Video: ऑफिस में जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ सकता है भारी? महिला ने बताया क्यों बचाकर रखें 20% एनर्जी

कॉर्पोरेट दुनिया में मेहनती और हमेशा उपलब्ध रहने वाले कर्मचारी को अक्सर जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन क्या हर दिन जरूरत से ज्यादा काम करना आगे चलकर आपके लिए ही परेशानी बन सकता है? इसी सवाल को लेकर एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि अगर कर्मचारी लगातार तय समय से पहले काम पूरा करते हैं या ऑफिस के बाद भी मैसेज का जवाब देते रहते हैं, तो धीरे-धीरे मैनेजमेंट उसी प्रदर्शन को सामान्य मानने लगता है। जो काम कभी अतिरिक्त प्रयास था, वही बाद में रोज की अपेक्षा बन सकता है। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी पूरी ऊर्जा हर दिन खर्च करने के बजाय कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी।

उनके मुताबिक, यह काम से बचने की बात नहीं है, बल्कि मुश्किल दिनों के लिए खुद को तैयार रखने का तरीका है। सोशल मीडिया पर उनकी इस सोच को लेकर कई लोगों ने सहमति जताई और अपने ऑफिस अनुभव भी साझा किए।

‘आज जल्दी काम किया तो कल भी उतनी ही उम्मीद होगी’

इंस्टाग्राम पर अव्रीन ने एक वीडियो शेयर कर कर्मचारियों को काम और निजी जिंदगी के बीच सीमाएं तय करने की सलाह दी। उन्होंने समझाया कि अगर कोई कर्मचारी छह घंटे में पूरा होने वाला काम सिर्फ तीन घंटे में खत्म कर देता है, तो मैनेजर भविष्य में उसी काम को तीन घंटे में पूरा होने वाला मान सकते हैं। यानी एक बार दिखाई गई अतिरिक्त तेजी आगे चलकर रोज की अपेक्षा बन सकती है।

रात 10 बजे जवाब दिया तो रोज की उम्मीद?

अव्रीन ने ऑफिस के मैसेज का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी कभी-कभार रात 10 बजे Teams पर जवाब देता है, तो इससे दूसरों को यह लग सकता है कि वह उस समय भी उपलब्ध रहता है। उनका कहना है कि कॉर्पोरेट माहौल में एक अनकही धारणा बन सकती है आपका सबसे अच्छा प्रदर्शन ही धीरे-धीरे आपका सामान्य प्रदर्शन मान लिया जाता है।

‘80% दो, 20% अपने लिए बचाकर रखो’

महिला ने कर्मचारियों को हर दिन अपना पूरा दम लगाने के बजाय अपनी ऊर्जा का कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक, इसका मतलब काम में लापरवाही करना नहीं है। बल्कि जरूरी यह है कि कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता को हर दिन का न्यूनतम मानक न बनने दें। बची हुई ऊर्जा उन दिनों काम आ सकती है, जब तबीयत खराब हो, निजी जिंदगी में कोई परेशानी चल रही हो या ऑफिस में अचानक कोई जरूरी स्थिति पैदा हो जाए।

ज्यादा मेहनत और लापरवाही में फर्क

अव्रीन ने साफ किया कि उनकी सलाह जिम्मेदारियों से बचने या जानबूझकर काम धीमा करने की नहीं है। उनका फोकस वर्कप्लेस बाउंड्रीज पर है। उनके मुताबिक, कभी-कभार अतिरिक्त मेहनत करना ठीक है, लेकिन अगर वही हर दिन की अपेक्षा बन जाए तो कर्मचारी पर लगातार दबाव बढ़ सकता है।

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सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘बात तो सही है’

अव्रीन की पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके विचारों से सहमति जताई। कुछ लोगों ने कहा कि ऑफिस में सीमाएं तय करना जरूरी है, जबकि कई ने अपने अनुभव भी साझा किए।

एक यूजर ने लिखा कि वर्कप्लेस पर सीमाएं बनाना बेहद जरूरी है। दूसरे ने कहा कि यह बात बिल्कुल सही है। एक अन्य यूजर ने कॉर्पोरेट लाइफ को समझाने वाला अनुभव बताया।

एक कर्मचारी ने अपने मैनेजर का उदाहरण देते हुए लिखा कि लंबे समय तक 10 घंटे से ज्यादा काम करने के बावजूद उसे सामान्य काम का हिस्सा माना जाने लगा। इसके बाद उसने तय ऑफिस टाइम खत्म होते ही काम बंद करना शुरू कर दिया।

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ऑफिस में प्रोडक्टिविटी बढ़ानी है तो इन टाइम वेस्टिंग एक्टिविटीज से बचें!

