Retirement Planning: आप रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो ये बातें जरूर जान लें

क्या रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपने पैसे जुटाने शुरू कर दिए हैं? अगर नहीं तो इसमें आपको देर नहीं करना चाहिए। लेकिन, इससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। यह सुनने में आसान लगता है लेकिन यह सवाल मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि आज आपको अपने लिए जितना फंड पर्याप्त लगता है, उसकी वैल्यू 10-15 साल बाद काफी कम रह जाएगी।

रिटायरमेंट बाद के खर्च का अंदाजा

कई लोग रिटायरमेंट बाद के खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना खर्च करते हैं, उतना रिटायरमेंट के बाद आपको खर्च करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। कुछ खर्च आपके बजट से निकल जाएंगे तो कुछ नए खर्च आपके बजट में शामिल हो जाएंगे। उदाहरण के लिए घर की EMI चुकाने की जरूरत आपको नहीं रह जाएगी। लेकिन मेडिकल केयर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

इनफ्लेशन से पैसे की वैल्यू घटती रहती है

इनफ्लेशन के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आज आपके परिवार का मंथली खर्च 45,000 रुपये है। 20 साल बाद आपको सेम लाइफ स्टाइल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा मंथली खर्च करना पड़ेगा। इसकी वजह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से पैसे की वैल्यू 6 फीसदी तक घटती जाती है।

कम से कम 25 साल के खर्च का इंतजाम जरूरी

दूसरा, लोगों को यह पता नहीं होता कि रिटायरमेंट बाद उन्हें कितने सालों तक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे उतने लंबे समय तक पैसे खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति 60 साल में रिटायर करता है तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च के बारे में सोचना चाहिए।

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निवेश के कई विकल्पों का कर सकते हैं इस्तेमाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करने के लिए निवेश के कई विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, म्यूचुअल फंड की स्कीम आदि शामिल हैं। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ भी शामिल होगा। आप जितना जल्द रिटारमेंट के लिए निवेश शुरू करेंगे, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश होगी। साथ ही लंबी अवधि में आपके पैसे पर कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलेगा।

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EPFO Alerts: अगर आप भी नौकरीपेशा हैं और अपने PF खाते से एडवांस निकालने, क्लेम सेटलमेंट करने या बैलेंस चेक करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन क्लेम सर्विसेज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

इतना ही नहीं, ईपीएफओ पोर्टल के साथ-साथ सरकारी उमंग ऐप (Umang App) पर मिलने वाली पीएफ सेवाएं भी अगले कुछ दिनों तक उपलब्ध नहीं रहेंगी। इस शटडाउन के कारण करोड़ों पीएफ सब्सक्राइबर्स प्रभावित हो सकते हैं। जानिए ये सेवाएं कब से कब तक बंद रहेंगी और आप कब से दोबारा काम कर पाएंगे।

EPFO पोर्टल: 3 दिनों तक बंद रहेगी क्लेम सर्विस

EPFO द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन और डेटाबेस सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक तय प्लानिंग के तहत माइग्रेशन का काम किया जा रहा है। ऑनलाइन क्लेम सबमिशन और प्रोसेसिंग की सेवाएं 26 जून की रात 00:00 बजे से लेकर 28 जून की रात 23:59 बजे तक पूरी तरह बंद रहेंगी। पीएफ पोर्टल पर ये सभी डिजिटल सेवाएं 29 जून को सुबह 00:00 बजे से दोबारा सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देंगी।

इस मेंटेनेंस पीरियड के दौरान पीएफ मेंबर्स न तो नया ऑनलाइन क्लेम डाल सकेंगे और न ही पुराने क्लेम प्रोसेस होंगे। जो क्लेम इस शटडाउन से पहले सबमिट किए जा चुके हैं, उन पर भी काम सेवाएं बहाल होने के बाद ही शुरू होगा।

