फेल छात्रों की खुलेगी किस्मत! गुजरात बोर्ड ने उठाया बड़ा कदम, नवंबर-दिसंबर में होगी विशेष परीक्षा

फेल छात्रों की खुलेगी किस्मत! गुजरात बोर्ड ने उठाया बड़ा कदम, नवंबर-दिसंबर में होगी विशेष परीक्षा

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गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSEB) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जो छात्र नियमित रूप से किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं करते हैं या बोर्ड परीक्षा में तीन से अधिक विषयों में असफल रहे हैं, उन्हें फिर से परीक्षा देने का विशेष अवसर देने का निर्णय लिया गया है। ऐसे छात्रों के भविष्य को सुधारने के लिए बोर्ड द्वारा पहली बार ‘स्टेट ओपन स्कूल’ की विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। ALSO READ: गुजरात सरकार की अटल सुशासन पुरस्कार योजना, अधिकारियों को मिलेगा सम्मान

 

नवंबर-दिसंबर में नेशनल ओपन स्कूल की तर्ज पर परीक्षा का आयोजन

बोर्ड द्वारा यह विशेष परीक्षा नवंबर-दिसंबर महीने के दौरान आयोजित की जाएगी। देश में चल रही ‘नेशनल ओपन स्कूल’ (NIOS) व्यवस्था की तर्ज पर ही अब गुजरात राज्य में भी ‘स्टेट ओपन स्कूल’ के तहत छात्रों को परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इस नई व्यवस्था से राज्य के हजारों छात्र, जो मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित रह गए थे, उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग मिलेगा।

 

फॉर्म भरने के लिए 6 अक्टूबर तक का समय   

स्टेट ओपन स्कूल की परीक्षा देने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक सभी छात्रों को आगामी 6 अक्टूबर तक अपने नजदीकी स्कूल से फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इसके लिए छात्रों को शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदन करना होगा। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में Ease of Doing Business पर जोर, Single Window व्यवस्था से निवेश को आसान बनाने की कोशिश

 

गैर-स्कूली और अधिक विषयों में असफल छात्रों को मिलेगा लाभ

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को होगा जो वर्तमान में किसी भी स्कूल में नियमित पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कक्षा 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 3 से अधिक विषयों में फेल हुए छात्रों को भी इसके माध्यम से दोबारा परीक्षा देने का सुनहरा मौका मिलेगा। इस फैसले से पहले परिणाम में असफल रहे छात्र पढ़ाई छोड़ने के बजाय दोबारा मेहनत कर सकेंगे।
 

 

शैक्षणिक वर्ष को बर्बाद होने से बचाने का सराहनीय प्रयास

गुजरात बोर्ड के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना और असफल होने के कारण उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो, यह सुनिश्चित करना है। स्टेट ओपन स्कूल व्यवस्था शुरू होने से नियमित स्कूल में पढ़ाई न कर पाने वाले या पिछली परीक्षा में असफल रहे छात्रों के लिए शिक्षा प्रणाली में एक सक्षम वैकल्पिक मार्ग तैयार हुआ है।

 

स्टेट ओपन स्कूल परीक्षा के लिए पात्र उम्मीदवार   

 

बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार इस विशेष परीक्षा का लाभ मुख्य रूप से चार श्रेणियों के छात्रों को मिलेगा: 

  • कक्षा 10वीं और 12वीं के ओपन स्कूल के छात्र।   
  • वर्तमान में किसी भी स्कूल में नियमित पढ़ाई न करने वाले छात्र।
  • बोर्ड की मुख्य परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में असफल (फेल) छात्र।
  • बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयावधि में पंजीकरण (Registration) कराने वाले सभी छात्र।

गुजरात के एकता नगर में सजेगा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का मंच

गुजरात के एकता नगर में सजेगा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का मंच

national film award

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में होगा, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कलाकारों को सम्मानित करेंगी। यह समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि मंगलवार को इसके इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। 70 साल के इतिहास में यह समारोह दूसरी बार दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। ALSO READ: गुजरात सरकार की अटल सुशासन पुरस्कार योजना, अधिकारियों को मिलेगा सम्मान

 

