नालंदा के सरकारी स्कूल में बड़ी लापरवाही! मिड-डे मील में रसोइए ने नमक की जगह डाल दिया डिटर्जेंट, 34 बच्चों की बिगड़ी तबीयत

Bihar Mid-Day Meal: मंगलवार को बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय ब्लॉक के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 34 बच्चे बीमार पड़ गए। स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि यह घटना तब हुई जब रसोइए ने गलती से उन छात्रों को डिटर्जेंट पाउडर दे दिया, जिन्होंने और नमक मांगा था।

नालंदा जिले के एक अधिकारी के मुताबिक, खाना खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर पारसी मिडिल स्कूल की 17 लड़कियों और उतने ही लड़कों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया। जिला प्रशासन ने बताया कि इलाज के बाद सभी बच्चे स्वस्थ हैं और खतरे से बाहर हैं।

एक वीडियो में स्कूल के हेडमास्टर शैलेंद्र कुमार सिंह स्थानीय पत्रकारों को घटना के बारे में जानकारी देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक NGO की ओर से स्कूल में मिड-डे मील उपलब्ध कराया गया था। तय मेन्यू के मुताबिक बच्चों को चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी।

यह सब कैसे शुरू हुआ?

हेडमास्टर ने बताया कि स्कूल में कई बार में खाना परोसा जाता है। एक वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “दूसरी बार खाना परोसने के दौरान, स्कूल के एक रसोइए की पोती ने और नमक मांगा। रसोइए ने गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर उठा लिया और उसे लड़की के खाने में मिला दिया।” उन्होंने आगे कहा, “रसोइए को सिर्फ अपनी पोती को खाना परोसते देख, दूसरे छात्रों ने भी और नमक मांगा और उन्हें भी वही डिटर्जेंट पाउडर मिल गया। जल्द ही, कुछ छात्रों ने गले और पेट में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद हमें इस समस्या के बारे में पता चला।”

हालांकि, स्कूल मैनेजमेंट ने शुरुआत में प्रभावित बच्चों को लक्षणों से राहत देने के लिए गुनगुना नमक का पानी पिलाया। इसके बाद बच्चों को इलाज के लिए सबसे पहले भागन बिगहा स्थित डेंटल कॉलेज भेजा गया, जहां से बाद में उन्हें आगे के इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

इस बीच, जिले के अधिकारी ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्चों की जांच की और उनकी हालत स्थिर है।

अधिकारी के मुताबिक, स्कूल में मिड-डे मील एकता शक्ति फाउंडेशन की ओर से नगरनौसा के रामघाट स्थित सेंट्रलाइज्ड किचन से भेजा गया था। एक अधिकारी ने कहा”खाना परोसने से पहले, स्कूल के दो रसोइयों और दो शिक्षकों ने खाना खाया था। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे सभी 132 छात्रों को खाना परोसा गया। उनमें से 34 बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के बाद दोपहर करीब 2:15 बजे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।”

जिला अधिकारी ने बताया कि फाउंडेशन की सेंट्रलाइज्ड किचन चंडी, नगरनौसा और नूरसराय ब्लॉक के 206 स्कूलों में रोजाना लगभग 23,000 बच्चों को मिड-डे मील सप्लाई करती है।

खाने की जांच के लिए लिए जाएंगे सैंपल

अधिकारियों ने कहा कि वे खाने के सैंपल की जांच करवाएंगे। इस बीच, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उस अस्पताल पहुंचे जहां बच्चों को भर्ती कराया गया था। बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी सदर अस्पताल का दौरा किया, बच्चों से मुलाकात की और डॉक्टरों को सही इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जिला प्रशासन ने बताया कि डॉक्टरों ने सभी बच्चों को स्वस्थ और खतरे से बाहर पाया है। जांच के समय बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं दिखा।

फिलहाल, इस मामले में अभी तक कोई FIR या शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

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बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

