24-कोच वंदे भारत स्लीपर का डिजाइन फाइनल होने की डेट आई सामने, जानिए कब पटरी पर दौड़ेगा स्लीपर वर्जन

Vande Bharat Sleeper Train: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। भारत की वंदे भारत ट्रेन को तैयार करने वाले सुधांशु मणि ने भी इस पहल का स्वागत किया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने चार साल से ज्यादा की देरी के बाद इस ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल करने का लक्ष्य रखा है।

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने चार साल से भी पहले 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लिए तकनीकी जानकारी जारी की थी। अब ICF ने बताया है कि ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल कर लिया जाएगा। इसका पहला प्रोटोटाइप मई या जून 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।

फिलहाल, 16 कोच वाली दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही हैं। इन ट्रेनों को यात्रियों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेंगी यात्रियों की सुविधा वाली कई खूबियां

बता दें कि यह एक आधुनिक ट्रेन है, जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए कई खूबियां हैं। इनमें सेमी-हाई स्पीड, बेहतर कुशनिंग वाली आरामदायक बर्थ, आसानी से आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टिब्यूल, बेहतरीन सस्पेंशन और कम शोर के साथ आरामदायक सफर, और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए डिसइंफेक्टेंट तकनीक शामिल हैं।

मणि ने कहा, “ICF का नवंबर 2026 तक 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का डिजाइन फाइनल करने और 2027 के मध्य तक इसका प्रोटोटाइप तैयार करने का प्लान एक स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है। देर से ही सही, लेकिन यह समय-सीमा बहुत अहम है।”

उन्होंने कहा, “इस समय-सीमा का पालन करने से ICF को अपनी मुख्य डिजाइन और निर्माण क्षमताओं का पूरा उपयोग करने, अधिकतम क्षमता वाली ट्रेनों के जरिए सीमित ट्रैक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को रात के सफर का वह प्रीमियम अनुभव देने में मदद मिलेगी, जिसकी वे उम्मीद करते हैं।”

2018 में ही महसूस होने लगी थी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जरूरत: मणि

मणि ने कहा कि 2018 में शुरुआत से ही यह स्पष्ट था कि आगे चलकर वंदे भारत प्लेटफॉर्म के लिए एक स्लीपर वेरिएंट की जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने कहा, “दिन के समय चलने वाली चेयर-कार सेवाओं का बाजार एक स्तर पर आकर रुकने ही वाला था, जिससे रात भर चलने वाली ट्रेनें एक जरूरी जरूरत बन गईं। आज की स्थिति से यह बात साबित भी होती है। वंदे भारत की दिन की सेवाओं में से 30 प्रतिशत तक में यात्रियों की संख्या काफी कम रहती है।” उन्होंने कोच बनाने के क्षेत्र में ICF की ऐतिहासिक विरासत की भी तारीफ की।

देरी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में ICF ने 2019 के आखिर तक एक स्लीपर प्रोटोटाइप तैयार करने की योजना बनाई थी, लेकिन वंदे भारत प्रोजेक्ट में लगभग चार साल के ठहराव के कारण यह समय-सीमा पटरी से उतर गई।

वंदे भारत ट्रेन के कोच घटाकर 8 करने पड़े, देरी पर मणि ने उठाए सवाल

मणि ने तर्क दिया कि देरी के कारण एक ऐसा समझौता करना पड़ा जो आदर्श नहीं था: कुछ रूटों पर 16 कोच वाली सामान्य चेयर-कार ट्रेनों को घटाकर 8 कोच वाली ट्रेन सेट कर दिए गए। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि सरकार द्वारा बताए गए उम्मीद भरे आंकड़ों को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा, “चूंकि भारतीय रेलवे के रूटों पर बहुत अधिक भीड़ रहती है और ये काफी महंगे संसाधन हैं, इसलिए लंबी ट्रेनों के जरिए लाइन की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना एक अहम प्राथमिकता होनी चाहिए।”

उन्होंने बताया कि विकास की गति बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने निजी क्षेत्र का रुख किया। इसके तहत ‘किनेट रेलवे सॉल्यूशंस’ (रेल विकास निगम लिमिटेड और रूस की TMH का एक संयुक्त उद्यम) को 120 स्लीपर ट्रेनों का ठेका दिया गया, और ‘टाटागढ़’ तथा ‘भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड’ (BHEL) के एक समूह को 80 और रेक (ट्रेन सेट) बनाने का ठेका मिला। लेकिन, अनुबंध और डिजाइन से जुड़ी मंजूरियों में देरी के कारण इन निजी परियोजनाओं में विलंब हुआ। ऐसे में, काम को जल्द शुरू करने के लिए रेलवे ने 10 स्लीपर ट्रेन सेट का एक शुरुआती ऑर्डर दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह ऑर्डर ICF को नहीं, बल्कि ‘भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड’ (BEML) को दिया गया।

