Rentomojo IPO: ₹1256 करोड़ का इश्यू 73 गुना भरकर बंद, 37% मुनाफे में हो सकती है लिस्टिंग! ग्रे मार्केट से संकेत

फर्नीचर, अप्लायंसेज किराए पर देने वाली कंपनी रेंटोमोजो का ₹1,255.57 करोड़ का IPO 11 सितंबर को बंद हो गया। इसे कुल 72.89 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 177.29 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 67.93 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 15.62 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 21.03 गुना भरा। यह 9 सितंबर को खुला था और प्राइस बैंड ₹384-₹404 प्रति शेयर था।

अलॉटमेंट 15 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। लिस्टिंग अच्छे मुनाफे में होने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में रेंटोमोजो का शेयर 36.63 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

रेंटोमोजो ग्राहकों को घर के फर्नीचर और अप्लायंसेज के लिए किफायती, फ्लेक्सिबल और लॉन्ग टर्म सब्सक्रिप्शन प्लान उपलब्ध कराती है। इसके प्रोडक्ट्स में घर की जरूरी चीजें जैसे बेड, गद्दे, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, अलमारी, सोफा, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, वॉटर प्योरिफायर आदि शामिल हैं।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

रेंटोमोजो अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए, वेयरहाउस और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लिए लीज रेंटल/लाइसेंस फीस का पेमेंट करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। IPO में ₹150 करोड़ के 37.15 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹1,105.57 करोड़ के 2.74 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। OFS में कंपनी के प्रमोटर गीतांश बामनिया के साथ-साथ एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस), एडलवाइस डिस्कवरी फंड-सीरीज I, IDG वेंचर्स इंडिया फंड III LLC, वैल्यू क्वेस्ट S.C.A.L.E. फंड, मैडिसन इंडिया, चिराटे वेंचर्स, GMO पेमेंट गेटवे समेत कई निवेशकों ने शेयरों को बिक्री के लिए रखा। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से ₹376.07 करोड़ जुटाए।

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Rentomojo की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 394 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 142 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 104.30 करोड़ रुपये रहा। इस बीच रेंटोमोजो पर 187.59 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 271.96 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 43.11 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

New IPO Alert: ब्लैकरॉक और गोल्डमैन सैक्स का बड़ा दांव! आज से खुला इश्यू, जानिए दांव लगाने से पहले 5 बड़ी बातें

Rentomojo IPO Details: भारत में फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स अप्लायंसेज किराये पर देने वाला प्रमुख प्लेटफॉर्म ‘रेंटोमोजो’ का आईपीओ आज, 9 सितंबर से दांव लगाने के लिए खुल गया है। पब्लिक इश्यू खुलने से ठीक एक दिन पहले कंपनी ने अपने एंकर इन्वेस्टर्स से ₹376.07 करोड़ जुटाकर जबरदस्त शुरुआत की है।

एंकर बुक में ब्लैकरॉक और गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गज ग्लोबल निवेशकों के साथ-साथ देश के प्रमुख म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों ने दिल खोलकर पैसा लगाया है।

अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो जान लीजिए इसका प्राइस बैंड, फाइनेंशियल्स और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी 5 सबसे अहम बातें।

आईपीओ की तारीखें और प्राइस बैंड

  • इश्यू खुलने की तारीख: 9 सितंबर
  • इश्यू बंद होने की तारीख: 11 सितंबर
  • प्राइस बैंड: ₹384 से ₹404 प्रति शेयर
  • कुल आईपीओ साइज: ₹1,256 करोड़

इस आईपीओ में ₹150 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है, यानी यह पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा। वहीं, प्रमोटर्स और मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए ₹1,105.56 करोड़ मूल्य के 2.73 करोड़ शेयर बेच रहे हैं।