विदेश से कुछ समय रहकर या घूमकर आने के बाद, हममें से ज्यादातर लोग अपने देश में साफ-सफाई की शिकायत जरूर करते हैं। लेकिन देखिए, बिहार के शुभम कुमार क्या कर रहे हैं?
वे सफाई का जिम्मा खुद उठा रहे हैं।
बिहार के शुभम हर रविवार घाट की सफाई करते है।
एक रविवार से शुरू हुई उनकी ये सफाई मुहिम, आज 1,100+ वॉलंटियर्स तक पहुँच चुकी है।
1.4 लाख किलो से ज्यादा प्लास्टिक हटाई गई।
2 लाख से ज्यादा बोतलें रीसायकल हुईं।
और 16,000+ लोगों की रोजी-रोटी इन सुधरे हुए इलाकों से जुड़ गई।
इस Independence Day, आइए देशभक्ति का एक अलग रूप celebrate करें।
द बेटर इंडिया लेकर आया है #CivicSenseHero—एक ऐसी पहल, जिसके जरिए हम उन आम भारतीयों को सम्मान देंगे, जो सिर्फ़ अपने देश से प्यार नहीं करते, बल्कि अपने कामों से उसकी बेहतर तस्वीर बनाते हैं।

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी Community के लिए कुछ अच्छा कर रहा है और बदलाव ला रहा है?

तो अपने #CivicSenseHero को Nominate करें और उनकी कहानी हम तक पहुंचाएं।

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Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Bihar: प्रशांत किशोर की राजनीति के मुरीद हुए चिराग पासवान! शराबबंदी पर सरकार को घेरा

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने शनिवार को जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किशोर धर्म और जाति के आधार पर लोगों को जोड़ने की कोशिश करने के बजाय विकास की बात करते हैं, इसलिए वह उनकी राजनीति से सहमत हैं। चिराग पासवान ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी पार्टी के कार्यालय में तिरंगा फहराया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रशांत किशोर को लेकर अपनी राय रखी।

PK की राजनीति को चिराग का समर्थन!

इससे एक दिन पहले चिराग पासवान ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मौजूदा रूप में यह कानून अपने मकसद को पूरा करने में सफल नहीं रहा है और इसकी समीक्षा की जरूरत है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून राज्य में अवैध शराब के कारोबार को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने इसी वजह से कानून की समीक्षा किए जाने की बात कही।

शराबबंदी पर सरकार को घेरा

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, “शराबबंदी लागू होने के बाद भी शराब की खरीद-बिक्री और बनाने की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। इनमें नकली शराब के मामले भी शामिल हैं। ऐसे में इस नीति का मकसद पूरा नहीं हो रहा है। इसलिए कानून की समीक्षा करके इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि जब 2016 में बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया गया था, तब उनकी पार्टी विपक्ष में थी, फिर भी उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि अब लोगों को शराब पीने से होने वाले नुकसान के बारे में बड़े स्तर पर जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार और समाज, दोनों को मिलकर काम करना चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) बिहार और केंद्र, दोनों जगह एनडीए की सहयोगी पार्टी है। चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी बिहार की शराबबंदी व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। मांझी ने कहा था कि राज्य में शराबबंदी कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने गुजरात की तरह बिहार में भी शराबबंदी कानून लागू करने की मांग की थी। मांझी के इन बयानों के कुछ दिनों बाद चिराग पासवान ने भी बिहार की शराबबंदी नीति की समीक्षा करने की जरूरत बताई है। इससे एनडीए के सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

क्या हमारी नौकरियां ले सकता है AI? जानें 5 ऐसी फील्ड जहां इंसानों की काबीलियत का मुकाबला नहीं कर सकेगा एआई

आज के दौर में छोटे-बड़े पदों पर काम कर रहे कामगारों को एक सवाल सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या हमारी नौकरियां ले सकता है? कहने को यह सिर्फ मशीन है, लेकिन एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर सीईओ तक इसके खौफ में जी रहे हैं। आए दिन मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की छंटनी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में ये सोचना लाजिमी है कि क्या एआई की वजह से इंसानों के काम करने के विकल्प सीमित होंगे या खतरा उतना बड़ा भी नहीं है, जितना इसका खौफ बन गया है? इस विषय पर बीबीसी हिंदी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई नौकरियां पैदा भी करेगा। जनवरी 2026 में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई के कारण लाखों नई नौकरियां बनी हैं। कोई 12वीं छात्र एआई से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है, तो इसके लिए सही कोर्स चुनना होगा। आइए जानें 5 ऐसे करियर विकल्प जहां एआई इंसानों का बाल भी बांका नहीं कर सकता है।

क्या होता है एआई?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन या कंप्यूटर की ऐसी क्षमता, जिससे ऐसा लगे कि वो इंसानों की तरह ही सोचने-समझने के काबिल है।” वह कहते हैं रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर-मोबाइल एप्लिकेशन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम कर रहा है।

