3 करोड़ की नौकरी छोड़ दुनिया घूमने निकल पड़ा शख्स, फिर बना डाली करोड़ों की कंपनी

सोशल मीडिया पर अंडर नीट शेपवियर ब्रांड्स के को-फाउंडर और सीईओ विमर्श राजदान का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में विमर्श राजदान ने बताया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि, करीब 10 साल तक रोज 18 से 20 घंटे काम करने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि अब अपने सपनों पर काम करने का समय आ गया है। इसी सोच की वजह से उन्होंने ऊंची सैलरी वाली नौकरी छोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप का रास्ता चुना। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

शेयर किया पोस्ट

विमर्श राजदान ने लिंक्डइन पर शेयर की गई एक पोस्ट में बताया कि जब उन्होंने एक साल का ब्रेक लेकर दुनिया घूमने का फैसला किया था, तब कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी। लेकिन उनका कहना है कि यही फैसला उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस अनुभव ने काम करने के तरीके, नेतृत्व और बिजनेस को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल दी।

3 करोड़ को नौकरी छोड़ दी

राजदान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने 3 करोड़ रुपये की CTC वाली नौकरी छोड़ दी और एक साल तक पूरी दुनिया घूमने निकल गया।” उन्होंने आगे बताया कि, “पिछले 13 सालों तक मेरी जिंदगी सिर्फ काम के इर्द-गिर्द ही घूमती रही। मैं घर केवल सोने के लिए जाता था। रोज 18 से 20 घंटे काम करना मेरी दिनचर्या बन गई थी और धीरे-धीरे यही मेरे लिए नॉर्मल बात हो गई थी।”

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आखिरकार, राजदान ने अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया। नई नौकरी शुरू करने की बजाय उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और आइसलैंड, क्रोएशिया व पेरिस जैसे कई देशों की यात्रा की। उनके मुताबिक, ये सफर उनकी जिंदगी का अहम मोड़ साबित हुआ और इसी अनुभव ने उनकी सोच और आगे का रास्ता बदल दिया। राजदान ने माना कि करियर बनाने में कई साल लगाने के बाद करोड़ों रुपये की सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के उनके फैसले को ज्यादातर लोग समझ नहीं पाए। उन्होंने लिखा, “लोगों ने कहा कि मैं पागल हो गया हूं। उन्होंने कहा कि तुम अपना मोमेंटम खो रहे हो।”

3 लाख सैलरी के बाद भी लाइफ में नहीं मिल रहा सुकून, इंजीनियर की ये पोस्ट हो रही खूब वायरल

सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि, हर महीने 3 लाख रुपये सैलरी मिलने के बावजूद वह रोज 15-16 घंटे काम करने की वजह से पूरी तरह थक चुका है। लगातार काम का दबाव, लंबे घंटे और निजी जीवन के लिए समय न मिलने की वजह से ये नौकरी उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गई। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं कई लोग इस पर अपनी राय भी रख रहे हैं।

r/IndiaCareers पर शेयर की गई सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने एक Reddit पोस्ट किया। इस पोस्ट का टाइटल था “महीने में 3 लाख रुपये कमा रहा हूं… लेकिन फिर भी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं।” इस पोस्ट में इंजीनियर ने अपनी मानसिक थकान और बर्नआउट का अनुभव शेयर किया।

महीने की 3 लाख है सैलरी

यूज़र ने लिखा, “मैं टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं, महीने में 3 लाख रुपये से ज्यादा कमाता हूं और मेरे पास चार साल का अनुभव है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रेजुएशन के बाद से मैं एक ही मिड-साइज स्टार्टअप में काम कर रहा हूं।” उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सैलरी लगातार बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद अब उन्हें अपनी नौकरी में पहले जैसी खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं हो रही है।

रोज उसी काम से थक गया हूं

उन्होंने आगे बताया कि अब काम पहले जैसा चुनौतीपूर्ण नहीं रहा और रोज एक ही तरह का काम करते-करते वह थक चुके हैं। यूजर ने लिखा, “आजकल ऐसा लगता है कि मैं दिन-रात बस एक ही काम कर रहा हूं। मुझे महसूस होता है कि मैंने कुछ नया सीखना बंद कर दिया है। इसके अलावा काम का दबाव इतना ज्यादा है कि कई बार रोज 15 से 16 घंटे तक काम करना पड़ता है।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है।

इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त नहीं

पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने लिखा, “मेरे पास अपने लिए बिल्कुल समय नहीं बचता। मैं आगे बढ़ना चाहता हूं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता। ऊपर से इस समय बहुत कम कंपनियां भर्ती कर रही हैं। अगर नौकरी बदलनी है, तो कम से कम 3 से 4 महीने की तैयारी करनी होगी और यह सब उसी काम के साथ करना पड़ेगा, जिसने पहले से ही मुझे पूरी तरह थका दिया है।”

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लोगों से मांगी सलाह

पोस्ट के आखिर में इंजीनियर ने ऐसे लोगों से सलाह मांगी, जो पहले इसी दौर से गुजर चुके थे। इसके बाद कई यूजर्स ने नौकरी बदलने, मेंटल हेल्थ का ध्यान रखने और वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर करने जैसे सुझाव दिए। एक यूजर ने कॉर्पोरेट नौकरी के अलावा दूसरे विकल्प तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कमेंट किया, “क्यों न अपना कुछ शुरू करें? जरूरी नहीं कि वह टेक से जुड़ा हो। यह आपकी हॉबी, किसी इवेंट या छोटा-सा ऑनलाइन बिजनेस भी हो सकता है। शुरुआत में शायद उससे खर्च न निकल पाए, लेकिन आपको खुशी जरूर मिलेगी। और अगर बाद में लगे कि यह सही नहीं है, तो आप दोबारा कॉर्पोरेट नौकरी में वापस जा सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि, “तुम्हें तैयारी के लिए 3-4 महीने क्यों चाहिए? 10-15 दिन की छुट्टी लो और दूसरी कंपनियों में आवेदन करना शुरू कर दो। मुझे लगता है कि तुम इंटरव्यू देने से घबरा रहे हो, क्योंकि काफी समय से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। थोड़ा ब्रेक लो और अप्लाई करना शुरू करो। अगर शुरुआत में चयन नहीं भी होता, तो चिंता की बात नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास पहले से नौकरी है।”

कई Reddit यूजर्स का मानना था कि इंजीनियर की सबसे बड़ी समस्या इंटरव्यू की तैयारी नहीं, बल्कि रोज़ 16 घंटे तक काम करना है। एक यूजर ने लिखा, “सबसे पहले किसी भी तरह अपने काम के घंटे कम करने की कोशिश करो। अगर जरूरत पड़े, तो स्वास्थ्य का कारण बता दो या फिर साफ कह दो कि तुम अपने लिए और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हो। इसके अलावा, बिना किसी को बताए भी हर दिन अपने लिए थोड़ा समय निकालने की आदत डालो।”

ऑफिस भी, ट्रैवल भी! बिना ज्यादा छुट्टियों के ऐसे बनाएं घूमने का प्लान

क्या 9 से 5 की जॉब करते हुए भी बार-बार घूमा जा सकता है? इसका जवाब है—हां। सही प्लानिंग, छुट्टियों का समझदारी से इस्तेमाल और बजट मैनेजमेंट (budget management) के साथ नौकरी छोड़े बिना भी ट्रैवल का सपना पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से आप काम और घूमने के बीच बेहतरीन बैलेंस बना सकते हैं:

 

ट्रिप (trip) की प्लानिंग पहले से करें

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अगर आप नौकरी के साथ घूमना चाहते हैं, तो पहले से प्लान बनाना सबसे जरूरी है। ट्रैवल की तारीख, बजट, होटल और फ्लाइट (flights) की बुकिंग समय रहते कर लें। इससे खर्च कम होता है और ऑफिस से छुट्टी लेने में भी आसानी रहती है।

 

 

छुट्टियों (holidays) और वीकेंड (weekends) का सही इस्तेमाल करें

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सिर्फ लंबी छुट्टियों का इंतजार करने की बजाय, सरकारी छुट्टियों और वीकेंड को जोड़कर ट्रिप प्लान करें। इससे कम छुट्टियों में भी 4 से 10 दिन तक का अच्छा ब्रेक मिल सकता है और नई जगहों को आराम से घूमने का मौका मिलता है।

 

 

हर महीने ट्रैवल फंड (travel fund) बनाएं

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ट्रैवल के लिए अलग से बचत करना अच्छी आदत है। हर महीने अपनी सैलरी का थोड़ा हिस्सा ट्रैवल फंड में रखें और गैर-जरूरी खर्चों को कम करें। इससे ट्रिप का खर्च एक साथ उठाने का दबाव नहीं पड़ता और बिना स्ट्रेस के ट्रैवलिंग की जा सकती है।

 

 

 

रिमोट वर्क (remote work) का फायदा उठाएं

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अगर आपकी कंपनी वर्क फ्रॉम होम (work-from-home) या वर्क फ्रॉम एनीवेयर (work from anywhere) की सुविधा देती है, तो इसका पूरा लाभ लें। कुछ दिन किसी नई जगह से काम करते हुए बाकी समय वहां घूम सकते हैं। इससे काम और ट्रैवल दोनों साथ-साथ चलते हैं।

 

 

 

एक्स्ट्रा इनकम (extra income) और स्मार्ट बजटिंग अपनाएं

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अगर पॉसिबल हो, तो फ्रीलांसिंग (freelancing), कंटेंट क्रिएशन (content creation) या किसी दूसरे पार्ट-टाइम काम से एक्स्ट्रा कमाई करें। यह पैसा ट्रैवल के खर्च में मदद कर सकता है। हालांकि, एक्स्ट्रा कमाई जरूरी नहीं है—सही बजट प्लानिंग और रेगुलर सेविंग से भी साल में एक या दो अच्छी ट्रिप आसानी से की जा सकती हैं।

2 लाख रुपये महीने की सैलरी भी बन सकती है सबसे बड़ा जाल! MBA प्रोफेशनल ने बताई चौंकाने वाली वजह

कॉर्पोरेट दुनिया में बेहतर सैलरी और बड़ा पद हासिल करना अक्सर सफलता की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। हर नई नौकरी, प्रमोशन और वेतन वृद्धि लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन क्या लगातार अधिक कमाई की चाह वास्तव में बेहतर जीवन की गारंटी देती है, या फिर ये इंसान को ऐसी दौड़ में शामिल कर देती है, जहां संतुष्टि हमेशा एक कदम दूर रहती है? यही सवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक अनुभवी प्रोफेशनल की राय ने इस बहस को नई दिशा दे दी है।

उनका मानना है कि करियर में एक स्तर के बाद केवल ज्यादा सैलरी पर ध्यान देने के बजाय जीवन की गुणवत्ता, मानसिक शांति, परिवार और भविष्य की सुरक्षा पर भी उतना ही फोकस होना चाहिए। उनकी यह सोच लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है और एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इंसान के लिए ‘पर्याप्त कमाई’ की सीमा क्या होनी चाहिए।

‘₹2 लाख महीने के बाद शुरू हो जाता है असली ट्रैप

करीब 13 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले MBA ग्रेजुएट मोहित तलरेजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि भारत में यदि किसी की मासिक आय लगभग ₹2 लाख तक पहुंच जाती है, तो वह आरामदायक जीवन जी सकता है। उनके मुताबिक इसके बाद सिर्फ ज्यादा सैलरी के पीछे भागना इंसान को ऐसी रेस में धकेल देता है, जहां प्रतिस्पर्धा कभी खत्म नहीं होती।

कॉर्पोरेट सीढ़ी जितनी ऊंची, उतना बढ़ता है दबाव

तलरेजा का मानना है कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के साथ काम का तनाव और जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे स्तर पर अक्सर उन्हीं लोगों से मुकाबला होता है जो करियर के लिए अपनी सेहत, परिवार और निजी जिंदगी तक दांव पर लगाने को तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि हर किसी के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा सही विकल्प नहीं हो सकती।

पहले तय करें कितना काफी है

उन्होंने सलाह दी कि हर प्रमोशन को अगला लक्ष्य बनाने के बजाय लोगों को पहले यह तय करना चाहिए कि उनकी जरूरतों के हिसाब से कितनी आय पर्याप्त है। जब वो स्तर हासिल हो जाए, तो जीवन की गुणवत्ता सुधारने, परिवार के साथ समय बिताने और स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

सिर्फ नौकरी नहीं, भविष्य के लिए दूसरा सहारा भी बनाएं

तलरेजा का कहना है कि प्रोफेशनल्स को ऐसी स्किल्स विकसित करनी चाहिए जो आने वाले 10-15 सालों में नौकरी पर निर्भर हुए बिना भी कमाई का जरिया बन सकें। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे भविष्य में स्वतंत्र आय अर्जित की जा सकती है।

लंबी दौड़ में क्या है असली जीत?