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पुरस्कारों की अगली शृंखला के लिए देश के बाकी राज्यों में भी इस आयोजन को लेकर जाने की कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इससे पहले केवल एक बार यह आयोजन 1971 में चेन्नई में हुआ था। मंत्रालय के अनुसार भारतीय सिनेमा अनेकता में एकता का प्रतीक है, इसलिए इस बार एकता के प्रतीक स्थल एकता नगर, गुजरात को चुना गया है। 

 

अभिनेता कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैपियन’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए अभिनेता रणदीप हुड्डा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलेगा। फिल्म ‘अमरन’ के लिए म्यूजिक कंपोजर जीवी प्रकाश को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए पुरस्कार मिलना है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में Ease of Doing Business पर जोर, Single Window व्यवस्था से निवेश को आसान बनाने की कोशिश

 

इस समारोह में शामिल होने कई फिल्मी सितारे गुजरात पहुंच चुके हैं। मंगलवार को वह केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी देखने पहुंचे। 

लाइसेंस राज की छुट्टी! सरकार बदलने जा रही है कारोबार के लाइसेंस का पूरा सिस्टम, 15 साल तक बढ़ा सकती है वैलिडिटी

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में लाइसेंस से जुड़ी शर्तों में बड़े बदलाव करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत,कई तरह के परमिट की वैलिडिटी को 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है। कारोबारियों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम हो सकेगा। बताते चलें कि अभी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के किसी बिजनेस को प्रोजेक्ट के पूरे समय में केंद्र,राज्य और स्थानीय निकायों से कम से कम 60 लाइसेंस की जरूरत होती है। इनमें केंद्र-स्तर की कई मंज़ूरियां भी शामिल हैं,जैसे पर्यावरण से जुड़ी मंज़री और फ़ूड सेफ्टी लाइसेंस। इन्हें समय-समय पर रिन्यू भी करवाना पड़ता है।

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) के लाइसेंस को अभी हर 1 से 5 साल में रिन्यू करवाने की जरूरत होती है। सुधार की इस प्रक्रिया में पर्यावरण,ड्रग रेग्युलेशन,विस्फोटक और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) जैसे इंडस्ट्री पर असर डालने वाले कई क्षेत्र शामिल हैं।

वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भुगतान

इस सुधार को नॉन-फाइनेंशियल रेगुलेटरी रिफॉर्म्स पर बनी एक हाई-लेवल कमिटी आगे बढ़ा रही है। इसके हेड नीति आयोग के सदस्य और पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा हैं। इस कमिटी का गठन अगस्त 2025 में किया गया था। इसका मसद नियमों का पालन करने के बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार के रेगुलेशन, सर्टिफिकेशन,लाइसेंस और परमिशन की समीक्षा करना था।

इन सुधारों के तहत अब लाइसेंस की वैधता और फीस के भुगतान के नियम अलग-अलग होंगे। सूत्रों के मुताबिक कारोबारियों को तय फीस हर साल देनी होगी,लेकिन जब लाइसेंस 10 या 15 साल के लिए मान्य होगा तो उन्हें रिन्यूअल के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि कारोबारियों को सालाना फीस तो देनी होगी लेकिन उन्हें रिन्यूअल से जुड़े बार-बार होने वाले कागजी काम और प्रक्रियाओं से छुटकारा मिल जाएगा।

अभी अलग-अलग इंडस्ट्री को उनकी जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग लाइसेंस लेने होते हैं। इस पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग लाइसेंस को एक ही लाइसेंस में मिलाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। कारोबारियों को अभी भी अलग-अलग लाइसेंस जरूरी लाइसेंस लेने होंगे। इस कवायद का मकसद सिर्फ नियमों को आसान बनाना और अनुपालन का बोझ कम करना है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस

यह कोशिश भारत में ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस(कारोबार करने में आसानी)को बेहतर बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का ही एक हिस्सा है। वर्ल्ड बैंक के ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2014 में 142वीं थी जो 2020 में सुधरकर 63वीं हो गई। डेटा की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं के कारण इस इंडेक्स को बंद करने से पहले यह इसका आखिरी एडिशन था। अब भारत इस साल के आखिर में वर्ल्ड बैंक के नए बिज़नेस रेडी(B-READY) असेसमेंट में शामिल होगा।

 

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