एआई के पांच टॉप कोर्स

दिल्ली में टेक पॉलिसी फोकस्ड थिंकटैंक इसिया सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी एआई एक्सपर्ट मेघना बल कहती हैं, ”एआई उन लोगों के लिए खतरा नहीं है, जो खुद को अपडेट रखते हैं। बल्कि यह उनके लिए मौका है।” मेघना के मुताबिक एआई से संबंधित कुछ बेसिक स्तर के कोर्स सभी को करने चाहिए। सरकार के स्वयं पोर्टल के जरिए कई कोर्स फ्री में किए जा सकते हैं। लेकिन इस फील्ड में करियर बनाने में ये 5 कोर्स आपके काम आएंगे।

एमबीए/पीजी डिप्लोमा इन एआई एंड बिजनेस एनालिटिक्स : आईआईएम, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, और अपग्रैड, या ग्रेट लर्निंग जैसी एडुटेक कंपनियों के साथ जुड़कर ये कोर्स किया जा सकता है। इसकी फीस करीब ढाई से सात लाख रुपये तक हो सकती है। कोर्स करने के बाद संभावित सैलरी छह से बीस लाख रुपये के बीच हो सकती है।

एआई सर्टिफिकेट प्रोग्राम (ऑनलाइन): ये ऑनलाइन एडुटेक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसकी फीस डेढ़ लाख रुपये के आसपास है। ये उनके लिए है, जो एकदम शुरुआती चरण में हैं और एआई की बुनियादी समझ बनाना चाहते हैं। इस कोर्स के बाद सालाना 10 लाख तक सैलरी मिल सकती है।

एमसीए/एम टेक इन एआई एंड मशीन लर्निंग : आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और कई दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालय से ये कोर्स किया जा सकता है। इसके अलावा आईआईटी में एआई से जुड़े कई क्रैश कोर्स भी उपलब्ध हैं। मास्टर्स की फीस सालाना एक लाख से दस लाख के बीच हो सकती है। इसे करने के बाद अनुमानित सैलरी 22 लाख रुपए हो सकती है।

बीएससी/बीटेक इन एआई एंड डेटा साइंस : दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, एनआईटी जैसे बड़े संस्थानों से ये कोर्स किया जा सकता है। पूरे प्रोग्राम की फीस एक लाख से बीस लाख रुपए के बीच हो सकती है। संभावित सैलरी 6 से 18 लाख रुपये तक जा सकती है।

एआई बूटकैंप और इंडस्ट्री प्रोग्राम : आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और कई बड़े निजी संस्थान में ये कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस करीब 1 लाख से साढ़े तीन लाख रुपये हो सकती है। कोर्स के बाद संभावित पैकेज 6 से 18 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो सकता है।

हेल्थ, सीए, कानून के पेशे में कम होगा एआई का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का खतरा उन पेशों पर कम होगा, जहां इंसानी कनेक्ट की जरूरत होगी। मेघना बल कहती हैं, “नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, टीचर के काम एआई नहीं कर पाएगा। इन कामों के लिए इंसान ही चाहिए। लोग सिर्फ ऑटोमेटेड जवाबों से संतुष्ट नहीं होंगे।”

इसके अलावा क्रिएटिव डायरेक्टर्स, लेखक या कॉन्टेंट स्ट्रैटेजिस्ट के काम में एआई मददगार हो सकता है, लेकिन इनकी जगह नहीं ले पाएगा। प्रोफेसर आकाश सिन्हा चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, नर्स, एआई इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, वकील के करियर को एआई से सुरक्षित मानते हैं। लेकिन इसमें अपनी विशेषज्ञता कायम रखनी होगी। ये करियर विकल्प पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन आप खुद एआई टूल का इस्तेमाल करना सीखें, ताकि काम जल्दी कर सकें।

Bihar Police ASI Operation Result 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर इस तरह चेक करें प्री परीक्षा की मेरिट लिस्ट, 462 पदों के लिए हुई थी परीक्षा

Bihar Police ASI Operation Result 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर इस तरह चेक करें प्री परीक्षा की मेरिट लिस्ट, 462 पदों के लिए हुई थी परीक्षा