उनके अनुसार लक्ष्य सिर्फ बड़ा पैकेज या ऊंचा पद हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी जिंदगी बनानी चाहिए जिसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ मानसिक शांति और व्यक्तिगत संतुलन भी बना रहे।

सोशल मीडिया पर बंट गई राय

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताते हुए कहा कि एक समय के बाद पैसा नहीं, जीवन का संतुलन ज्यादा मायने रखता है। वहीं कई लोगों का कहना था कि आज के दौर में ₹2 लाख महीना भी हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं है। एक यूजर ने लिखा कि इतनी आय में बड़े शहरों में घर खरीदना आसान नहीं, जबकि दूसरे ने सलाह दी कि इस स्तर की कमाई के बाद खुद का बिजनेस शुरू करने पर विचार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: ट्रेन में महिला का फूटा गुस्सा! छेड़छाड़ करने वाले के साथ किया कुछ ऐसा, वीडियो हुआ वायरल

मुंबई में शख्स ने लाखों की सैलरी छोड़ किया 1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट’, रेस्टोरेंट और निवेश से हो रही 4 लाख की कमाई

एक व्यक्ति, जिसने ऐसा रास्ता चुना जिसे कई लोग जोखिम भरा मानते थे, अब आर्थिक आजादी और काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन का आनंद ले रहा है। सोशल मीडिया पर अंकित पांडे द्वारा साझा की गई उनकी कहानी ने ऑनलाइन कई लोगों को प्रेरित किया है।

पोस्ट के अनुसार, उस व्यक्ति ने मुंबई में अपनी 1.5 लाख रुपये प्रति महीने की नौकरी छोड़ दी, जबकि लोगों ने उससे कहा कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। उसने अपना फ्लैट लगभग 3 करोड़ रुपये में बेच दिया और कोई दूसरा महंगा अपार्टमेंट खरीदने के बजाय अपने होमटाउन वापस चला गया।

उसने लगभग 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी, 50 लाख रुपये में घर बनवाया और दो रेस्टोरेंट खोलने के लिए लगभग 50 लाख रुपये का निवेश किया। आज, दोनों रेस्टोरेंट जोमैटो और स्विगी पर लिस्टेड हैं और कर्मचारी उन्हें मैनेज करते हैं। बताया जाता है कि इन बिजनेस से उसे इतना मुनाफा होता है कि वह हर महीने लगभग 3 लाख रुपये बचा लेता है।

उसने फिक्स्ड डिपॉजिट में भी 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे उसे ब्याज के तौर पर हर महीने लगभग 1 लाख रुपये मिलते हैं। कुल मिलाकर, उसकी मासिक आय लगभग 4 लाख रुपये बताई जाती है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

एक यूजर ने लिखा, “बिना किसी विरासत, बिना किसी असली सोशल सर्कल और शहर से बिना किसी सच्चे लगाव के, मेट्रो शहर में सिर्फ एक औसत सैलरी पर गुज़ारा करना, एक दुखद जीवन जैसा लगता है।”एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “भले ही यह सच्ची कहानी हो, लेकिन जब वह होमटाउन गया तो उसके पास 3 करोड़ रुपये की पूंजी और पहले की बचत थी, जिससे बिजनेस और नई ज़िंदगी शुरू की जा सकती थी। हर किसी के पास, जो मेट्रो से होमटाउन जाता है, ऐसी सुविधा नहीं होती। अच्छी कहानी है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए आदर्श या उनसे जुड़ी हुई नहीं है।”

एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “यह इतना आसान नहीं है! रेस्टोरेंट का बिजनेस ही जोखिम भरा होता है! इतने सारे लाइसेंस और रिश्वत, लेबर की समस्याएं, सफाई के सर्टिफिकेट वगैरह, जिन्हें कॉम्पिटिटर निशाना बना सकते हैं! मैं रोज़ रेस्टोरेंट बंद होते देखता हूं!”

