RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कहा-जरूरत पड़ी तो रुपये में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग रोकने के लिए और कदम उठाएंगे

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय बैंक कुछ और उपायों पर विचार करेगा। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) और इंटरेस्ट रेट सहित कई मसलों पर अपनी राय बताई। गौरतबल है कि पिछले हफ्ते रुपये पर दबाव घटाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई बड़े कदम उठाए थे।

मल्होत्रा ने एक्सटर्नल सेक्टर यानी वैश्विक स्थितियों को भारत के लिए मुख्य चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अच्छी है। बैंकों की बैलेंसशीट मजबूत है। कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार और आरबीआई बैलेंस ऑफ पेमेंट्स की मजबूती के लिए और कदम उठाएंगे।

स्पेकुलेटिव फॉरेक्स ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लागने के लिए हाल में उठाए गए कदमों के बारे में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। उदाहरण के लिए कैंसिल किए गए फॉरेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर रोक लगा दी गई है। इससे गैरजरूरी स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि हमारे फॉरेक्स मार्केट का मुख्य मकसद अंडरलाइंग फॉरेन एक्सचेंज की जरूरत को पूरा करना या हेज करना है। यह शेयर बाजार जैसा नहीं है, जहां पार्टिसिपेंट्स शेयरों की कीमतों की दिशा पर दांव लगा सकते हैं। फॉरेक्स मार्केट मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें वास्तविक हेजिंग की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि एक ही दिन में बड़ी संख्या में ट्रेड्स कैंसिल किए जा रहे हैं और रीबुक किए जा रहे हैं। कुछ मामलों में तो करीब एक-तिहाई ट्रेड्स जिस दिन किए गए उसी दिन क्लोज्ड या कैंसिल कर दिए गए। अगर किसी पार्टिसिपेंट को सच में हेजिंग की जरूरत है तो वह उस ट्रेड को तब तक बनाए रखेगा, जब तक उसकी जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। एक दिन कैंसिलेशंस और रीबुकिंग से पता चलता है कि फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी स्पेकुलेटिव ट्रेड्स हो रहे हैं।

क्या आरबीआई रुपये के सहारा देने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा? इस सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने कहा कि मैं फिर से उस सिद्धांत को दोहराउंगा जिसके बारे में मैंने कुछ दिन पहले कौटिल्य इकोनॉमिक कॉनक्लेव में बताया था। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के बगैर कीमतों में स्थिरता नहीं आ सकती। मॉनेटरी पॉलिसी में उठाए गए कदमों का सही असर तभी दिखता है जब फाइनेंशियल सिस्टम में स्टैबिलिटी होती है।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क को कम करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल नहीं करते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल प्राइस स्टैबिलिटी के लिए होता है। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए रेगुलेटरी, सुपरवायजरी और मैक्रोप्रूडेंशियल टूल्स का इस्तेमाल होता है। हालांकि, दोनों को पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर फाइनेंशियल स्टैबिलिटी पर पड़ सकता है।

RBI ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए उठाए बड़े कदम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

आरबीआई ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने इसका ऐलान 9 अक्टूबर को किया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिसके बाद आरबीआई को एक्शन लेना पड़ा।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए सोमवार से स्पेशल विंडो

RBI तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रोजाना की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए एक स्पेशल विंडो ओपन करेगा। इससे स्पॉट मार्केट में रुपये पर दबाव में कमी आएगी। कई बार रुपये पर दबाव ज्यादा बढ़ने पर आरबीआई ऑयल कंपनियों को सीधे अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की सप्लाई करता है।

सीधे आरबीआई से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेंगे डॉलर

केंद्रीय बैंक के इस कदम से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum 12 अक्टूबर यानी मंगलवार से सीधे आरबीआई के स्पेशल विंडो से डॉलर ले सकेंगे। आरबीआई ने यह भी कहा है कि फॉरेक्स डीलर्स यूजहर्स को किसी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव्स रीबुक करने की इजाजत नहीं देंगे।

 एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट घटी

आरबीआई ने रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट 10 करोड़ डॉलर 50 लाख डॉलर कर दी है। केंद्रीय बैंक ने फॉरेक्स डीलर्स को रुपये से जुड़े सभी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ‘फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व’ बनाए रखने को कहा है। यह हर ट्रांजेक्शन के नोशनल अमाउंट के 20 फीसदी के बराबर होगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंचा

बीते कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव दिखा है। 9 अक्टूबर यानी शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 96.73 के लेवल पर बंद हुआ। यह 8 अक्टूबर के रुपये के क्लोजिंग लेवल जितना है। यह डॉलर के मुकाबले रुपया के अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। इस साल मई में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.96 के लेवल पर आ गया था। यह डॉलर के मुकाबले रुपया का सबसे निचला स्तर है।

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RBI के कदमों से रुपये में उतार-चढ़ाव में आ सकती है कमी 

मुंबई में एएनजेड बैंक के फॉरेक्स स्ट्रेटेजिस्ट धीरज निम ने कहा कि ऑयल कंपनियों की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए स्पेशल विंडो के ऐलान से फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की मांग का एक बड़ा स्रोत खत्म हो गया है। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव में कमी आएगी, लेकिन इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटेगा।