डिजिटल भुगतान पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा यू टर्न: राहुल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में यूपीआई भुगतान पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगाने के आश्वासन के बावजूद मोदी सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई कारोबारी लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।

श्री खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा ‘नो फीस ऑन यूपीआई’ को बदलकर अब ‘दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर नो फीस’ कर दिया गया है। गगनचुंबी महंगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है और थोक महंगाई 10 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता पर ‘डिजिटल पेमेंट्स टैक्स’ लगाकर उसकी बची-खुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना रही है।

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कई खबरों के मुताबिक पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जाएगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि ये खबरें क्या सही हैं।

श्री गांधी ने कहा कि अब दो हजार रुपये से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाया जा सकता है। इन लेनदेन की संख्या भले ही केवल पांच प्रतिशत हो लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का करीब 65 प्रतिशत इन्हीं में है।

उन्होंने कहा “सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से-कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।

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ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद वे कहीं नहीं दिखे। अमित शाह लगभग पूरी तरह से ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भी बिजनेस फोरम की बैठक हो या बाद का आयोजन वे इससे दूर रहे या शामिल हुए भी तो यह प्रयास किया कि किसी तरह से उनके ऊपर फोकस नहीं बने।

ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन यानी समापन के दिन अमित शाह दिल्ली में नहीं थे। वे तीन दिन के दौरे पर मुंबई चले गए। वहां उन्होंने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन यानी 17 सितंबर के अवसर पर भाजपा पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान चला रही है। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए इस बार का अभियान खास है। इस अभियान में अमित शाह भी दूसरे किसी अन्य मंत्री की तरह शामिल हो रहे हैं और इससे भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, ब्रिक्स के लाइमलाइट से शाह के दूर रहने के पहले से ही इस बात की चर्चा हो रही है कि सरकार और पार्टी के कामकाज में वे पहले जैसे सक्रिय नहीं हैं।

Smartphone GST Cut: क्या सस्ते होने वाले हैं स्मार्टफोन? इंडस्ट्री की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

Smartphone GST Cut: स्मार्टफोन की कीमत लगातार बढ़ रही है, क्योंकि जरूरी पार्ट्स महंगे हो गए हैं। खासकर, AI की वजह से। ऐसे में मोबाइल फोन पर GST कम करने की मांग तेज हो गई है। इंडस्ट्री चाहती है कि GST को मौजूदा 18% से घटाकर 5% किया जाए। उसका कहना है कि इससे फोन सस्ते होंगे और बिक्री बढ़ सकती है।

GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

स्मार्टफोन कंपनियों की इंडस्ट्री बॉडी इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने यह मांग उठाई है। ICEA ने 2 और 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजे हैं।

एसोसिएशन चाहती है कि इस प्रस्ताव को अगली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाए। ICEA में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dixon, Bhagwati और Lava जैसी कंपनियां शामिल हैं। इंडस्ट्री का कहना है कि 18% GST से खासकर सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वालों पर बोझ बढ़ रहा है। इसलिए टैक्स घटाने की जरूरत है।

फोन पहले ही काफी महंगे हो चुके हैं

ICEA के मुताबिक, पिछले एक साल में स्मार्टफोन की कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। इसकी एक वजह मोबाइल मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत है।

एसोसिएशन का कहना है कि सितंबर 2025 से DRAM और NAND फ्लैश की कीमतें करीब चार गुना बढ़ चुकी हैं। AI डेटा सेंटर में मेमोरी चिप की मांग बढ़ने से दुनियाभर में इसकी सप्लाई पर दबाव आया है। इसका असर भारत में भी दिखा है। ICEA के मुताबिक, पिछले एक साल में एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमतें करीब 35-45% बढ़ी हैं।

₹10,000 से सस्ते फोन की सप्लाई घटी

सबसे ज्यादा दबाव सस्ते फोन के बाजार पर है। ICEA के मुताबिक, ₹10,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की सप्लाई अब 5% से भी कम रह गई है। कंपनियों के लिए मेमोरी चिप की बढ़ी पूरी लागत खुद उठाना मुश्किल है। इसलिए उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है। ऊपर से 18% GST भी लग रहा है।

ICEA के मुताबिक, फोन की प्री-टैक्स कीमत में ₹1 की बढ़ोतरी होती है तो 18% GST के हिसाब से टैक्स का बोझ भी 18 पैसे बढ़ जाता है।

