कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह हो रहा है। इसमें लोग तय करेंगे कि प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं। इप्सोस-ग्लोबल न्यूज के सर्वे में अल्बर्टा के करीब 70% लोग कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद अलग देश बनाने की मांग करने वाले लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अल्बर्टा में अलग देश बनाने की मांग कोई नई बात नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह तेल से होने वाली कमाई और केंद्र सरकार के साथ पैसों के बंटवारे को लेकर नाराजगी है। अल्बर्टा में तेल का चौथा सबसे बड़ा भंडार अल्बर्टा में दुनिया के प्रमाणित तेल भंडार के मामले में चौथा सबसे बड़ा भंडार है। यहां का तेल उद्योग, रोजगार और कमाई का बड़ा जरिया है। अलग देश बनाने के समर्थकों का कहना है कि अल्बर्टा केंद्र सरकार को बहुत पैसा देता है, लेकिन उसे बदले में उतना फायदा नहीं मिलता। उनका आरोप है कि प्रांत की कमाई का इस्तेमाल कनाडा के दूसरे हिस्सों की मदद के लिए किया जाता है। वर्ष 2015 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह विवाद फिर बढ़ा। उनकी सरकार ने कार्बन टैक्स और प्रदूषण घटाने के लिए कई नियम लागू किए। अल्बर्टा के तेल उद्योग से जुड़े लोगों ने इनका विरोध किया। उनका मानना था कि इन नियमों से तेल का कारोबार प्रभावित होगा। क्या वोटिंग के बाद अल्बर्टा अलग देश बन जाएगा? नहीं। इस जनमत संग्रह में लोगों से सीधे यह फैसला नहीं कराया जा रहा कि अल्बर्टा तुरंत अलग देश बने या नहीं। उनसे पूछा जा रहा है कि क्या अलग होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। लोगों के सामने दो विकल्प हैं- 1. कनाडा का हिस्सा बने रहना 2. भविष्य में अलग होने पर फैसला लेने के लिए जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करना अगर लोग दूसरे विकल्प के पक्ष में वोट देते हैं, तब भी अल्बर्टा तुरंत अलग देश नहीं बन जाएगा। इसके लिए कनाडा की केंद्र सरकार, दूसरे प्रांतों और वहां रहने वाले मूल निवासी समुदायों के साथ बातचीत करनी होगी। अलग होने की स्थिति में कई सवालों पर फैसला लेना होगा। इनमें संसाधनों का बंटवारा, अधिकार और कनाडा के साथ भविष्य के रिश्ते शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्नी अल्बर्टा के हैं, अलग के पक्ष में नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी खुद अल्बर्टा में पले-बढ़े हैं। वे भी मानते हैं कि प्रांत के लोगों में नाराजगी है। हालांकि, वे अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि वे अलग होने के पक्ष में वोट न करें। ऐसा फैसला देश में लंबे समय तक राजनीतिक खींचतान और अनिश्चितता पैदा कर सकता है। कार्नी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण अल्बर्टा के कई लोगों को ऐसा लगता है, जैसे उनके अपने संसाधन भी उनके नहीं हैं। हालांकि सरकार अल्बर्टा के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अलग होने के खिलाफ फिर जनमत संग्रह क्यों करा रहीं? अल्बर्टा के मुख्यमंत्री डेनियल स्मिथ ने पिछले साल जनमत संग्रह कराने की प्रक्रिया आसान कर दी थी। इसके बाद आजादी का मुद्दा राज्य की राजनीति में और चर्चा में आ गया। हालांकि, स्मिथ खुद अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अलग होने के खिलाफ वोट दे रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस जनमत संग्रह के पीछे स्मिथ की अपनी पार्टी की राजनीति भी है। उनकी पार्टी में कई लोग अल्बर्टा को अलग देश बनाने के पक्ष में हैं। स्मिथ जनमत संग्रह के जरिए अपनी ही पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच चल रहे मतभेदों को सुलझाना चाहती हैं। जनमत संग्रह के अलावा 9 और सवाल पूछे जा रहे अल्बर्टा में सिर्फ आजादी के मुद्दे पर ही वोटिंग नहीं हो रही है। लोगों से कुल 10 सवालों पर राय मांगी जा रही है। 