उमंग ऐप भी 2 जुलाई तक रहेगा ठप

पोर्टल के अलावा, ईपीएफओ ने एक अन्य नोटिस में बताया है कि शेड्यूल मेंटेनेंस के चलते लोकप्रिय सरकारी ऐप ‘उमंग’ पर भी पीएफ से जुड़ी सेवाएं 2 जुलाई 2026 तक बंद रहेंगी। उमंग ऐप पर यह रुकावट ज्यादा लंबी होने के कारण खाताधारक अगले कुछ दिनों तक इन जरूरी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे:

  1. पीएफ बैलेंस चेक करना
  2. नया क्लेम फाइल करना और क्लेम स्टेटस ट्रैक करना
  3. UAN से जुड़ी सेवाएं
  4. शिकायत दर्ज कराना
  5. स्कीम सर्टिफिकेट और जीवन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना

क्यों लिया गया यह फैसला?

ईपीएफओ का कहना है कि इस तकनीकी अपग्रेडेशन और डेटाबेस कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य अपनी डिजिटल सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बनाना है। इस अपग्रेड के बाद क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगा, जिससे भविष्य में सब्सक्राइबर्स को क्लेम सेटलमेंट में कम समय लगेगा और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस मिलेगा।

अगर आपका कोई पीएफ से जुड़ा बेहद जरूरी काम है, तो 29 जून तक EPFO पोर्टल के लिए और 2 जुलाई उमंग ऐप के लिए तक का इंतजार करें।

1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; सैलरी, टैक्स, PF और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा असर

जुलाई 2026 से कई बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं। इनका असर नौकरीपेशा लोगों, टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ेगा।

इनमें EPFO की UPI से PF निकासी, ITR फाइलिंग की डेडलाइन, महंगाई भत्ता (DA) और क्रेडिट कार्ड के नए नियम शामिल हैं। अगर समय रहते इन बदलावों की जानकारी नहीं होगी, तो टैक्स फाइलिंग, बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में परेशानी हो सकती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन का रखें ध्यान

जुलाई में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए सबसे जरूरी काम रिटर्न दाखिल करना है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) का रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

वहीं, ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका टैक्स ऑडिट नहीं होता, वे 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर तय समय तक ITR नहीं भरा गया, तो जुर्माना लग सकता है। कुछ टैक्स बेनिफिट्स भी नहीं मिलेंगे। साथ ही कुछ तरह के नुकसान (Loss) को अगले साल कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिलेगा।

UPI से PF निकालना हो सकता है आसान

जुलाई में EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मकसद EPFO की डिजिटल सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

नए सिस्टम के तहत EPF खाताधारकों को UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो PF निकालने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो जाएगी।

DA बढ़ने का इंतजार

जुलाई में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर महंगाई भत्ते (DA) पर भी रहेगी। सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में DA की समीक्षा करती है।

इसलिए इस बार भी जुलाई में DA में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार रहेगा। इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिल सकता है।

HDFC Bank क्रेडिट कार्ड के नियम

HDFC Bank ने अपने Regalia Gold और Diners Club Privilege क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े कुछ बदलाव पहले ही लागू हो चुके हैं। अब 1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नए नियम लागू होंगे।

नए नियम के मुताबिक, Regalia Gold कार्डधारकों को मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा पाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम ₹60,000 खर्च करना होगा।

SBI Card में भी बदलेंगे नियम

SBI Card ने भी PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इसके बाद हर महीने मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी।

बीमा प्रीमियम पर होने वाले खर्च और दूसरी कैटेगरी के खर्च के लिए अलग-अलग लिमिट होगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पहले के मुकाबले कम कर दिए गए हैं।

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Personal Loan: अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए कैसे चुनें सही पर्सनल लोन? ये 5 फैक्टर करेंगे आपकी मदद

Personal Loan: -पर्सनल लोन जरूरत के समय बड़ी राहत दे सकता है। मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह, घर की मरम्मत या पुराने कर्जों को चुकाने जैसे कई कामों के लिए लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, बिना योजना के लिया गया लोन बाद में आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी जरूरत, चुकाने की क्षमता और लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