पहली बार फोन खरीदने वालों पर ज्यादा असर

ICEA का कहना है कि महंगे फोन का असर सबसे ज्यादा पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले परिवारों के लिए भी फोन खरीदना मुश्किल हुआ है।

अगर GST 5% किया जाता है, तो फोन की शुरुआती कीमत कम हो सकती है। इससे लोग पुराने फोन बदलने के लिए भी प्रोत्साहित हो सकते हैं। साथ ही फीचर फोन और 2G यूजर्स के स्मार्टफोन पर आने की रफ्तार बढ़ सकती है।

पहले 12% था मोबाइल पर GST

मोबाइल फोन पर हमेशा से 18% GST नहीं था। जुलाई 2017 में GST लागू हुआ था। उस समय मोबाइल फोन को 12% GST स्लैब में रखा गया था। अप्रैल 2020 में GST बढ़ाकर 18% कर दिया गया। अब ICEA इसे सीधे 5% करने की मांग कर रहा है।

एसोसिएशन का कहना है कि यह दर GST लागू होने से पहले के टैक्स स्ट्रक्चर के ज्यादा करीब होगी। GST से पहले मोबाइल फोन पर 1% बेसिक एक्साइज ड्यूटी लगती थी। ज्यादातर राज्यों में VAT भी 5% या उससे कम था।

GST 18% से 5% घटने पर क्या असर होगा?

अगर GST 18% से घटकर 5% हो जाता है, तो फोन की कीमत में अच्छी खासी कमी आ सकती है। मसलन, ₹10,000 का फोन करीब ₹8,898 का हो सकता है। यानी करीब ₹1,102 की बचत। ₹20,000 का फोन करीब ₹17,797 और ₹30,000 का फोन करीब ₹26,695 का हो सकता है।

वहीं ₹50,000 का फोन करीब ₹44,492 और ₹1 लाख का फोन करीब ₹88,983 में मिल सकता है। यानी जितना महंगा फोन, उतनी ज्यादा बचत। हालांकि यह तभी होगा, जब कंपनियां GST कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को दें।

सरकार का रेवेन्यू भी पूरी तरह नहीं घटेगा?

ICEA ने सरकार के रेवेन्यू को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उसका कहना है कि GST घटने से टैक्स रेवेन्यू में शुरुआती कमी आ सकती है। लेकिन ज्यादा फोन बिकने पर इसकी कुछ भरपाई हो सकती है। इसके अलावा ग्रे मार्केट की खरीदारी का ज्यादा हिस्सा औपचारिक बाजार में आ सकता है। मोबाइल डेटा, सब्सक्रिप्शन और डिजिटल सर्विसेज से मिलने वाला GST भी बढ़ सकता है।

अब ICEA चाहती है कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार करे और इसे अगली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाए। अगर GST में कटौती पर सहमति बनती है, तो इसका सीधा फायदा स्मार्टफोन खरीदारों को मिल सकता है।

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Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ का नया पोस्टर हुआ रिलीज, राम-सीता का दिखा मनमोहक अंदाज

Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ के मेकर्स ने एक नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें रणबीर कपूर राम के रोल में और साई पल्लवी सीता के रोल में नजर आ रहे हैं। यह बहुत प्यारा है। नया पोस्टर उनके रिश्ते के सॉफ्ट पल को खूबसूरती से दिखा रहा है। सोशल मीडिया पर पोस्टर तेजी से रिलीज हो रहा है।

‘रामायणम्’ का पोस्टर रिलीज

पोस्टर में राम और सीता को सेफ्रॉन कपड़ों में नदी के किनारे बैठे हुए दिखाया गया है। ये पल उनके वनवास के समय का है। राम प्यार से सीता के बाल ठीक करते हुए दिख रहे हैं, जबकि सीता शरमाते हुए मुस्कुरा रही हैं। यह एक बहुत ही साधारण पल है, लेकिन यही बात इस पोस्टर को खास बनाती है। मेकर्स ने “सिया राम के मजबूत रिश्के” का जश्न मनाते हुए इसे शेयर किया।

‘रामायणम्’ का पहला गाना आज रिलीज होगा!

