कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

ये भी पढ़ें- Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बोले- ‘इस्तीफा नहीं दूंगा, SBI कर्मचारियों को रहना चाहिए था सतर्क’

Ram Mandir: पांच करोड़ का रामचरितमानस…राम मंदिर में कितना आया चढ़ावा? ट्रस्ट ने दिया पूरा हिसाब

Ram Mandir Donation: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को एक अहम बैठक हुई। इस बैठक महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने करीब तीन घंटे लंबी चली ट्रस्ट की बैठक के बाद मीडिया का सामने इसकी घोषणा की। ट्रस्ट ने दान चोरी और महत्वपूर्ण इस्तीफा-नियुक्तियों के लेकर जानकारी दी। ट्रस्ट की ओर से अब प्राप्त की गईं दान का पूरा ब्यौरा दिया गया।

चढ़ावा का दिया ब्योरा

बता दें कि, राम मंदिर में दान की गई कीमती चीजों के गायब होने के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए गहने और अन्य कीमती वस्तुएं सार्वजनिक रूप से दिखाईं। ट्रस्ट ने कहा कि दान में मिली सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका सही तरीके से रिकॉर्ड रखा गया है। ट्रस्ट ने जिन वस्तुओं को दिखाया, उनमें करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस की एक प्रति भी शामिल थी, जिसे एक श्रद्धालु ने मंदिर को भेंट किया था। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने दान की गई वस्तुओं का आधिकारिक रजिस्टर भी मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि यह कदम दान की कीमती वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों और लोगों की शंकाओं को दूर करने के लिए उठाया गया है।

मंदिर को दान में मिली इतनी चीजें

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा कि कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि मंदिर को दान में मिली कई कीमती वस्तुएं गायब हो गई हैं। उन्होंने कहा, “इसी वजह से हम दान की गई सभी वस्तुओं का आधिकारिक रजिस्टर आपके सामने लेकर आए हैं। जिन वस्तुओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका पूरा विवरण भी हम दिखाएंगे।” ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर को दान में मिली हर वस्तु का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने बताया कि रजिस्टर में अब तक करीब 2,800 दान की गई वस्तुओं का विवरण दर्ज है। हालांकि, इनमें से केवल कुछ वस्तुओं को उदाहरण के तौर पर मीडिया और लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा, “हमारे पास दान में मिली करीब 2,800 वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज है और सभी चीजें सुरक्षित रखी गई हैं। जिन पांच वस्तुओं को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उन्हें हम केवल उदाहरण के तौर पर आपके सामने लेकर आए हैं।” ट्रस्ट ने यह भी बताया कि अब तक मंदिर को करीब 2,926 दान की गई वस्तुएं मिल चुकी हैं। यदि कोई श्रद्धालु अपने द्वारा दान की गई वस्तु के बारे में जानकारी लेना चाहता है, तो वह ट्रस्ट के किसी अधिकारी से पहले समय लेकर अयोध्या आ सकता है। ट्रस्ट की ओर से उसे पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

ट्रस्ट ने दी ये जानकारी

ट्रस्ट ने कहा कि जो श्रद्धालु अपने दान की गई वस्तु के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं या यह जानना चाहते हैं कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है, वे पहले ट्रस्ट के किसी अधिकारी से समय लेकर अयोध्या आ सकते हैं। उन्हें दान से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाएगी। इस बीच, ट्रस्ट ने बताया कि उसकी अगली बैठक 22 अगस्त को होगी। इस बैठक में दान की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है। साथ ही जांच के निष्कर्षों और ट्रस्ट में नए ट्रस्टियों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा कि ट्रस्ट की मांग है कि दान की कथित चोरी में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, “22 अगस्त को ट्रस्ट की अगली बैठक होगी। हमें उम्मीद है कि तब तक विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट मिल जाएगी। उसी रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और नए ट्रस्टियों की नियुक्ति पर भी फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि चोरी, चोरी होती है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी दोषियों को, चाहे वे अभी फरार ही क्यों न हों, पकड़कर कानून के मुताबिक सजा दिलाई जाए। ट्रस्ट भी इसी मांग पर पूरी तरह कायम है।