Rejinagar Bypolls election voting: रेजीनगर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान भारी हंगामा, पश्चिम बंगाल पुलिस ने हुमायूं कबीर को किया गिरफ्तार

Rejinagar Bypolls election voting: आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को मंगलवार (6 अक्टूबर) को पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में वोट डालने के बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कई बूथों पर वोटिंग प्रक्रिया में पुलिस के दखल का आरोप लगाया था। वोटिंग के बाद कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी मतदान प्रक्रिया में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही सत्ता में है, तो ऐसी दखलअंदाजी की क्या जरूरत है।

इस दौरान उन्होंने काफी हंगामा किया। फिर कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हुमायूं कबीर को पुलिस ने उनके रेजीनगर पार्टी ऑफिस से हिरासत में लिया और फिर रेजीनगर पुलिस स्टेशन ले गई। आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजीनगर उपचुनाव में कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को चुनावी मैदान में उतारा है।

उपचुनाव के लिए मतदान जारी

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मंगलवार सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हुआ। मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट उस समय खाली हुई जब 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवादा दोनों सीटों से जीतने वाले हुमायूं कबीर ने नवादा सीट बरकरार रखी।

कबीर ने अपने बेटे को बनाया उम्मीदवार

हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव मैदान में BJP के उम्मीदवार और मुर्शिदाबाद जिले के पूर्व अध्यक्ष सखराव सरकार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी, तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी और माकपा के सैयद असद अली शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की है।

नंदीग्राम में भी वोटिंग जारी, 71 कंपनियां तैनात

अधिकारियों ने बताया कि उपचुनाव के लिए केंद्रीय बलों की कुल 71 कंपनियां तैनात की गई हैं। मतदान शाम छह बजे तक चलेगा। शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे। विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के दो दिन बाद छह मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद बनर्जी के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं बचा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। उन्होंने इसे इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) को मजबूत करने की कोशिश बताया।

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक को लिफाफा चुनाव चिह्न और एक अलग अस्थायी पार्टी पहचान के साथ मैदान में उतारा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया है। वहीं,

मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

ममता को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी की पार्टी टूट गई है और टूटे हुए गुट की याचिका पर ममता बनर्जी की पार्टी के बैंक खातों पर रोक लग गई है। इस मामले में ममता सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं लेकिन वहां से उनको कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को उन चार बैंक खातों को संचालित करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम की शिकायत के सिलसिले में फ्रीज कर दिया था।

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने टीएमसी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है। खातों में मौजूद फंड का असली हकदार कौन है, इस मामले पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए हम इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे’। गौरतलब है कि चार मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे, जिसमें टीएमसी 15 साल बाद राज्य की सत्ता से बाहर हो गई थी।

इसके बाद पार्टी के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया था। यह गुट असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा करता है। बहरहाल, ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से पेश हुए सीनियर एडव्होकेट अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बैंक खातों को फ्रीज करना पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कोशिश है। इससे पार्टी की गतिविधियां ठप्प हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उपचुनावों आदि को देखते हुए पार्टी के खर्चों के लिए हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। टीएमसी जैसी बड़ी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों के लिए यह न्यूनतम राशि है। इसलिए इन खातों को चलाने की मंजूरी दी जाए।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दो गुट खुद को असली तृणमूल बता रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह तय करने को कहा है कि असली पार्टी कौन सी है। उन्होंने कहा, ‘दूसरा गुट भी कह रहा है कि हमें खाता चलाने की अनुमति दी जाए। इसलिए उन्हें असली तृणमूल पर फैसले का इंतजार करना चाहिए’।

पश्चिम बंगाल के इन 250 मदरसों को क्यों बंद करने जा रहे हैं शुभेंदु अधिकारी? दुर्गा पूजा से पहले मिलेगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में चल रहे मदरसों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी से मान्यता प्राप्त 250 प्राइवेट मदरसों को धीरे-धीरे बंद करने का फैसला किया गया है।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम या नामात्र की है और बुनियादी ढांचा भी पर्याप्त नहीं है। बताया जा रहा है कि इन मदरसों में वर्तमान में जो छात्र एनरोल हैं, उनके लिए दिसंबर तक कक्षाएं जारी रहेंगी। इसके बाद इन्हें बंद कर दिया जाएगा।