सुबह उठते ही कई लोगों के सामने कामों की लंबी लिस्ट होती है। अलार्म बंद करने के बाद फोन पर ईमेल और मैसेज देखने लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ पिछले दिन के अधूरे काम भी याद आने लगते हैं। ऐसे में दिन शुरू होने से पहले ही स्ट्रेस महसूस होने लगता है और लगता है कि समय बहुत तेजी से निकल रहा है। लेकिन ज्यादा काम करने का मतलब यह नहीं है कि अपनी नींद या आराम को कम कर दिया जाए।

समय बचाने के लिए रोज की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी काफी समय बचाया जा सकता है। सही तरह से किया गया काम हर हफ्ते कई घंटे बचा सकता हैं। इसके लिए आपको बस अपने रूटीन में कुछ आसान और असरदार आदतों को शामिल करने की जरूरत है।

1. हर काम के लिए टाइम लिमिट रखें

किसी काम को बहुत ज्यादा परफेक्ट बनाने की कोशिश में कई बार हम जरूरत से ज्यादा समय लगा देते हैं। इससे बचने के लिए हर काम की एक टाइम लिमिट रखें। जैसे ईमेल के लिए 30 मिनट, मीटिंग की तैयारी के लिए 20 मिनट या जरूरी फोन कॉल के लिए 15 मिनट। समय तय होने से आपका ध्यान काम पर बना रहता है और बार-बार दूसरी चीजों में जाने की आदत कम होती है। इसके लिए फोन का टाइमर या कैलेंडर में टाइम ब्लॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. काम की प्रायोरिटी डिसाइड करें

हम दिनभर के काम की लिस्ट बनाते हैं, लेकिन किन कामों से बचना है, इस पर ध्यान नहीं देते। इसके लिए एक छोटी ‘न-करने वाली लिस्ट’ बनाएं और उसमें ऐसी आदतें लिखें जो आपका समय बेवजह खराब करती हैं। जैसे काम के बीच बार-बार सोशल मीडिया देखना, हर मैसेज का तुरंत जवाब देना या बिना जरूरत की मीटिंग में शामिल होना। जब इन चीजों से बचने का फैसला पहले से तय होगा, तो बार-बार सोचने में समय नहीं जाएगा।

3. काम के बीच दिमाग को दें छोटा ब्रेक

एक काम खत्म करने के तुरंत बाद दूसरे काम पर ध्यान लगाना कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में दो कामों के बीच एक छोटा सा ब्रेक या रीसेट रूटीन रखें। जैसे एक मिनट के लिए डेस्क व्यवस्थित करना, गहरी सांस लेना, थोड़ा स्ट्रेच करना या पानी पीना। इससे दिमाग को यह समझने में मदद मिलती है कि पिछला काम खत्म हो चुका है और अब नए काम पर ध्यान देना है।

4. रोज 5 मिनट प्लानिंग करें

दिन की शुरुआत बिना किसी प्लान के करने पर जरूरी काम पीछे छूट सकते हैं और समय छोटे-छोटे कामों में निकल जाता है। इसलिए सुबह सिर्फ पांच मिनट निकालकर पूरे दिन की जरूरी चीजों का प्लान बना लें। लंबी लिस्ट बनाने की जरूरत नहीं है, बस उस दिन के तीन सबसे जरूरी काम तय करें और उनके लिए समय निकालें। इससे आपको दिनभर बार-बार यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि अब कौन सा काम करना है।

