कौन हैं जगदीश अफले? IIT बॉम्बे से पढ़े इंजीनियर को राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव नियुक्त किया गया

Jagdish Aphale: राम मंदिर में दान में मिले सामान की कथित चोरी के विवाद के बीच, बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जगदीश अफले को अपना पहला सेक्रेटरी नियुक्त किया है। News 18 के अनुसार, अफले रोजाना के कामकाज की देखरेख करेंगे। हालांकि, अफले की नियुक्ति पर 2 सितंबर को ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव मीटिंग में औपचारिक रूप से मुहर लगाई जाएगी।

राम मंदिर ट्रस्ट ने बनाया पहला सेक्रेटरी पद

राम मंदिर में कथित चांदी चोरी मामले को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच ट्रस्ट ने सचिव का नया पद बनाया है। यह पद सीईओ (CEO) के पद से अलग होगा। सीईओ पद के लिए जहां ट्रस्ट ने पहले सार्वजनिक रूप से आवेदन मांगे थे और इसके लिए एक तय जॉब डिस्क्रिप्शन जारी किया गया था, वहीं सचिव की नियुक्ति ट्रस्ट की कार्यकारिणी समिति के फैसले के आधार पर की गई है।

जगदीश अफले कौन हैं?

पुणे के रहने वाले जगदीश अफले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT) के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर ट्रेनिंग ली है। उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech और MTech की डिग्री है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर अफले ने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह उस मुख्य इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा थे, जिसने नींव के काम से लेकर सुपरस्ट्रक्चर तक के प्रोजेक्ट को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि अफले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और कई सालों से संगठन से जुड़े हुए हैं।

रिटायरमेंट के बाद भारत लौटने से पहले, अफले ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम किया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने यूरोप और अमेरिका में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं हैं।

अब जगदीश अफले अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को रिपोर्ट करेंगे और ट्रस्ट में एक पदाधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

राम मंदिर दान चोरी मामले में ताजा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए IGP किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यों वाली SIT के गठन का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि “सुधारात्मक कदम उठाने होंगे” और “पारदर्शिता सुनिश्चित करने” के लिए कदम उठाए जाएंगे। बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाएगा।

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कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

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राम मंदिर दान चोरी केस में बड़ा खुलासा! आरोपी ने रिश्तेदारों पर उड़ाए 19 लाख, खरीदी SUV

Ram Mandir : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बैठक के बीच इस मामले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कथित तौर पर निकाले गए पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

आरोपी ने किया बड़ा खुलासा

इस मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान पैसों के खर्च से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने बताया कि कथित तौर पर करीब 19 लाख रुपये अपने रिश्तेदारों और परिचितों पर खर्च किए गए। उसने यह भी बताया कि लगभग 6 लाख रुपये एक भाई की शादी में खर्च हुए, 5 से 6 लाख रुपये दूसरे भाई को दिए गए और करीब 3.5 लाख रुपये में एक मारुति ब्रेज़ा कार खरीदी गई।

दोस्त के खाते में ट्रांसफर किए पैसे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर अपने एक दोस्त के खाते में करीब 2.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। इतना ही नहीं, उसने उसी दोस्त को एक महंगा मोबाइल फोन भी गिफ्ट में दिए थे। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ छोटी-छोटी रकम कई अन्य लोगों में भी बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये जानकारियां तब सामने आईं जब पुलिस ने 24 घंटे की रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला से करीब 13 घंटे तक लगातार पूछताछ की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूछताछ से उन्हें कई अहम सुराग मिले हैं।

जांच के दौरान मिले अमेरिकी डॉलर

जांच के दौरान पुलिस अविनाश शुक्ला को कई जगहों पर भी लेकर गई। इनमें कौशलपुरी का एक योग केंद्र और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्ला ने उन स्थानों की भी पहचान की, जहां कथित तौर पर दान की रकम आपस में बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने और चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक गाड़ी जब्त की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि UP42AP6054 नंबर की मारुति ब्रेज़ा कार कथित तौर पर दान की हेराफेरी से मिले पैसों से खरीदी गई थी। हालांकि, इस कार का पंजीकरण अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के नाम पर कराया गया था।