1.51 लाख भर्ती प्रस्ताव को मिली मंजूरी

बुधवार को कैबिनेट बैठक में अलग-अलग सरकारी विभागों में लगभग 1.51 लाख लोगों की भर्ती के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। इसमें पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए 12,000 और कोलकाता पुलिस के लिए 4,000 लोग शामिल हैं।

दुर्गा पूजा से से पहले रिपोर्ट मिलने की उम्मीद

अधिकारी ने कहा, “कैबिनेट ने 250 प्राइवेट मदरसों को बंद करने का फैसला किया, जिनमें सही इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है और छात्रों की संख्या बहुत कम है। उन्हें दिसंबर तक काम करने दिया जाएगा।” अधिकारी ने कहा कि इन संस्थानों से रिपोर्ट दुर्गा पूजा उत्सव से पहले मिलने की उम्मीद है। इसके बाद जरूरी प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।

सरकार पहले बंद कर चुकी है 252 बिना इजाजत वाले मदरसे

यह कदम राज्य सरकार के 252 बिना इजाजत वाले मदरसों को बंद करने और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजने के कुछ दिनों बाद आया है। राज्य भर में हुए एक सर्वे में पाया गया था कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचा की कमी थी।

अलग-अलग चरणों में बंद हो सकते हैं 2500 मदरसे

अधिकारी ने कहा कि अलग-अलग चरण में राज्य भर में बिना सरकारी पंजीकरण के चल रहे करीब 2,500 मदरसे भी बंद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने कथित गड़बड़ियों को लेकर 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की भी मंजूरी दे दी है।

सभी विभागों में भर्ती में तेजी लाना चाहती है सरकार

राज्य में मंजूर की गई भर्तियों पर वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सरकार सभी विभागों में भर्ती में तेजी लाना चाहती है और खाली जगहों को भरना चाहती है ताकि सार्वजनिक सेवा पर असर न पड़े। संबंधित विभागों को भर्ती प्रक्रिया में रुकावट डालने वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए कहा गया है।”

Delhi IGI Airport: हैंड बैग में रखे थे 11 जार, चेकिंग में निकला चंदन, CISF ने अफगान पैसेंजर को दबोचा तो ये सब पता चला

मिलन प्रधान तो शुभेंदु के साथ ही आंदोलन में थे

पश्चिम बंगाल में बहुत दिलचस्प घटनाक्रम चल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट और अपने परिवार का गढ़ माने जाने वाले नंदीग्राम में उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया है। तभी ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे को चुनाव मैदान से हटाया गया। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बीतने के बाद शुक्रवार, 18 सितंबर को खुद मुख्यमंत्री ने संचिता प्रधान से मुलाकात की और उसके बाद उन्होंने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान किया। उसके बाद ममता बनर्जी के पास कोई विकल्प नहीं बचा तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि वे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करेंगी। लेकिन उन्होंने जैसे ही कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया उसके थोड़ी देर बाद ही बंगाल पुलिस ने मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया।

सोचें, मुख्य विपक्ष को इस तरह से मैदान से हटाने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? यह भी हैरान करने वाली बात है कि मिलन प्रधान को 2007 में दर्ज हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। लगभग 20 साल के बाद अचानक पुलिस को ध्यान आया है कि एक वारंट लंबित है और प्रधान को गिरफ्तार करना चाहिए। इससे पहले प्रधान ने नामांकन किया तो निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना हलफनामा भी पेश किया, जिसमें इस मुकदमे का जिक्र था। लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं की गई। तब मिलन प्रधान को कुछ नहीं समझा जा रहा था। वैसे भी नंदीग्राम में कांग्रेस को आधा फीसदी वोट आया था। लेकिन जब ममता ने उनको समर्थन दिया तब अचानक वे गंभीर उम्मीदवार हो गए। फिर पुराना मामला निकाला गया। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई कि 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े जिस मामले में उनको गिरफ्तार किया गया उस आंदोलन का नेतृत्व तो खुद शुभेंदु अधिकारी कर रहे थे। वे उस समय तृणमूल कांग्रेस में थे। लेकिन अब वे मुख्यमंत्री हैं और जो चाहें सो कर सकते हैं।

