न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

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12 साल तक मीडिया में काम किया, लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब जसवीर सिंह जस्सी और पत्नी सुधा शाह की नौकरियाँ चली गईं। आर्थिक तंगी आई, लोगों ने ताने मारे और कई बार लगा कि अब आगे कोई रास्ता नहीं है।
फिर मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर गए और वहाँ पर खाए एक वड़ा पाव ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
आज यही कपल नोएडा सेक्टर 19 में अपना वड़ा पाव स्टॉल चलाता है और मेहनत से अपनी नई पहचान बना रहा है।
उनकी कहानी याद दिलाती है कि कोई काम छोटा नहीं होता, अगर आप उसे ईमानदारी और हौसले से करते हैं।
आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है?
@patrakarcouple

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple Vada Pav Business | Patrakar Couple Vada Pav Wale | Noida

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न बड़ा रेस्टोरेंट, न महंगा खाना… ₹100 की थाली से लाखों की बिक्री, जानें कैसे चल रहा ये कारोबार?

गांव के पास मुख्य सड़क पर मौजूद एक छोटी-सी खाने की दुकान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। आमतौर पर लोग बड़ी दुकानों और शहरों के कारोबार को ही ज्यादा कमाई वाला मानते हैं, लेकिन इस दुकान की कहानी कुछ अलग तस्वीर दिखाती है। यहां कम कीमत में मिलने वाला खाना और लगातार आने वाले ग्राहक लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। दुकान के मालिक से हुई बातचीत में रोजाना ग्राहकों और टिफिन ऑर्डर को लेकर कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए, जिन्हें देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी चर्चा करने लगे।

खास बात यह है कि दुकान किसी बड़े शहर या महंगे बाजार में नहीं, बल्कि गांव के पास स्थित है। इसके बावजूद कारोबार को लेकर सामने आई जानकारी ने छोटे और स्थानीय बिजनेस की क्षमता पर नई बहस छेड़ दी है। आखिर इस छोटी दुकान की कमाई का पूरा गणित क्या है और लोग इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों कर रहे हैं? आगे जानिए।

₹100 में मिलती है पूरी थाली

सोशल मीडिया यूजर नलिनी उनागर ने इस दुकान की जानकारी X पर साझा की। पोस्ट के मुताबिक, दुकान पर सिर्फ 100 रुपये में पूरी थाली मिलती है। इसमें दो सब्जियां, रोटी, दाल, चावल, पापड़ और सलाद शामिल हैं। यानी ग्राहक को कम कीमत में काफी कुछ खाने को मिल जाता है। दुकान की यही खासियत इसे आसपास के लोगों के लिए पसंदीदा विकल्प बनाती है।

रोज 25 से ज्यादा लोग खाते हैं खाना

नलिनी उनागर ने दुकान के मालिक से बातचीत में पूछा कि रोज कितने लोग यहां खाना खाते हैं। मालिक के अनुसार, हर दिन 25 से ज्यादा ग्राहक दुकान पर बैठकर खाना खाते हैं। दुकान मुख्य सड़क पर होने के कारण वहां आने-जाने वाले लोगों को भी आसानी से खाना मिल जाता है। यही लोकेशन कारोबार के लिए बड़ा फायदा साबित होती दिखाई दे रही है।

40 से ज्यादा टिफिन ऑर्डर भी

दुकान की कमाई सिर्फ सामने बैठकर खाना खाने वाले ग्राहकों से नहीं होती। मालिक के अनुसार, रोजाना 40 से ज्यादा पक्के टिफिन ऑर्डर भी मिलते हैं। जब दोनों आंकड़ों को जोड़ा जाए तो रोजाना 65 से ज्यादा थाली बिकने का दावा सामने आता है।

गांव में कौन मंगाता है टिफिन?

यह सवाल भी दिलचस्प है कि गांव में टिफिन की जरूरत किसे पड़ती है। मालिक ने बताया कि उनके ग्राहकों में खेतों में काम करने वाले लोग और अकेले रहने वाले बुजुर्ग शामिल हैं। ऐसे लोगों के लिए रोज खाना बनाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सस्ती और तैयार थाली उनके लिए सुविधाजनक विकल्प बन जाती है।

₹100 की थाली से कितनी कमाई?

अगर रोजाना 65 थाली 100 रुपये के हिसाब से बिकती हैं, तो गणित कुछ ऐसा बनता है:

एक दिन की बिक्री: ₹6,500

30 दिन की बिक्री: ₹1.95 लाख

एक साल की बिक्री: ₹23.4 लाख

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कुल बिक्री का अनुमान है, मुनाफा नहीं।

दुकान में कर्मचारी भी नहीं रखने पड़ते

पोस्ट के अनुसार, दुकान का खाना मालिक और उनकी पत्नी खुद तैयार करते हैं। इससे कर्मचारियों की सैलरी का अतिरिक्त खर्च बचता है। इतना ही नहीं, मालिक की अपनी खेती भी है और वह वहां सब्जियां उगाते हैं। इससे दुकान के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ सब्जियों की लागत कम हो जाती है।

हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा मुनाफे का दावा

सोशल मीडिया पोस्ट में दुकान के 60 फीसदी तक मुनाफे का दावा किया गया। इस हिसाब से हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा होने की बात कही गई। लेकिन यही दावा ऑनलाइन बहस का कारण भी बन गया।

मुनाफे के हिसाब पर क्यों उठे सवाल?

कुछ यूजर्स ने कहा कि 1.95 लाख रुपये की मासिक बिक्री का हिसाब तो आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन 1 लाख रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा तय करने के लिए सभी खर्चों को देखना जरूरी है।इन खर्चों में सब्जी और राशन, LPG, बिजली, पैकिंग, खाना खराब होने का नुकसान, डिलीवरी और किराया शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा मालिक और उनकी पत्नी की मेहनत को भी लागत में जोड़ना होगा। इसलिए 60 फीसदी का मुनाफा एक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी से नहीं होती।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि छोटे कारोबार को कम नहीं आंकना चाहिए। उनके मुताबिक, कम कीमत, लगातार ग्राहक और कम खर्च मिलकर छोटे बिजनेस को भी बड़ा बना सकते हैं। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग छोटे और मध्यम स्तर के कारोबार पर निर्भर हैं, इसलिए ऐसी दुकान का सफल होना कोई हैरानी की बात नहीं है।

₹100 में इतनी चीजें, लोगों को लगा शानदार सौदा

कई लोगों ने दुकान की कीमत और खाने की मात्रा की तारीफ भी की। उनका कहना था कि 100 रुपये में इतनी चीजें मिलना ग्राहकों के लिए काफी अच्छा सौदा है। हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि खाने के कारोबार में कम कीमत के साथ साफ-सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक ग्राहक बनाए रखने के लिए स्वाद के साथ हाइजीन भी जरूरी है।