Bihar Police ASI Operation Result 2026: बिहार पुलिस में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ऑपरेशन) की प्राथमिक लिखित परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। इनके लिए जरूरी अपडेट है। बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (BPSSC) ने इन उम्मीदवारों का इंतजार को खत्म करते हुए बीपी एएसआई (ऑपरेशन) प्राथमित लिखित परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। यह परिणाम बिहार पुलिस रेडियो में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ऑपरेशन) की 462 वैकेंसी पर भर्ती के लिए घोषित किया गया है। प्री परीक्षा 22 जुलाई, 2026 को एक ही शिफ्ट में आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए कुल 1,03,248 उम्मीदवार तय किए गए थे, जबकि 42,595 कैंडिडेट शामिल हुए। मूल्यांकन के बाद, 41,605 कैंडिडेट को भर्ती प्रक्रिया के लिए चुना गया। मेरिट और रिजर्वेशन क्राइटेरिया के आधार पर, 6,748 कैंडिडेट को मुख्य लिखित प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के लिए चुना गया है।

बिहार पुलिस एएसआई रिजल्ट 2026: सिलेक्शन डिटेल्स देखें

आयोग ने उन उम्मीदवारों के रोल नंबर की लिस्ट जारी कर दी है जिन्हें मुख्य लिखित परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया है। उम्मीदवार ध्यान दें कि यह लिस्ट मेरिट लिस्ट अंतिम नहीं है और इसमें सिर्फ अगले चरण के लिए चुने गए लोगों के नाम हैं।

कुल पद : 462

शेड्यूल किए गए कैंडिडेट : 1,03,248

कैंडिडेट शामिल हुए : 42,595

कैंडिडेट का मूल्यांकन किया गया : 41,605

मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चुने गए कैंडिडेट : 6,748

कम से कम क्वालिफाइंग मार्क्स : 30%

आयोग ने बताया कि जिन उम्मीदवारों ने कम से कम 30% अंक हासिल किए थे, उन्हें मेरिट और रिजर्वेशन श्रेणी के हिसाब से मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चुना गया है। अगले चरण के लिए अंतिम चयन से पहले कुल 15,934 कैंडिडेट को विचार के लिए योग्य पाया गया।

बिहार पुलिस एएसआई रिजल्ट 2026: कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ चेक करें

आयोग ने मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चयनित उम्मीदवारों के लिए कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ भी बताया है। कट-ऑफ कैटेगरी और लैंगिक समूह के हिसाब से अलग-अलग होता है।

अनारक्षित : पुरुषों के लिए 41.2 और महिलाओं के लिए 30.0

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग : पुरुषों के लिए 36.4

अनुसूचित जाति : पुरुषों के लिए 31.6

अनुसूचित जनजाति : पुरुषों के लिए 30.4

बेहद पिछड़ा वर्ग : पुरुषों के लिए 37.4

पिछड़ा वर्ग : पुरुषों के लिए 38.8

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग FFW: महिलाओं के लिए 35.2

मेन लिखित परीक्षा के लिए सफल हुए उम्मीदवारों के रोल नंबर के साथ कट-ऑफ की पूरी जानकारी आधिकारिक रिजल्ट डॉक्यूमेंट में उपलब्ध है। जिन उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया है, उन्हें मुख्य लिखित परीक्षा के बारे में और जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना चाहिए। आयोग ने कहा है कि मुख्य लिखित परीक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी भर्ती विज्ञापन में उपलब्ध है।

HP High Court Vacancy 2026: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में 388 पदों निकली भर्ती, 10वीं पास भी कर सकते हैं अप्लाई

ट्रेन को टेम्पो बना दिया! परिवार को चढ़ाने के लिए क्रॉसिंग पर रुकी ट्रेन? वायरल वीडियो देखकर इंटरनेट यूजर्स ने रेलवे से मांगा जवाब

बिहार के पश्चिम चंपारण में रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है वहां दिखाई देने वाला एक ऐसा नजारा, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की होगी। जहां आमतौर पर लोग ट्रेन के गुजरने तक इंतजार करते हैं, वहीं इस घटना में एक परिवार अचानक ट्रेन की तरफ बढ़ता नजर आया। देखते ही देखते परिवार के चार सदस्य ट्रेन के करीब पहुंचे और उसमें सवार हो गए। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह पूरा घटनाक्रम काफी हैरान करने वाला था। किसी ने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।

वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं और इस असामान्य घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि पूरा मामला किसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ।

क्रॉसिंग पर इंतजार कर रहा था परिवार

बताया जा रहा है कि यह घटना 8 अगस्त को कुमारबाग रेलवे स्टेशन के पास हुई। वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग बंद दिखाई दे रही है और दूसरी तरफ कई वाहन ट्रेन के निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी दौरान चार लोगों का एक परिवार क्रॉसिंग के पास खड़ा नजर आता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शख्स ने दावा किया कि परिवार काफी देर से वहीं मौजूद था और करीब एक घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहा था।