यूएन में अमित शाह की शिकायत

नई दिल्ली। ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की शिकायत संयुक्त राष्ट्र संघ में की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल में सरकारी कार्यक्रमों में मुस्लिम अधिकारियों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में अमित शाह के कार्यक्रम में से मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को धर्म के आधार पर बाहर रखने का आरोप लगाया है।

महुआ मोइत्रा ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अल्पसंख्यक मामलों के विशेष दूत प्रोफेसर निकोलस लेवरा को पत्र भेजा है। उन्होंने लिखा है कि जुलाई और अगस्त में अमित शाह के राज्य दौरे के दौरान तीन वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यक्रमों से हटाया गया या आने से रोका गया। महुआ के मुताबिक, दूसरे धर्मों के अधिकारियों को कार्यक्रमों में शामिल होने दिया गया।

महुआ मोइत्रा ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारी को लिखी चिट्ठी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। मोइत्रा ने मानवाधिकारों के लिए यूएन हाई कमिश्नर कार्यालय, ओएचसीएचआर के अल्पसंख्यक मामलों के विशेष दूत को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि तीन मौकों पर वरिष्ठ मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को कार्यक्रमों से बाहर किया गया। ये घटनाएं अमित शाह के जुलाई और अगस्त में पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुईं।

महुआ ने लिखा है कि इन अधिकारियों के दूसरे धर्मों के समकक्षों को कार्यक्रमों में मौजूद रहने की अनुमति दी गई। उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘इन तीनों अधिकारियों में एक बात समान है और जो बात उन्हें कार्यक्रम में रहने की अनुमति पाने वाले सहयोगियों से अलग करती है, वह उनका धर्म है’। महुआ मोइत्रा ने अपनी चिट्ठी में सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर वकार रजा, पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख जावेद शमीम और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी खलील अहमद के नाम लेकर जिक्र किया है। यह संभवतः पहला मामला है, जिसमें भारत का आंतरिक मामला इस तरह से संयुक्त राष्ट्र संघ में पहुंचा है।

क्या अब DNA टेस्ट से होगा 5 बेबी ओरंगुटानों के रहस्यमय सफर का खुलासा?

अचानक ओडिशा के जंगल में मिले 5 बेबी ओरंगुटानों पर सरकार अब अलर्ट मोड में नजर आ रही है। आखिर अब क्या होना वाला इन क्यूट 5 बेबी ओरंगुटानों के साथ। और कैसे घुस आए ये पांचों बेबी ओरंगुटान भारत के अंदर, क्या ऐसे जानवर भारत में और भी हो सकते हैं? इन सब सवालों के जवाब ढूंढ़ने के लिए राज्य सरकार ने अब जांच और तेज कर दी है. पांचों नन्हे ओरंगुटानों की सच्चाई जानने के लिए अब राज्य सरकार ने नया तरीका निकाला है।

दरअसल सरकार इन जीवों की पहचान, उनके माता-पिता और वे किस देश या चिड़ियाघर से लाए गए हैं, इन सब सवलों का पता लगाने के लिए DNA टेस्ट कराने की योजना बना रही है। अधिकारियों का कहना है कि DNA रिपोर्ट आने के बाद ही उनके वास्तविक स्रोत की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। बताया जा हा है कि इस मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच की जा रही है.

फिलहाल रेस्क्यू किए गए सभी बेबी ओरंगुटान को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखा गया है। वहां पशु चिकित्सकों की टीम उनकी लगातार स्वास्थ्य जांच कर रही है। मंत्री के अनुसार, सभी ओरंगुटान पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और खान-पान कर रहे हैं। जल्द ही उन्हें दूध भी दिया जाएगा।

क्या DNA जांच से 5 बेबी ओरंगुटानों का सच आएगा सामने?

ये ओरंगुटान किस देश के हैं, किस चिड़ियाघर से चुराए गए हैं और इनके माता-पिता कौन हैं। इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए सरकार इनका DNA टेस्ट कराने जा रही है। माना जा रहा है कि DNA रिपोर्ट आने से इनके बारे में काफी कुछ पता चल सकता है जैसे की असली ठिकाने और किस देश, किस जंगल या किस ब्रीडिंग सेंटर से लाए गए हैं।

क्या भारत का हवा-पानी झेल पाएंगे बेबी ओरंगुटान?