5. बार-बार होने वाले कामों को ऑटोमेट करें

जो काम हर दिन या हर हफ्ते रिपीट पड़ते हैं, उन्हें बार-बार हाथ से करने में काफी समय चला जाता है। ऐसे कामों के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ली जा सकती है। जैसे बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट, बार-बार भेजे जाने वाले ईमेल के लिए टेम्प्लेट और जरूरी कामों के लिए रिमाइंडर सेट करना। इससे आपको हर बार वही काम दोहराने या छोटे-छोटे फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अच्छी प्रोडक्टिविटी का मतलब सिर्फ ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि पूरे दिन को इस तरह जीना है कि काम के साथ आराम और प्राइवेट टाइम के लिए भी जगह बनी रहे। छोटी शुरुआत करके अपनी आदतों में बदलाव लाना ज्यादा आसान होता है। जब काम का तरीका बेहतर होने लगता है, तो दिन कम भागदौड़ वाला और ज्यादा बैलेंस फील होता है।

15 महीने में मिलीं 3 प्रमोशन! युवा कर्मचारी ने बताए ऑफिस में सम्मान पाने के 3 सीक्रेट

ऑफिस में पहचान और सम्मान हासिल करना हर कर्मचारी का सपना होता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ लंबा अनुभव या बड़ा पद जरूरी नहीं होता। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कंटेंट क्रिएटर मारीज ने ऐसी ही कुछ छोटी-छोटी आदतों के बारे में बताया है, जो किसी भी प्रोफेशनल की छवि को बेहतर बना सकती हैं। मारीज के अनुसार, सही तरीके से बातचीत करना, जिम्मेदारी को समझना और अपने काम में भरोसा दिखाना ही असली अंतर पैदा करता है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे कुछ व्यवहारिक बदलावों ने उन्हें कम समय में आगे बढ़ने में मदद की। उनका वीडियो युवाओं के बीच तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें करियर ग्रोथ और ऑफिस में सम्मान पाने से जुड़े आसान लेकिन असरदार टिप्स बताए गए हैं।

मैनेजर के सवाल का जवाब देने से पहले करें ये छोटा सा काम

मारीज के मुताबिक, जब कोई मैनेजर सवाल पूछे तो तुरंत जवाब देने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि जवाब देने से पहले सिर्फ दो सेकंड का छोटा ब्रेक लें। उनके अनुसार, यह छोटा सा ठहराव व्यक्ति को ज्यादा आत्मविश्वासी, शांत और समझदार दिखाता है। बिना सोचे तुरंत बोलने से गलतियां होने की संभावना बढ़ सकती है।

काम मिलने पर तुरंत ‘हां‘ कहने से बचें

उनकी दूसरी सलाह है कि कोई नया काम मिलने पर तुरंत “हां” बोलने के बजाय पहले उसे दोहराकर समझ लें। जैसे- काम क्या है, उसकी डेडलाइन क्या है और आखिर में किस तरह का रिजल्ट चाहिए। इससे मैनेजर को भरोसा होता है कि कर्मचारी ने जिम्मेदारी को सही तरीके से समझ लिया है।

काम पूरा करके गायब न हों, अपनी वैल्यू दिखाएं

मारीज का तीसरा और सबसे अहम सुझाव है कि काम खत्म करने के बाद सिर्फ रिपोर्ट जमा करके चुप न हो जाएं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी को यह भी बताना चाहिए कि इस काम से उसने क्या सीखा, कौन-सी नई स्किल हासिल की या आगे इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है। इससे मैनेजर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सम्मान पद से नहीं, भरोसे से मिलता है

मारीज ने वीडियो के अंत में कहा कि ऑफिस में असली सम्मान उस व्यक्ति को मिलता है जिस पर लोग भरोसा कर सकें। उनका मानना है कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे व्यवहार ही किसी कर्मचारी की पहचान बनाते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी उनकी इन बातों को पसंद कर रहे हैं और कई लोग इन्हें नए कर्मचारियों के लिए उपयोगी सलाह बता रहे हैं।

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ये AI स्टार्टअप कर्मचारियों को दफ्तर के पास रहने के लिए दे रही 17 लाख का हाउसिंग स्टाइपेंड, 3 टाइम खाना, जिम-सॉना और न जाने क्या-क्या!