1. अल्बर्टा की आजादी: क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बन जाना चाहिए? 2. प्रवासियों की संख्या: क्या अल्बर्टा सरकार को प्रांत में आने वाले प्रवासियों की संख्या सीमित करने का अधिकार मिलना चाहिए? 3. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता: क्या नौकरियों में अल्बर्टा के लोगों को बाहर से आने वाले लोगों के मुकाबले प्राथमिकता दी जानी चाहिए? 4. स्वास्थ्य सेवाओं पर अलग नियम: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग नियम बनाए जाने चाहिए? 5. शिक्षा की सुविधाएं: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के बच्चों को सरकारी शिक्षा देने पर कुछ पाबंदियां लगाई जानी चाहिए? 6. सरकारी आर्थिक मदद: क्या सरकारी आर्थिक सहायता और दूसरी सुविधाएं पाने के लिए लोगों के लिए अल्बर्टा में कम से कम 12 महीने रहना जरूरी होना चाहिए? 7. वोट देने के लिए पहचान पत्र: क्या प्रांतीय चुनाव में वोट देने वालों के लिए नागरिकता का सबूत दिखाना जरूरी होना चाहिए? 8. प्रांतों को जज चुनने का अधिकार: क्या अल्बर्टा और दूसरे प्रांतों को अपनी अदालतों के जज चुनने का अधिकार मिलना चाहिए? 9. कनाडा की सीनेट खत्म करना: क्या देश की संसद के ऊपरी सदन सीनेट को खत्म कर देना चाहिए? 10. प्रांतों को ज्यादा अधिकार: क्या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मामलों में प्रांतीय सरकारों को केंद्र सरकार के मुकाबले ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए? मुख्यमंत्री स्मिथ ने पहले प्रस्ताव के खिलाफ और बाकी नौ प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अल्बर्टा को ज्यादा ताकत मिलेगी। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी इसी साल जनवरी में ऐसा संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि अल्बर्टा के पास बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं और वह अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के लोग स्वतंत्र सोच वाले हैं और ऐसी चर्चा है कि वहां के लोग कनाडा में बने रहने या अलग होने पर जनमत संग्रह करा सकते हैं।
कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह हो रहा है। इसमें लोग तय करेंगे कि प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं। इप्सोस-ग्लोबल न्यूज के सर्वे में अल्बर्टा के करीब 70% लोग कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद अलग देश बनाने की मांग करने वाले लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अल्बर्टा में अलग देश बनाने की मांग कोई नई बात नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह तेल से होने वाली कमाई और केंद्र सरकार के साथ पैसों के बंटवारे को लेकर नाराजगी है। अल्बर्टा में तेल का चौथा सबसे बड़ा भंडार अल्बर्टा में दुनिया के प्रमाणित तेल भंडार के मामले में चौथा सबसे बड़ा भंडार है। यहां का तेल उद्योग, रोजगार और कमाई का बड़ा जरिया है। अलग देश बनाने के समर्थकों का कहना है कि अल्बर्टा केंद्र सरकार को बहुत पैसा देता है, लेकिन उसे बदले में उतना फायदा नहीं मिलता। उनका आरोप है कि प्रांत की कमाई का इस्तेमाल कनाडा के दूसरे हिस्सों की मदद के लिए किया जाता है। वर्ष 2015 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह विवाद फिर बढ़ा। उनकी सरकार ने कार्बन टैक्स और प्रदूषण घटाने के लिए कई नियम लागू किए। अल्बर्टा के तेल उद्योग से जुड़े लोगों ने इनका विरोध किया। उनका मानना था कि इन नियमों से तेल का कारोबार प्रभावित होगा। क्या वोटिंग के बाद अल्बर्टा अलग देश बन जाएगा? नहीं। इस जनमत संग्रह में लोगों