लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी: बिहार के स्टूडेंट्स की सेफ्टी को लेकर एक्टिव हुए सम्राट चौधरी, चांसलर और सांसद अशोक मित्तल से की बात

LPU University Unrest: पंजाब के प्रमुख प्राइवेट विश्वविद्यालय लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हिंसा और विरोध-प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार (28 सितंबर) को LPU के संस्थापक अशोक मित्तल से फोन पर बातचीत की। सीएम ने वहां पढ़ रहे बिहार के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पंजाब के फगवाड़ा स्थित एलपीयू के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से कथित दुष्कर्म किए जाने के दावे को लेकर रविवार को परिसर में तोड़फोड़ की और नेशनल हाईवे-44 को बाधित कर दिया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “मैंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से फोन पर बात की। उन्होंने बिहार के छात्रों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव सहयोग तथा आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।” इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में बिहार के स्टूडेंट पढ़ते हैं।

क्लासेस पर रोक, एग्जाम स्थगित

एलपीयू प्रशासन द्वारा सोमवार से 10 दिन के लिए क्लासेस स्थगित किए जाने के बाद कई छात्र अपने घरों के लिए रवाना होते दिखाई दिए। विश्वविद्यालय ने हाफ इयरली एग्जाम (Half-Yearly Exams)भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी हैं। विश्वविद्यालय ने कहा है कि छात्र चाहें तो अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह के बाद इस अवधि में घर जा सकते हैं।

वहीं, परिसर में रुकने वाले छात्रों को सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास या निवास स्थान के भीतर रहने और किसी भी प्रकार की अशांति से दूर रहने की सलाह दी गई है। अशोक मित्तल ने इस साल अप्रैल में छह अन्य राज्यसभा सदस्यों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर एक्शन

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के हिंसा पर उतरने के आरोप के एक दिन बाद सोमवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

परिसर में रविवार को कथित हंगामे और तोड़फोड़ की घटना पर यादव ने कहा कि पुलिस ने अब तक संयम बरता है। लेकिन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्र विश्वविद्यालय परिसर में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

राष्ट्रीय राजधानी में हाल में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए यादव ने छात्रों में व्याप्त नाराजगी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटना से निपटने में पुलिस ने रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ पुलिस और स्टूडेंट की चर्चा

पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर छात्रों की शिकायतों को दूर कराने के लिए इस प्राइवेट विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत कराई। यादव ने कहा, “हमारे अधिकारियों ने तय किया कि न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया।”

SIT करेगी मामले की पूरी जांच

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास किए गए। छात्रों द्वारा दुष्कर्म की कथित घटना का दावा किए जाने के बारे में यादव ने कहा कि FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

रविवार शाम प्रदर्शन के कथित तौर पर हिंसक हो जाने पर यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पुलिस के वाहनों पर पथराव किया गया।तोड़फोड़ में शामिल लोगों को संदेश देते हुए डीजीपी ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से बेबुनियाद अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की।

SIT की जांच और FIR के बारे में उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एलपीयू में यह घटना पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई। वहां भी दो छात्राओं द्वारा परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने की अपुष्ट खबरों को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। कथित तौर पर पुलिस के एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

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अधिकारियों के अनुसार, रविवार (27 सितंबर) शाम प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। उन्होंने उनके वाहनों पर हमला किया और कुछ वस्तुओं में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

Badrinath Dham DJ Video Row: जहां शंख बजाना मना, वहां कैसे बजा तेज डीजे और लाउड म्यूजिक! बद्रीनाथ धाम विवाद पर DM गौरव ने अब उठाया ये कदम

Badrinath Dham DJ Video Row: उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में हाल में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान हुए शोर-शराबे के साथ तेज आवाज में म्यूजिक बजाने और नाच-गाने के कार्यक्रम को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है। इसके बाद चमोली जिला प्रशासन ने भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन गढ़वाल स्काउटस को एक कारण बताओ नोटिस भेजा है। बद्रीनाथ धाम में ऐसे आयोजन की अनुमति प्रदान करने को वरिष्ठ बीजेपी नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी द्वारा सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताए जाने के बाद पिछले सप्ताह हुए महोत्सव को लेकर विरोध ने जोर पकड़ लिया है।

