Delhi Power Cut: 6 अगस्त को दिल्ली के कई इलाकों में बिजली रहेगी गुल, जानें टाइमिंग और प्रभावित क्षेत्र

Delhi Power Cut: दिल्ली के लोगों को मंगलवार, 6 अगस्त को कुछ इलाकों में होने वाली निर्धारित बिजली कटौती के लिए तैयार रहना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर में बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) मेंटेनेंस का काम करेंगी। इस वजह से दिल्ली के कुछ रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने इलाके में बिजली कटौती की जानकारी पहले से ले लें, ताकि दिनभर के कामकाज में अचानक परेशानी न हो।

BSES और टाटा पावर ने जारी किया नोटिस, इन इलाकों में प्रभावित हो सकती है बिजली सप्लाई

दिल्ली में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) ने बिजली कटौती को लेकर नोटिस जारी किया है।

बिजली कटौती का असर खासतौर पर दक्षिण दिल्ली, द्वारका और उत्तर दिल्ली के कुछ इलाकों में पड़ सकता है। बिजली कंपनियों की टीमें इस दौरान ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत और अपग्रेड करने के साथ-साथ बिजली की ऊपर से गुजरने वाली लाइनों के पास मौजूद पेड़ों की शाखाओं की सफाई करेंगी।

लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले SMS अलर्ट जरूर चेक करें। इससे उनके इलाके में बिजली कटौती का सही समय पता चल जाएगा।

6 अगस्त को दिल्ली में बिजली कटौती से प्रभावित इलाके और समय

बिजली कंपनी (DISCOM)प्रभावित इलाकेबिजली कटौती का समय
TPDDLपीतमपुरा, रोहिणी, रिठालासुबह 10:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक
BRPLद्वारका, साकेत, लाजपत नगरसुबह 09:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक
BYPLलक्ष्मी नगर, दिलशाद गार्डनसुबह 10:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक

 

बता दें कि ग्राहकों को लंबे समय तक होने वाली परेशानी को कम करने के लिए मेंटेनेंस का काम तय समय पर किया जा रहा है। वेस्ट दिल्ली और रोहिणी में ज्यादातर काम दोपहर की शुरुआत तक पूरा हो जाएगा। हालांकि, साउथ दिल्ली के कुछ इलाकों में रुक-रुक कर बिजली जा सकती है और इसमें छह घंटे तक लग सकते हैं। वहीं, बिजली कंपनियों का कहना है कि अगस्त में ज्यादा नमी और उमस के कारण ट्रांसफॉर्मर पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में पहले से मेंटेनेंस करने से अचानक ट्रांसफॉर्मर खराब होने और बड़े बिजली संकट से बचने में मदद मिलेगी।

दिल्ली में बिजली कटौती का स्टेटस कैसे चेक करें

अगर आपके इलाके में बिजली कटौती हो रही है या होने वाली है, तो आप इसकी जानकारी आसानी से ले सकते हैं। इसके लिए आप 1912 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके तुरंत अपडेट पा सकते हैं। अपना कंज्यूमर अकाउंट (CA) नंबर बताकर आप पता कर सकते हैं कि आपके इलाके की बिजली लाइन या फीडर प्रभावित है या नहीं।

इसके अलावा, BSES और टाटा पावर के मोबाइल ऐप पर भी बिजली सप्लाई बंद होने और दोबारा शुरू होने (रिस्टोरेशन) की जानकारी देखी जा सकती है।

बिजली कटौती की जानकारी पहले से होने पर आप अपने जरूरी कामों की बेहतर योजना बना सकते हैं। खासतौर पर वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने वालों और पानी की मोटर चलाने जैसे जरूरी कामों में परेशानी से बचा जा सकता है।

बिजली कटौती से पहले ऐसे करें तैयारी

अगर आपके इलाके में बिजली कटौती होने वाली है, तो पहले से तैयारी कर लेना बेहतर रहेगा। मेंटेनेंस शुरू होने से पहले अपने मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज कर लें। साथ ही, बिजली जाने से पहले पानी की टंकी भरकर रख लें, ताकि बाद में परेशानी न हो।

लोगों को सलाह दी गई है कि बिजली बंद होने के तय समय से करीब 10 मिनट पहले लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें, ताकि अचानक बिजली जाने पर लिफ्ट में फंसने जैसी स्थिति न बने।

बिजली कंपनियों का कहना है कि ये मेंटेनेंस कार्य लंबे समय में दिल्ली के लोगों को बेहतर और भरोसेमंद बिजली सप्लाई देने में मदद करेंगे। इससे बिजली लाइनों में आने वाली खराबियों और अचानक होने वाली कटौती को कम किया जा सकेगा।

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Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

pm modi paper leak

संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक विरोधी विधेयक का संसद से पारित होना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

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उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने देशवासियों से विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने कहा कि दशकों से केंद्र और राज्य की अलग-अलग सरकारें पेपर लीक की घटनाओं से निपटती रही हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता थी।

 

प्रधानमंत्री ने अपने करीब 2 मिनट 26 सेकंड के वीडियो में कहा कि सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था और उनके वादे के मुताबिक दोनों सदनों में बड़ी संख्या में सांसदों ने इस पर विस्तार से चर्चा की। अब दोनों सदनों ने सख्त प्रावधानों वाले इस विधेयक को पारित कर दिया है।

 

पीएम मोदी ने कहा कि विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और यह काम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति को लंबे समय तक बने नहीं रहने देगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की अपील की।

राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हुआ बिल

'Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026' को गुरुवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। अब विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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पेपर लीक पर 5 से 10 साल तक की सजा

 

संशोधन विधेयक में पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल लोगों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों में कम से कम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए कड़े प्रावधान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात, किन मुद्दों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति से भेंट की। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं।