लेकिन सिर्फ पोस्टर ही नहीं आ रहा है। इसके रिलीज होने के बाद मेकर्स ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ लॉन्च करेंगे। इस गाने को एआर रहमान ने कंपोज किया है और इसके बोल डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इस गाने में भारतीय संगीत की दो सबसे बड़ी आवाजें – श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह – शामिल हैं।

मेकर्स ने बड़ी घोषणा की

मेकर्स ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि फिल्म का म्यूजिकल सफर आधिकारिक तौर पर गणेश चतुर्थी पर शुरू होगा, जिसमें ‘सिया राम’ पोस्टर का अनावरण किया जाएगा और उसके बाद पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज किया जाएगा। नोट में लिखा था, “हर शुभ शुरुआत एक प्रार्थना के साथ होती है। इस गणेश चतुर्थी पर ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर सुबह 7:30 बजे (IST) हमारे ‘सिया राम’ पोस्टर के अनावरण के साथ शुरू होगा। इसके तुरंत बाद हमारा पहला म्यूजिकल तोहफा ‘जय जय राम’ आएगा। संगीत एआर रहमान बोल- डॉ. कुमार विश्वास, गायक- श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह।” इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

‘रामायणम्’ के बारे में

नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘रामायणम्’ को इस महाकाव्य के दो-भाग वाले रूपांतरण के रूप में बनाया जा रहा है। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, साई पल्लवी सीता के रूप में हैं, यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं, रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं, और सनी देओल हनुमान के रूप में नजर आएंगे। इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

Gala Dinner: PM मोदी के गाला डिनर में नहीं शामिल हुए जिनपिंग, सामने आई ये बड़ी वजह

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हुए।

उनके अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी सम्मेलन के बाद वापस अपने देश रवाना हो जाने के कारण इस डिनर में मौजूद नहीं थे।

क्यों गायब रहे शी जिनपिंग? सामने आई यह वजह

चीनी राष्ट्रपति के डिनर में शामिल न होने का सटीक और आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शी जिनपिंग सम्मेलन के व्यस्त शेड्यूल के बाद आराम करने के लिए सीधे अपने होटल चले गए थे।

गौरतलब है कि शी जिनपिंग शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्रों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की थी।

पुतिन से लेकर कई दिग्गजों की रही मौजूदगी

शी जिनपिंग भले ही डिनर में मौजूद नहीं रहे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा आयोजित इस शाही भोज में शिरकत की। इस डिनर में केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए:

केंद्रीय मंत्री: अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान।

मुख्यमंत्री व नेता: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।

ये सभी केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री संसद भवन से दो बसों में सवार होकर डिनर के वेन्यू यानी भारत मंडपम पहुंचे थे।

डिनर के मेन्यू में क्या था खास?

विदेशी और देसी मेहमानों के लिए परोसे गए भोजन में भारतीय व्यंजनों का खास स्वाद देखने को मिला:

मेन कोर्स: खांडवी मिल-फॉय, खुंब गलोटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर-बीन्स पोरियल और मिलेट्स (बाजरा) पुलाव।

डेजर्ट (मीठा): पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई।

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योगी सरकार का दिव्यांगजनों को बड़ा तोहफा, 75 जिलों में लगेंगे सहायक उपकरण-कृत्रिम अंग वितरण शिविर

योगी सरकार का दिव्यांगजनों को बड़ा तोहफा, 75 जिलों में लगेंगे सहायक उपकरण-कृत्रिम अंग वितरण शिविर

Yogi adityanath in ayodhya

Yogi Govt Gift Disabled People: दिव्यांगजनों को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी सरकार लगातार कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए चरणबद्ध तरीके से वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

 

पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। 17 सितंबर को 41 जनपदों में तथा 2 अक्टूबर को 34 जनपदों में वितरण शिविर आयोजित होंगे। इसके बाद द्वितीय चरण 20 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तथा तृतीय चरण 3 दिसंबर से 15 दिसंबर 2026 तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में शिविर लगाए जाएंगे। 

 

17 सितंबर को आगरा, अलीगढ़, एटा, अयोध्या, सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, बदायूं, बांदा, देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, उन्नाव, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, जौनपुर, गोरखपुर, कन्नौज, प्रयागराज, शामली, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, बिजनौर, इटावा, हापुड़, ललितपुर, मथुरा, रामपुर, सीतापुर, कौशाम्बी, हरदोई और बुलन्दशहर वितरण शिविर अयोजित किये जाएंगे।

 

