न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

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12 साल तक मीडिया में काम किया, लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब जसवीर सिंह जस्सी और पत्नी सुधा शाह की नौकरियाँ चली गईं। आर्थिक तंगी आई, लोगों ने ताने मारे और कई बार लगा कि अब आगे कोई रास्ता नहीं है।
फिर मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर गए और वहाँ पर खाए एक वड़ा पाव ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
आज यही कपल नोएडा सेक्टर 19 में अपना वड़ा पाव स्टॉल चलाता है और मेहनत से अपनी नई पहचान बना रहा है।
उनकी कहानी याद दिलाती है कि कोई काम छोटा नहीं होता, अगर आप उसे ईमानदारी और हौसले से करते हैं।
आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है?
@patrakarcouple

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple Vada Pav Business | Patrakar Couple Vada Pav Wale | Noida

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Video: 40 रुपये की कॉफी बेचकर एक दिन में 18 हजार की बिक्री, जानें कैसे चला ये अनोखा स्टॉल

एक कप कॉफी की कीमत भले ही 40 रुपये हो, लेकिन अगर ग्राहक लगातार मिलते रहें तो यही छोटी बिक्री बड़ा आंकड़ा बना सकती है। इसी गणित को परखने के लिए कंटेंट क्रिएटर देवांश त्यागी ने कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर एक दिन के लिए कॉफी स्टॉल लगाया। मकसद था यह देखना कि ऑफिस जाने वाले लोगों के बीच कॉफी बेचकर एक दिन में कितनी बिक्री की जा सकती है। सुबह स्टॉल शुरू हुआ तो धीरे-धीरे ग्राहक आने लगे। कभी बिक्री धीमी हुई तो कभी ऑफिस ब्रेक और शाम की भीड़ ने रफ्तार बढ़ा दी। दिन खत्म होते-होते सामने आया 450 कप का आंकड़ा, जिसने इस छोटे से प्रयोग को चर्चा में ला दिया।

सुबह-सुबह शुरू हुई कॉफी की दुकान

देवांश ने अपने प्रयोग की पूरी झलक सोशल मीडिया वीडियो में दिखाई। सुबह उन्होंने एक टेबल, गैस स्टोव, दूध, इंस्टेंट कॉफी, कप और दूसरी जरूरी चीजों का इंतजाम किया।

करीब 10 बजे तक उनका छोटा सा स्टॉल तैयार था। ग्राहकों को सामान्य कॉफी से थोड़ा अलग अनुभव देने के लिए उन्होंने चार फ्लेवर भी रखे।

इसके बाद दूध गर्म किया गया, कॉफी तैयार हुई और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए बिक्री शुरू हो गई।

पहले दो घंटे में बिके 40 कप

सुबह ऑफिस ब्रेक के दौरान लोगों की आवाजाही बढ़ी तो कॉफी की बिक्री भी शुरू हो गई। देवांश ग्राहकों को कॉफी देने के साथ-साथ उनसे स्वाद का फीडबैक भी लेते रहे।

उनके मुताबिक, शुरुआत अच्छी रही और पहले दो घंटे में ही 40 कप कॉफी बिक गई।

दोपहर में धीमी हुई बिक्री, शाम को फिर बढ़ी भीड़

हालांकि पूरे दिन ग्राहकों की रफ्तार एक जैसी नहीं रही। दोपहर के समय बिक्री कुछ धीमी पड़ गई। लेकिन शाम होते ही ऑफिस से निकलने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ी और कॉफी की मांग फिर तेज हो गई।

ऑर्डर बढ़ने लगे तो देवांश को कॉफी बनाने की रफ्तार भी बढ़ानी पड़ी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उस समय उनके हाथ इतनी तेजी से चल रहे थे, जैसे वह खुद कॉफी मशीन बन गए हों।

कॉफी का स्टॉक ही पड़ गया कम

बढ़ती बिक्री के बीच आखिरकार एक ऐसी समस्या सामने आई, जो किसी भी छोटे कारोबार के लिए आम है। कॉफी का स्टॉक खत्म हो गया। देवांश के मुताबिक, दिन के अंत तक उन्होंने कुल 450 कप कॉफी बेचने का दावा किया। अगर हर कप की कीमत 40 रुपये मानी जाए, तो 450 कप की कुल बिक्री 18,000 रुपये बैठती है।

18 हजार रुपये की बिक्री का मतलब 18 हजार का मुनाफा नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। 18 हजार रुपये पूरे दिन की बिक्री यानी राजस्व है, मुनाफा नहीं।दूध, कॉफी, फ्लेवर, कप, गैस और दूसरी चीजों पर हुए खर्च को निकालने के बाद ही पता चलेगा कि वास्तव में कितना पैसा बचा। वीडियो में इन सभी खर्चों का पूरा हिसाब सामने नहीं आया।

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क्या हर दिन इतनी कमाई हो सकती है?