राष्ट्रपति कार्यालय ने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। 

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सप्ताह के सफल विदेश दौरे के बाद रविवार को भारत लौटी हैं। इस दौरान उन्होंने मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया का दौरा किया था।  राष्ट्रपति के इस दौरे को भारत के इन यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की चर्चा हो रही है। जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से होली के दिन कथित रूप से जले हुए नोट बरामद होने की घटना के डेढ़ साल हो गए। लेकिन यह पता ही नहीं चल रहा है कि इस मामले में क्या होना है? सुप्रीम कोर्ट ने घटना के तुरंत बाद एक कमेटी बना कर जांच कराई थी, जिसने कहा था कि नोट उनके घर से बरामद हुए थे। उसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों ने उनकी नियुक्ति का बड़ा विरोध किया। उन्हें बिना कोई काम दिए अदालत में रखा गया। इधर संसद में महाभियोग का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और जजेज इन्क्वायरी एक्ट के हिसाब से स्पीकर ने जांच की कमेटी भी बना दी। कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा भी दे दिया। सवाल है कि क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है? एक रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट और भारत सरकार के न्याय विभाग के रिकॉर्ड में वे आज भी जज हैं। अगर ऐसा है तो इसका अर्थ है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। तब भी सवाल है कि क्या वे महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे? अगर ऐसा होगा तो वे देश के पहले जज होंगे, जो महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे। यह भी सवाल है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हो जाएगा तो क्या महाभियोग की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी?

NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह 'पूर्ण विनम्रता और कर्तव्य भावना' के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनके मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

 

63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार से पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

जोशी ने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और शिक्षा क्षेत्र में कई अहम पहल की गईं। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।”

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों—उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आंदोलन का दुरुपयोग “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न कर सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

 

प्रधान ने अपने पत्र में कहा, “जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। देश की एकता बनी रहनी चाहिए और भारत के प्रत्येक छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

 

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा 49 दिनों का आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

 

यह फैसला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच हुई तीन दौर की वार्ता के बाद लिया गया। इन बैठकों में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया है और उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू किया जाएगा।

कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? जानिए उनकी पढ़ाई और पूरा राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे कई बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

कितने पढ़े लिखे हैं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की पढ़ाई की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि प्रह्लाद जोशी ने कला (आर्ट्स) विषय से पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जीवन और संसदीय कामकाज का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब केंद्र सरकार कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है।

इस कॉलेज से की है पढ़ाई

प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा कर्नाटक के हुब्बल्ली में पूरी की। इसके बाद उन्होंने के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यहां से कई प्रमुख राजनेता, अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पढ़ाई कर चुके हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2004 से हैं लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब तक पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया है और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जब कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने उनकी कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती बढ़ाने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में लाने की तैयारी भी की जा रही है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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Ravneet Singh: केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा मंजूर, छोड़ा रेल राज्यमंत्री का पद

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। हालांकि, उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राज्य की राजनीति में सक्रिय वापसी की अटकलों के बीच यह फैसला लिया गया है। रवनीत सिंह का राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यकाल जून में ही समाप्त हो गया था। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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इंग्लैंड दौरे से पहले रोहित शर्मा को मिला बड़ा सम्मान, राष्ट्रपति ने दिया पद्म श्री अवॉर्ड , देखें वीडियो

भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को आज देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री से सम्मानित किया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रोहित शर्मा को पद्म श्री से सम्मानित किया। रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल और प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिना जाता है। रोहित की कप्तानी में भारत ने टी-20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जैसे बड़े खिताब अपने नाम किए। रोहित शर्मा अगले महीने 3 मैचों की वनडे सीरीज के लिए इंग्लैंड दौरे पर जाएंगे।

वहीं, भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को उनके खेल जगत में लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई अन्य हस्तियों को भी सम्मानित किया गया।

रोहित को मिला पद्म श्री 

सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले रोहित ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 हजार से अधिक रन बनाए हैं और उनके नाम 50 शतक भी दर्ज हैं। लंबे समय से भारतीय टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ रहे रोहित ने अपनी शानदार पारियों और नेतृत्व क्षमता से क्रिकेट जगत में खास पहचान बनाई है। रोहित शर्मा टेस्ट और टी20 से रियायरमेंट ले चुके हैं। रोहित अब केवल वनडे मैच खलते हैं।

विजय अमृतराज को मिला पद्म भूषण

वहीं दूसरी ओर विजय अमृतराज भारत के सबसे सम्मानित खेल सितारों में शामिल हैं। टेनिस के अलावा उन्होंने कमेंट्री, एक्टिंग और सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने करियर के दौरान वह दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे और एक समय उनकी विश्व रैंकिंग 16वें स्थान तक पहुंची थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में कई एकल और युगल खिताब जीते, जबकि विंबलडन और यूएस ओपन जैसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों में भी शानदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा, उन्होंने भारत को दो बार डेविस कप के फाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

65 लोगों को मिला सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इस चरण में कुल 65 पुरस्कार दिए गए, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री सम्मान शामिल थे। सम्मान पाने वालों में प्रसिद्ध अभिनेता ममूटी और मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक भी शामिल रहीं। ये पुरस्कार उन 131 पद्म सम्मानों का हिस्सा हैं, जिनकी घोषणा गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर की गई थी। इन सम्मानों के जरिए कला, खेल, संगीत, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है।

कब शुरू हुआ था अवॉर्ड

पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, समाज सेवा, उद्योग, लोक प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वर्ष 1954 में शुरू हुए ये पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित करने के लिए प्रदान किए जाते हैं।