19 और 20 सितंबर को हुए कार्यक्रम में तेज आवाज में म्यूजिक और डांस के वीडियो सामने आने के बाद साधु-संतों, पुजारियों और नेताओं ने बी आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ा कि चमोली जिला प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग लिया।

कमांडिंग आफिसर को भेजा गया नोटिस

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग आफिसर को भेजे नोटिस में कहा है कि बद्रीनाथ धाम में इस प्रकार के सामूहिक आयोजन और उसमें ऊंची आवाज में म्यूजिक का प्रयोग करना उसकी गरिमा के विपरीत है। इससे वहां प्रतिदिन होने वाले पूजा कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही धार्मिक विद्वानों को असप्रसन्नता होती है एवं स्थानीय प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है।

उन्होंने इस प्रकार के आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संबंध में कोई अनुमति सक्षम स्तर से प्राप्त की गई थी। कार्यक्रम में तेज म्यूजिक का प्रयोग किन कारणों से किया गया?” जिलाधिकारी ने यह ताकीद भी की कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाए।

DM गौरव कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि 19 और 20 सितंबर को भारतीय सेना ने बामनी और माणा गाँवों के इलाकों में ‘वाइब्रेंट विलेज’ स्कीम के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। सेना के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार के लिए स्टॉल लगाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को तय करने या उनसे जुड़े भुगतान को संभालने में जिला प्रशासन या राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।”

जिलाधिकारी ने आगे कहा, “ये सभी गतिविधियाँ भारतीय सेना द्वारा की गईं। भारतीय सेना को एक नोटिस जारी कर पूछा गया है कि बद्रीनाथ धाम इलाके में बिना पूर्व अनुमति के ऐसा कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया। इसके अलावा, वहां भविष्य में ऐसे किसी भी कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है। मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप किसी भी कार्यक्रम के लिए SDM से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।”

सेना का बयान

इस बारे में भारतीय सेना ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। सेना के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “इस संबंध में आधिकारिक बयान आने पर उसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।” पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बदरीनाथ में शोर-शराबे वाले म्यूजिक इवेंट के आयोजन को अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उसे न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन,बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात बताया।

दिग्गज BJP नेता नाराज

डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी। नाराजगी व्यक्त करते हुए BJP नेता ने कहा, “उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में बदला जा रहा है।”

उन्होंने शंकराचार्यों तथा महात्माओं से संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी रूप से आवाज उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों से भी उनका आग्रह है कि वे ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाकर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें। उन्होंने कहा, “हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास और मां गंगा का उद्गम है, इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।”

क्या है पूरा मामला?

बद्रीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया था। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और सीमांत क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्यमिता और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे ।

हालांकि, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने बताए गए उद्देश्यों की बजाय धाम की धार्मिक परपंराओं और मान्यताओं के विपरीत नाच गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम किए। धाम में स्थित अराइवल प्लाजा में हुए कार्यक्रमों की निंदा करते हुए महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा, “हमारा विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर नहीं बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। यहां बद्रीनाथ की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्यक्रम होने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में शंख की ध्वनि की भी मनाही है। वहां तेज ध्वनि और संगीत का शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य मठ ने भी इस आयोजन को परंपरा-विरुद्ध, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए इस पर घोर आपत्ति जताई।

संतों ने किया कड़ा विरोध

शंकराचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य और मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहां ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम के नियम तय किये है। उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में शंख बजाना तक वर्जित है, ताकि तपस्यारत भगवान नर-नारायण एवं साधकों की एकाग्रता में कोई विघ्न न पड़े । लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से यहां का धार्मिक वातावरण बिगाड़ा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि जहां ब्रह्मकमल जैसे अति संवेदनशील पुष्प को भी विशेष नियमों, पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रभु चरणों में अर्पित किया जाता है, वहां संगीत की तेज ध्वनि में नाच-गाने और फूहड़ता का सांस्कृतिक प्रदूषण कहां तक उचित है? स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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विवाद के बीच, उत्तराखंड DIPR की तरफ से X पर एक पोस्ट में बड़ा ऐलान किया गया है। DIPR ने कहा, “श्री बद्रीनाथ धाम सहित जनपद चमोली के सभी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री गौरव कुमार द्वारा धार्मिक स्थलों के आस-पास उच्च आवृत्ति (हाई फ्रीक्वेंसी) वाले साउंड सिस्टम का प्रयोग कर धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।”

SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर ECI का जवाब! ‘असहमति सामान्य प्रक्रिया…’; 10 महीने के सवालों पर चुनाव आयोग ने क्या-क्या कहा?