मणि ने कहा, “देश अब ‘ओवरनाइट’ (रात भर चलने वाली) वंदे भारत सेवाओं के एक नए युग की शुरुआत देख रहा है। BEML द्वारा बनाई गई एक ट्रेन ने कमर्शियल स्लीपर सेवा की सफल शुरुआत की है, जो हावड़ा और कामाख्या के बीच एक महत्वपूर्ण लंबी दूरी के रूट पर चल रही है।”

उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, ICF की योजना – जिसके तहत नवंबर 2026 तक डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाना है और 2027 के मध्य तक 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया जाना है – एक स्वागत योग्य और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द आ रही हैं 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें! अब रात का सफर होगा और आरामदायक

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे और ज्यादा वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करके अपने प्रीमियम लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लॉन्च के बाद से अभी तक वंदे भारत एक्सप्रेस ज्यादातर दिन में चलने वाली चेयर कार ट्रेन के तौर पर संचालित होती रही है, लेकिन लंबे समय से यात्री रात के सफर के लिए इसके स्लीपर वर्जन की मांग कर रहे थे। वहीं, अब यात्रियों की इस मांग को पूरा करने के लिए चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 24 कोच होंगे। उम्मीद है कि नए ट्रेनसेट से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ेगी और पूरे भारत में लंबी दूरी के और रूट पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने में मदद मिलेगी।

यह कदम भारतीय रेलवे की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसका मकसद रात भर और इंटरसिटी यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, ज्यादा आरामदायक और आधुनिक यात्रा के विकल्प देना है। इस प्रस्तावित विस्तार के साथ, उम्मीद है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें देश के प्रीमियम रेल यात्रा सेगमेंट में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

ICF के जनरल मैनेजर मनीष अग्रवाल के अनुसार, देश में बनी 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग पूरी हो गई हैं। इन डिजाइनों में कोच का स्ट्रक्चर, कोच को जोड़ने वाले सिस्टम और उनके नीचे लगाए जाने वाले उपकरण शामिल हैं।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के बारे में मुख्य बातें

  • 50 ट्रेनसेट की योजना: ICF चेन्नई 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी।
  • हर ट्रेन में 24 कोच: आने वाले ट्रेनसेट में 24 कोच होंगे, जबकि अभी चल रही स्लीपर ट्रेन में 16 कोच हैं।
  • ज्यादा यात्री क्षमता: उम्मीद है कि 24 कोच वाली ट्रेन में 16 कोच वाली ट्रेन के मुकाबले लगभग 1.5 गुना ज्यादा यात्री यात्रा कर सकेंगे।
  • प्रोडक्शन के लिए डिजाइन तैयार: कोच के स्ट्रक्चर, कोच कनेक्शन और अंडरफ्रेम इक्विपमेंट से जुड़े डिजाइन पूरे हो चुके हैं।
  • और रूटों पर चलने की उम्मीद: अतिरिक्त ट्रेनसेट से रेलवे को लंबी दूरी के और रूटों पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने पर विचार करने में मदद मिलेगी।
  • लंबी यात्राओं के लिए डिजाइन: स्लीपर सुविधा का मकसद रात भर और लंबी दूरी की यात्रा के लिए तेज़ और ज्यादा आरामदायक विकल्प देना है।
  • कोच की संख्या अभी तय नहीं: भारतीय रेलवे ने अभी तक कोच की अंतिम संख्या के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, हालांकि खबरों के मुताबिक 24-कोच वाली ट्रेनसेट में 17 AC 3-टियर कोच, पांच AC 2-टियर कोच, एक AC फर्स्ट क्लास कोच और एक पैंट्री कार हो सकती है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी

अभी देश में चलने वाली वंदे भारत स्लीपर सर्विस हावड़ा और कामाख्या के बीच चलती है। मौजूदा ट्रेन में 11 थर्ड AC कोच, चार सेकंड AC कोच और एक फर्स्ट AC कोच है।

24 कोच वाली प्रस्तावित ट्रेनों से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, रेलवे ने अभी तक इन नई ट्रेनों में कोच के अंतिम कॉम्बिनेशन की घोषणा नहीं की है।

बता दें कि यह कदम लंबी दूरी के यात्रियों के लिए तेज और ज्यादा आरामदायक ट्रेनें उपलब्ध कराने की रेलवे की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

अमृत ​​भारत एक्सप्रेस 3.0 के बारे में भी अपडेट आया है

ICF ने अगली पीढ़ी की अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के बारे में भी जानकारी दी है। उम्मीद है कि अमृत भारत 3.0 में AC, जनरल और स्लीपर क्लास के कोच होंगे। इससे यात्रियों को बेहतर आराम के साथ यात्रा का एक और सस्ता विकल्प मिलेगा।

हालांकि, अभी चल रही अमृत भारत ट्रेनों में मुख्य रूप से जनरल और स्लीपर कोच हैं। अगली पीढ़ी की ट्रेनों में AC कोच जोड़ने से और भी ज्यादा यात्री इन ट्रेनों का फायदा उठा सकेंगे। ICF में हो रही ताजा गतिविधियों से पता चलता है कि वंदे भारत स्लीपर और अगली पीढ़ी की अमृत भारत ट्रेनों के प्रोडक्शन की प्लानिंग आगे बढ़ रही है।

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