से सीधे यह फैसला नहीं कराया जा रहा कि अल्बर्टा तुरंत अलग देश बने या नहीं। उनसे पूछा जा रहा है कि क्या अलग होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। लोगों के सामने दो विकल्प हैं- 1. कनाडा का हिस्सा बने रहना 2. भविष्य में अलग होने पर फैसला लेने के लिए जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करना अगर लोग दूसरे विकल्प के पक्ष में वोट देते हैं, तब भी अल्बर्टा तुरंत अलग देश नहीं बन जाएगा। इसके लिए कनाडा की केंद्र सरकार, दूसरे प्रांतों और वहां रहने वाले मूल निवासी समुदायों के साथ बातचीत करनी होगी। अलग होने की स्थिति में कई सवालों पर फैसला लेना होगा। इनमें संसाधनों का बंटवारा, अधिकार और कनाडा के साथ भविष्य के रिश्ते शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्नी अल्बर्टा के हैं, अलग के पक्ष में नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी खुद अल्बर्टा में पले-बढ़े हैं। वे भी मानते हैं कि प्रांत के लोगों में नाराजगी है। हालांकि, वे अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि वे अलग होने के पक्ष में वोट न करें। ऐसा फैसला देश में लंबे समय तक राजनीतिक खींचतान और अनिश्चितता पैदा कर सकता है। कार्नी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण अल्बर्टा के कई लोगों को ऐसा लगता है, जैसे उनके अपने संसाधन भी उनके नहीं हैं। हालांकि सरकार अल्बर्टा के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अलग होने के खिलाफ फिर जनमत संग्रह क्यों करा रहीं? अल्बर्टा के मुख्यमंत्री डेनियल स्मिथ ने पिछले साल जनमत संग्रह कराने की प्रक्रिया आसान कर दी थी। इसके बाद आजादी का मुद्दा राज्य की राजनीति में और चर्चा में आ गया। हालांकि, स्मिथ खुद अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अलग होने के खिलाफ वोट दे रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस जनमत संग्रह के पीछे स्मिथ की अपनी पार्टी की राजनीति भी है। उनकी पार्टी में कई लोग अल्बर्टा को अलग देश बनाने के पक्ष में हैं। स्मिथ जनमत संग्रह के जरिए अपनी ही पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच चल रहे मतभेदों को सुलझाना चाहती हैं। जनमत संग्रह के अलावा 9 और सवाल पूछे जा रहे अल्बर्टा में सिर्फ आजादी के मुद्दे पर ही वोटिंग नहीं हो रही है। लोगों से कुल 10 सवालों पर राय मांगी जा रही है। 1. अल्बर्टा की आजादी: क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बन जाना चाहिए? 2. प्रवासियों की संख्या: क्या अल्बर्टा सरकार को प्रांत में आने वाले प्रवासियों की संख्या सीमित करने का अधिकार मिलना चाहिए? 3. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता: क्या नौकरियों में अल्बर्टा के लोगों को बाहर से आने वाले लोगों के मुकाबले प्राथमिकता दी जानी चाहिए? 4. स्वास्थ्य सेवाओं पर अलग नियम: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग नियम बनाए जाने चाहिए? 5. शिक्षा की सुविधाएं: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के बच्चों को सरकारी शिक्षा देने पर कुछ पाबंदियां लगाई जानी चाहिए? 6. सरकारी आर्थिक मदद: क्या सरकारी आर्थिक सहायता और दूसरी सुविधाएं पाने के लिए लोगों के लिए अल्बर्टा में कम से कम 12 महीने रहना जरूरी होना चाहिए? 7. वोट देने के लिए पहचान पत्र: क्या प्रांतीय चुनाव में वोट देने वालों के लिए नागरिकता का सबूत दिखाना जरूरी होना चाहिए? 8. प्रांतों को जज चुनने का अधिकार: क्या अल्बर्टा और दूसरे प्रांतों को अपनी अदालतों के जज चुनने का अधिकार मिलना चाहिए? 9. कनाडा की सीनेट खत्म करना: क्या देश की संसद के ऊपरी सदन सीनेट को खत्म कर देना चाहिए? 10. प्रांतों को ज्यादा अधिकार: क्या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मामलों में प्रांतीय सरकारों को केंद्र सरकार के मुकाबले ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए? मुख्यमंत्री स्मिथ ने पहले प्रस्ताव के खिलाफ और बाकी नौ प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अल्बर्टा को ज्यादा ताकत मिलेगी। