Rhetan TMT का बजाज ट्यूबलर के साथ MOU, 20000 MT TMT बार खरीदने का प्रस्ताव

TMT स्टील बार कंपनी Rhetan TMT ने महाराष्ट्र की Bajaj Tubular Products के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) साइन किया है। इसके तहत 24 महीने में करीब 20,000 मीट्रिक टन TMT बार की खरीद का प्रस्ताव है। कंपनी ने इस कारोबार की संभावित वैल्यू ₹250-300 करोड़ आंकी है।

20,000 MT TMT बार की खरीद

MOU के तहत Bajaj Tubular Products ने अगले 24 महीनों में Rhetan TMT से करीब 20,000 MT TMT बार खरीदने की इच्छा जताई है। हालांकि, यह कोई पक्का ऑर्डर नहीं है। असल खरीद अलग-अलग ऑर्डर के जरिए होगी। यह मात्रा प्रोजेक्ट की जरूरत, प्रोडक्ट की उपलब्धता और सप्लाई शेड्यूल के आधार पर बदल सकती है।

₹250-300 करोड़ का कमर्शियल पोटेंशियल

Rhetan TMT के मैनेजमेंट के मुताबिक, इस रिश्ते से 24 महीनों में करीब ₹250-300 करोड़ का कमर्शियल पोटेंशियल बन सकता है। यह अनुमान संभावित प्रोडक्ट मिक्स, ऑर्डर की फ्रीक्वेंसी और मौजूदा व अनुमानित मार्केट रेट को ध्यान में रखकर लगाया गया है। कंपनी ने साफ किया है कि यह पक्का ऑर्डर या तय रेवेन्यू नहीं है।

कंपनी को क्या फायदा होगा?

इस MOU से Rhetan TMT को Bajaj Tubular Products के साथ लंबे समय का कारोबारी रिश्ता बनाने का मौका मिलेगा। अगर प्रस्तावित खरीद ऑर्डर में बदलती है, तो इससे कंपनी की बिक्री मात्रा बढ़ सकती है। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी संभव है।

मैनेजिंग डायरेक्टर ने क्या कहा?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन ए. शाह ने कहा कि यह MOU कंपनी के कारोबारी संबंधों को बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। उनके मुताबिक, Bajaj Tubular Products के साथ यह समझौता लंबे समय के कमर्शियल रिश्ते और भविष्य में नए कारोबारी अवसर तलाशने का रास्ता खोलता है।

1 MW का सोलर प्रोजेक्ट भी शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW के कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट उसकी अपनी जरूरतों के लिए रिन्यूएबल बिजली उपलब्ध कराएगा। इससे एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

A-One Steels IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹405 करोड़ का एक और इश्यू, रहेंगे ₹355 करोड़ के नए शेयर

देश के IPO मार्केट में पिछले कुछ वक्त से हलचल काफी तेज है। एक ​के बाद एक बड़ी संख्या में पब्लिक इश्यू लॉन्च हो रहे हैं। मेनबोर्ड सेगमेंट में भी लगातार नए IPO आ रहे हैं। इसी कड़ी में जल्द ही A-One Steels India का नाम भी जुड़ने वाला है। कंपनी ₹405 करोड़ का इश्यू लॉन्च करने जा रही है। यह 24 सितंबर को खुलेगा और 28 सितंबर को बंद होगा। प्राइस बैंड और लॉट साइज तय होना अभी बाकी है। IPO में ₹355 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹50 करोड़ का ऑफर फॉर सेल रहेगा, जिसमें कंपनी के प्रमोटर संदीप कुमार, सुनील जालान और कृष्ण कुमार जालान शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

इस IPO में एंकर निवेशक 23 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। क्लोजिंग के बाद अलॉटमेंट 29 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 अक्टूबर को हो सकती है। इस इश्यू के लिए PL कैपिटल मार्केट्स और खंबाटा सिक्योरिटीज बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज है।

A-One Steels IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए ​किया जाएगा।

