Iran Kuwait Conflict: ईरान के हमले से कुवैत के पावर प्लांट में लगी भीषण आग, अमेरिका ने भी तेज किए वार। देखें वीडियो

Iran Kuwait Conflict: कुवैत में रविवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब ईरान ने अल-सुबिया पावर जनरेशन और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। बता दें कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका ने लगातार नौवीं बार रात को ईरान के ठिकानों पर हमले किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अल-सुबिया प्लांट से उठता हुआ काला धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। ये वीडियो ओपन सोर्स इंटेल समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा शेयर किए गए हैं।

वहीं, ईरान के इस हमले पर कुवैत की सेना ने कहा कि उन्होंने दिन भर देश के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोनों को रोका।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा, “आज सुबह से ही सशस्त्र बलों ने कुवैत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाया है, जिन्हें रोककर बेअसर कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि “ईरान की निंदनीय आक्रामकता देश में आम नागरिकों और जरूरी सुविधाओं को निशाना बना रही है।” उन्होंने बताया कि बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े कुछ ठिकानों पर हमले किए गए, जिससे वहां आग लग गई और भारी नुकसान हुआ।

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ नए दौर के हमलों की घोषणा की। CENTCOM ने X पर कहा, “उसने आज शाम 7 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात नए हमले शुरू किए। ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना जारी रखेंगे जिनका इस्तेमाल होर्मुज (Strait Of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।”

मरीन वन से रवाना होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले उस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में किए गए थे।

ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर जोरदार हमला किया।” उन्होंने बताया कि ये हमले हाल के दिनों में मध्य पूर्व में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों के “सम्मान में” किए गए थे।

बता दें कि यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है, जब इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी कुवैत के बिजली और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमलों की खबर सामने आई थी।

कुवैत, जो अपनी पानी की सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) पर निर्भर है, तेहरान द्वारा खाड़ी देश में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से जुड़ी सुविधाओं को संभावित टारगेट के तौर पर पहचाने जाने के कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव में फंसता जा रहा है।

यह तनाव ऐसे समय और गहरा गया है, जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों ने क्षेत्र में ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

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कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

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Iran-US War Update: ईरान का अमेरिका पर जोरदार पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से किया हमला

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिकी हमले के बाद अब ईरान ने अमेरिका पर जोरदार पलटवार किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस बलों ने ईरानी क्षेत्र पर ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक संयुक्त मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किया है। इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।

IRGC ने कहा है कि उसने खाड़ी देशों में मौजूद 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले अमेरिका ने दूसरे दिन लगातार रविवार तड़के ईरान पर बड़ा हमला किया है। ईरान के मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी पर हमले के बाद ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया। साथ ही ईरान को नक्शे से मिटाने की धमकी दी है।

IRGC ने क्या कहा?

IRGC की नेवल और एयरोस्पेस यूनिट्स ने मिलकर यह ऑपरेशन किया है। इसे ईरान के अंदर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों का बदला बताया गया। गार्ड्स ने एक बयान में कहा, “कुवैत में अली अल-सलेम बेस और बहरीन के पोर्ट सलमान में फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस पर आठ ज़रूरी अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों को तबाह कर दिया।”

गार्ड्स ने कहा, “दुश्मन की किसी भी आक्रामकता का चाहे उसका बहाना कुछ भी हो, और चाहे वह मामूली लक्ष्यों के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो…करारा जवाब दिया जाएगा।” IRGC के अनुसार, यह हमला शनिवार को अमेरिकी सेना की उस कार्रवाई के जवाब में किया गया है जिसमें ईरान के मिसाइल और ड्रोन डिपो के साथ-साथ तटीय रडार सुविधाओं को निशाना बनाया गया था।

ईरान के सरकारी मीडिया ने यह भी आरोप लगाया कि वाशिंगटन ने ईरान के पांच तटीय ठिकानों पर हमला किया था। साथ ही, उसने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज से जुड़ी घटना का इस्तेमाल इस सैन्य अभियान को सही ठहराने के लिए किया।

कुवैत ने मिसाइलों और ड्रोनों को रोका

कुवैत की सेना ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली दुश्मन मिसाइलों और ड्रोनों को रोका। पूरे देश में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। जबकि बहरीन ने भी एहतियात के तौर पर चेतावनी वाले सायरन बजाए। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस बारे में कोई तत्काल बयान नहीं आया कि क्या निशाना बनाए गए सैन्य ठिकानों को कोई नुकसान पहुंचा है या कोई हताहत हुआ है।

होर्मुज स्टेट में सिंगापुर के कमर्शियल जहाज द्वारा ईरान के निर्देश ना मानने पर उस पर ड्रोन हमला किया गया है। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। जबाब में ईरान ने भी खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे है।

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इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को ईरानी और ओमान के समुद्री इलाकों से निकालने के लिए दो नए रास्तों की घोषणा की है। ईरान ने इस योजना को खारिज कर दिया और कहा कि इसकी घोषणा बिना किसी बातचीत के की गई थी। ताइवान द्वारा संचालित ‘एवर लवली’ जहाज पर ओमान के तट के पास एक संदिग्ध ईरानी ड्रोन से हमला हुआ, जिससे जहाज को कुछ नुकसान तो हुआ। लेकिन चालक दल के किसी सदस्य को चोट नहीं आई।