₹2 लाख/वर्ग मीटर जमीन, 12-20 हजार/वर्ग फीट बिक रहे फ्लैट? समझिए ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी के पास प्रॉपर्टी को क्यों लग रहे पंख

ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी और उसके आसपास का क्षेत्र आने वाले समय में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में आकार लेता दिख रहा है। रेलवे स्टेशन, इंटरनेशनल बस अड्डा और लगभग 600 एकड़ में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वजह से इस इलाके के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। बुनियादी ढांचे के इस बड़े विस्तार से आसपास के सेक्टरों में जमीन, आवासीय फ्लैट और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है।

बोड़ाकी बनेगा NCR का प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब

दादरी के पास बोड़ाकी में स्थित मौजूदा रेलवे हॉल्ट को एक आधुनिक मल्टी-मॉडल रेलवे टर्मिनल (ग्रेटर नोएडा टर्मिनल) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तैयार होने से गौतमबुद्ध नगर के लाखों यात्रियों की ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। प्रस्तावित स्टेशन में 12 प्लेटफॉर्म होंगे, साथ ही बड़ी संख्या में यार्ड और लूप लाइनें तैयार की जाएंगी। दावों के मुताबिक यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और रखरखाव की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। भविष्य में पूर्वांचल की दिशा में जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन यहां से जोड़े जाने की संभावना है।

कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए इस टर्मिनल को ‘नमो भारत’ रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, बोड़ाकी में लगभग 14 एकड़ क्षेत्र में एक आधुनिक बस अड्डा, वर्कशॉप और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की योजना है। स्टेशन परिसर में होटल, प्रमुख फूड चेन और कमर्शियल स्पेस भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र सिर्फ एक स्टेशन न रहकर बड़ा ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब बनेगा।

600 एकड़ में फैलेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब

SVG Realty के चेयरमैन व डायरेक्टर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट अंकुर मित्तल बताते हैं कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लोकल ट्रेन और लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी जैसी इंटिग्रेटेड सुविधाएं शामिल होंगी।

इन सुविधाओं के विकसित होने से केवल आम यात्रियों को ही सहूलियत नहीं मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार, बड़े कारोबार और कमर्शियल गतिविधियों के मौके पैदा होंगे। इसी वजह से बोड़ाकी और इसके आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।

जमीन के रेट: डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन की उपलब्धता और सेक्टरों के विकास की स्थिति के हिसाब से रेट्स में अंतर देखा जा रहा है। विकसित सेक्टर की बात करें तो अथॉरिटी के प्लॉटों की कीमतें लगभग 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई हैं। सेमी-डेवलप सेक्टर में भी जमीन के दाम लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास देखे जा रहे हैं। किसानों के सेमी-कमर्शियल प्लॉट की कीमत 1 लाख रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास बताई जा रही है।

बालाजी होम्स के रियल एस्टेट एक्सपर्ट संजय कुमार के मुताबिक, बोड़ाकी जंक्शन के पास स्थित इटा, ओमिक्रॉन और म्यू प्रमुख सेक्टरों में शामिल हैं, जहां विकास के काम तेजी से चल रहे हैं। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे और रेलवे जंक्शन के कारण इन सेक्टरों में प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बताई जा रही हैं।

12 हजार से 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट पहुंचे फ्लैट्स के दाम

टाटा, गोदरेज और हीरो रियल्टी जैसे देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स इस क्षेत्र में अपने प्रोजेक्ट्स ला चुके हैं। नए लॉन्च हो रहे आवासीय प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों के रेट 12 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से शुरू होकर लग्जरी सेगमेंट में 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच रहे हैं। कामकाजी वर्ग और निवेशकों के बीच स्टूडियो अपार्टमेंट्स की मांग में भी इजाफा हुआ है। कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में 500 से 600 वर्ग फीट के स्टूडियो अपार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी दरें 10 हजार रुपये से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच हैं।

