रैपिडो ड्राइवर ने पकड़ लिया हाथ और देने लगा क्रीपी इस्माइल! इस लड़की ने सुनाई पूरी दास्तां तो आया ये रिएक्शन

बेंगलुरु की एक महिला ने रैपिडो बाइक टैक्सी के एक राइडर पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उसे उसकी रिहायशी सोसाइटी के बाहर छोड़ने के बाद भी राइडर वहीं रुका रहा, जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगी। महिला ने इस घटना के बारे में ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, जिस पर बेंगलुरु सिटी पुलिस और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का ध्यान गया।

अपनी पोस्ट में महिला ने बाइक-टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल उठाए। उसने बताया कि बारिश की वजह से वह पहले राइड लेने में हिचकिचा रही थी, लेकिन राइडर ने बार-बार उससे बुकिंग कैंसिल न करने के लिए कहा। उसने लिखा- “मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे राइडर्स के लिए रैपिडो की कोई जवाबदेही कैसे नहीं है।”

“उसने मुझे अजीब सी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ लिया”

महिला ने बताया कि ड्राइवर बहुत ज्यादा घुल-मिलकर बात कर रहा था और उसने उसे रेनकोट देने की भी कोशिश की। महिला ने आगे बताया कि ड्राइवर बार-बार पूछ रहा था कि क्या वह सहज (कंफर्टेबल) है। उसने कहा, “उसने मुझे मेरी सोसाइटी के पास छोड़ा और जब मैं उसे उसका हेलमेट वापस दे रही थी, तो उसने कुछ सेकंड के लिए मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे देखकर अजीब सी मुस्कान दी।”

उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पेमेंट करने के लिए QR कोड मांगा तो राइडर ने कहा कि बारिश की वजह से उसका फोन काम नहीं कर रहा है और उसने उनका फोन नंबर मांग लिया। फिर पेमेंट के लिए अपना नंबर देने को कहा। मैंने QR कोड पर ही जोर दिया और पेमेंट कर दिया।”

“मैं बहुत असुरक्षित और सदमे में महसूस कर रही थी”

अपने घर पर पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह तुरंत अपनी रेजिडेंशियल सोसाइटी के अंदर नहीं गईं क्योंकि उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा था। उन्हें तब और भी बड़ा झटका लगा, जब एक सिक्योरिटी गार्ड के जाने के लिए कहने के बावजूद राइडर वहीं एंट्री गेट के पास खड़ा रहा। गार्ड के दूसरी बार कहने पर वह वहां से गया।

महिला ने लिखा- “मैं बहुत असुरक्षित महसूस कर रही थी और सदमे में थी। हकीकत यह है कि खराब सुरक्षा इंतजामों की वजह से पीक आवर्स के दौरान भी आप बाइक, ऑटो या कैब में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।”

बेंगलुरु सिटी पुलिस और रैपिडो ने उनकी शिकायत पर प्रतिक्रिया दी

महिला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने उनसे लोकेशन की जानकारी और संपर्क विवरण डायरेक्ट मैसेज (DM) के जरिए साझा करने को कहा। वहीं रैपिडो ने भी जवाब दिया, इस अनुभव के लिए माफी मांगी और आरोपों की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “इस परेशान करने वाले अनुभव के लिए हमें सचमुच खेद है। बिना सहमति के शारीरिक संपर्क और ऐसा व्यवहार जिससे आप असुरक्षित महसूस करें, बहुत गंभीर मामला हैं। उस कैप्टन को रैपिडो प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।”

रैपिडो ने आगे कहा-अगर कभी भी राइड के दौरान आप असहज या असुरक्षित महसूस करें तो तुरंत मदद पाने के लिए रैपिडो ऐप में दिए गए SOS विकल्प का इस्तेमाल करें। आपकी सुरक्षा और सम्मान हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं।”

“यह बहुत भयानक है”