Video: वीकेंड पर ऑफिस बुलाया तो महिला ने रख दी ऐसी शर्त, सुनकर मैनेजर भी रह गया शांत

आज के दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक कॉरपोरेट शब्द नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जरूरत बन चुका है। देर तक काम करना, वीकेंड पर लगातार काम और बिना अतिरिक्त भुगतान के ओवरटाइम जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहते हैं। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी खुलकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे कार्यस्थल की संस्कृति पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच एक वीडियो ने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक महिला कर्मचारी अपने अधिकारों और तय कार्य समय को लेकर जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती है, उसने हजारों लोगों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी।

किसी ने इसे कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायक बताया, तो किसी ने इसे भारतीय वर्क कल्चर की वास्तविक तस्वीर कहा। यही वजह है कि ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं।

हर बार मदद की, लेकिन इसे नियम मत बनाइए

वीडियो में मैनेजर कर्मचारी अफरीन को फोन कर पूछता है कि वो ऑफिस क्यों नहीं पहुंची, जबकि पूरी टीम उसका इंतजार कर रही है। जवाब में अफरीन कहती हैं कि शनिवार उनका ऑफ है। जब मैनेजर याद दिलाता है कि वो पिछले दो महीनों से हर शनिवार आ रही थीं, तो अफरीन समझाती हैं कि वह सिर्फ टीम की मदद के लिए कभी-कभी शनिवार को ऑफिस आती थीं, लेकिन यह उनकी नियमित ड्यूटी नहीं थी।

अब मुफ्त में काम नहीं करूंगी

बातचीत के दौरान मैनेजर टीम पर बढ़ते काम का दबाव बताता है, लेकिन अफरीन दो टूक कहती हैं कि टीम पर दबाव होना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। वो कहती हैं कि अगर शनिवार को काम चाहिए तो ओवरटाइम का भुगतान किया जाए। उनका ये जवाब “मैंने सिर्फ मुफ्त में काम करना बंद किया है” सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

सोमवार तक टली बहस

जब अफरीन ओवरटाइम की बात करती हैं, तो मैनेजर कहता है कि इस मुद्दे पर सोमवार को बात होगी और कॉल समाप्त कर देता है। वीडियो के कैप्शन में अफरीन ने लिखा कि अगर आज आवाज नहीं उठातीं तो “बस इस वीकेंड” वाला सिलसिला शायद सालों तक चलता रहता।

असल घटना नहीं, लेकिन लोगों को लगी अपनी कहानी

अफरीन आमतौर पर स्क्रिप्टेड वीडियो बनाती हैं और ये वीडियो भी उसी का हिस्सा है। हालांकि, इसकी कहानी ने हजारों लोगों को अपनी नौकरी के अनुभव याद दिला दिए। कई यूजर्स ने कहा कि भारतीय दफ्तरों में कर्मचारियों से अक्सर वीकेंड और ऑफिस समय के बाद भी बिना अतिरिक्त भुगतान के काम कराया जाता है।

लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि वीकेंड पर काम तो लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता। दूसरे ने कहा कि उन्होंने भी कई सप्ताह तक शनिवार को काम किया, लेकिन कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। वहीं एक अन्य यूजर ने दावा किया कि कई देशों में तय कार्य समय का सम्मान किया जाता है और अतिरिक्त काम के बदले भुगतान या बोनस दिया जाता है। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि चाहे वीडियो स्क्रिप्टेड हो, लेकिन इसमें दिखाई गई स्थिति भारतीय वर्क कल्चर की सच्चाई से काफी मेल खाती है।

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₹15 लाख की नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, अब महीने की कमाई सिर्फ ₹12000, इस शख्स ने बताया अपना दर्द

अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने को अक्सर आर्थिक आजादी की दिशा में एक साहसी कदम माना जाता है। हालांकि, पहली बार बिजनेस शुरू करने वाले कई लोगों के लिए, असलियत सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलता की कहानियों से कहीं ज्यादा मुश्किल होती है।

X पर हाल ही में एक पोस्ट ने चर्चा छेड़ दी है, जिसमें एक एंटरप्रेन्योर ने सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेस खड़ा करने में आने वाली आर्थिक मुश्किलों के बारे में बताया। इस पोस्ट ने कई यूजर्स का ध्यान खींचा, जिन्होंने एक पक्की सैलरी की सुरक्षा के बजाय एंटरप्रेन्योरशिप चुनने से जुड़े जोखिमों, ज़िम्मेदारियों और त्याग पर अपनी राय रखी।

