Greater Noida Family Deaths Case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के एक गांव में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चों की कथित जान देने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में जांच के दौरान शुरुआती तौर पर चाय और नूडल्स खाने के बाद फूड पॉइजनिंग से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद पुलिस अब संपत्ति विवाद और मौत को गले लगाने के लिए उकसाने के एंगल से जांच कर रही है। इस मामले में मृतक की दो बहनों और उनके जीजा को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस जांच में पता चला है कि मृतक महेश जिस मकान में पत्नी और बच्चों सहित रहता था, उसे उसकी ही सगी बहन सुनीता ने मां से अपने नाम करवा लिया था। इसे लेकर महेश हमेशा टेंशन में रहता था। उसके मोबाइल से एक ऑडियो मिली है। इसमें मौत का जिम्मेदार बहन सुनीता, बहनोई शेखर, छोटी बहन सपना को बताया है। शिकायत के आधार पर ग्रेटर नोएडा पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से संपत्ति विवाद से जूझ रहा था। इसी विवाद को पांचों की मौत की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
मौत से पहले महेश ने वॉयस नोट में खोला राज!
पुलिस के मुताबिक, मृतक महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन में एक वॉयस नोट रिकॉर्ड किया था। इसमें उसने परिवार की स्थिति के लिए अपनी दोनों बहनों और जीजा को जिम्मेदार ठहराया है। इस रिकॉर्डिंग को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। रबूपुरा के थाना प्रभारी (SHO) सुजीत उपाध्याय ने पीटीआई को बताया कि मृतक व्यक्ति की दो बहनों और एक जीजा को एक रिश्तेदार की ओर से मिली शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, 37 वर्षीय महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन पर एक ‘वॉयस नोट’ रिकॉर्ड किया था, जिसमें कथित तौर पर तीनों आरोपियों को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि संपत्ति के विवाद के कारण यह घटना हुई होगी। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम में जहर दिए जाने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद विसरा के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का सटीक कारण पता चल सकेगा। महेश, उनकी पत्नी ललिता (35), बेटी मिष्टी (7) और बेटे लड्डू (11) व साक्षात (3) के शव शनिवार सुबह रबूपुरा के पास नगला श्री पदम गांव स्थित उनके घर से बरामद हुए थे। शुरुआत में मौत का कारण खाद्य विषाक्तता माना जा रहा था क्योंकि खबरों से पता चला था कि परिवार के सदस्यों ने मौत से पहले ‘नूडल्स’ खाए थे। फिलहाल, मामले में अन्य एंगल से भी जांच चल रही है।
शिकायत के आधार पर तीन रिश्तेदार गिरफ्तार
पुलिस ने महेश की दो बहनों सुनीता और सपना तथा उनके जीजा शेखर को गिरफ्तार किया है। मृतकों में से एक के भाई की शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों रिश्तेदार महेश और उसके परिवार को परेशान कर रहे थे। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित उत्पीड़न और संपत्ति विवाद का पांचों की मौत से क्या संबंध था।
विसरा रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद डॉक्टरों ने पांचों मृतकों के विसरा सैंपल सुरक्षित रखे थे। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस आत्महत्या की आशंका, जहर दिए जाने की संभावना, संपत्ति विवाद और वॉयस नोट में लगाए गए आरोपों सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। ऐसे में विसरा रिपोर्ट इस मामले में अहम साबित हो सकती है।
Supreme Court Internet Rights: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना और उस तक पहुंच रखना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को भी यह अधिकार हासिल है। उन्हें पूरी तरह से इंटरनेट इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट के उपयोग से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि उनमें ऐसी कोई विवेक-बुद्धि नहीं है जिसकी रक्षा की जानी चाहिए, या उनके पास अभिव्यक्ति की ऐसी कोई स्वतंत्रता नहीं है जिसे वे व्यक्त कर सकें।
पीठ ने कहा, “हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। हमारे बच्चे इन दोनों के ही हकदार हैं।”
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी तब आई, जब कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) का पता लगाने और उसे हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
इंटरनेट तक पहुंच और बच्चों की सुरक्षा, दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट की बेंच ने इस बात पर विचार किया कि क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिलने वाले ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार में, जानकारी और विचारों को जानने, प्राप्त करने और साझा करने का अधिकार भी शामिल है।