आज के समय में टेक कंपनियां अपने एम्प्लॉई को अट्रैक्ट करने के लिए कई तरह की फैसिलिटीज देती हैं, लेकिन न्यूयॉर्क की AI स्टार्टअप कंपनी रिला ने एक अलग पहल शुरू की है। कंपनी अपने एम्प्लॉई को ऑफिस के पास रहने के लिए लाखों रुपये का हाउसिंग स्टाइपेंड देती है। इसका मकसद एम्प्लॉई का आने-जाने का समय बचाना और उन्हें काम पर ज्यादा ध्यान फोकस करने में मदद करना है। हालांकि, इस सुविधा के साथ कंपनी का वर्क कल्चर भी काफी सख्त बताया जाता है:

एम्प्लॉई के रहने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है कंपनी

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न्यूयॉर्क की AI स्टार्टअप कंपनी रिला अपने एम्प्लॉई के हाउसिंग अलाउंस पर हर साल करीब 1.7 मिलियन डॉलर (लगभग 16-17 करोड़ रुपये) खर्च करती है। कंपनी के CEO सेबेस्टियन जिमेनेज़ का मानना है कि एम्प्लॉई को ऑफिस के करीब रहने से समय की बचत होती है और उनकी प्रोडक्टिविटी बेहतर हो सकती है। यह फैसिलिटी कंपनी की खास रणनीति का हिस्सा है, जिससे एम्प्लॉई अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे सकें।

ऑफिस के पास रहने पर मिलता है ₹17 लाख से ज्यादा का स्टाइपेंड

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रिला कंपनी अपने एम्प्लॉई को सालाना करीब 18,000 डॉलर (लगभग 17 लाख रुपये) का हाउसिंग स्टाइपेंड देती है। यह लाभ उन एम्प्लॉई को मिलता है, जो ब्रुकलिन के विलियम्सबर्ग इलाके में कंपनी के ऑफिस से करीब 10 मिनट की बाइक दूरी के अंदर रहना पसंद करते हैं। विलियम्सबर्ग न्यूयॉर्क के सबसे पॉपुलर और एक्सपेंसिव एरिया में शामिल है, जहां स्टूडियो अपार्टमेंट का किराया लगभग 4,000 डॉलर प्रति महीने तक हो सकता है।

ज्यादातर एम्प्लॉई उठा रहे हैं इस सुविधा का लाभ

A row of colorful houses with a blue sky and trees in the background | Premium AI-generated image

रिला में करीब 120 एम्प्लॉई काम करते हैं, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत एम्प्लॉई इस अल्टरनेटिव हाउसिंग फैसिलिटी का यूज कर रहे हैं। इसी वजह से कंपनी का सालाना खर्च करीब 1.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाता है। CEO के अनुसार, यह एम्प्लॉई को आराम देने के बजाय उनके काम करने के तरीके को बेहतर बनाने की कोशिश है।

आने-जाने का समय बचाना है कंपनी का प्राइमरी ऑब्जेक्टिव

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रिला के CEO सेबेस्टियन जिमेनेज़ का कहना है कि रोजाना ऑफिस आने-जाने में लगने वाला समय लोगों के दिन का सबसे स्ट्रेस्फुल बन जाता है। कंपनी चाहती है कि एम्प्लॉई लॉन्ग कम्युटेस में समय गंवाने के बजाय फैमिली के साथ समय बिताएं, किताब पढ़ें, एक्सरसाइज करें या कोई अच्छा काम कर सकें। इस तरह हाउसिंग अलाउंस को एम्प्लॉई की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के तरीके के रूप में देखा जा रहा है।

हाउसिंग के अलावा भी मिलती हैं कई फैसिलिटीज

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रिला अपने एम्प्लॉई को हाउसिंग स्टाइपेंड के अलावा दिन में तीन बार खाने की सुविधा भी देती है। कंपनी एम्प्लॉई के लिए सॉना और कोल्ड प्लंज जैसी सुविधाओं वाली जिम भी तैयार कर रही है। हालांकि, इन सुविधाओं के साथ कंपनी का काम करने का माहौल काफी डिमांडिंग है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एम्प्लॉई अक्सर हफ्ते में छह दिन और रोजाना करीब 12 घंटे काम करते हैं, यानी लगभग 72 घंटे प्रति सप्ताह। CEO ने कंपनी के कल्चर को “बेहद सख्त” बताया है, जहां ज्यादा परफॉरमेंस और हार्ड रोक पर जोर दिया जाता है।