यह पोस्ट X यूजर किरणजीत दास ने शेयर किया था, जिन्होंने बिजनेस जमाने की कोशिश के दौरान बहुत कम कमाई होने की मुश्किलों के बारे में खुलकर बात की। कैप्शन में लिखा था, “सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिज़नेस से महीने में ₹12,000 कमाना शायद आपको व्यक्तिगत रूप से परेशान न करे। चुनौतियां तब बढ़ती हैं जब आपके पास परिवार की देखभाल, फीस भरना, दवाइयां खरीदना और कई अन्य ज़िम्मेदारियां हों। ‘एम्प्लॉई नहीं, एंटरप्रेन्योर बनो’ कहना आसान है। इसे करना नहीं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “जो लोग पहले से ही किसी कंपनी/ऑर्गनाइज़ेशन में बहुत अच्छी सैलरी पर काम कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ डे ट्रेडिंग के लिए अपनी नौकरी कभी नहीं छोड़नी चाहिए। नौकरी के साथ-साथ, कोई भी छोटे स्तर पर पोजीशनल ट्रेडिंग, इन्वेस्टिंग और म्यूचुअल फंड में शामिल हो सकता है।

मुझे याद है कि 2017 और 2020 के बीच, 2 या 3 ‘तथाकथित’ मशहूर ट्रेडर्स-कम-यूट्यूबर्स से प्रेरित होकर, कई लोगों ने फुल-टाइम ट्रेडिंग को अपना पेशा बनाने के लिए अपनी पक्की नौकरियां छोड़ दी थीं।”एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “पूरी तरह सहमत हूं, लेकिन किसी को अपने परिवार की आर्थिक तंगी को बदलने के लिए जोखिम उठाना चाहिए, जिसका सामना वे पुश्तैनी तौर पर कर रहे हैं।”

कॉर्पोरेट नौकरी से बिजनेस तक का सफर, 1.8 लाख रुपये महीना कमाने वाले प्रोफेशनल ने बताए सफलता के राज

नौकरी की सुरक्षा छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अच्छी सैलरी, तय समय पर मिलने वाली आय और स्थिर करियर के बावजूद कई लोग अपने सपनों को सिर्फ इसलिए पीछे छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें असफल होने का डर रहता है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जोखिम उठाने का साहस करते हैं और अपनी मेहनत के दम पर नई पहचान बना लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए सफलता का मतलब केवल बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी होता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही कहानी चर्चा में है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा है।

एक मार्केटिंग प्रोफेशनल ने अपनी प्रोफेशनल जर्नी साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर नया रास्ता चुना। उसने अपनी सफलता को पैसों से ज्यादा आजादी, संतुलित जीवन और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय से जोड़ा। उसकी कहानी के साथ साझा किए गए अनुभव और सलाह अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

Reddit पर शेयर की अपनी कहानी

33 वर्षीय मार्केटिंग प्रोफेशनल ने Reddit के r/Indian_flex पर अपनी सफलता की कहानी साझा की। उसने बताया कि करीब दो साल पहले उसने अपनी फुल-टाइम कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खुद का मार्केटिंग सर्विस बिजनेस शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।

कभी 16 घंटे करता था नौकरी

यूजर ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह रोज 14 से 16 घंटे तक नौकरी करता था। उस दौर को याद करते हुए उसने लिखा कि अब वह जिंदगी किसी दूसरे दौर जैसी लगती है। आज वह वही काम करता है जो उसे पसंद है और परिवार के साथ ज्यादा समय भी बिता पाता है।

शुरुआत में आईं कई चुनौतियां

नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती महीनों में सबसे बड़ी चुनौती क्लाइंट्स ढूंढना, काम की बेहतर प्रक्रिया बनाना और ऐसा सिस्टम तैयार करना था जिससे बिजनेस लंबे समय तक चल सके। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और क्लाइंट्स बढ़ने लगे।

अब कई क्लाइंट्स के साथ कर रहा काम

मार्केटिंग प्रोफेशनल ने बताया कि पिछले साल से वह दो बड़े क्लाइंट्स के साथ काम कर रहा है और हाल ही में एक नया क्लाइंट भी जुड़ा है। अब साल खत्म होने से पहले वह कुछ और बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की तैयारी में है।