कोर्ट ने इंटरनेट को विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जानकारी का एक बाजार बताते हुए कहा कि इसका महत्व केवल इसमें मौजूद कंटेंट में ही नहीं है, बल्कि इस बात में भी है कि यह बड़ों और बच्चों, दोनों को जानकारी तक पहुंच प्रदान करता है।
कोर्ट ने कहा, “कई बच्चों के लिए, खासकर दूर-दराज के इलाकों में, यह अक्सर सीखने और जानकारी पाने का एकमात्र जरिया होता है।” कोर्ट ने आगे कहा कि इंटरनेट विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है; उनके लिए ऑनलाइन जगहें ऐसे मौके दे सकती हैं, जहां वे दोस्त बना सकें और अपने जैसी परिस्थितियों वाले अन्य लोगों से जुड़ सकें।
पीठ ने माना कि इंटरनेट, अपने मौजूदा रूप में, बच्चों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियां हानिकारक सामग्री को पहचानने और हटाने में नाकाम रहती हैं, तो इसकी सजा बच्चों को नहीं दी जा सकती। उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना सही नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा रवैया अपनाने पीड़ित को ही समस्या मानने जैसा होगा।
बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का प्रस्ताव खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कानून बनाकर बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोक देने का मतलब यह नहीं है कि वे इसका इस्तेमाल करना बंद कर देंगे। ऐसी पाबंदियों के बाद बच्चे दूसरे अनियंत्रित प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों का रुख कर सकते हैं, जहां उनके लिए खतरा और भी ज्यादा हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी तरह से पाबंदी लगाने से ऐसे बच्चे हतोत्साहित हो सकते हैं जिन्हें ऑनलाइन बहकाया जा रहा है, धमकाया जा रहा है या जिनका शोषण हो रहा है। वे अपने माता-पिता, अभिभावकों या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को ऐसी घटनाओं के बारे में बताने से डरेंगे, क्योंकि उन्हें डर होगा कि इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए उन्हें डांट पड़ेगी।
पीठ ने टिप्पणी की, “बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर किसी भी तरह की पूर्ण पाबंदी लगाना, एक ऐसा कदम है जो न तो कारगर साबित हुआ है और न ही उचित है।”
कोर्ट ने उम्र के आधार पर इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़ी एक और चिंता जताई। उसने कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स की उम्र की पहचान करनी पड़ सकती है और बार-बार इसकी पुष्टि करनी पड़ सकती है। इसके लिए संवेदनशील निजी जानकारी जुटाई और उस पर नजर रखी जा सकती है। इससे डेटा के गलत इस्तेमाल और लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी का खतरा पैदा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपाय सुझाए
पूरी तरह से पाबंदी लगाने के बजाय, बेंच ने स्पष्ट किया कि उनके सुझावों का मतलब यह नहीं है कि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए उम्र के हिसाब से सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जा सकते। कोर्ट ने सुझाव दिया कि जब बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें, तो माता-पिता की सहमति, मार्गदर्शन और निगरानी पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने बच्चों के अकाउंट के लिए एक खास “चाइल्ड मोड” (child mode) लाने की संभावना पर भी बात की।
कोर्ट के मुताबिक, ऐसे इंतजामों में बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट को डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रखना, अनजान वयस्कों के मैसेज और संपर्क पर रोक लगाना और उन्हें दिखाए जाने वाले विज्ञापनों व कंटेंट को नियंत्रित करना शामिल हो सकता है।
बेंच ने कहा कि ये सुरक्षा उपाय खासतौर पर कम उम्र के बच्चों यानी प्री-टीन्स (13 साल से कम उम्र के) के लिए तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए माता-पिता की सहमति की पुष्टि करने के उचित और संतुलित तरीके अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, इन उपायों को लागू करने का पूरा ब्योरा तय करने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर छोड़ दी।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसकी टिप्पणियों का मतलब यह नहीं है कि सरकार बच्चों के लिए नुकसानदायक कंटेंट या ऑनलाइन सेवाओं पर रोक नहीं लगा सकती। सरकार ऐसी वेबसाइटों और सेवाओं तक बच्चों की पहुंच सीमित कर सकती है, जो उनके लिए हानिकारक हैं। इनमें वयस्कों के लिए बनी अश्लील सामग्री वाली वेबसाइटें भी शामिल हैं।
कोर्ट ने बाल यौन शोषण सामग्री को हटाने के लिए कदम उठाने का दिया आदेश
बच्चों के इंटरनेट अधिकारों पर अपनी टिप्पणियों के साथ-साथ, सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
इन उपायों में एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना शामिल है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने में मदद करेगा।