इस घटना ने इंटरनेट पर लोगों को गुस्से से भर दिया है और कई लोग रैपिडो से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। एक व्यक्ति ने कमेंट किया- “हे भगवान यह बहुत भयानक है। बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं। उम्मीद है कि आप ठीक होंगी।”

एक यूजर ने कहा, “रैपिडो (Rapido) का इस्तेमाल करने से बचें। यहां डेटा प्राइवेसी नहीं है… राइड कैंसिल करने के बाद भी ड्राइवर आपको कॉल कर सकते हैं। हो सकता है कि इस बदतमीज इंसान ने आपका नंबर भी सेव कर लिया हो और वह आपसे संपर्क करने की कोशिश करे। भले ही थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन उबर (Uber) या ओला (Ola) का इस्तेमाल करें। आप अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे हैं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा- “अरे बाप रे, यह तो बहुत ही डरावना है। उम्मीद है कि रैपिडो कोई ठोस कदम उठाएगा। नियमों को लागू करने के मामले में तो यह ऐप एकदम बेकार है।”

12 लाख का पैकेज, फिर भी वीकेंड पर चलाते हैं रैपिडो! कमाई जान हो जाएंगे हैरान

Viral Post: अगर आप हर महीने एक लाख से ज्यादा कमाते हो और फिर वीकेंड पर आप अपने एंटरटेरमेंट के लिए रैपिडो चलाए…सुनने में ये आपको थोड़ा अजीब लगेगा पर पुणे से एक ऐसी ही कहानी सामने आई है। पुणे में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सोशल मीडिया पर अपने दो रूममेट्स से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया है। उसने बताया कि उसके दोनों रूममेट सालाना 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वीकेंड पर रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने का फैसला किया है।

खास बात ये है कि वे ऐसा पैसे कमाने की जरूरत के लिए नहीं, बल्कि अपने खाली समय में कुछ नया करने और शौक के लिए कर रहे हैं। उनके इस फैसले ने सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सॉफ्टवेयर डेवलपर ने लिखा कि उसके दो रूममेट हैं, जो हर साल 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं। इसके बावजूद, पिछले सप्ताहांत दोनों ने रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने के लिए पजिस्ट्रेशन कराया और सिर्फ शौक के लिए कुछ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया। दोनों के पास स्पोर्ट्स बाइक हैं। इस दौरान एक ने 900 रुपये कमाए, जबकि दूसरे की कमाई 500 रुपये रही। डेवलपर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब कोई महीने में एक लाख रुपये कमाता हो और फिर भी ऐसा करे, तो समझिए कि लड़के अपने शौक के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

 

900-500 रुपए कमाए

पोस्ट के मुताबिक, दोनों रूममेट के पास स्पोर्ट्स बाइक हैं और रैपिडो चलाकर एक ने 900 रुपये, जबकि दूसरे ने 500 रुपये कमाए। इस घटना से पता चलता है कि कुछ लोग सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि नए अनुभव हासिल करने और मनोरंजन के लिए भी अलग-अलग काम करना पसंद करते हैं। दोनों इंजीनियरों के लिए वीकेंड पर बाइक टैक्सी चलाना भी कुछ ऐसा ही अनुभव रहा। उनका यह कदम अतिरिक्त कमाई से ज्यादा कुछ नया आजमाने और खाली समय को मजेदार बनाने की कोशिश नजर आता है।

यूजर्स ने किया कमेंट

इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। पुरुषों की दोस्ती, अचानक बनाए गए प्लान और सिर्फ मजे के लिए कुछ अलग करने के उनके अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा है। यह किस्सा दिखाता है कि कई बार दोस्त मिलकर ऐसे काम भी कर जाते हैं, जिनका मकसद कमाई नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना और नई चीजों का अनुभव लेना होता है। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “मैंने भी नए लोगों से मिलने और उनसे जान-पहचान बढ़ाने के लिए ऐसा करने के बारे में सोचा था।”

