‘जिसे सब समझते थे कचरा, उसी से कमा लिए करोड़ों’! इस कपल को पहाड़ों की सैर से आया था बिजनेस आइडिया

Plastic Waste Startup: दिल्ली में प्लास्टिक कचरा एक बड़ी समस्या है, लेकिन पति-पत्नी की एक जोड़ी ने इसी कचरे को अपने बिजनेस के लिए रॉ मटीरियल में बदल दिया। सोनल शुक्ला और वैभव वर्मा ने 2020 में Econscious की शुरुआत की। प्लास्टिक कचरे को सिर्फ कूड़ा समझने के बजाय, उन्होंने इसे काम की चीज़ोंचीजों में बदलने का एक मॉडल तैयार किया।

आज उनकी कंपनी प्लास्टिक कचरे से पार्क बेंच, डस्टबिन, प्लांटर और आम लोगों के इस्तेमाल की दूसरी चीजें बनाती है। इस कंपनी की शुरुआत महामारी के दौरान प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए की गई थी।

ट्रेक के दौरान आया आइडिया

पहाड़ी इलाकों में यात्रा करते समय, सोनल और वैभव ने देखा कि हर तरफ प्लास्टिक का कचरा फैला हुआ था। इस बात ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि कचरे को लैंडफिल में फेंकने के बजाय किसी काम की चीज़ में कैसे बदला जा सकता है। अपनी टेक्निकल जानकारी का इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने प्लास्टिक कचरे को रीसायकल करके नए प्रोडक्ट बनाने पर काम करना शुरू किया। बता दें कि सोनल शुक्ला और वैभव वर्मा, दोनों ने NIT कुरुक्षेत्र से M.Tech किया है।

घर और कंपनियों से आता है कच्चा माल

Econscious का मॉडल सिर्फ प्लास्टिक से सामान बनाने तक ही सीमित नहीं है। कंपनी प्लास्टिक कचरे को उसके स्रोत से इकट्ठा करने का काम भी करती है और दिल्ली-NCR इलाके में घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा उठाने की सर्विस देती है। इसके अलावा, यह कई कंपनियों और संगठनों के साथ मिलकर काम करती है।

इकट्ठा किए गए प्लास्टिक को प्रोसेस करके अलग-अलग डिजाइन वाले प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। जहां आम तौर पर बिजनेस को नया कच्चा माल खरीदना पड़ता है, वहीं यहां प्लास्टिक जिसे आमतौर पर कचरा माना जाता है, प्रोडक्ट बनाने का आधार बनता है। यही बात इस मॉडल को सर्कुलर इकॉनमी से जोड़ती है।

प्लास्टिक से बन रही बेंच और डस्टबिन

कंपनी के प्रोडक्ट्स में बेंच, डस्टबिन, प्लांटर्स और दूसरी ऐसी चीजें शामिल हैं जिन्हें पार्क और सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। Econscious ने P&G, जिलेट, नेस्ले, ITC, बिसलेरी और HCL फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। कंपनी के मुताबिक, बिसलेरी की बोतलों के ढक्कनों का इस्तेमाल करके रीसाइकल किए गए प्लास्टिक की बेंच बनाई गई हैं। साथ ही, HCL फाउंडेशन के लिए नोएडा में कई जगहों पर बेंच बनाकर लगाई भी गई हैं।

लाखों किलो प्लास्टिक को बनाया उपयोगी

इस बिजनेस का सबसे अहम पहलू इससे होने वाली कमाई है। सोनल शुक्ला ने बताया कि Econscious ने अब तक लगभग 3,50,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को रीसायकल किया है। साथ ही, कंपनी ने अपनी शुरुआत से अब तक ₹1 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

सोनल के अनुसार, कंपनी की कमाई सिर्फ रीसायकल किए गए प्रोडक्ट्स को बेचने से ही नहीं होती, प्लास्टिक कचरा मैनेजमेंट, उसे इकट्ठा करना और अलग-अलग ऑर्गनाइजेशन के लिए कस्टमाइज़्ड प्रोजेक्ट्स भी इस बिजनेस का हिस्सा हैं।

कमाई का मॉडल सिर्फ एक प्रोडक्ट बेचने तक सीमित नहीं है। यह प्रोसेस कचरा इकट्ठा करने से शुरू होता है, फिर प्रोसेसिंग होती है, और आखिर में रीसायकल किए गए मटीरियल का इस्तेमाल करके ग्राहकों की ज़रूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं। इस पूरे प्रोसेस के दौरान अलग-अलग स्टेज पर वैल्यू क्रिएट होती है।

रिपोर्ट- शुभांगी तिवारी 

इन पहाड़ों में मिलेगा ऐसा सुकून, शिमला-मसूरी की भीड़ भी भूल जाएंगे!