पांचों बेबी ओरंगुटान भारत का हवा-पानी झेल पाएंगे या नहीं इसके लिए ओडिशा सरकार ने सेंट्रल जू अथॉरिटी से पूछा है कि क्या हमारे राज्य का मौसम इन जीवों के रहने लायक है या नहीं। अथॉरिटी की एक टीम जल्द ही नंदनकानन जू आकर देखेगी कि ये जीव किस हालत में हैं और इन्हें रखने के लिए क्या-क्या सुविधाएं चाहिए। इस जांच के बाद ही तय होगा कि इन्हें हमेशा के लिए नंदनकानन में रखा जाएगा या कहीं और भेजा जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एंगल से भी होगी जांच

पांचों बेबे ओरंगुटान को भारत में खूब प्यार मिल रहा है, लेकिन इन मासूमों को इनके परिवार से अलग कर के जंगल में कौन छोड़ गया इसकी जांच भी अब तेज हो रही है। जांच एजेंसियां हर एंगल से इस मामले की जांच कर रही हैं. पुलिस, जिला प्रशासन, वन विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स संयुक्त रूप से इस संदिग्ध तस्करी नेटवर्क की पड़ताल कर रहे हैं। जांच एजेंसियां स्थानीय निवासियों से भी पूछताछ कर रही हैं, क्योंकि घटना स्थल पर एक संदिग्ध वाहन के 15 मिनट रुककर जाने की खबर भी मिली थी। इसके अलावा, ओडिशा सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और वहां के लोकल अफसरों के साथ मिलकर इस मामले की जांच की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस मामले के तथ्यों को सामने लाने में जुटी हैं। आगे की कार्रवाई तय करने से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव और पशु कल्याण संगठनों से भी चर्चा की जाएगी।

कभी-कभी इसानों की तरह इमोशनल भी हो जाते हैं ओरंगुटान 

ऑरंगउटान का DNA इंसानों से 97% मिलता है, इसीलिए ये काफी हद तक इंसानों की तरह ही अक्लमंद और इमोशनल होते हैं। ये हाथ से औजार बनाने से लेकर अपनी समस्याएं सुलझाना तक बखूबी जानते हैं। इंसानों की तरह इनकी मां भी अपने बच्चे को लगभग 7 से 9 साल तक संभालती है और उसे ज़िंदगी जीने के सारे तरीके सिखाती है। हैरान करने वाली बात यह है कि बीमार या चोटिल होने पर ये खुद जड़ी-बूटियों और पत्तियों को चबाकर अपने जख्मों पर मलम लगा लेते हैं। यही नहीं, ये सोने के भी बड़े शौकीन होते हैं और पेड़ों की ऊंची डालियों पर पत्तियों से बाकायदा गद्दा-तकिया सेट करके रोज़ अपने लिए नया और आरामदायक बिस्तर तैयार करते हैं। भारत आए नन्हे 5 ऑरंगउटानों की ऐसी ही कुछ क्यूट हरकतें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं जिन्हें देख कर लोग इन पर खूब प्यार लुटा रहे हैं।

 

सौरव गांगुली और पत्नी को मिले 2 धमकी भरे पत्र, CAB में मचा हड़कंप

भारतीय एकदिवसीय और टेस्ट टीम के पूर्व कप्तान और सलामी बल्लेबाज सौरव गांगुली और उनकी पत्नी डोना को जानलेवा धमकी भरे पत्र मिलने से क्रिकेट बंगाल के दफ्तर में हड़कंप मच गया। सूत्रों की मानें तो इस पत्र की भाषा काफी हिंसक थी। 

कोरियर द्वारा भेजे गए दो पत्र अंग्रेजी भाषा में लिखे गए थे। इसके साथ ही गांगुली की पत्नी डोना और स्टाफ को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। गांगुली परिवार की ओर से ठाकुरपुकुर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही पुलिस ने  त्वरित कार्यवाही शुरु कर दी हैय़

पिछले 6 माह से मिल रहे थे धमकी भरे पत्र 

पुलिस की प्रथम दृश्या जांच में यह पता लगा है कि पिछले 6 महीने से ऐसे पत्र बंगाल क्रिकेट के दफ्तर में मिल रहे थे। इस मामले को परिवार ने किसी नाराज क्रिकेट फैन की कुंठा के तौर पर लिया गया। हालांकि यह सिलसिला नहीं रुकने पर गांगुली परिवार ने बंगाल पुलिस से संपर्क किया।. 

भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 38 शतक लगाए हैं।उन्होंने 311 एकदिवसीय और 113 टेस्ट मैच खेले।अगर गांगुली के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि वह 30 बार 80 या 90 रन की संख्या पार करने के बाद आउट हुए। अगर वह इन पारियों को भी शतक में बदलने में सफल रहते तो उनके नाम पर 50 से अधिक शतक दर्ज होते।गांगुली ने वनडे में 72 और टेस्ट क्रिकेट में 35 अर्धशतक लगाए हैं।

ममता बनर्जी को महाझटका! TMC के 12 और बैंक खाते सील, अब तक 1000 करोड़ रुपए लॉक

TMC bank accounts sealed: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) का शिकंजा ऐसा कसा है कि पार्टी पूरी तरह लाचार नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने टीएमसी के 12 और बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली मामूली राहत के अगले ही दिन हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब तक टीएमसी के कुल 15 बैंक खाते सील हो चुके हैं, जिनमें करीब 1,000 करोड़ रुपये फंसे होने का अनुमान है।

सरकारी और प्राइवेट बैंकों पर एक्शन

पुलिस के आला अफसरों के मुताबिक, जिन 12 नए खातों पर रोक लगाई गई है, वे अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट बैंकों में फैले हुए हैं। पुलिस ने इन खातों को खोलने वालों की पूरी कुंडली और पिछले सभी लेन-देन (ट्रांजैक्शन हिस्ट्री) का ब्योरा बैंकों से तलब किया है। ALSO READ: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ED ने फ्रीज किए 440 करोड़, क्या होगा TMC पर इसका असर

इससे पहले गुरुवार को ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी को HDFC बैंक के तीन खातों से रोजमर्रा के दफ्तर के खर्चे, स्टाफ की सैलरी और कानूनी लड़ाई के लिए सीमित लेन-देन की इजाजत दी थी। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। लेकिन पुलिस की इस नई कार्रवाई ने हाई कोर्ट से मिली राहत को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।  ALSO READ: ममता बनर्जी ने संभाली TMC की कमान, बागी नेताओं को दी चुनौती, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा…

 

इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों और पार्टी के भीतर मचे घमासान से जुड़ी हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद टीएमसी के भीतर अंतर्कलह चरम पर पहुंच गई। ममता बनर्जी के ही बागी विधायकों और सीनियर नेताओं ने बैंक प्रशासन से लिखित शिकायत कर दी कि संगठन में भारी विवाद है, इसलिए खातों से लेन-देन रोका जाए।

 

साइबर क्राइम सेल में FIR : बागी नेताओं ने बिधाननगर पुलिस के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि इन खातों में जमा भारी-भरकम रकम के सोर्स (पूंजी का जरिया) संदिग्ध हैं। इस शिकायत के अगले ही दिन पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत इन खातों को अटैच किया है। यह पूरी कार्रवाई एक प्राइवेट एविएशन कंपनी से जुड़े 160 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। यह पूरा स्कैम एक 'एम्ब्रेयर बिजनेस जेट' और एक 'अगस्ता हेलीकॉप्टर' की रहस्यमयी खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है। टीएमसी ने शुक्रवार को दोबारा कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया और ईडी के इस फ्रीजिंग ऑर्डर को चुनौती दी है। पार्टी के सीनियर वकील किशोर दत्ता ने जस्टिस कृष्णा राव की अदालत से तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई, जिस पर अब अदालत सोमवार को फैसला करेगी।

 

Jahangir Khan: TMC के ‘पुष्पा’ जहांगीर खान की पत्नी सरीना भी गिरफ्तार, पति को छुड़ाने के लिए किया था बवाल

