिसके लिए पुराने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरों के पूर्व में डिलीट हो चुके रिकॉर्ड को रिकवर करने की दिशा में भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल के कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की जांच भी जारी है।

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राम मंदिर दान चोरी केस में बड़ा खुलासा! आरोपी ने रिश्तेदारों पर उड़ाए 19 लाख, खरीदी SUV

Ram Mandir : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बैठक के बीच इस मामले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कथित तौर पर निकाले गए पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

आरोपी ने किया बड़ा खुलासा

इस मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान पैसों के खर्च से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने बताया कि कथित तौर पर करीब 19 लाख रुपये अपने रिश्तेदारों और परिचितों पर खर्च किए गए। उसने यह भी बताया कि लगभग 6 लाख रुपये एक भाई की शादी में खर्च हुए, 5 से 6 लाख रुपये दूसरे भाई को दिए गए और करीब 3.5 लाख रुपये में एक मारुति ब्रेज़ा कार खरीदी गई।

दोस्त के खाते में ट्रांसफर किए पैसे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर अपने एक दोस्त के खाते में करीब 2.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। इतना ही नहीं, उसने उसी दोस्त को एक महंगा मोबाइल फोन भी गिफ्ट में दिए थे। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ छोटी-छोटी रकम कई अन्य लोगों में भी बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये जानकारियां तब सामने आईं जब पुलिस ने 24 घंटे की रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला से करीब 13 घंटे तक लगातार पूछताछ की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूछताछ से उन्हें कई अहम सुराग मिले हैं।

जांच के दौरान मिले अमेरिकी डॉलर

जांच के दौरान पुलिस अविनाश शुक्ला को कई जगहों पर भी लेकर गई। इनमें कौशलपुरी का एक योग केंद्र और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्ला ने उन स्थानों की भी पहचान की, जहां कथित तौर पर दान की रकम आपस में बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने और चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक गाड़ी जब्त की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि UP42AP6054 नंबर की मारुति ब्रेज़ा कार कथित तौर पर दान की हेराफेरी से मिले पैसों से खरीदी गई थी। हालांकि, इस कार का पंजीकरण अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के नाम पर कराया गया था।

अब तक आठ लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।