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BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया

आज के दौर में जब ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट्स छुट्टियों में घूमने-फिरने या आराम करने की सोचते हैं। वहीं, बेंगलुरु के एक BBA सेकंड ईयर के स्टूडेंट ने कुछ अलग करने का फैसला किया। पहले सास की परीक्षाएं खत्म होने के बाद मिले लगभग 3 महीने के वेकेशन में उसने सड़कों पर उतर रैपिडो बाइक चलाने का फैसला किया। इसके बाद इस छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी इस 3 महीने की यात्रा की पूरी कहानी बताई। छात्र ने अपनी पोस्ट में रोज की कमाई, ऐप के एल्गोरिदम, रेस्टोरेंट के चक्करों और गिग वर्कर्स की जिंदगी की कठिनाई को विस्तार से बताया है।

सुबह 8 से शाम 4:30 बजे की ड्यूटी और ₹1200 की रोजाना कमाई

स्टूडेंट ने बताया कि वह सुबह लगभग 8 बजे ऐप पर ऑनलाइन होता था और शाम 4:30 बजे तक काम करके घर लौट आता था। यानी वह रोज करीब 8.5 घंटे सड़कों पर बिताता था। शुरुआत में उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रैपिडो का प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम कैसे काम करता है। लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि शहर के किस इलाके में और किस समय राइड्स की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। जैसे ही उसने एल्गोरिदम का को समझ लिया, उसकी कमाई आसान हो गई। एक दिन में वह रोजाना करीब ₹1200 तक कमा लेता था। छात्र के लिए पॉकेट मनी और साइड हसल के तौर पर यह कमाई काफी अच्छी थी।

पर क्या सबकुछ अच्छा ही था? गिग वर्कर्स की असली मजबूरी समझिए

इस तजुर्बे ने छात्र को उन लोगों की जिंदगी के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया जो पूरी तरह से डिलीवरी या राइड-शेयरिंग पर ही निर्भर हैं। उसने बताया कि 8.5 घंटे के दौरान वह कभी ब्रेक नहीं लेता था या तो वह बाइक चला रहा होता था या फिर अगली राइड का इंतजार कर रहा होता था। छात्र का कहना है कि वह छुट्टियों में सिर्फ एक्सपीरियंस और पॉकेट मनी के लिए यह काम कर रहा था, इसलिए उसके पास किसी भी वक्त काम बंद करके घर जाने का विकल्प था। लेकिन जो लोग अपने परिवार को पालने के लिए फुल-टाइम यह काम करते हैं, उनके पास घर लौटने का ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

छात्र ने ऐप के सिस्टम पर भी नाराजगी जताई। उसने लिखा कि कैप्टन (ड्राइवर) का अपनी राइड्स पर कोई कंट्रोल नहीं होता। अगर कोई ग्राहक राइड कैंसिल कर देता है, तो उसकी गलती न होने के बावजूद ड्राइवर की रेटिंग खराब हो जाती है। किसी भी समस्या के समय ऐप से सही कस्टमर सपोर्ट पाना किसी बुरे सपने जैसा है।

दोपहर में जब राइड कम तो आजमाई ये ट्रिक

स्टूडेंट की पोस्ट के मुताबिक दोपहर 12 से 3 बजे के बीच राइड्स काफी कम हो जाती थीं, इसलिए वह इस दौरान फूड ऑर्डर डिलीवर करने लगा। उसने बताया कि रेस्टोरेंट का अनुभव एकदम अलग होता था। कभी खाना तुरंत मिल जाता तो कभी 20-25 मिनट तक खड़े होकर इंतजार करना पड़ता। अपने इस सफर की एक सबसे हैरान कर देने वाली घटना का जिक्र करते हुए उसने बताया कि रैपिडो के जरिए स्विगी का एक फूड ऑर्डर लिया था क्योंकि उसकी ड्रॉप लोकेशन लड़के के घर के पास थी।

