Silver vs Gold Prices: सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा गिरावट, शिखर से 50% टूटी; अब आगे कैसी रहेगी चाल?

Silver vs Gold Prices: सोना और चांदी दोनों पिछले कुछ महीनों से दबाव में हैं। हालांकि, हालिया गिरावट में चांदी को ज्यादा नुकसान हुआ है। चांदी में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 29 जनवरी को 121 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद यह करीब 50% टूट चुकी है। इसके मुकाबले सोना अपने शिखर से करीब 25% नीचे है। यानी हालिया गिरावट में चांदी पर सोने के मुकाबले दोगुना दबाव पड़ा है।

हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अलग है। पिछले एक साल में चांदी ने 23.80% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 3.81% रहा। पांच साल में चांदी 167.71% और सोना 138.77% चढ़ा। दस साल में भी चांदी ने 249.72% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 233.98% रहा।

Silver vs Gold: अलग-अलग अवधि में रिटर्न

अवधिचांदी का रिटर्नसोने का रिटर्नबेहतर प्रदर्शन
1 महीना-8.14%-3.83%सोना
6 महीने-20.14%-12.19%सोना
इस साल अब तक-16.53%-3.14%सोना
1 साल0.2380.0381चांदी
5 साल1.67711.3877चांदी
10 साल2.49722.3398चांदी

सोर्स: TradingView, 9 अक्टूबर तक। 

चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है। इसकी बड़ी वजह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग रहती है। इसलिए ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार धीमी होने की आशंका चांदी पर ज्यादा असर डालती है।

Augmont की चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनीशा चैनानी के मुताबिक, चांदी में पहले तेज तेजी आई थी। इसके बाद निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन बढ़ने से गिरावट तेज हुई। सोलर सेक्टर में चांदी की खपत घटने की आशंका भी कीमतों पर दबाव बना रही है।

सोने को केंद्रीय बैंकों का सहारा

सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सपोर्ट मिलता है। पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। चांदी को इस तरह का संस्थागत सहारा नहीं मिलता।

इसके अलावा, चांदी का बाजार सोने के मुकाबले छोटा है। इसलिए कम मात्रा में बिकवाली भी इसकी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है।

चांदी की कीमतों पर आगे क्या असर पड़ेगा?

J.P. Morgan ने चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 70 डॉलर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर सेक्टर में मांग घटने से चांदी की खपत प्रभावित हो सकती है। Silver Institute ने भी 2026 में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की मांग में करीब 10% गिरावट का अनुमान लगाया है।

अहर महंगाई, ऊंची बॉन्ड यील्ड और कमजोर औद्योगिक मांग का दबाव बना रहा, तो चांदी में और गिरावट मुमकिन है। वहीं, इन परिस्थितियों में सुधार आने पर चांदी में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।

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Silver Price Outlook: रिकॉर्ड ऊंचाई से 45% फिसली चांदी, क्या अगले साल इसमें फिर आएगी तूफानी तेजी?

Silver Price Outlook: चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 45 फीसदी गिर चुकी हैं। इस साल जनवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर का प्राइस 120 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था। अब यह गिरकर 60-61 डॉलर प्रति औंस रह गया है। भारत में एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स 4.28 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अब यह गिरकर 2.39-2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। सवाल है कि क्या चांदी की कीमतें फिर से 2027 में नई ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी?

इस साल जनवरी में चांदी की कीमत 121 डॉलर प्रति औंस थी

अगले साल चांदी की सप्लाई डिमांड से ज्यादा रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस वजह से रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने की जगह चांदी की कीमतों में कंसॉलिडेशन दिख सकता है। चांदी की कीमतों में पिछले करीब दो साल में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 1 जनवरी, 2025 को चांदी का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 डॉलर प्रति औंस था। जनवरी 2026 में भाव 121 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

इस साल जून में 57 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थी कीमत 

इस साल जून तक कीमत करीब 65 फीसदी गिरकर 57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थीं। अभी यह 60-61 डॉलर प्रति औंस पर चल रही हैं। भारत में भी इस साल जनवरी में चांदी का भाव 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अभी यह गिरकर 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा है। पिछले महीने चांदी 8 फीसदी से ज्यादा गिरी। इस साल यह करीब 14 फीसदी गिरी है।

अगले साल डिमांड  से ज्यादा रह सकती है सप्लाई

पिछले कुछ सालों में चांदी की सप्लाई उसकी डिमांड से कम थी। 2021 में चांदी की सप्लाई करीब 8 से 10 करोड़ औंस कम थी। 2025 में यह 4 करोड़ औंस रही। इस साल यह 4.6 करोड़ औंस कम रह सकती है। लेकिन, अगले साल चांदी की सप्लाई डिमांड से ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसकी वजह चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी है।

चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड घटने के संकेत

एक तरफ चांदी की डिमांड सुस्त पड़ने के संकेत हैं तो दूसरी तरफ इसकी सप्लाई बढ़ रही है। चीन में सोलर पावर सेक्टर की चांदी की डिमांड 30 फीसदी कम रह सकती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कॉस्ट घटाने के लिए मैन्युफैक्चरर्स अब पतले इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट्स, सिल्वर पेस्ट और कॉपर पर सिल्वर प्लेटिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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ब्रोकरेज फर्मों ने दिए कीमत के अनुमान 

जेपी मॉर्गन का मानना है कि अगले साल चांदी की कीमत 63.90 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। UBS ने चांदी की कीमतें 80 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। Citi का मानना है कि अगले साल चांदी 65-75 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है। HSBC ने इसकी कीमत 68 डॉलर प्रति औंस और डोएचे बैंक ने 70 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है।