फोन के बाद कुछ ऐसा हुआ कि सब चौंक गए

वीडियो में परिवार के एक सदस्य को फोन पर बातचीत करते हुए भी देखा गया। रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति को लगा कि शायद वह किसी परिचित से बात कर रहा था और उसी संपर्क के जरिए ट्रेन को वहां रुकवाने की व्यवस्था की गई। कुछ ही देर बाद मुजफ्फरनगर-नरकटियागंज DEMU ट्रेन वहां पहुंची। ट्रेन पहले धीमी हुई और फिर रेलवे क्रॉसिंग के पास पूरी तरह रुक गई। बस फिर क्या था, परिवार के चारों सदस्य तुरंत ट्रेन के एक कोच के दरवाजे की तरफ बढ़े और उसमें चढ़ गए।

गेटमैन भी देखता रह गया पूरा नजारा

वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग पर मौजूद गेटमैन भी इस पूरी घटना को देखते हुए दिखाई देता है। ट्रेन के रुकते ही परिवार के लोगों का तेजी से कोच में चढ़ना वहां मौजूद लोगों के लिए भी असामान्य दृश्य था। वीडियो बनाने वाले शख्स ने इसी बात को लेकर रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या इस तरह रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन रोककर यात्रियों को सवार करने की अनुमति है।

‘ट्रेन को टेंपो बना दिया’

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने घटना पर हैरानी जताई, तो कुछ ने पूरे मामले पर मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा, “ट्रेन को टेंपो बना दिया।” वहीं दूसरे ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि यहां कुछ भी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने सीधे लोको पायलट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। एक कमेंट में तो लोको पायलट को निलंबित करने तक की बात कही गई।

रेलवे से जांच की मांग

मामले को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए जांच की मांग की। एक यूजर ने रेल मंत्रालय से सवाल किया कि आखिर सड़क वाले रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन को यात्रियों के चढ़ने के लिए कैसे रोका गया। एक अन्य व्यक्ति ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह आम लोगों का समय बर्बाद करना उचित नहीं है।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल

फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्रेन वहां किस कारण रुकी थी और परिवार के सदस्यों को चढ़ने की अनुमति किस परिस्थिति में मिली। हालांकि, इस वीडियो ने रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के अचानक रुकने और यात्रियों के इस तरह सवार होने को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग अब पूरे मामले की जांच और स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं।

Video: घर से काम करना इतना भी आसान नहीं! महिला ने बताया WFH का वो नुकसान, जिसकी कोई बात नहीं करता

पटना में बाइक सवार को अचानक पुलिस ने रोका, वजह जान हैरान रह गए लोग, VIDEO वायरल

बिहार की राजधानी पटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। पटना में रात के समय बाइक से जा रहे एक युवक को पुलिस ने अचानक रोक लिया। पुलिस के अचानक रोकने पर युवक घबरा गया। आमतौर पर पुलिस ट्रैफिक नियम तोड़ने या दस्तावेजों की जांच के लिए किसी वाहन को रोकती है, लेकिन इस मामले में वजह कुछ अलग थी। पुलिस ने युवक को उसकी जैकेट में छिपे एक छोटे से पिल्ले की वजह से उसे रुकवाया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

पिल्ले की वजह से रोका

X पर शेयर किए गए एक वीडियो में एक युवक रात के समय बाइक चलाता नजर आया। उसने अपनी जैकेट के अंदर एक छोटे पपी को सेफ रखा हुआ था। सड़क लगभग खाली थी और दोनों बाइक से घूम रहे थे। इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे रुकने का इशारा किया। युवक को पहले लगा कि शायद पुलिस सामान्य ट्रैफिक जांच के लिए उसे रोक रही है। लेकिन पुलिस ने युवक को किसी नियम के उल्लंघन के लिए नहीं रोका था। पुलिसवालों की नजर उसकी जैकेट के अंदर बैठे छोटे पपी पर पड़ी थी।