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान की पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों पर हमला करने का आरोप है। 37 वर्षीय सरीना बीबी को फलता थाना क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में हिरासत में लिया गया। आरोप है कि उन्होंने दो दिन पहले थाने के बाहर हुए हंगामे के दौरान अपने पति जहांगीर खान को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की थी। इसी घटना को लेकर पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है।

पुलिस पर हमला करने का आरोप 

रिपोर्टों के अनुसार, फलता पुलिस थाने में हुई हिंसा के मामले में अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि सरीना बीबी ने अपने पति जहांगीर खान की रिहाई की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन की अगुवाई की थी। जहांगीर खान 8 जून से पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि उन्हें नेपाल सीमा के पास उस समय पकड़ा गया था, जब वे कथित तौर पर देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरीना बीबी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और ऐसी गतिविधियों में देश-विरोधी तत्व शामिल हो सकते हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

मुख्यमंत्री ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

फलता में हाल ही में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि दोषी पाए जाने वाले लोगों की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून का पालन करना सभी के लिए जरूरी है और किसी को भी व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरीना बीबी अपने पति जहांगीर खान को कमर में रस्सी बांधकर सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने से नाराज थीं। आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने पुलिस थाने पर हमले की योजना बनाई। पुलिस का यह भी दावा है कि गिरफ्तारी के बाद जहांगीर खान को कई बार फलता की सड़कों पर घुमाया गया था।

 जहांगीर खान का गढ़ था फालता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने फलता इलाके में अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई थी। फलता, अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीर खान उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उनका आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ सार्वजनिक विवाद हुआ था। उस चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, जिसके बाद फलता में दूसरे चरण का मतदान रद्द कर दिया गया था। उस समय जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार थे।

बाद में एक नाटकीय घटनाक्रम में जहांगीर खान ने दोबारा मतदान से पहले चुनाव मैदान से अपना नाम वापस ले लिया। चुनाव प्रचार के दौरान वे खुद की तुलना तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार से करते थे। उनके चुनाव से हटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह सीट रिकॉर्ड अंतर से जीत ली। धमकी देने और चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों के कारण जांच एजेंसियां भी लंबे समय से जहांगीर खान की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं।

पश्चिम बंगाल: टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल पुलिस को शनिवार को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब तीन दिनों से फरार चल रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान की पत्नी रेजिना बीबी को गिरफ्तार कर लिया गया। रेजिना बीबी पर फाल्टा पुलिस थाने पर हमले की कोशिश की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। 

पुलिस पहले ही जहांगीर खान को गिरफ्तार कर चुकी है। अब रेजिना बीबी की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उसे दक्षिण 24 परगना की जिला अदालत में पेश करेगी।

राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा फाल्टा पुलिस थाने पर हमले और जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश के मामले में भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित एक ठिकाने से रेजिना बीबी को गिरफ्तार किया। रेजिना बीबी की गिरफ्तारी के साथ ही अब इस मामले में कुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

Also Read : आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं द्रौपदी मुर्मु

पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि फाल्टा पुलिस थाने पर हमले की योजना सोमवार को एक गुप्त स्थान पर आयोजित बैठक में बनाई गई थी। आरोप है कि यह बैठक रेजिना बीबी ने बुलाई थी।

जिला पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “बैठक में तय किया गया था कि समर्थक फाल्टा पुलिस थाने से करीब तीन किलोमीटर दूर एक निर्धारित स्थान पर एकत्र होंगे। इसके बाद वे अचानक और संगठित तरीके से पुलिस थाने पर धावा बोलकर जहांगीर खान को छुड़ाने का प्रयास करेंगे।

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे पुलिस स्टेशन पर हमले में शामिल लोगों की संपत्तियों की पहचान करें, उन्हें जब्त करें, उनकी नीलामी करें और नीलामी से मिली रकम से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करें।

मुख्यमंत्री अधिकारी ने शुक्रवार को कहा था फाल्टा घटना के सिलसिले में हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की अलग-अलग धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। हम न केवल हमलावरों को कड़ी सजा दिलाना सुनिश्चित करेंगे, बल्कि उनकी संपत्तियों को जब्त करके नुकसान का मुआवजा भी वसूल करेंगे।

Pic Credit : ANI