उत्तर भारत के पहाड़ों में छुट्टियां बिताने का नाम आते ही सबसे पहले शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसी जगहों का ख्याल आता है। इन जगहों की खूबसूरती देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन छुट्टियों के समय यहां बढ़ती भीड़, ट्रैफिक और महंगे होटल कई बार सफर का मजा थोड़ा कम कर देते हैं। ऐसे में यदि आप शोर-शराबे से दूर किसी शांत पहाड़ी जगह पर कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, तो कुछ कम मशहूर जगहों की ट्रिप कर सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई ऐसे छोटे-छोटे पहाड़ी ठिकाने हैं, जहां प्रकृति की खूबसूरती के साथ आपको शांत माहौल भी मिलेगा। यहां देवदार और चीड़ के जंगल, ठंडी हवा, पहाड़ों के सुंदर नजारे और आराम से समय बिताने का मौका मिलता है।

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शोजा, हिमाचल प्रदेश

जिभी के पास बसा शोजा एक शांत और खूबसूरत पहाड़ी गांव है। यहां चारों तरफ घने जंगल, लकड़ी के बने घर और सुंदर पहाड़ी रास्ते देखने को मिलते हैं। यहां बड़े टूरिस्ट सेंटर जैसी भीड़ नहीं होती, इसलिए आप आराम से घूमने का मजा ले सकते हैं। शोजा में रहकर आप शांत माहौल का मजा ले सकते हैं और साथ ही जिभी के कैफे व आसपास की मशहूर जगहों पर भी घूम सकते हैं।

 

 

 

मशोबरा, हिमाचल प्रदेश

शिमला से करीब 11 किलोमीटर दूर मशोबरा उन लोगों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है, जो शिमला के पास रहकर भी भीड़ से बचना चाहते हैं। यहां देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरे रास्ते और शांत माहौल आपको काफी सुकून देंगे। यहां पुराने समय की खूबसूरत बिल्डिंग और आरामदायक रहने की जगहें भी मिलती हैं। पहाड़ों में शांति से समय बिताने के लिए मशोबरा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

 

 

 

पंगोट, उत्तराखंड

नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर पंगोट एक छोटा और शांत पहाड़ी गांव है। यहां आपको भीड़भाड़ वाले मार्केट की जगह हरे-भरे जंगल और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलेंगे। यह जगह पक्षी देखने के शौकीन लोगों को पसंद आती है। यहां जंगल की पगडंडियों पर घूमने, पहाड़ों को देखने और शांत होमस्टे में रहने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है। प्रकृति के करीब कुछ दिन बिताने के लिए पंगोट अच्छा डेस्टिनेशन है।

लैंडोर, उत्तराखंड

मसूरी से करीब 5 किलोमीटर दूर लैंडोर एक शांत और खूबसूरत जगह है। यहां पुराने घर, चीड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं। यहां छोटे कैफे और शांत घूमने की जगहें भी हैं। यदि आप मसूरी घूमना चाहते हैं, लेकिन वहां की ज्यादा भीड़ से बचना चाहते हैं, तो लैंडोर में ठहरना बेहतर साबित हो सकता है।

 

 

 

कनाताल, उत्तराखंड

मसूरी और धनौल्टी के पास कनाताल एक शांत पहाड़ी जगह है। यहां चारों तरफ हरियाली, जंगल और सेब के पेड़ दिखाई देते हैं। मौसम साफ होने पर दूर से हिमालय की बर्फीली चोटियों के नजारे भी देखे जा सकते हैं। यहां आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, नेचर के बीच घूम सकते हैं या बस शांत माहौल में आराम कर सकते हैं। मसूरी और धनौल्टी की भीड़ से दूर कुछ दिन बिताने के लिए कनाताल अच्छा ऑप्शन है।

 

 

 

एक ट्रिप में दो तरह का मजा

इन शांत पहाड़ी जगहों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये कई मशहूर हिल स्टेशनों के पास ही हैं। इसलिए आपको घूमने के लिए किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। दिन में आप शिमला, मसूरी, नैनीताल या जिभी जैसी पॉपुलर डेस्टिनेशन की सैर कर सकते हैं और शाम को भीड़ से दूर अपने शांत डेस्टिनेशन पर लौट सकते हैं। इस तरह एक ही ट्रिप में आपको मशहूर जगहों और पहाड़ों का सुकून एक साथ मिल जाता है।