एंकर निवेशकों से ₹376 करोड़ की बंपर फंडिंग

कंपनी ने एंकर निवेशकों को ₹404 प्रति शेयर पर कुल 93.08 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए हैं। ब्लैकरॉक, गोल्डमैन सैक्स और थेलेम पार्टनर जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स इसमें शामिल हुए। साथ ही देश के 16 प्रमुख म्यूचुअल फंड हाउस की 30 स्कीम्स ने मिलकर करीब ₹244 करोड़ (60.41 लाख शेयर) का निवेश किया।एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ और बजाज लाइफ सहित इंश्योरेंस कंपनियों ने ₹51 करोड़ (12.62 लाख शेयर) लगाए।

जुटाए गए पैसों का कंपनी क्या करेगी?

फ्रेश इश्यू से मिलने वाली ₹150 करोड़ की शुद्ध रकम को कंपनी इन कामों में खर्च करेगी:

कर्ज चुकाने में: ₹70 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी अपना कर्ज कम करने के लिए करेगी (कंपनी पर कुल ₹258.3 करोड़ का कर्ज है)।

लीज और किराया: ₹42.5 करोड़ का इस्तेमाल वेयरहाउस और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लीज रेंट और लाइसेंस फीस देने में होगा।

कॉर्पोरेट जरूरतें: बाकी बची रकम का इस्तेमाल कंपनी के सामान्य कामकाज और विस्तार में किया जाएगा।

कंपनी का बिजनेस मॉडल और नेटवर्क

रेंटोमोजो एक ओमनीचैनल प्लेटफॉर्म चलाती है, जहां ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर करने के साथ-साथ स्टोर्स पर जाकर भी फर्नीचर और होम अप्लायंसेज देख सकते हैं। देश भर में कंपनी के पास वर्तमान में 82 एक्सपीरियंस स्टोर्स हैं। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑक्यूपेंसी रेट 83.34% रही, जो पिछले साल (82.82%) के मुकाबले बेहतर हुई है।

142% बढ़कर ₹104 करोड़ पहुंचा मुनाफा

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वित्त वर्ष में रेंटोमोजो का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 45.5% की सालाना बढ़त के साथ ₹387 करोड़ पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2025 में ₹266 करोड़ रहा था। वहीं, कंपनी के नेट प्रॉफिट (PAT) में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। FY25 के ₹43.1 करोड़ के मुकाबले कंपनी का शुद्ध मुनाफा 142% बढ़कर FY26 में ₹104.2 करोड़ दर्ज किया गया है। रेवेन्यू और मुनाफे में आया यह तगड़ा उछाल कंपनी के बिजनेस मॉडल और सब्सक्रिप्शन आधार में आई मजबूती को दर्शाता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rentomojo IPO 9 सितंबर से, ₹384-₹404 रहेगा प्राइस बैंड; ग्रे मार्केट में अभी से चढ़ा शेयर

फर्नीचर, अप्लायंसेज किराए पर देने वाली कंपनी रेंटोमोजो का ₹1,255.57 करोड़ का IPO 9 सितंबर को खुलने वाला है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹384-₹404 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 37 शेयर है। इस इश्यू में ₹150 करोड़ के 37.15 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹1,105.57 करोड़ के 2.74 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर गीतांश बामनिया के साथ-साथ एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस), एडलवाइस डिस्कवरी फंड-सीरीज I, IDG वेंचर्स इंडिया फंड III LLC, वैल्यू क्वेस्ट S.C.A.L.E. फंड, मैडिसन इंडिया, चिराटे वेंचर्स, GMO पेमेंट गेटवे समेत कई निवेशक शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

IPO में एंकर निवेशक 8 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। इश्यू की क्लोजिंग 11 सितंबर को होगी, जिसके बाद अलॉटमेंट 15 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। इश्यू के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, एक्सिस कैपिटल और IIFL कैपिटल सर्विसेज बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