देवांश के इस प्रयोग के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस भी शुरू हो गई। कुछ लोगों को यह कारोबार का अच्छा आइडिया लगा, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि क्या हर दिन 450 कप कॉफी बेचना संभव है। कुछ यूजर्स का कहना था कि एक दिन कॉर्पोरेट कर्मचारियों का समर्थन मिल जाना और रोजाना स्थायी ग्राहक बनना दो अलग बातें हैं। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि असली चुनौती सिर्फ एक दिन बिक्री करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक उसी जगह कारोबार चलाना है।

एक दिन का प्रयोग, लेकिन सवाल बड़ा

इस कॉफी स्टॉल के प्रयोग ने कम से कम एक बात जरूर दिखा दी कि सही जगह, सही ग्राहक और सही कीमत छोटे कारोबार की बिक्री पर बड़ा असर डाल सकते हैं। हालांकि, एक दिन की 18 हजार रुपये की बिक्री को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि इतनी कमाई हर दिन आसानी से हो सकती है। असली तस्वीर लागत, ग्राहक और लगातार बिक्री के आंकड़ों से ही सामने आएगी।

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महीने की 2 लाख कमाई और 1 लाख सीधा मुनाफा! बेंगलुरु का यह बार्बर कमा रहा है बंपर प्रॉफिट, जानें इनकी सक्सेस सीक्रेट

कई बार बिजनेस शुरू करने के लिए बड़े ऑफिस, महंगे ऐप या लाखों रुपये की टेक्नोलॉजी की जरूरत नहीं होती। लोगों की रोज की जरूरत से जुड़ा कोई साधारण काम भी अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है। बेंगलुरु के एक नाई की कहानी इसी बात का उदाहरण बनकर सामने आई है।एक समय खुद बाल काटने का काम करने वाले इस शख्स ने आगे चलकर अपना सैलून शुरू किया और धीरे-धीरे कारोबार को बढ़ाकर चार आउटलेट तक पहुंचा दिया। सोशल मीडिया पर सामने आई इस कहानी ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा, क्योंकि इसमें एक छोटे और आम दिखने वाले बिजनेस करके कमाई की बढ़ती संभावना दिखाई देती है।

मालिक ने सीधे किसी बड़े बिजनेस या इन्वेस्टमेंट से शुरुआत नहीं की थी। वह पहले खुद नाई का काम करता था और इसी काम का एक्सपीरियंस लेकर आगे अपना सैलून शुरू किया। काम बढ़ने के साथ उसने कारोबार को भी बड़ा किया और अब उसके चार सैलून चलने की बात कही जा रही है। इससे यह भी पता चलता है कि किसी काम का एक्सपीरियंस आगे चलकर अपना बिजनेस खड़ा कर सकता है और उसके लिए ये फॉर्मूला अपना सकते है।

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1. बिजनेस मॉडल (सैलून)

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, इस सैलून से महीने में करीब 2 लाख रुपये का रेवेन्यू आता है। इसमें से दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और कमीशन जैसे खर्च निकालने के बाद करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये तक बचने का दावा किया गया है। यानी रोज की जरूरत वाली सर्विस होने की वजह से सैलून का कारोबार लगातार कस्टमर पर डिपेंड रहकर चल सकता है। लेकिन कमाई का यह आंकड़ा हर महीने एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

2. रेवेन्यू और प्रॉफिट

Reddit यूजर के मुताबिक, उनकी दोस्त ने सैलून में काम करने वाले नाई से पूछा कि दुकान से मालिक की कितनी कमाई होती है। जवाब में बताया गया कि सैलून से हर महीने करीब ₹2 लाख का रेवेन्यू आता है। इसमें से दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और कमीशन जैसे खर्च निकालने के बाद मालिक के पास करीब ₹80 हजार से ₹1 लाख तक बच सकते हैं। यानी कमाई सिर्फ हेयरकट से नहीं, बल्कि खर्चों को संभालकर और कस्टमर की संख्या बनाए रखकर होती है।