क्या करती है कंपनी

A-one Steels India Limited एक बैकवर्ड-इंटीग्रेटेड स्टील मैन्युफैक्चरर है। यह लंबे और फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स के साथ-साथ स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स की भी पेशकश करती है। कंपनी MS बिलेट्स से HR और CR कॉइल बनाती है, जिन्हें बाद में HR पाइप, CR पाइप और गैल्वेनाइज्ड ट्यूब में बदला जाता है। यह लंबे स्टील प्रोडक्ट्स के तौर पर MS बिलेट्स से TMT बार भी बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है, जैसे कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर प्लांट, बांध, एयरपोर्ट, पुल, फ्लाईओवर, स्टेडियम, हाइवे, मरीन स्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल बिल्डिंग और ऊंची रिहायशी इमारतें।

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कंपनी मेट कोक और सिलिकॉन मैंगनीज/फेरोसिलिकॉन जैसे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट भी बनाती है, जिन्हें खुले बाजार में बेचा जाता है। स्टील इंडस्ट्री में एलॉयिंग (मिश्र धातु बनाने) के लिए फेरोसिलिकॉन बहुत जरूरी है। A-one Steels की 6 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जिनमें से 5 कर्नाटक में गौरीबिदानूर, बेल्लारी, कोप्पल, चिक्कंतापुर में हैं। एक यूनिट आंध्र प्रदेश के हिंदूपुर में है।

A-One Steels की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर ₹4,202 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 1552 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹127.41 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹1,010.94 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू ₹3,569.63 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹7.71 करोड़ रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Housing Prices: घर बनवाना महंगा हुआ! 5 साल में 34% बढ़ी लागत; ईरान संकट ने और बढ़ाई मुश्किल

Housing Prices: देश के सात बड़े शहरों में घरों की कीमत तेजी से बढ़ी है। 2021 से 2025 के बीच इनमें 59% का उछाल आया। वहीं, इसी दौरान घर बनाने की लागत करीब 34% बढ़ी। यानी घरों का दाम निर्माण लागत के मुकाबले काफी तेज बढ़ी है। Anarock Research की रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह जमीन की बढ़ती कीमतों को बताया गया है।

दाम किस तरह से बढ़ रहे हैं?

2021 में एक स्टैंडर्ड-प्लस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट की औसत निर्माण लागत ₹2,681 प्रति वर्ग फुट थी। 2025 में यह बढ़कर ₹3,604 प्रति वर्ग फुट हो गई। यानी सालाना करीब 6.9% की बढ़ोतरी हुई।

दूसरी तरफ, घरों की औसत कीमत 2021 में ₹5,826 प्रति वर्ग फुट थी। 2025 में यह बढ़कर ₹9,260 प्रति वर्ग फुट हो गई। इसकी सालाना बढ़ोतरी करीब 12% रही।

निर्माण लागत का कितना हाथ?

Anarock के मुताबिक, घरों की कीमत बढ़ने में करीब 66% योगदान निर्माण लागत का रहा। बाकी 34% बढ़ोतरी जमीन की कीमत, डेवलपर मार्जिन और मांग-सप्लाई जैसे कारणों से हुई।

Anarock Group के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के मुताबिक, पिछले पांच साल में बड़े शहरों में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ी है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग-सप्लाई, लोकेशन और डेवलपर की कीमत तय करने की रणनीति का भी असर पड़ा है।

जमीन की कीमत 120% तक बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच सात बड़े शहरों में जमीन की कीमत 50-120% तक बढ़ी। NCR में जमीन की कीमत 70-130% तक बढ़ी। बेंगलुरु में भी इसमें 60-120% का उछाल आया।

संतोष कुमार के मुताबिक, महंगी जमीन का सीधा असर प्रोजेक्ट की लागत और घर की कीमत पर पड़ता है। खासकर उन इलाकों में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बन रहा है। ऐसे इलाकों में प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जमीन महंगी हो जाती है।