ECI response SIR Row: चुनाव आयोग ने पिछले 10 महीनों के दौरान इलेक्शन क (ECI) के भीतर उठाई गई कथित आपत्तियों और अलग-अलग टिप्पणियों को लेकर बुधवार (23 सितंबर) को विस्तृत प्रेस नोट जारी कर विस्तृत जवाब दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। ECI ने कहा कि आयोग संविधान के आर्टिकल 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। उसके सभी कदम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप हैं। SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर 2 चुनाव आयुक्त की आपत्ति के बारे में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी किया है।

‘अलग-अलग राय विमर्श का सामान्य हिस्सा’

चुनाव आयोग ने कहा, “किसी भी संस्था में अंतिम फैसला लेने से पहले अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।” आयोग के मुताबिक, “सिर्फ तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है।” ECI ने कहा कि सदस्यों की ओर से ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल या सुझाव चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

‘हर अधिकारी अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है’

चुनाव आयोग ने बयान में कहा, “किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।”

10 महीनों के दौरान क्या-क्या हुआ?

ECI ने कहा, “10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है। हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन (SIR सहित) के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं।”

‘सिर्फ कुछ आंतरिक नोट्स से पूरी तस्वीर नहीं बनती’

आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में सामने आए कुछ खास आंतरिक नोट्स और टिप्पणियों को अलग से देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। ECI के मुताबिक, हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल शुरू कीं। इनमें देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण, जिसमें SIR भी शामिल है, जैसे चुनावी सुधार और प्रक्रियाएं शामिल हैं। आयोग ने दावा किया कि पिछले एक साल में लिए गए ये सभी फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।

कई राज्यों में चुनाव कराने का भी जिक्र

प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में कराए गए प्रमुख चुनावों का भी उल्लेख किया। आयोग ने कहा कि इन चुनावों के संचालन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और ऑपरेशनल मशीनरी लगी और इस दौरान आयोग की ओर से कई मंजूरियां और निर्देश जारी किए गए।

ECINet और डेटा सुरक्षा पर भी सफाई

डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी आयोग ने अपना पक्ष रखा। ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं, जिनका उद्देश्य अनधिकृत छेड़छाड़ और डेटा में हेरफेर को रोकना है। आयोग ने कहा कि IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस में अपनाए जाने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं।

‘संवैधानिक जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध’

प्रेस नोट के अंत में चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है। यह प्रेस नोट चुनाव आयोग के डिप्टी डायरेक्टर पी. पवन की ओर से जारी किया गया है।

अखबार की रिपोर्ट में क्या है?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि वोटर लिस्ट के SIR के दौरान 10 महीने में 14 बार दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कदमों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद अधिकारियों का यह बयान आया है। अखबार ने खबर दी है कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर ही मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR)र से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए गए। खबर के अनुसार, तीन में से दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई बार इन मुद्दों को उठाया।

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अंग्रेजी दैनिक की खबर में कहा गया कि एसआईआर के देशव्यापी क्रियान्वयन की निगरानी तीनों निर्वाचन आयुक्तों की देखरेख में हो रही है। हालांकि, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें उनकी जानकारी के बिना लिया गया या जारी किया गया था। इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गईं। विपक्षी दलों ने एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना की है। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य उन मतदाताओं को निशाना बनाना था, जो BJP और उसके सहयोगी दलों के साथ नहीं हैं।

‘वोट चोरी देशद्रोह है…’, चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

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rahul gandhi attacks BJP and EC on SIR

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान और मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस खुलासे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर ‘वोट चोरी’ को देश की जनता के खिलाफ अपराध और ‘देशद्रोह’ करार दिया है। ALSO READ: चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे आयोजित करने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय जरूर मिलेगा।

10 माह में 14 बार आपत्ति

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर  पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई।

 

सफाई में क्या बोला चुनाव आयोग?

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।

2,700 की कैंसर दवा 27,000 में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मरीजों से ‘दिनदहाड़े डकैती’ है, अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

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कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और लूट पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने रखा। ALSO READ: नोटिस मशीन से जारी हुए लगते हैं, दिल्ली में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

 

कोर्ट ने बताया कि एक दवा, जिसका अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 27,000 रुपये प्रिंट किया गया था, वह असल में रिटेलर को महज 2,700 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही थी। यानी रिटेलर को मिलने वाली कीमत से MRP सीधे 10 गुना ज्यादा था। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। अगर यह जबरन वसूली नहीं है, तो और क्या है?’