रेंटोमोजो ग्राहकों को घर के फर्नीचर और अप्लायंसेज के लिए किफायती, फ्लेक्सिबल और लॉन्ग टर्म सब्सक्रिप्शन प्लान उपलब्ध कराती है। इसके प्रोडक्ट्स में घर की जरूरी चीजें जैसे बेड, गद्दे, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, अलमारी, सोफा, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, वॉटर प्योरिफायर आदि शामिल हैं। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

रेंटोमोजो अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए, वेयरहाउस और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लिए लीज रेंटल/लाइसेंस फीस का पेमेंट करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 8.17 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

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Rentomojo की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 394 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 142 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 104.30 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 187.59 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 271.96 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 43.11 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लाइसेंस राज की छुट्टी! सरकार बदलने जा रही है कारोबार के लाइसेंस का पूरा सिस्टम, 15 साल तक बढ़ा सकती है वैलिडिटी

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में लाइसेंस से जुड़ी शर्तों में बड़े बदलाव करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत,कई तरह के परमिट की वैलिडिटी को 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है। कारोबारियों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम हो सकेगा। बताते चलें कि अभी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के किसी बिजनेस को प्रोजेक्ट के पूरे समय में केंद्र,राज्य और स्थानीय निकायों से कम से कम 60 लाइसेंस की जरूरत होती है। इनमें केंद्र-स्तर की कई मंज़ूरियां भी शामिल हैं,जैसे पर्यावरण से जुड़ी मंज़री और फ़ूड सेफ्टी लाइसेंस। इन्हें समय-समय पर रिन्यू भी करवाना पड़ता है।

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) के लाइसेंस को अभी हर 1 से 5 साल में रिन्यू करवाने की जरूरत होती है। सुधार की इस प्रक्रिया में पर्यावरण,ड्रग रेग्युलेशन,विस्फोटक और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) जैसे इंडस्ट्री पर असर डालने वाले कई क्षेत्र शामिल हैं।

वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भुगतान

इस सुधार को नॉन-फाइनेंशियल रेगुलेटरी रिफॉर्म्स पर बनी एक हाई-लेवल कमिटी आगे बढ़ा रही है। इसके हेड नीति आयोग के सदस्य और पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा हैं। इस कमिटी का गठन अगस्त 2025 में किया गया था। इसका मसद नियमों का पालन करने के बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार के रेगुलेशन, सर्टिफिकेशन,लाइसेंस और परमिशन की समीक्षा करना था।

इन सुधारों के तहत अब लाइसेंस की वैधता और फीस के भुगतान के नियम अलग-अलग होंगे। सूत्रों के मुताबिक कारोबारियों को तय फीस हर साल देनी होगी,लेकिन जब लाइसेंस 10 या 15 साल के लिए मान्य होगा तो उन्हें रिन्यूअल के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि कारोबारियों को सालाना फीस तो देनी होगी लेकिन उन्हें रिन्यूअल से जुड़े बार-बार होने वाले कागजी काम और प्रक्रियाओं से छुटकारा मिल जाएगा।

अभी अलग-अलग इंडस्ट्री को उनकी जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग लाइसेंस लेने होते हैं। इस पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग लाइसेंस को एक ही लाइसेंस में मिलाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। कारोबारियों को अभी भी अलग-अलग लाइसेंस जरूरी लाइसेंस लेने होंगे। इस कवायद का मकसद सिर्फ नियमों को आसान बनाना और अनुपालन का बोझ कम करना है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस

यह कोशिश भारत में ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस(कारोबार करने में आसानी)को बेहतर बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का ही एक हिस्सा है। वर्ल्ड बैंक के ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2014 में 142वीं थी जो 2020 में सुधरकर 63वीं हो गई। डेटा की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं के कारण इस इंडेक्स को बंद करने से पहले यह इसका आखिरी एडिशन था। अब भारत इस साल के आखिर में वर्ल्ड बैंक के नए बिज़नेस रेडी(B-READY) असेसमेंट में शामिल होगा।

 

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