पश्चिम एशिया तनाव से भी बढ़ा दबाव

निर्माण लागत पर अब ईरान युद्ध यानी पश्चिम एशिया विवाद का भी असर पड़ा है। Anarock का अनुमान है कि इससे कुल निर्माण लागत में 8-10% की और बढ़ोतरी हुई है। स्टील और ईंधन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स लागत सबसे ज्यादा बढ़ी है।

स्टील की कीमत करीब 20% बढ़ी है। TMT बार करीब ₹72,000 प्रति टन पहुंच गया है। ईंधन और साइट लॉजिस्टिक्स की लागत 15-20% बढ़ी है। टाइल्स, ग्लास और हार्डवेयर जैसे फिनिशिंग मटेरियल भी 8-12% महंगे हुए हैं। वहीं MEP यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग की लागत 9-13% बढ़ी है।

लेबर अभी भी सबसे बड़ा खर्च

किसी प्रोजेक्ट की कुल लागत में लेबर का हिस्सा करीब 25-30% है। हालांकि, इसकी लागत में बढ़ोतरी बाकी चीजों के मुकाबले कम रही। लेबर कॉस्ट करीब 5-6% बढ़ी है। सीमेंट की कीमत में भी करीब 4-5% की बढ़ोतरी हुई है।

MEP लागत में तेजी ज्यादा रही। 2023 से 2025 के बीच कोर बिल्डिंग की लागत 13% बढ़कर ₹2,212 प्रति वर्ग फुट हो गई। वहीं MEP लागत 17% से ज्यादा बढ़कर ₹788 प्रति वर्ग फुट पहुंच गई। 2025 में कुल निर्माण लागत में MEP का हिस्सा करीब 22% था।

नए और पुराने प्रोजेक्ट पर अलग असर

बढ़ती लागत से पहले लॉन्च और बिक चुके प्रोजेक्ट पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट में डेवलपर के पास कीमत बढ़ाने की गुंजाइश कम होती है। इससे मार्जिन प्रभावित हो सकता है।

नए प्रोजेक्ट में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा है। लेकिन यहां भी एक सीमा है। मिड-इनकम और अफोर्डेबल हाउसिंग में ज्यादा कीमत बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह घर खरीदारों की सीमित भुगतान क्षमता है।

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Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT को अहम BIS सर्टिफिकेशन मिला, सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई का रास्ता खुला

स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को प्रीमियम TMT ग्रेड के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का सर्टिफिकेशन मिल गया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी का दावा है कि इससे उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और बाजार पहुंच मजबूत होगी।

प्रीमियम TMT ग्रेड बनाने की मिली मंजूरी

Rhetan TMT को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार बनाने के लिए BIS लाइसेंस मिला है। इस मंजूरी के बाद Rhetan TMT अब देशभर में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम ग्रेड TMT बार की सप्लाई कर सकेगी। इससे कंपनी के लिए नए बाजार खुलेंगे और उसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का भी विस्तार होगा।

सोलर प्रोजेक्ट से घटेगी बिजली की लागत

Rhetan TMT ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी को GEDA रजिस्ट्रेशन और NHAI समेत सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगस्त 2026 के पहले सप्ताह के अंत तक बिजली उत्पादन शुरू कर देगा। कंपनी का मानना है कि इससे ऊर्जा लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा टिकाऊ बनेगी।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि कंपनी पिछले कुछ वर्षों से क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर लगातार निवेश कर रही है। उनके मुताबिक, BIS सर्टिफिकेशन से प्रीमियम स्टील सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी। वहीं, सोलर पावर प्रोजेक्ट से उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा कुशल बनेगी और लंबे समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Rhetan TMT का कारोबार

Rhetan TMT, TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल रिहायशी, कमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होता है। कंपनी का कहना है कि वह आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक, गुणवत्ता और क्षमता विस्तार पर लगातार फोकस कर रही है, ताकि भारत के बढ़ते स्टील और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।