9 से 5 की नौकरी से मिली आजादी

उसने बताया कि आज भी काम में मेहनत करनी पड़ती है, क्लाइंट मीटिंग्स और ट्रैवल भी होता है, लेकिन अब किसी तय ऑफिस टाइम में बंधकर काम नहीं करना पड़ता। अगर दिन में सब्जियां खरीदनी हों या बेटी को बीच घुमाने ले जाना हो, तो वह बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकता है। इन दिनों वह अपने गांव से बारिश का आनंद लेते हुए रिमोटली काम कर रहा है।

बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बताए 3 जरूरी सबक

  1. बिना तैयारी नौकरी छोड़ने की गलती न करें

उसने सलाह दी कि जब तक अच्छी बचत, बैकअप प्लान या आर्थिक सहारा न हो, तब तक नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए। बिजनेस में शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  1. सिर्फ बड़े क्लाइंट्स के पीछे न भागें

यूजर का कहना है कि छोटे क्लाइंट्स से उसे बिजनेस को बेहतर तरीके से चलाने और मजबूत सिस्टम बनाने की सबसे ज्यादा सीख मिली। बड़े क्लाइंट्स कई बार सीखने और नए प्रयोग करने की गति धीमी कर देते हैं।

  1. सिर्फ टैलेंट नहीं, मजबूत सिस्टम भी जरूरी

उसने कहा कि सफल बिजनेस केवल अच्छी स्किल से नहीं चलता। काम के लिए स्पष्ट प्रक्रिया (SOP), तय फ्रेमवर्क और ऐसे नतीजे होने चाहिए जिन्हें क्लाइंट साफ तौर पर देख सके। तभी लंबे समय तक सफलता मिलती है।

लोगों ने की जमकर तारीफ

Reddit पर इस पोस्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी बताती है कि असली सफलता सिर्फ ज्यादा कमाई में नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का नियंत्रण पाने में है।

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ना ओवरटाइम, ना देर रात काम… फिर भी Amazon में सबसे आगे निकला यह कर्मचारी वायरल हुआ फॉर्मूला

आज के समय में ज्यादातर लोग मानते हैं कि जितने ज्यादा घंटे काम करेंगे, उतनी ही सफलता मिलेगी। कई ऑफिसों में देर तक रुकना और हमेशा व्यस्त दिखना मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है। लेकिन क्या सच में अच्छी नौकरी का मतलब सिर्फ लंबे समय तक काम करना है? क्या कम समय में भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है? इन सवालों पर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। एक वायरल पोस्ट ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है कि काम की असली पहचान घंटों से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और फोकस से होती है।

यही वजह है कि अब लोग वर्क-लाइफ बैलेंस, स्मार्ट वर्क और सही टाइम मैनेजमेंट को पहले से ज्यादा अहम मानने लगे हैं। इस पोस्ट ने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद कम समय में पूरे मन से किया गया काम, लंबे समय तक बिना फोकस के काम करने से कहीं ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।

7 घंटे काम, लेकिन शानदार प्रदर्शन

अमेरिका में काम कर रहीं भारतीय प्रोफेशनल मुस्कान अग्रवाल ने लिंक्डइन पर अपने Amazon के एक पूर्व सहकर्मी का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम का एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर (SDE 3) रोज सुबह ठीक 8 बजे ऑफिस पहुंचता था और दोपहर 3 बजे तक अपना काम खत्म कर निकल जाता था।

ऑफिस के बाद पूरी तरह ऑफलाइन

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वह कर्मचारी ऑफिस छोड़ने के बाद कभी भी Slack या किसी ऑफिस चैट पर दिखाई नहीं देता था। न देर रात काम करता था और न ही वीकेंड पर अतिरिक्त घंटों की होड़ में शामिल होता था।

फोकस ने बनाया सबसे प्रोडक्टिव कर्मचारी

मुस्कान के मुताबिक, सीमित समय में पूरी एकाग्रता के साथ काम करने की वजह से वह टीम का सबसे खुश और सबसे अधिक प्रोडक्टिव सदस्य था। उसके काम की गुणवत्ता भी शानदार थी और वह बिना अनावश्यक ओवरटाइम के अपने सभी लक्ष्य पूरे कर लेता था।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस