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी इसी साल जनवरी में ऐसा संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि अल्बर्टा के पास बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं और वह अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के लोग स्वतंत्र सोच वाले हैं और ऐसी चर्चा है कि वहां के लोग कनाडा में बने रहने या अलग होने पर जनमत संग्रह करा सकते हैं।
Warren Buffett: दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने इस साल अपनी सालाना चैरिटी डोनेशन में Bill Gates Foundation को शामिल नहीं किया। उन्होंने करीब 6 अरब डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) का दान अपने परिवार से जुड़ी चार फाउंडेशन को देने का ऐलान किया। मंगलवार को जारी बयान में उन्होंने Bill Gates Foundation का कोई जिक्र नहीं किया।
2034 तक पूरी संपत्ति दान करेंगे
बफे ने यह भी कहा कि उनकी बची हुई Berkshire Hathaway की हिस्सेदारी 31 दिसंबर 2034 तक पूरी तरह दान कर दी जाएगी। इसकी मौजूदा कीमत करीब 146 अरब डॉलर है।
पहले योजना यह थी कि उनके निधन के बाद उनके तीन बच्चे 10 साल के भीतर उनकी संपत्ति दान करेंगे। अब बफे ने इस प्रक्रिया को पहले ही पूरा करने का फैसला किया है।
Bill Gates Foundation क्यों नहीं शामिल?
बफे ने इस फैसले की वजह नहीं बताई। हालांकि, यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिल गेट्स के दिवंगत फाइनेंसर जॉफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein )से संबंधों को लेकर फिर चर्चा हो रही है।
बिल गेट्स ने हमेशा कहा है कि उन्हें Epstein के अपराधों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि Epstein से उनकी मुलाकात सिर्फ चैरिटी के लिए फंड जुटाने की उम्मीद में हुई थी। बिल गेट्स पर किसी तरह का आपराधिक आरोप नहीं लगा है।
पहले सबसे ज्यादा दान Gates Foundation को मिला
2006 में अपनी संपत्ति दान करने का ऐलान करने के बाद से बफे 61 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम Bill Gates Foundation को दे चुके हैं। हर साल वह Berkshire Hathaway के शेयर Gates Foundation और अपने बच्चों की फाउंडेशन को दान करते रहे हैं।
कभी गहरे दोस्त थे Buffett और Gates
एक समय वॉरेन बफे और बिल गेट्स बेहद करीबी दोस्त थे। दोनों अक्सर मिलते थे, साथ में छुट्टियां बिताते थे और ऑनलाइन ब्रिज खेलते थे। गेट्स कई साल तक Berkshire Hathaway के बोर्ड में रहे। वहीं, बफे भी Gates Foundation के बोर्ड का हिस्सा थे।
हालांकि, बफे ने इसी साल CNBC को बताया था कि 2025 में Epstein से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद से उनकी गेट्स से कोई बातचीत नहीं हुई है।
Epstein मामले पर क्या बोले बफे?
बफे ने कहा कि Jeffrey Epstein लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाने में माहिर था। उन्होंने कहा कि वह किसी ऐसे मामले से जुड़ना नहीं चाहते, जिसकी भविष्य में जांच हो सकती हो।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी होती है कि इतने प्रभावशाली और अमीर लोग Epstein के जाल में कैसे फंस गए। वहीं, Gates Foundation ने बताया है कि उसने Epstein से जुड़े पुराने संबंधों की समीक्षा शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी साझेदारियों की जांच के नियम भी मजबूत किए जा रहे हैं।
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