अल्फा से बोड़ाकी तक कमर्शियल कॉरिडोर में तेजी

अल्फा से बोड़ाकी के बीच करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कमर्शियल गतिविधियों की मांग काफी बढ़ी है। ग्राउंड फ्लोर रिटेल स्पेस 30,000 रुपये से 35,000 रुपये प्रति वर्ग फीट, अपर फ्लोर कमर्शियल स्पेस करीब 20,000 रुपये प्रति वर्ग फीट और ऑफिस स्पेस 12,000 रुपये से 13,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक जा रहे हैं।

रेलवे कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, लॉजिस्टिक्स हब और बस अड्डे जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं के चलते बोड़ाकी और आसपास के सेक्टरों का रियल एस्टेट मार्केट इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि किसी भी प्रॉपर्टी का अंतिम मूल्य उसकी सटीक लोकेशन, प्रोजेक्ट की स्थिति और मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है।

(ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर बनेगा ‘गेटवे टू नोएडा’! ₹4526 करोड़ की लागत से बनेगा कन्वेंशन और हैबिटेट सेंटर

नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) सेक्टर 94 में ओखला बर्ड सेंचुरी के पास करीब 25 एकड़ जमीन पर एक बड़ा प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसमें कन्वेंशन और हैबिटेट सेंटर के साथ कई तरह की सुविधाओं वाला मिक्स्ड-यूज कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। करीब 4,526 करोड़ रुपये की लागत वाले इस बड़े प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए प्राइवेट कंपनी का चयन किया जाएगा। इसके लिए अथॉरिटी ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं।

25 एकड़ में बनेगा

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के पास 25 एकड़ में यह बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। इसे नोएडा के प्रमुख कमर्शियल और कल्चरल हब के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर, दुकानें, ऑफिस, होटल, सर्विस्ड अपार्टमेंट और रिहायशी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। इसे ‘नोएडा का गेटवे’ के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। ये जगह कालिंदी कुंज के रास्ते साउथ दिल्ली से नोएडा आने वाले लोगों के लिए प्रमुख प्रवेश मार्ग पर है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को ‘गेटवे टू नोएडा’ नाम दिया गया है।

30 महीने में काम होगा पूरा

नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर एसपी सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें आधुनिक कन्वेंशन सेंटर और प्रदर्शनी के लिए जगह के साथ रिटेल दुकानें, ऑफिस, होटल, सर्विस्ड अपार्टमेंट और रिहायशी क्षेत्र भी बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट मिलने के बाद कन्वेंशन सेंटर का निर्माण 30 महीने के भीतर पूरा करना होगा। वहीं, पूरे प्रोजेक्ट को सात साल के अंदर तैयार कर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। डेवलपर के चयन के बाद काम जल्द शुरू किया जा सकता है, क्योंकि प्रोजेक्ट का लेआउट और बिल्डिंग प्लान पहले ही मंजूर किए जा चुके हैं।

जानें इस कन्वेंशन सेंटर के बारे में

RFP के अनुसार, प्रस्तावित कन्वेंशन सेंटर करीब 18,762 वर्ग मीटर में बनाया जाएगा। वहीं, हैबिटैट सेंटर और होटल के लिए 29,507-29,507 वर्ग मीटर जगह तय की गई है। प्रोजेक्ट में करीब 65,437 वर्ग मीटर का रिटेल स्पेस और ऑफिस व सर्विस अपार्टमेंट के लिए 1.10 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र होगा। रिहायशी हिस्से के लिए 1.75 लाख वर्ग मीटर जगह रखी गई है, हालांकि इसका हिस्सा कुल बिल्ट-अप एरिया के 40 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा। यहां करीब 7,180 कारों की पार्किंग की सुविधा भी बनाई जाएगी।

PPP मॉडल के तहत नोएडा अथॉरिटी और चुनी गई निजी कंपनी मिलकर एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) बनाएंगे। निजी डेवलपर प्रोजेक्ट की डिजाइन, पैसा जुटाने, निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। अथॉरिटी के अनुमान के अनुसार, प्रोजेक्ट से सात साल बाद करीब 6,890 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। यह आंकड़ा 10 साल में बढ़कर 10,324 करोड़ और 15 साल में 17,292 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह प्रोजेक्ट नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और ओखला बर्ड सैंक्चुअरी मेट्रो स्टेशन के पास होने के कारण काफी अहम माना जा रहा है।