इसी तरह 2 अक्टूबर को लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, चन्दौली, बलरामपुर, चित्रकूट, अम्बेडकर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, जालौन, कानपुर देहात, खीरी, महाराजगंज, मऊ, पीलीभीत, रायबरेली, सम्भल, शाहजहांपुर, सोनभद्र, अमेठी, औरैया, बागपत, बाराबंकी, भदोही, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महोबा, मुजफ्फरनगर, बहराइच, बलिया, बस्ती एवं मैनपुरी में वितरण शिविर आयोजित होंगे।

 

विभाग ने सभी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारियों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार शिविरों के सफल आयोजन के लिए कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण, आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित किए जाते रहैं। सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग वितरण योजना इसी श्रृंखला की एक कड़ी है। योजना का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध ढंग से पहुंचाना है।

 

वितरण शिविरों के माध्यम से लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाना है। प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाना तथा उनकी गतिशीलता, कार्यक्षमता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

 

यूपी में NCR की तर्ज पर बनेगा SCR! लखनऊ समेत 6 जिलों का बेस मैप मंजूर, देखें डेवलपमेंट प्लान

UP SCR map: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास को अब शहर की सीमाओं से बाहर ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) ने मंगलवार (8 सितंबर) को अपनी पहली बड़ी बाधा पार कर ली। यूपी एससीआर ने इसकी रिव्यू कमेटी ने छह जिलों वाले इस क्षेत्र के लिए बेस मैप को मंजूरी दे दी। इसके बाद अब क्षेत्र के लिए GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

UP SCR का उद्देश्य लखनऊ के आसपास एक योजनाबद्ध और आपस में जुड़ा हुआ क्षेत्रीय विकास मॉडल तैयार करना है। इसमें राजधानी के साथ-साथ सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

ये 6 जिले होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जिले शामिल हैं। यह पूरा क्षेत्र करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। इसका उद्देश्य केवल लखनऊ का विस्तार करना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शहरी विकास, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाना है।

‘बेस मैप’ को मंजूरी देने का फैसला लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के ‘पारिजात सभागार’ में हुई समीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की। अब इस बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने का काम शुरू होगा।

30 बड़े प्रोजेक्ट पर होगा फोकस

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राज्य सरकार पहले ही UP SCR के लिए बड़े विकास कार्यों की पहचान कर चुकी है। मई में सरकार ने क्षेत्र के लिए प्रमुख परियोजनाओं की सूची तैयार कर संबंधित विभागों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी थीं।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई बैठक में परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जुड़े 29 प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 परियोजनाओं तक पहुंच गई है। LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक, इन परियोजनाओं का चयन क्षेत्र की भविष्य की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

सिर्फ लखनऊ नहीं, पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर जोर

UP SCR का सबसे बड़ा लक्ष्य ऐसा विकास नेटवर्क तैयार करना है जिसमें केवल लखनऊ पर निर्भरता न रहे। इसके लिए क्षेत्र के अलग-अलग जिलों को बेहतर सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित योजनाओं में स्टेट कैपिटल माला रीजनल रोड नेटवर्क, एलिवेटेड पेरीफेरल रोड और मौजूदा सड़कों के अपग्रेडेशन जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की भी योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और हर रोज बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को संभालना और छह जिलों के बीच आवागमन को आसान बनाना है।

इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब भी होंगे विकसित

रीजनल प्लान में आर्थिक विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स पार्क, फूड पार्क और आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। विशेष रूप से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के आसपास कॉरिडोर आधारित विकास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इससे उद्योगों, कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

2,239 जगहों पर हुई मैप की जमीनी जांच

UP SCR के बेस मैप को तैयार करने में सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों पर निर्भर नहीं किया गया। मैप की सटीकता जांचने के लिए छह जिलों में बड़े स्तर पर फील्ड वेरिफिकेशन यानी ग्राउंड-ट्रुथिंग की गई।

धिकारियों और कंसल्टेंट्स ने 2,239 स्थानों पर जाकर जमीनी स्थिति की जांच की।

सैटेलाइट इमेजरी और मैप में दर्ज जानकारी की तुलना वास्तविक स्थिति से की गई, ताकि मास्टर प्लान तैयार करते समय जमीन से जुड़ी सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध हो। इस पूरी प्रक्रिया में 22 विभागों और एजेंसियों से भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निकाय, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन से जुड़े विभाग शामिल रहे।