1. सबसे पहले तय करें कितनी रकम चाहिए

लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको कितनी रकम की जरूरत है और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना है। कई बार लोग जरूरत से ज्यादा लोन ले लेते हैं, जिससे EMI और ब्याज दोनों का बोझ बढ़ जाता है।

जरूरत के हिसाब से लोन लेने का फायदा यह है कि कुल ब्याज कम चुकाना पड़ता है और लोन चुकाना भी आसान रहता है। इससे आपकी वित्तीय स्थिति पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

2. ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी

पर्सनल लोन चुनते समय सबसे अहम ब्याज दर है। अलग-अलग बैंक अलग-अलग दरों पर लोन देते हैं। जून 2026 में Axis Bank 8.95% सालाना की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर कर रहा है। वहीं HDFC Bank और कई अन्य बैंक 9.99% से शुरू होने वाली दरों पर लोन दे रहे हैं।

ब्याज दर में छोटा-सा अंतर भी लंबे समय में बड़ी रकम का फर्क पैदा कर सकता है। इसलिए किसी एक बैंक के ऑफर को देखकर फैसला करने की बजाय कई बैंकों की दरों की तुलना करना बेहतर रहता है।

3. छिपे हुए शुल्कों को नजरअंदाज न करें

सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेना सही फैसला नहीं होता। कई बार प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज, पार्ट-पेमेंट फीस, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरे शुल्क लोन की कुल लागत को काफी बढ़ा देते हैं।

यही वजह है कि आवेदन करने से पहले सभी नियम और शुल्कों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी या अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।

4. सही टेन्योर चुनना भी उतना ही अहम

लोन का टेन्योर आपकी EMI और कुल ब्याज लागत दोनों को प्रभावित करता है। कम अवधि वाला लोन चुनने पर EMI ज्यादा आती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है। वहीं लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन ब्याज का कुल बोझ बढ़ जाता है।

इसलिए ऐसा टेन्योर चुनना चाहिए, जो आपकी आय और मासिक बजट के हिसाब से संतुलित हो। EMI इतनी होनी चाहिए कि बाकी जरूरी खर्चों पर असर न पड़े।

5. बैंक की साख और सेवा भी देखें

लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि बैंक या वित्तीय संस्था की साख भी देखनी चाहिए। ग्राहक सेवा, शिकायत निपटान व्यवस्था, लोन प्रोसेसिंग की पारदर्शिता और रकम मिलने में लगने वाला समय जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। एक अच्छी संस्था से लिया गया लोन पूरी प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बना सकता है।

सोच-समझकर लें पर्सनल लोन का फैसला

पर्सनल लोन एक वित्तीय जिम्मेदारी है। बैंक आपको तय शर्तों पर रकम देता है और बदले में आपको हर महीने EMI चुकानी होती है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी आय, खर्च, मौजूदा कर्ज और भविष्य की जरूरतों का आकलन जरूर करें।

ब्याज दर, टेन्योर, अतिरिक्त शुल्क और चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला आपको आर्थिक दबाव से बचा सकता है। जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी वित्तीय फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Gold Silver Prices: सोने और चांदी में मंगलवार को बड़ी गिरावट दिखी। यह ट्रेंड वैश्विक और घरेलू, दोनों बाजारों में दिखा। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। इसकी वजह फेडरल रिजर्व का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में तीन बार ब्याज दर बढ़ने का अनुमान दिया है। इस फैक्टर ने भी निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

सोने और चांदी में कितनी गिरावट

गोल्ड दोपहर 2.40 बजे तक करीब 2100 रुपये यानी 1.42% की गिरावट के साथ 1,46,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। हालांकि, एक वक्त यह गिरकर 1,45,510 रुपये तक पर आ गया था। वहीं, चांदी 7300 रुपये यानी 3% से ज्यादा टूटकर 2,27,010 प्रति किलो पर थी। ये भी कारोबार के दौरान गिरकर 2,25,666 रुपये तक आ गई थी।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो वहां सोना करीब 2% गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। वहीं, चांदी में 5% से ज्यादा की गिरावट आई है। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लगभग इतना ही टूटे हैं।