Greater Noida Family Death: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। रबूपुरा इलाके के नगला श्री पदम गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चे शामिल हैं। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मृतकों की पहचान 37 वर्षीय महेश, उनकी 35 वर्षीय पत्नी ललिता और तीन बच्चों लड्डू (11), मिस्टी (7) और साक्षत (3) के रूप में हुई है। बच्चों की उम्र महज 3 से 11 साल के बीच थी।
पुलिस को आशंका है कि परिवार की मौत फूड पॉइजनिंग यानी दूषित खाना खाने की वजह से हुई हो सकती है। हालांकि, अभी तक मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाई है।
पुलिस ने दी जानकारी
पुलिस के मुताबिक, शनिवार सुबह रबूपुरा थाने को इस घटना की जानकारी मिली। इसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारी, एंबुलेंस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम और पुलिस की फील्ड यूनिट ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। टीम ने मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मौके से जरूरी वैज्ञानिक सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं।
रात में खाए नूडल्स, सुबह घर में मिले पांचों के शव
शुरुआती पूछताछ में पड़ोसियों और महेश की मां ने पुलिस को बताया कि परिवार के सभी सदस्यों ने रात में नूडल्स खाए थे। इसके बाद अगली सुबह पांचों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतकों के मुंह से झाग भी निकल रहा था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि इसका मौत की वजह से कोई संबंध है या नहीं।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग यानी दूषित खाना खाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी।
Development in Noida-Greater Noida: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से तैयार की जा रही महायोजना और औद्योगिक विकास की योजनाओं में इसे महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इंडस्ट्रियल नोड के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, रोजगार और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
YEIDA की ओर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी क्षेत्र में करीब 8,000 हेक्टेयर में इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्राधिकरण के निदेशक मंडल की ओर से भी इस प्रस्ताव का अवलोकन किया गया है। इसके लिए महायोजना तैयार करने की दिशा में कंसल्टेंट के चयन की कार्रवाई की जा रही है।
प्राधिकरण के मुताबिक, इंडस्ट्रियल नोड के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के आसपास योजनाबद्ध तरीके से औद्योगिक गतिविधियां विकसित होने से क्षेत्र में कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की भी तैयारी
YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ इंटरनेशनल ट्रेड सिटी विकसित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। प्राधिकरण की योजना Yiwu International Trade City की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र विकसित करने की है। प्रस्तावित ट्रेड सिटी में क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी, बिक्री और निर्यात के लिए बाजार उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।
इससे स्थानीय उद्योगों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और वैश्विक व्यापार के अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है। एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ ट्रेड सिटी को जोड़ने की योजना क्षेत्र के कारोबारी ढांचे को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
295 औद्योगिक भूखंडों में तेजी से बढ़ रहा काम
YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने के लिए भूखंड आवंटन के बाद निर्माण और उत्पादन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है। प्राधिकरण के मुताबिक 4,000 वर्गमीटर से अधिक आकार के 295 औद्योगिक भूखंडों में 181 भूखंडों के लीज डीड का निपटारा हो चुका है। इनमें 152 आवंटियों को कब्जा दिया जा चुका है। जबकि 69 भूखंडों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वहीं 13 इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
सेक्टर-28 के मेडिकल डिवाइस पार्क में भी औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां 203 भूखंडों के सापेक्ष 123 भूखंड आवंटित किए गए हैं। इनमें 75 भूखंडों पर कब्जा दिया जा चुका है और 28 पर निर्माण शुरू हो गया है।
आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर
मेडिकल डिवाइस पार्क में 3D Prototype Lab, Electronics Assembly Facility, IoMT, Biomaterial, Common IT Facility और Tooling Room जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी काम चल रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों को जरूरी तकनीकी और साझा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा सेक्टर-29 के अपैरल पार्क में 159, एमएसएमई पार्क में 503 और हैंडीक्राफ्ट पार्क में 188 भूखंडों का आवंटन हो चुका है। अपैरल पार्क में 110 और हैंडीक्राफ्ट पार्क में 83 आवंटियों को कब्जा भी मिल चुका है। सेक्टर-33 के टॉय पार्क में 148 भूखंड आवंटित किए गए हैं।