लखनऊ पर बढ़ता दबाव कम करने की कोशिश

UP SCR की सबसे बड़ी सोच यह है कि विकास का लाभ केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि आसपास के जिलों में भी रोजगार, कारोबार, शिक्षा, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं का विस्तार हो। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को अपने ही जिले या आसपास रोजगार और कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर अंतर-जिला कनेक्टिविटी होने से लोगों को नौकरी और बेहतर सुविधाओं के लिए लखनऊ की ओर पलायन करने की जरूरत भी कम हो सकती है।

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अब बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। इसके बाद इसकी अगली प्रक्रिया पूरी होने पर GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यही मास्टर प्लान आने वाले वर्षों में छह जिलों में सड़क, रेल, मेट्रो, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और शहरी विस्तार जैसी प्रोजेक्ट्स के लिए दिशा तय करेगा।

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

UP Textiles Conclave 2026

UP Textiles Conclave 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।

 

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।

 

प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।

यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी

सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।

 

पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

 

 

योगी सरकार ने प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच राहत और बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ तेज कर दिया है। बाढ़ प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था, मौके पर तैनात राहत टीमें और प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने के कारण प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं 19,496 प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। साथ ही बाढ़ से जनहानि शून्य है।

 

राहत एवं बचाव अभियान के तहत अब तक स्थापित बाढ़ चौकियों की संख्या 1,634 की जा चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। वहीं, राहत और बचाव कार्यों के लिए 2,161 नाव एवं मोटरबोट राहत अभियान में जुटी हुईं हैं।

 

योगी सरकार के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान भी जारी है। सोमवार को 6,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि अब तक 19,496 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा चुका है। प्रभावितों के लिए 1,315 शरणालय स्थापित किए गए हैं।

 

भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में भी प्रशासन पूरी सक्रियता दिखा रहा है। अब तक 1.11 लाख से अधिक बाढ़ राहत किट और 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.68 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.60 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए हैं।

 

बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में भी प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 1,490 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जिसके सापेक्ष कुल 1,272 मामलों में सहायता दी जा चुकी है।

 

प्रभावित जिले

अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

GST Council Meeting: 12 सितंबर की मीटिंग टली, ब्रिक्स की वजह से अब 7 अक्टूबर को होगी

GST Council Meeting: GST Council की 12 सितंबर को होने वाली बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को होगी। भारत में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसी वजह से GST Council की बैठक को आगे बढ़ाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह GST Council की 57वीं बैठक होगी। इससे पहले अधिकारियों की बैठक 5 और 6 अक्टूबर को होगी। GST Council की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करती हैं। इसमें राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं।

एक साल से ज्यादा समय बाद होगी बैठक

GST Council की पिछली यानी 56वीं बैठक 3-4 सितंबर 2025 को हुई थी। उस बैठक में GST की दरों और स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया था।

22 सितंबर 2025 से GST की नई व्यवस्था लागू हुई। इसमें मुख्य तौर पर 5% और 18% के दो स्लैब रखे गए। वहीं, बेहद महंगी और कुछ खास वस्तुओं के लिए 40% की दर रखी गई। इससे पहले GST में 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब थे।

बड़े कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन पर चर्चा

7 अक्टूबर की बैठक में उन कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने पर चर्चा हो सकती है, जिनकी हर महीने टैक्स क्रेडिट पास करने की राशि ₹2.5 लाख से ज्यादा है।

फिलहाल बड़े कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है। केंद्र और अलग-अलग राज्यों में इसके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे टैक्सपेयर्स के बीच उलझन की स्थिति बनती है।

GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की प्रक्रिया भी एजेंडे में

GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की प्रक्रिया में ऑटोमेशन और दूसरे बदलावों पर भी चर्चा हो सकती है। इसका मकसद प्रक्रिया को ज्यादा आसान और एक समान बनाना है।

छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए पहले ही आसान GST रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू की जा चुकी है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी।

इस योजना में डेटा के आधार पर GST सिस्टम जिन कारोबारियों को छोटा और कम जोखिम वाला मानता है, वे इसका विकल्प चुन सकते हैं। कारोबारी खुद भी आकलन कर सकते हैं कि उनकी मासिक आउटपुट टैक्स देनदारी ₹2.5 लाख से ज्यादा नहीं है।

GST के तहत 1.68 करोड़ कारोबार

देश में फिलहाल करीब 1.68 करोड़ कारोबार GST के तहत रजिस्टर्ड हैं। आगामी बैठक में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़े फैसलों पर खास नजर रहेगी।

*एजेंसी से इनपुट के साथ

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