ऑफिस में प्रोडक्टिविटी बढ़ानी है तो इन टाइम वेस्टिंग एक्टिविटीज से बचें!

सुबह उठते ही कई लोगों के सामने कामों की लंबी लिस्ट होती है। अलार्म बंद करने के बाद फोन पर ईमेल और मैसेज देखने लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ पिछले दिन के अधूरे काम भी याद आने लगते हैं। ऐसे में दिन शुरू होने से पहले ही स्ट्रेस महसूस होने लगता है और लगता है कि समय बहुत तेजी से निकल रहा है। लेकिन ज्यादा काम करने का मतलब यह नहीं है कि अपनी नींद या आराम को कम कर दिया जाए।

समय बचाने के लिए रोज की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी काफी समय बचाया जा सकता है। सही तरह से किया गया काम हर हफ्ते कई घंटे बचा सकता हैं। इसके लिए आपको बस अपने रूटीन में कुछ आसान और असरदार आदतों को शामिल करने की जरूरत है।

1. हर काम के लिए टाइम लिमिट रखें

किसी काम को बहुत ज्यादा परफेक्ट बनाने की कोशिश में कई बार हम जरूरत से ज्यादा समय लगा देते हैं। इससे बचने के लिए हर काम की एक टाइम लिमिट रखें। जैसे ईमेल के लिए 30 मिनट, मीटिंग की तैयारी के लिए 20 मिनट या जरूरी फोन कॉल के लिए 15 मिनट। समय तय होने से आपका ध्यान काम पर बना रहता है और बार-बार दूसरी चीजों में जाने की आदत कम होती है। इसके लिए फोन का टाइमर या कैलेंडर में टाइम ब्लॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. काम की प्रायोरिटी डिसाइड करें

हम दिनभर के काम की लिस्ट बनाते हैं, लेकिन किन कामों से बचना है, इस पर ध्यान नहीं देते। इसके लिए एक छोटी ‘न-करने वाली लिस्ट’ बनाएं और उसमें ऐसी आदतें लिखें जो आपका समय बेवजह खराब करती हैं। जैसे काम के बीच बार-बार सोशल मीडिया देखना, हर मैसेज का तुरंत जवाब देना या बिना जरूरत की मीटिंग में शामिल होना। जब इन चीजों से बचने का फैसला पहले से तय होगा, तो बार-बार सोचने में समय नहीं जाएगा।

3. काम के बीच दिमाग को दें छोटा ब्रेक

एक काम खत्म करने के तुरंत बाद दूसरे काम पर ध्यान लगाना कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में दो कामों के बीच एक छोटा सा ब्रेक या रीसेट रूटीन रखें। जैसे एक मिनट के लिए डेस्क व्यवस्थित करना, गहरी सांस लेना, थोड़ा स्ट्रेच करना या पानी पीना। इससे दिमाग को यह समझने में मदद मिलती है कि पिछला काम खत्म हो चुका है और अब नए काम पर ध्यान देना है।

4. रोज 5 मिनट प्लानिंग करें

दिन की शुरुआत बिना किसी प्लान के करने पर जरूरी काम पीछे छूट सकते हैं और समय छोटे-छोटे कामों में निकल जाता है। इसलिए सुबह सिर्फ पांच मिनट निकालकर पूरे दिन की जरूरी चीजों का प्लान बना लें। लंबी लिस्ट बनाने की जरूरत नहीं है, बस उस दिन के तीन सबसे जरूरी काम तय करें और उनके लिए समय निकालें। इससे आपको दिनभर बार-बार यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि अब कौन सा काम करना है।

5. बार-बार होने वाले कामों को ऑटोमेट करें

जो काम हर दिन या हर हफ्ते रिपीट पड़ते हैं, उन्हें बार-बार हाथ से करने में काफी समय चला जाता है। ऐसे कामों के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ली जा सकती है। जैसे बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट, बार-बार भेजे जाने वाले ईमेल के लिए टेम्प्लेट और जरूरी कामों के लिए रिमाइंडर सेट करना। इससे आपको हर बार वही काम दोहराने या छोटे-छोटे फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अच्छी प्रोडक्टिविटी का मतलब सिर्फ ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि पूरे दिन को इस तरह जीना है कि काम के साथ आराम और प्राइवेट टाइम के लिए भी जगह बनी रहे। छोटी शुरुआत करके अपनी आदतों में बदलाव लाना ज्यादा आसान होता है। जब काम का तरीका बेहतर होने लगता है, तो दिन कम भागदौड़ वाला और ज्यादा बैलेंस फील होता है।

ना ओवरटाइम, ना देर रात काम… फिर भी Amazon में सबसे आगे निकला यह कर्मचारी वायरल हुआ फॉर्मूला

आज के समय में ज्यादातर लोग मानते हैं कि जितने ज्यादा घंटे काम करेंगे, उतनी ही सफलता मिलेगी। कई ऑफिसों में देर तक रुकना और हमेशा व्यस्त दिखना मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है। लेकिन क्या सच में अच्छी नौकरी का मतलब सिर्फ लंबे समय तक काम करना है? क्या कम समय में भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है? इन सवालों पर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। एक वायरल पोस्ट ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है कि काम की असली पहचान घंटों से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और फोकस से होती है।

यही वजह है कि अब लोग वर्क-लाइफ बैलेंस, स्मार्ट वर्क और सही टाइम मैनेजमेंट को पहले से ज्यादा अहम मानने लगे हैं। इस पोस्ट ने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद कम समय में पूरे मन से किया गया काम, लंबे समय तक बिना फोकस के काम करने से कहीं ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।

7 घंटे काम, लेकिन शानदार प्रदर्शन

अमेरिका में काम कर रहीं भारतीय प्रोफेशनल मुस्कान अग्रवाल ने लिंक्डइन पर अपने Amazon के एक पूर्व सहकर्मी का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम का एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर (SDE 3) रोज सुबह ठीक 8 बजे ऑफिस पहुंचता था और दोपहर 3 बजे तक अपना काम खत्म कर निकल जाता था।

ऑफिस के बाद पूरी तरह ऑफलाइन

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वह कर्मचारी ऑफिस छोड़ने के बाद कभी भी Slack या किसी ऑफिस चैट पर दिखाई नहीं देता था। न देर रात काम करता था और न ही वीकेंड पर अतिरिक्त घंटों की होड़ में शामिल होता था।

फोकस ने बनाया सबसे प्रोडक्टिव कर्मचारी

मुस्कान के मुताबिक, सीमित समय में पूरी एकाग्रता के साथ काम करने की वजह से वह टीम का सबसे खुश और सबसे अधिक प्रोडक्टिव सदस्य था। उसके काम की गुणवत्ता भी शानदार थी और वह बिना अनावश्यक ओवरटाइम के अपने सभी लक्ष्य पूरे कर लेता था।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस

यह पोस्ट वायरल होने के बाद इंटरनेट पर नई चर्चा छिड़ गई है। कई लोगों का मानना है कि सफलता का राज लंबे घंटों तक काम करने में नहीं, बल्कि काम के दौरान पूरी एकाग्रता और बेहतर टाइम मैनेजमेंट में छिपा है। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि हर नौकरी और हर टीम में ऐसा वर्क रूटीन अपनाना संभव नहीं होता।

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