वायरल हुआ वीडियो

एक पुलिसकर्मी ने प्यार से पपी को बाहर निकालकर सहलाया। शुरुआत में पपी थोड़ा घबराया हुआ था, लेकिन कुछ देर बाद वह सहज हो गया। पुलिसकर्मी ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए उसका हाल भी पूछा। पुलिसवाले ने पूछा, “ठीक है, अच्छे से हो ना?” वहां मौजूद दूसरे लोग राइडर और उसके पपी को देखकर मुस्कुराते नजर आए, जब पुलिसकर्मी उसे प्यार कर रहा था। इसके बाद पुलिसवालों ने युवक को जाने दिया और वह पपी को जैकेट के अंदर आराम से बैठाकर वहां से चला गया।

 

लोगों ने किया कमेंट

सोशल मीडिया ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आते ही यूजर्स का ध्यान इस पर गया और लोगों ने इस खूबसूरत पल की जमकर तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, “भाई सड़क पर सबसे प्यारे पैसेंजर को ले जा रहा था!” दूसरे यूजर ने लिखा, “उसने कितने प्यारे तरीके से पूछा, ‘ठीक है, अच्छे से होना।’” एक अन्य यूजर ने मजाक में कहा, “दिन का सबसे अच्छा ट्रैफिक स्टॉप। चालान के बजाय छोटे पैसेंजर के सिर पर प्यार से हाथ फेरा गया। कभी-कभी दयालुता का एक छोटा सा काम हर किसी का दिन बेहतर बना देता है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “सबसे प्यारे छोटे को-राइडर ने एक सामान्य ट्रैफिक स्टॉप को यादगार पल में बदल दिया।”

Independence Day 2026: भारत का अनोखा शहर! जहां 15 अगस्त की सुबह नहीं, 14 अगस्त की रात ही फहराया जाता है तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए गर्व और भावनाओं से जुड़ा खास दिन है। हर साल 15 अगस्त को देशभर में तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया जाता है। लेकिन बिहार के पूर्णिया शहर में इस मौके को मनाने का अंदाज बाकी जगहों से बिल्कुल अलग है। यहां लोग 15 अगस्त की सुबह का इंतजार नहीं करते, बल्कि 14 अगस्त की आधी रात को ही तिरंगा फहराते हैं। यह परंपरा आजादी मिलने के उस ऐतिहासिक पल से जुड़ी है, जब भारत ने रात 12 बजे के बाद स्वतंत्रता की घोषणा सुनी थी।

पूर्णिया का यह अनोखा जश्न दशकों पुरानी कहानी और स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं को आज भी जीवित रखता है। यही वजह है कि हर साल रात के समय झंडा चौक पर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और उस गौरवशाली पल को याद करते हैं।

आधी रात को मिली थी आजादी की खबर

यह परंपरा कोई नई शुरुआत नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें आजादी की उस ऐतिहासिक रात से जुड़ी हैं। 14 अगस्त 1947 की रात पूरा देश उस पल का इंतजार कर रहा था, जब भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त होने वाला था। ऑल इंडिया रेडियो पर स्वतंत्रता की घोषणा का प्रसारण हुआ और रात 12 बजकर 1 मिनट पर देश ने आजादी की खबर सुनी।

पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी ने रचा था इतिहास

जब पूरा देश उस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा था, तब पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने सुबह होने का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने दो साथियों रामरतन शाह और शमशुल हक के साथ रात में ही शहर के बीचों-बीच पहुंचकर तिरंगा फहराया। आज जिस जगह को ‘झंडा चौक’ के नाम से जाना जाता है, वहीं पहली बार उस रात आजादी का झंडा लहराया गया था।

तिरंगा फहरते ही गूंज उठा था पूरा इलाका

बताया जाता है कि जैसे ही झंडा ऊपर उठा, वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। उस पल आजादी सिर्फ रेडियो पर सुनाई देने वाली खबर नहीं रही, बल्कि लोगों के सामने एक ऐसा एहसास बन गई जिसे वे अपनी आंखों से देख और महसूस कर सकते थे।

आज भी कायम है 14 अगस्त की आधी रात वाली परंपरा

दशकों बाद भी पूर्णिया के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा को निभा रहे हैं। हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर लोग इकट्ठा होते हैं और उसी समय तिरंगा फहराते हैं, जब देश को पहली बार आजादी मिली थी। जब पूरा भारत 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं पूर्णिया कुछ घंटे पहले ही उस गौरवशाली पल को याद कर लेता है।

झंडा चौक बना आजादी की यादों का प्रतीक

आज झंडा चौक सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि इतिहास की उस रात का प्रतीक बन चुका है। ये जगह याद दिलाती है कि आजादी का जश्न केवल एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष और भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक एहसास है।

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