यह पोस्ट वायरल होने के बाद इंटरनेट पर नई चर्चा छिड़ गई है। कई लोगों का मानना है कि सफलता का राज लंबे घंटों तक काम करने में नहीं, बल्कि काम के दौरान पूरी एकाग्रता और बेहतर टाइम मैनेजमेंट में छिपा है। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि हर नौकरी और हर टीम में ऐसा वर्क रूटीन अपनाना संभव नहीं होता।

23 हजार की सैलरी और 6 दिन काम, हैदराबाद की इंजीनियर का सोशल मीडिया पर छलका दर्द

23 हजार की सैलरी और 6 दिन काम, हैदराबाद की इंजीनियर का सोशल मीडिया पर छलका दर्द

इन दिनों सोशल मीडिया पर हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर ने छह दिन काम करने वाली नौकरी को लेकर अपना अनुभव शेयर किया है। उन्होंने बताया कि लगातार लंबे समय तक काम करने से वह मानसिक रूप से काफी थक गई हैं। उन्होंने कहा कि अब वह अच्छी वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नौकरी के लिए कम वेतन पर भी काम करने को तैयार हैं। उनकी इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय और एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपने एक्सपीरिएंश भी शेयर किए और उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नई नौकरी तलाशने की सलाह दी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

अपनी Reddit पोस्ट में 25 वर्षीय इंजीनियर ने बताया कि, उन्होंने साल 2023 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और फिलहाल हैदराबाद की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने की खुशी जरूर है, लेकिन हफ्ते में छह दिन काम करने के कारण उनकी पर्सनल जिंदगी काफी प्रभावित हुई है। पोस्ट पर आए यूजर्स के सवालों का जवाब देते हुए इंजीनियर ने बताया कि उनकी मौजूदा मासिक सैलरी 23,000 रुपए है। उन्होंने ये जानकारी कमेंट सेक्शन में शेयर की।

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6 दिन के काम से थक जाती हूं

उन्होंने लिखा, “मैं 6 दिन के वर्क वीक से दिमागी तौर पर थक गई हूं।” उन्होंने बताया कि जब तक वह घर पहुंचती हैं, तब तक उनके पास घर के कामों, अपने परिवार के साथ समय बिताने या बस आराम करने के लिए बहुत कम एनर्जी बचती है। “जब तक मैं घर पहुंचती हूं, मुझमें घर के बेसिक काम करने, अपने परिवार के साथ समय बिताने या अपनी शाम का मजा लेने की भी एनर्जी नहीं बचती। संडे ज्यादातर हफ्ते की थकान से उबरने में बीतता है और इससे पहले कि मुझे पता चले, फिर से सोमवार आ जाता है।”

दूसरी नौकरी की तलाश में

इंजीनियर ने कहा कि वह अब दूसरी नौकरी की तलाश कर रही हैं और अगर उन्हें हफ्ते में पांच दिन काम करने वाली नौकरी का ऑफर मिलता है, तो वह सैलरी में कटौती भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “हम इंसान हैं, मशीन नहीं जो किसी का एम्पायर बढ़ाएं। यह कब रुकेगा? लगभग सभी देश हफ्ते में 5 दिन काम करने का नियम अपना रहे हैं।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई लोगों ने उनकी कम सैलरी और काम के दबाव को लेकर चिंता जताई। कई यूजर्स ने उनसे उनकी आर्थिक स्थिति और खर्चों के बारे में भी सवाल पूछे। एक यूजर ने लिखा, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है, दोस्त। इस देश ने तुम्हें फेल कर दिया है। तुम इससे कहीं ज्यादा डिजर्व करते हो। प्लीज इसे समझो। या तो किसी भी तरह स्विच करो या यह देश छोड़ दो। कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है OP, प्लीज नई नौकरियों के लिए अप्लाई करो और बेहतर मौके के लिए प्रार्थना करो। हफ्ते में 6 दिन के लिए 23k बहुत ज्यादा है। मैं प्रार्थना करता हूं कि तुम्हें हर दिन काफी ताकत मिले और तुम हर रात अच्छी नींद सो सको। मैं बस तुम्हारे लिए प्रार्थना कर सकता हूं। ऑल द बेस्ट।” एक और यूजर ने लिखा, “मैं भी कुछ ऐसी ही स्थिति में हूं, IT में 6 दिन, आने वाले महीनों में अपस्किल करूंगा और नौकरी छोड़ दूंगा।”