3. बिजनेस प्रैक्टिस और एक्सपेंस

इस कहानी पर चर्चा करते हुए कई लोगों ने कहा कि रोज की जरूरत से जुड़े छोटे बिजनेस में अच्छी कमाई हो सकती है। हेयरकट और ग्रूमिंग ऐसी सर्विस हैं जिनकी लोगों को बार-बार जरूरत पड़ती है। इसी तरह चाय की दुकान, नाश्ते की दुकान या दूसरी लोकल सर्विस भी सही जगह और अच्छे कस्टमर बेस के साथ अच्छा बिजनेस कर सकती है।

4. बिजनेस एक्सपीरियंस 

सैलून की कमाई सुनकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति इतनी ही कमाई आसानी से कर सकता है। दुकान खोलने के लिए जगह का किराया, फर्नीचर, मशीनें, स्टाफ, बिजली, सामान और शुरुआती महीनों का खर्च उठाना पड़ता है। इसके अलावा अच्छी लोकेशन पर पहले से कई सैलून मौजूद हो सकते हैं, जिससे मुकाबला भी बढ़ जाता है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने बड़े सैलून या फ्रैंचाइजी के लिए काफी ज्यादा शुरुआती इन्वेस्टमेंट की जरूरत होने की बात भी कही है।

ध्यान दें

यह जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट और यूजर्स के दावों पर आधारित है। इसे किसी बिजनेस की गारंटी या इस्वेस्टमेंट की सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

VIDEO: ‘मेरी सैलरी बताने लायक नहीं’ वेंडर की महीने की 1.5 लाख कमाई सुन हैरान रह गई कंटेंट क्रिएटर

सोशल मीडिया पर एक स्ट्रीट फूड बेचने वाले का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्ट्रीट फूड बेचने के महीने की कमाई जानकर हर कोई हैरान है। एक कंटेंट क्रिएटर ने जब वेंडर से उसकी महीने की इनकम के बारे में पूछा, तो जवाब सुनकर वह खुद भी हैरान रह गई। सड़क किनारे मैगी और छोले-कुलचे बेचने वाले इस शख्स ने दावा किया कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये कमाता है। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छोटे कारोबार से होने वाली कमाई को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई।

इंस्टाग्राम पर ये वीडियो कंटेंट क्रिएटर कोमल नेगी ने शेयर किया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “रेहड़ी लगाने से क्या हो जाएगा? अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो यह वीडियो देखने के बाद अपनी सोच जरूर बदलें।”

महीने में लाखों कमाता है ये वेंडर

वीडियो में कंटेंट क्रिएटर कोमल नेगी एक सड़क किनारे लगे फूड स्टॉल पर पहुंचती हैं, जहां एक व्यक्ति मैगी और छोले-कुलचे बेचता है। बातचीत के दौरान जब वह उससे उसकी महीने की इनकम के बारे में पूछती हैं, तो दुकानदार बताता है कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई कर लेता है। उसका जवाब सुनकर कंटेंट क्रिएटर भी हैरान रह जाती हैं। वेंडर की कमाई सुनकर कोमल नेगी जोर से हंस पड़ती हैं और कहती हैं, “अब मेरी सैलरी बताने लायक ही नहीं है।” दोनों के बीच हुई ये छोटी-सी बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।

 

लोगों ने किया कमेंट

वीडियो पर लोगों ने अलग-अलग तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “क्या वह मुझे नौकरी पर रखेगा?” वहीं दूसरे ने कहा, “न इनकम टैक्स, न किराया।”एक कमेंट में लिखा गया, “कोई भी काम छोटा नहीं होता। शुरुआत में मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है, लेकिन बाद में सब ठीक हो जाता है। ठेला लगाने में शर्म की कोई बात नहीं है। आज के समय में सबसे जरूरी चीज कमाई है।” एक अन्य यूजर ने वेंडर की सोने जैसी दिखने वाली चेन की ओर इशारा करते हुए लिखा, “चेन दिख रही है, ब्रो।” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “यह सच है कि सड़क किनारे ठेला लगाने वाले जितने गरीब दिखते हैं, उतने होते नहीं हैं।” लोग इस वीडियो को काफी शेयर भी कर रहे हैं।