गोल्ड-सिल्वर गिरने के 5 बड़े कारण

फेडरल रिजर्व के कड़े संकेत: अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने संकेत दिए हैं कि महंगाई को काबू में रखने के लिए इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। ब्याज दरें बढ़ने से निवेशक बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं। क्योंकि सोने-चांदी में ब्याज नहीं मिलता।

ब्याज दर बढ़ने का अनुमान: बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में ब्याज दरों में तीन बार बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। इसके चलते भी निवेशकों ने सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ा दी है।

निवेशकों की मुनाफावसूली: ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका से निवेशक गोल्ड और सिल्वर में मुनाफावसूली भी कर रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर ETF में भी प्रॉफिट बुकिंग दिख रही है।

अमेरिकी डॉलर: डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी देखने को मिली है। डॉलर मजबूत होने से विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है। इससे ग्लोबल डिमांड पर असर दिखता है।

भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम में कुछ नरमी आई है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

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पीएफ का पैसा अटक गया या क्लेम हुआ रिजेक्ट? जानें EPFO में कंप्लेन फाइल करने से लेकर समाधान पाने का पूरा प्रोसेस

EPFO Grievance Management System: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) रिटायरमेंट फंड जमा करने का एक बेहद जरूरी जरिया है। अक्सर वर्किंग प्रोफेशनल्स को पीएफ का पैसा निकालने में देरी, ट्रांसफर रिक्वेस्ट अटकने, कंपनी द्वारा पीएफ का योगदान जमा न करने या केवाईसी (KYC) डिटेल्स अपडेट न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीएफ खाताधारकों को ईपीएफओ के दफ्तर के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। EPFO एक ऑनलाइन शिकायत निवारण की सुविधा देता है। इसे EPF i-Grievance Management System (EPFiGMS) कहा जाता है। इसके जरिए पीएफ मेंबर्स, पेंशनभोगी और एम्प्लॉयर्स अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं और उनके स्टेटस को ट्रैक भी कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है ईपीएफओ शिकायत पोर्टल (EPFiGMS)?

अगर पीएफ से जुड़ी समस्याओं को संबंधित ईपीएफओ कार्यालय के संज्ञान में न लाया जाए तो उन्हें सुलझने में लंबा समय लग सकता है। इस ग्रीवांस पोर्टल के जरिए आपकी शिकायतें सीधे आपके UAN, पीएफ अकाउंट या पेंशन रिकॉर्ड से जुड़े सही ईपीएफओ ऑफिस तक ऑटोमैटिकली पहुंच जाती हैं। एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद EPFO एक रजिस्ट्रेशन नंबर जेनरेट करता है। इसका इस्तेमाल कर आप अपनी शिकायत का स्टेट्स ट्रैक भी कर सकते हैं।

इस पोर्टल पर उठाई जाने वाली मुख्य समस्याएं:

  • पीएफ निकासी में देरी।
  • पीएफ फंड ट्रांसफर से जुड़ी दिक्कतें।
  • पेंशन से जुड़े मामले।
  • गलत व्यक्तिगत जानकारियां।
  • केवाईसी से जुड़ी गड़बड़ियां।
  • कंपनी के योगदान से जुड़े विवाद और पासबुक से जुड़ी समस्याएं।

EPFO पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का पूरा प्रोसेस जानिए

इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया काफी आसान और साफ-सुथरी है। यहां नीचे इसे स्टेप बाई स्टेप समझाया गया है-

  • पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर विजिट करें।
  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर दिए गए Register Grievance विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद आपको खुद को पीएफ मेंबर, पेंशनर, एम्प्लॉयर या ‘अन्य’ कैटेगरी के रूप में चुनना होगा।
  • UAN और वेरिफिकेशन: अगर आप एक पीएफ मेंबर (कर्मचारी) हैं तो अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दर्ज करें और आवश्यक वेरिफिकेशन स्टेप्स को पूरा करें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
  • अकाउंट का चयन: ओटीपी वेरिफिकेशन पूरा होते ही पोर्टल आपके यूएएन से जुड़े सभी पीएफ खातों की लिस्ट दिखाएगा।
  • शिकायत का ब्योरा दें: अब उस पीएफ खाते को सिलेक्ट करें जिससे जुड़ी समस्या है और सही ग्रीवांस टाइप चुनें। समस्या के बारे में पूरी और सही जानकारी विस्तार से लिखें ताकि ईपीएफओ अधिकारी आपके मामले को ठीक से समझ सकें।
  • दस्तावेज अटैच करें: आप अपनी शिकायत के समर्थन में कोई भी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या ईमेल की इमेज भी अटैच कर सकते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर संभालें: एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। इस नंबर को संभाल कर रखें क्योंकि भविष्य में शिकायत को ट्रैक करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी।

अपनी शिकायत का स्टेटस कैसे ट्रैक करें?

शिकायत दर्ज करने के बाद मेंबर्स जब चाहें इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके लिए दोबारा EPFiGMS पोर्टल पर जाएं और View Status पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज करें। इसके बाद स्क्रीन पर दिख जाएगा कि आपकी शिकायत केवल दर्ज हुई है, उसकी जांच चल रही है या फिर उस पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। पोर्टल पर संबंधित ईपीएफओ विभाग की टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं भी देखी जा सकती हैं। अगर ईपीएफओ को आगे की जांच के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है तो यह पोर्टल यूजर्स को और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा भी देता है।

अगर शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें?

ज्यादातर मामलों में समस्याओं का समाधान EPFiGMS पोर्टल के माध्यम से ही हो जाता है। इसके बावजूद जो सदस्य अपने मामले के निपटारे के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं वे इसी पोर्टल के जरिए रिमाइंडर भेज सकते हैं। इसके अलावा वे सरकार के पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस सिस्टम के तहत उपलब्ध अन्य तरीकों से शिकायत को आगे बढ़ा सकते हैं। इंटरनेट पर शेयर किए गए कुछ हालिया अनुभवों से पता चलता है कि कुछ मामलों को EPFiGMS से आगे उच्च अधिकारियों तक भी ले जाया गया है।

ये काम की बातें भी जान लें

शिकायत दर्ज करने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि आपका UAN, आधार, पैन, बैंक डिटेल्स और केवाईसी जानकारी पूरी तरह सही और अपडेटेड है या नहीं। कई बार पीएफ क्लेम में देरी प्रोसेसिंग की गलती से नहीं बल्कि इन रिकॉर्ड्स में मिसमैच (डिटेल्स का आपस में मेल न खाना) होने के कारण होती है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1- क्या बिना UAN के भी EPFO में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है?

उत्तर: हां। जिन व्यक्तियों के पास UAN, एस्टेब्लिशमेंट नंबर या पीपीओ PPO नंबर नहीं है वे भी Others कैटेगरी को चुनकर संबंधित ईपीएफओ कार्यालय का जरूरी विवरण देकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Q2- शिकायत दर्ज करते समय कौन से दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं?

उत्तर: मेंबर्स अपनी समस्या को बेहतर ढंग से समझाने के लिए क्लेम डिटेल्स, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, कंपनी के साथ हुए संवाद (ईमेल आदि) और अन्य संबंधित प्रमाणों जैसे सहायक दस्तावेजों को अपलोड कर सकते हैं।

Q3- क्या शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है?

उत्तर: हां। EPFiGMS पोर्टल पर View Status की सुविधा उपलब्ध है, जहां मेंबर्स शिकायत दर्ज करते समय मिले रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग करके अपनी शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

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