वो एक आइसक्रीम शॉप से जुड़ा ऑर्डर था। पर जब वो आइसक्रीम शॉप पहुंचा तो वहां बिजली नहीं थी। उनकी मशीनें और कंप्यूटर बंद थे। वे ऑर्डर तैयार नहीं कर सकते थे। दुकान वालों ने उससे कहा कि उसे स्विगी को कॉल करके ऑर्डर कैंसिल कराना होगा।

उसने स्विगी को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि वे इसे कैंसिल नहीं कर सकते और उसे रैपिडो से संपर्क करना होगा। फिर उसने रैपिडो को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि यह स्विगी का ऑर्डर है इसलिए स्विगी से बात करो। कुल मिलाकर वो स्विगी और रैपिडो के इस इन्फिनिट लूप में फंस गया और 45 मिनट तक परेशान होता रहा। आखिरकार उसने देखा कि डिलीवरी लोकेशन एक ट्यूशन सेंटर की थी। उसने गूगल मैप्स पर ट्यूशन सेंटर का नंबर ढूंढा और उन्हें सीधे कॉल करके पूरी बात बताई। इसके बाद ट्यूशन सेंटर वालों ने रेस्टोरेंट स्टाफ से बात की और तब जाकर ऑर्डर कैंसिल हुआ।

छात्र ने बताया कि सबसे अजीब बात यह है कि रैपिडो तब तक कस्टमर का कांटेक्ट नंबर नहीं दिखाता जब तक आप खाना पिक न कर लें (जिसके लिए रेस्टोरेंट के ओटीपी की जरूरत होती है)। अगर वह ड्रॉप लोकेशन कोई रैंडम घर होता तो वह शायद कुछ नहीं कर पाता।

ऑटो ड्राइवरों लड़ाई हो जाने का भी खतरा

बेंगलुरु में अक्सर बाइक टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। छात्र ने बताया कि 3 महीनों के दौरान वह मजेस्टिक, रेलवे स्टेशनों और दूसरे बिजी इलाकों में नियमित रूप से ऐप लॉगिन करता था। ऑटो वाले कई बार उसे घूर-घूरकर ऐसे देखते थे मानो उसे स्कैन कर रहे हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि पूरे 3 महीनों में किसी भी ऑटो वाले ने उसे कभी धमकी नहीं दी और न ही कोई विवाद हुआ।

ग्राहकों के साथ उसका अनुभव काफी अच्छा रहा। उसने रास्ते में कई अनजान यात्रियों के साथ दिलचस्प बातचीत की और किसी भी ग्राहक के साथ उसका कोई कड़वा अनुभव नहीं रहा। उसने यह काम आरटीओ और बैन वाले हालिया विवादों से पहले ही खत्म कर लिया था, इसलिए उसे उस तरह की किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

3 महीने के सफर से मिला जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

इस BBA छात्र का मानना है कि यह 3 महीने का सफर सिर्फ ₹1200 रोज कमाने के बारे में नहीं था। इसने उसे जमीनी हकीकत दिखाई। राइड के लिए लंबा इंतजार, पेट्रोल का खर्च, अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म के कड़े नियम, रेस्टोरेंट की परेशानियां और लगातार चलते रहने का मानसिक दबाव जैसी जमीनी हकीकतों से उसे रुबरू होना पड़ा।

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रेडिट पोस्ट के आखिर में उसने अपने इस अनुभव का सबसे बड़ा हासिल बताते हुए लिखा है कि ‘एक स्टूडेंट के तौर पर 3 महीने के लिए गिग वर्क करना और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे मजबूरी में करना, दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। मेरे लिए यह महज एक साइड हसल था, लेकिन किसी और के लिए वही ₹1,200 उसके घर के बिल भरने और भूखे रहने के बीच का इकलौता सहारा हो सकते हैं।’