Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा को लेकर विवादित बयान पर विवादों में घिरे

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान एक्ट्रेस तृषा के बारे में विवादित टिप्पणी करने के आरोप में चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से विपक्षी DMK और सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब तंजावुर ईस्ट पुलिस ने एक विरोध सभा के दौरान DMK नेता की टिप्पणियों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। इसके बाद उनके घर के बाहर DMK कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। DMK ने सरकार पर उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें विधानसभा के चल रहे सत्र में हिस्सा लेने से रोकना था।

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को राष्ट्रीय महिला आयोग में DMK यूथ विंग के सेक्रेटरी और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 3 अगस्त को तंजावुर में DMK के एक प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। इसे फिल्म एक्ट्रेस पर निशाना साधकर कही गई बात माना जा रहा है।

विवादित बयान पर बवाल

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन सोमवार को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए। उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए।

पीटीआई के मुताबिक, उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

BJP ने बताया शर्मनाक बयान

तमिलनाडु की BJP इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने X पर कहा कि उदयनिधि की कथित द्विअर्थी टिप्पणी घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक है। BJP नेता ने कहा, “सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।”

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उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। तिरुपति ने कहा, “इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (DMK विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।”

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US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।