 

दवा के दाम कैसे तय हो रहे ?

सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, उससे दवा के दाम तय करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते है। MRP और रिटेलर के बीच दस गुना अंतर बताता है कि सप्लाई चेन में दाम के कई स्तर है। यानी कीमत तय करने की व्यवस्था पारदर्शी नहीं है। इस मामले में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े होते है। ALSO READ: राहुल गांधी ने फोन पर ऐसा क्‍या कहा कि महाराष्‍ट्र के राहुल बोंद्रे ने बदल दिया BJP में जाने का फैसला?

 

अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिन सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी बाजार में दवाओं की कीमतों और ऐसी अनियमितताओं पर लगाम लगाने की है, वे इस पर पूरी तरह चुप क्यों हैं। कोर्ट ने इसे ‘बेलगाम स्थिति’ करार दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर भी आकर्षित किया कि रजिस्टर्ड डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जेनेरिक दवाएं लिखने से जुड़े मुद्दे पर भी विचार किया जाना जरूरी है।

 

29 सितंबर को फिर सुनवाई

दवा कंपनियों और रिटेलरों द्वारा मनमाने दाम वसूलने के खिलाफ दायर याचिका पर अब 29 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने देश में दवा की कीमतें तय करने वाली सप्लाई चेन और इसकी निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

गरबे के दौरान भाग जाती थीं 4.5 लाख हिंदू लड़कियां, एमपी की BJP विधायक का अजब बयान

एमपी में नवरात्रि से पहले गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा विधायक उषा ठाकुर का एक अजब बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हर साल गरबे के दौरान करीब 4.5 लाख हिंदू लड़कियां गैर-हिंदुओं के साथ चली जाती हैं।

UP Election 2027: BJP को रोकने के लिए ओवैसी का बड़ा कदम, विपक्षी दलों को दी डेडलाइन

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Asaduddin Owaisi on Ram Mandir Donation Theft Case

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। इसी बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा राजनीतिक बयान देकर सूबे की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर विपक्षी दलों (सपा और कांग्रेस) को गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी है। ALSO READ: ओमप्रकाश राजभर का दावा: यूपी के चार टुकड़े होंगे, पूर्वांचल का सीएम बनेगा राजभर समाज का बेटा

 

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा कि अगर विपक्षी दलों का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को सत्ता से बाहर रखना है, तो उनकी पार्टी AIMIM उनके साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार है।

 

अकेले भाजपा को नहीं हरा सकते

ओवैसी ने जोर देकर कहा कि हम उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार नहीं बनने देना चाहते। यदि कोई दल ऐसा ही सोचता है, तो वे हमसे बात कर सकते हैं। लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि कोई भी पार्टी अकेले दम पर भाजपा को नहीं रोक सकती। उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का न्योता दिया है।

 

आगामी चुनावों को लेकर दी चेतावनी

बयान के दौरान ओवैसी ने आगामी राजनीतिक मुकाबले की नजाकत को भी समझाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों को पुराने चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुकाबला न तो 2014 जैसा होगा, न ही 2017, 2019 या 2022 के चुनावों की तरह होगा; इस बार चुनावी मैदान की चुनौतियां बिल्कुल अलग और नई होंगी।

 

ओवैसी ने सवाल उठाया कि राम मंदिर में कथित गबन मामले की SIT रिपोर्ट जनता के सामने क्यों नहीं रखी गई? सरकार इसे जारी क्यों नहीं कर रही है? और इस मामले के आरोपियों को जमानत कैसे मिल रही है? यह बेहद अजीब है और यह भी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनेगा।

दिल्ली SIR : CM रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस, मुख्यमंत्री की वोट एंट्री वैलिडेट

दिल्ली SIR : CM रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस, मुख्यमंत्री की वोट एंट्री वैलिडेट

Notices issued to Rekha Gupta and Arvind Kejriwal during special intensive revision

दिल्ली में मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतदाताओं की ओर से जमा कराए गए एन्यूमरेशन फॉर्म में कुछ विसंगतियां मिलने के बाद ये नोटिस जारी किए गए हैं।

