AI के अलावा भी उभरते बाजारों में मौके, भारत को मिल सकता है फायदा: BNP Paribas

AI से जुड़े शेयरों में तेजी ने दुनियाभर के बाजारों का ध्यान खींचा है। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदल रही है। निवेश के मौके सिर्फ AI तक सीमित नहीं रह गए हैं। उभरते बाजारों में दूसरी कंपनियों में भी कमाई के अनुमान बेहतर हो रहे हैं। इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है।

यह कहना है BNP Paribas Asset Management के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट और इन्वेस्टमेंट इनसाइट्स सेंटर के को-हेड डेनियल मॉरिस (Daniel Morris) का।

इमर्जिंग मार्केट्स पर ओवरवेट BNP Paribas

मॉरिस के मुताबिक, BNP Paribas इमर्जिंग मार्केट्स यानी उभरते बाजारों को लेकर ओवरवेट है। यहां सिर्फ AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई के अनुमान बेहतर नहीं हो रहे हैं। नॉन-टेक कंपनियों के लिए भी तस्वीर सुधर रही है।

उनके मुताबिक, इससे उभरते बाजारों में निवेश के मौके ज्यादा संतुलित हो रहे हैं। भारत इस तस्वीर में नॉन-टेक हिस्से की तरफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि AI और नॉन-टेक दोनों में मौकों का यह संतुलन पहले से बेहतर है।

भारत को मिल सकता है फायदा

मॉरिस ने कहा कि अगर उभरते बाजारों में निवेश बढ़ता है तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

उनके मुताबिक, वैश्विक निवेश का माहौल भी बदल रहा है। पिछले साल निवेशकों का फोकस काफी हद तक अमेरिका पर था। अब तस्वीर ज्यादा संतुलित दिख रही है। अमेरिका के अलावा जापान और उभरते बाजारों में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं।

जापान में भी बदल रहा निवेश का गणित

जापान में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ रही है। इसका असर वहां के घरेलू निवेशकों के फैसलों पर पड़ सकता है। जापानी निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी के बजाय अपने देश के सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं। इससे येन कैरी ट्रेड में कुछ कमी आ सकती है। जापान का अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में लगा पैसा भी कुछ हद तक वापस घरेलू बाजार में जा सकता है।

हालांकि, मॉरिस को इससे अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में बड़ी उथल-पुथल की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, इसे बाजार में पैसे के एक हिस्से के दूसरी जगह जाने के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने इसे रीबैलेंसिंग बताया है।

मजबूत येन का जापानी शेयरों पर असर

मजबूत येन का जापानी शेयर बाजार पर मिला-जुला असर हो सकता है। कमजोर येन का फायदा जापानी कंपनियों को लंबे समय से मिलता रहा है।

खासकर निर्यात पर निर्भर कंपनियों को कमजोर येन से फायदा होता है। विदेशी निवेशकों को भी जापानी शेयरों में तेजी के साथ करेंसी से फायदा मिल सकता है। ऐसे में येन मजबूत होने पर जापानी कंपनियों और विदेशी निवेशकों के लिए यह फायदा कुछ कम हो सकता है।

Railway Stocks: ₹20804 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट मंजूर, इन रेलवे स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर, GIFT City का भी जिक्र, समझिए पूरी तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेंटर स्टैबलिश करने का ओपन ऑफर दिया है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर गईं वित्त मंत्री ने शिकागो में टॉप इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर के साथ एक हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में यह बात कही। उन्होंने ग्लोबल पार्टनर्स से अपील की कि वे भारत की विशाल प्रतिभा और अवसरों का फायदा उठाते हुए देश में कोडेवलपमेंट और कोप्रोडक्शन करें। इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रोडक्ट्स और कैपेसिटी को डेवलप करें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्री ने भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि, देश में चल रहे रिफॉर्म्स की स्पीड और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को लेकर डिटेल में बात की है।

भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, ग्लोबल प्लेटफॉर्म समझें

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह अपने विशाल पैमाने, विकास दर, इंजीनियरिंग प्रतिभा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पिछले एक दशक में हुए सुधारों से काफी व्यापक इंपैक्ट रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें बल्कि इसे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में देखें।

इस बैठक का मैं एजेंडा भारत में निर्माण करें — भारत के लिए और दुनिया के लिए (Manufacture in India — for India and for the world) था। इसमें एआई, डिजिटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और हाई एंड टेक्नोलॉजी में अवसरों पर चर्चा हुई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI में नए मौके

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक ने आबादी के स्तर पर कई बड़े और सफल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला बड़ा अवसर एआई, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई वैल्लूर बिजनेस तैयार करने में है। भारत में बनाए गए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तेजी से ग्लोबल इनोवेशन के सेंटर बनते जा रहे हैं।

गिफ्ट सिटी तेजी से बन रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

पीटीआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। जून 2026 तक गिफ्ट सिटी में 1250 से अधिक रजिस्टर्ड संस्थाएं काम कर रही हैं। सीतारमण ने बताया कि गिफ्ट सिटी बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, रीइंश्योरेंस, एयरक्राफ्ट एंड शिप लीजिंग, सस्टेनेबल फाइनेंस और दूसरी क्रॉस बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विसेज में काफी संभावनाएं देता है। उन्होंने ग्लोबल इंस्टीट्यूशन से आग्रह किया वो भी इसे भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एंट्री के गेटवे के रूप में इस्तेमाल करें।

ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में स्केल देता है, बल्कि एक लॉन्गटर्म इनवेस्टमेंट और ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म भी ऑफर करता है। उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (PLI) जैसी टारगेटेड नीतिगत पॉलिसी स्कीम के जरिए अब भारत का ध्यान सिर्फ पार्ट्स को असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और हाई एंड टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी है। क

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, एग्रीकल्चर और डिफेंस सेक्टर पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, रेलवे का मॉडर्नाइजेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और हाई-स्पीड रेल सहित इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी विस्तार हो रहा है। ये सब मिलकर लॉन्गटर्म इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) इनमें हिस्सेदारी लेने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को एक कमर्शियल प्लेटफॉर्म दे रहा है।

भारत का एग्रीकल्चर बेस, बढ़ती इनकम और बदलता कंजंशन पैटर्न फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘iDEX’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत ड्रोन, ऑटोनोमस सिस्टम और हाई एंड टेक्नोलॉजी में तेजी से कैपेसिटी बिल्डिंग कर रहा है।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके बाद न्यूयॉर्क का दौरा भी करेंगी।