अब तक आठ लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।

राम मंदिर दान चोरी में बड़ा खुलासा! हर दिन 6 से 8 लाख रुपये के गबन का शक…SIT कर रहीं जांच

अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच चढ़ावा चोरी को लेकर भी कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर में मिले दान में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का मानना है कि हर दिन करीब 6 लाख से 8 लाख रुपये का गबन हुआ हो सकता है। यह अनुमान पूछताछ के दौरान बैंक अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर लगाया गया है।

 हर दिन 6 से 8 लाख रुपये के गबन का शक

रिपोर्ट के अनुसार, बैंक अधिकारियों ने जांच टीम को बताया कि कथित गड़बड़ी सामने आने से पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में रोजाना करीब 16 से 18 लाख रुपये जमा होते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद मंदिर के बैंक खातों में रोजाना जमा होने वाली दान की रकम बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये तक पहुंच गई। इसी अंतर के आधार पर जांच टीम का अनुमान है कि पहले हर दिन करीब 6 से 8 लाख रुपये के दान में गड़बड़ी हो रही थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि शुक्रवार को एसआईटी ने बैंक अधिकारियों और मंदिर के दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की।

जांच टीम ने ट्रस्ट और बैंक के बीच तय नियमों का पालन नहीं होने पर जवाब मांगा। अधिकारियों से पूछा गया कि तय प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया और अगर कोई गड़बड़ी दिख रही थी, तो इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। जांचकर्ताओं ने यह सवाल भी उठाया कि मंदिर की सुरक्षा के लिए नियुक्त निजी सुरक्षा एजेंसी को दान की नकदी गिनने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई।

बैंक कर्मचारियों की भी हो रही जांच

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और SBI के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी निष्कर्ष देगी। अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर में मिलने वाले नकद दान की गिनती एसबीआई की देखरेख में होती है। इसके लिए बैंक एक निजी एजेंसी की मदद लेता है। मंदिर के चार दान पात्रों से निकली रकम की गिनती 14 लोगों की टीम करती है, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के 3 प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

जांच में सामने आई ये बात

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी और इस मामले के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते थे। उनकी जिम्मेदारी थी कि दान पात्रों से निकाली गई नकदी सुरक्षित तरीके से गिनती वाले कमरे तक पहुंचे और फिर उसे एसबीआई को सौंपा जाए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मंदिर में चढ़ाए गए आभूषणों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था, जिससे उनकी चोरी की आशंका बढ़ जाती थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित गड़बड़ी का पता पहली बार फरवरी में चला। बताया गया कि गिनती करने वाली टीम के एक सदस्य ने सुभाष श्रीवास्तव को बताया था कि गिनती के दौरान पैसे चोरी किए जा रहे हैं। आरोप है कि इस पर श्रीवास्तव ने कहा, “भगवान सब देख रहे हैं, यह न तो आपके घर से जा रहा है और न ही मेरे घर से।” इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल हैं।

मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपी अविनाश शुक्ला को भीकापुर के पास 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित एक पार्क में लेकर गई। अविनाश ने पूछताछ में बताया था कि कथित तौर पर चोरी किए गए पैसों का बंटवारा इसी जगह पर किया गया था। वहीं, एसआईटी ने शुक्रवार को दूसरी बार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा व गोपाल राव से भी पूछताछ की। आरोप लगने के बाद तीनों ने ट्रस्ट के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। जांच अधिकारियों ने तीनों से उनकी चल और अचल संपत्ति, आय के स्रोत और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के बारे में सवाल किए। इसके अलावा मंदिर निर्माण और जमीन खरीद में कथित कमीशन लेने तथा कुछ लोगों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से खास तौर पर इन्हीं आरोपों पर विस्तार से पूछताछ की गई।