 

हालांकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मतदाता प्रविष्टि को अब वैलिडेट कर दिया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, उनका नाम शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में शामिल रहेगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।

 

रेखा गुप्ता को उम्र संबंधी विसंगति पर नोटिस

अधिकारियों के अनुसार रेखा गुप्ता की प्रविष्टि को एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी के आधार पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली सूची में शामिल किया गया था। उन्हें उम्र से संबंधित एक विसंगति के कारण नोटिस जारी हुआ था। बाद में उनकी मतदाता प्रविष्टि को वैध कर दिया गया।

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दिल्ली के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल समेत कई अन्य प्रमुख मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

 

अरविंद केजरीवाल और परिवार को क्यों मिला नोटिस?

पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल को ‘लास्ट SIR से अनमैप्ड’ होने के आधार पर नोटिस जारी किया गया है। उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता और बेटे को भी इसी कारण नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने  आई है।

 

केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से गायब करने की कैसी प्रक्रिया है?

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यह बयान AAP की ओर से दिया गया राजनीतिक आरोप है; चुनाव अधिकारियों की ओर से SIR के तहत नोटिस को मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन और विसंगतियों से जोड़कर बताया गया है।

 

कपिल सिब्बल और वीरेंद्र सचदेवा को भी नोटिस

राज्यसभा सांसद और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता कपिल सिब्बल को भी पिछली SIR से उनकी प्रविष्टि के मैप न होने के कारण नोटिस जारी किया गया है।

 

वहीं दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि उन्हें नाम से जुड़ी विसंगति के कारण नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि जरूरी दस्तावेजों के माध्यम से इसे ठीक कराया जाएगा। सचदेवा के मुताबिक, उनकी पत्नी और भाई का नाम भी नोटिस पाने वाले मतदाताओं में शामिल है।

 

33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली में  SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में सामने आई विसंगतियों को लेकर नोटिस भेजे जाने हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जा चुके हैं।

 

इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनके रिकॉर्ड पिछली SIR से लिंक या मैप नहीं हो पाए हैं। दिल्ली में पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के रिकॉर्ड वर्ष 2002 से संबंधित हैं।

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नोटिस मिलने पर क्या करना होगा?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, SIR के दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान संबंधित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।

 

नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।

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SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन और जरूरी सुधार करना है। दिल्ली CEO कार्यालय ने यह भी कहा है कि प्रमुख मतदाताओं समेत ऐसे नाम जिन्हें पहले चुनावी डेटाबेस में फ्लैग किया गया था, उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया गया है, ताकि दावे-आपत्तियों के चरण में आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें।

 

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पहले भी मतदाताओं को 2002 की पिछली SIR सूची में अपने या रिश्तेदारों के विवरण की जांच करने की जानकारी दी थी।

Kangana Ranaut: ‘हम अच्छी जिंदगी क्यों नहीं जी सकते?’ रोल्स-रॉयस खरीदने पर ट्रोल हुईं मैथिली ठाकुर के सपोर्ट में आईं कंगना रनौत

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने MLA मैथिली ठाकुर का समर्थन किया है। मैथिली ठाकुर को कुछ दिन पहले मुंबई के मशहूर लालबागचा राजा पंडाल में एक लग्जरी नीली रोल्स-रॉयस कलिनन कार में आने के लिए ट्रोल किया गया था। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अपनी राजनीतिक यात्रा के एक साल के भीतर ही बिहार की MLA और सिंगर के पास इतनी महंगी लग्जरी SUV कैसे हो सकती है, जिसकी मुंबई में ऑन-रोड कीमत 13 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। कंगना ने सवाल किया कि जब राजनेता अपनी जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं तो ट्रोलर्स को हमेशा बुरा क्यों लगता है।

कंगना ने क्या कहा

इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कंगना ने लिखा, “कुछ लोगों को तब बहुत जलन होती है जब वे राजनेता को अच्छी जिंदगी जीते हुए देखते हैं। अब हमारी युवा MLA को लग्जरी कार इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल किया जा रहा है। हम भले ही समाज सेवा में लगे हों, लेकिन हमारे अपने करियर, जिंदगी और लोकप्रियता भी होती है। हम निस्वार्थ भाव से जनहित में काम करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को हमारे अच्छे से रहने पर इतनी तकलीफ क्यों होती है? हम अच्छी जिंदगी क्यों नहीं जी सकते? हमें जनता के पैसे में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन हमसे यह उम्मीद करना कि हम गरीब और बेजान जिंदगी जिएं, बहुत बेतुका है।”

कौन हैं मैथिली ठाकुर?

लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में एक बड़े उलटफेर का कारण बनीं और RJD के दिग्गज नेता बिनोद मिश्रा को बड़े अंतर से हराया। वह बिहार की सबसे युवा MLA हैं। मैथिली ठाकुर एक लोकप्रिय गायिका हैं, जिन्होंने बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान BJP उम्मीदवार के तौर पर राजनीति में कदम रखा। भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक परंपराओं में प्रशिक्षित, उनके गायन में मैथिली, भोजपुरी, भक्ति भजन और फिल्मी-शैली के गाने शामिल हैं।

मैथिली बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली हैं। बाद में उनका परिवार उनकी संगीत की ट्रेनिंग और करियर को आगे बढ़ाने के लिए द्वारका- नई दिल्ली आ गया। उनके पिता रमेश ठाकुर संगीत शिक्षक हैं और उन्होंने बहुत कम उम्र से ही अपने पिता और दादा दोनों से संगीत सीखा।

2017 में, रियलिटी सिंगिंग शो ‘राइजिंग स्टार इंडिया’ में भाग लेने के बाद उन्हें बड़ी पहचान मिली। तब से उन्होंने सोशल मीडिया, खासकर YouTube पर अपनी मज़बूत उपस्थिति बनाई है, जहां वह शास्त्रीय और लोक संगीत की प्रस्तुतियां पोस्ट करती हैं। कुछ दिन पहले कंगना ने एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के समर्थन में बात की थी। पिछले महीने चेन्नई में स्वतंत्रता दिवस 2026 के समारोह में शामिल होने की वजह से तृषा एक विवाद में फंस गई थीं। तृषा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “आपने देखा होगा कि तमिलनाडु में क्या हुआ, जहां एक बहुत सम्मानित कलाकार और एक्ट्रेस एक ऐसे मामले में शामिल थीं, जिसमें दोनों पक्षों के बीच संबंध था। हालांकि जब गाली-गलौज और चरित्र हनन की बात आती है तो हमेशा महिला को ही निशाना बनाया जाता है।”

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

rushia--ukrain war

यूक्रेन ने मॉस्को की ओर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया है। रूस ने दावा किया है कि शनिवार से अब तक उसने 1,600 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए हैं, जिनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है। मॉस्को की एक ऑइल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद यहां आग लग गई। इस हमले के दौरान मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है।

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मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इसे क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के बाद मॉस्को के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

 

मॉस्को की तेल रिफाइनरी तक पहुंचे ड्रोन

 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई ड्रोन मॉस्को ऑयल रिफाइनरी तक पहुंचने में सफल रहे। रॉयटर्स के प्रत्यक्षदर्शियों ने रिफाइनरी परिसर से धमाकों और धुएं के गुबार की जानकारी दी। हालांकि, संयंत्र को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है। यूक्रेन की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

 

मॉस्को की इस रिफाइनरी ने वर्ष 2024 में करीब 11.6 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था। इससे लगभग 2.9 मिलियन टन पेट्रोल और 3.2 मिलियन टन डीजल का उत्पादन हुआ था।

 

यूक्रेन के हमलों से पहले भी रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। इन हमलों को रूस के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से भी जोड़ा गया है।

 

रूस के संसदीय चुनाव के बीच हुआ हमला

 

यह ड्रोन हमला रूस में संसदीय चुनाव के अंतिम दिन हुआ। मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने दावा किया कि ड्रोन अभियान का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को बाधित करना था। हालांकि, इस दावे पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। मॉस्को क्षेत्र के रामेंस्कोये में हमलों के बाद 21 मंजिला एक अपार्टमेंट बिल्डिंग से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें लगभग 70 बच्चे शामिल थे।

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यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले में चार की मौत

 

इसी बीच यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत हुई है। कीव क्षेत्र में हुए रातभर के हमले में तीन बच्चों समेत चार लोगों की जान चली गई। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, एक ड्रोन के निजी मकान से टकराने के बाद एक महिला और उसके तीन साल के दो बच्चों की मौत हो गई। एक अन्य हमले में घायल हुई लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच दोनों देशों में ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है।