महायोजना से तय होगी भविष्य की दिशा
YEIDA की ओर से आगरा-अर्बन सेंटर की महायोजना-2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी जारी है। संशोधित महायोजना रिपोर्ट प्राधिकरण की 88वीं बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। प्राप्त सुझावों की जांच के बाद उनके निस्तारण की संस्तुति की गई है। संशोधित ड्राफ्ट महायोजना तैयार की जा रही है, जो क्षेत्र के भविष्य के भूमि उपयोग और विकास की दिशा तय करेगी।
साथ ही औद्योगिक भूखंडों पर निर्माण और उत्पादन की गति बढ़ाने के लिए साप्ताहिक समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से लीज डीड, कब्जा, मानचित्र स्वीकृति, निर्माण और पूर्णता प्रमाण-पत्र से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है।
Greater Noida News: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण के मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को ऐसे सभी अवैध व्यावसायिक निर्माणों की पूरी लिस्ट और उनसे संबंधित कार्रवाई का डिटेल्स 10 दिनों के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश पूर्व गाजियाबाद पार्षद राजेंद्र त्यागी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। मामले की सुनवाई 24 सितंबर को NGT की प्रिंसिपल बेंच के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद ने की।
GNIDA को नोटिस और कोर्ट के आदेशों का देना होगा ब्योरा
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने कहा कि GNIDA को अपनी कार्रवाई से जुड़े पूरे डिटेल्स के साथ उन उल्लंघनकर्ताओं को जारी किए गए नोटिस और अदालतों द्वारा पारित आदेशों की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। NGT ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की है।
मामले में GNIDA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने जुलाई में जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा था। अब ट्रिब्यूनल ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 10 दिनों के भीतर आवश्यक जानकारी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करते हुए निर्माण परियोजनाएं चलाए जाने का आरोप लगाया गया है।
इसमें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) संबंधी अधिसूचना के प्रावधानों का पालन नहीं करने तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से आवश्यक सहमति प्राप्त किए बिना संचालन करने जैसे आरोप शामिल हैं।
मामले में NGT ने पहले जुलाई में UPPCB को ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन में शुरू की गई कथित अवैध निर्माण परियोजनाओं के आरोपों की जांच और सत्यापन करने का निर्देश दिया था।
UPPCB ने कहा- GNIDA ने नहीं दी परियोजनाओं की जानकारी
23 सितंबर को UPPCB की ओर से दाखिल रिपोर्ट में NGT को बताया गया कि GNIDA ने संबंधित परियोजनाओं का विवरण साझा नहीं किया।
बोर्ड के मुताबिक, इस संबंध में GNIDA को 17 अगस्त और 16 सितंबर को पत्र भेजे गए थे। लेकिन इसके बावजूद परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके बाद NGT ने GNIDA से कहा कि वह कथित अवैध निर्माणों से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराए।
इसमें प्राधिकरण की ओर से अब तक जारी किए गए नोटिस, उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई और संबंधित अदालतों के आदेशों का विवरण भी शामिल होगा।
10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
NGT के इस आदेश के बाद GNIDA को निर्धारित समयसीमा में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माणों की सूची और उनसे जुड़ी कार्रवाई का रिकॉर्ड पेश करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 दिसंबर को तय की गई है।
YEIDA Plot Scheme: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद आसपास के इलाकों में जमीन और प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने शुक्रवार को ग्रुप हाउसिंग और होटल प्लॉट के लिए अलग-अलग स्कीम लॉन्च की हैं। इन दोनों कैटेगरी में 10-10 प्लॉट शामिल हैं।
एयरपोर्ट के जून में शुरू होने के बाद से इस इलाके में रिहायशी और होटल प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट की मांग में तेजी देखने को मिली है।
कहां-कहां हैं ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट?
ग्रुप हाउसिंग के लिए चुने गए प्लॉट सेक्टर 17, 18, 20 और 22D में हैं। इन प्लॉट का आकार 11,513 वर्ग मीटर से लेकर 50,600 वर्ग मीटर तक है।
सेक्टर 17 में सबसे ज्यादा 4 प्लॉट रखे गए हैं। वहीं, सेक्टर 18 और सेक्टर 20 में 1-1 प्लॉट उपलब्ध है। इसके अलावा सेक्टर 22D में 4 प्लॉट हैं।
सेक्टर 22D में मौजूद प्लॉट्स में सबसे बड़ा प्लॉट 50,600 वर्ग मीटर का है। इसकी रिजर्व कीमत करीब 265 करोड़ रुपये रखी गई है।
वहीं, ग्रुप हाउसिंग प्लॉट के लिए अलॉटमेंट रेट 52,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई है।
बता दें कि बोली लगाने वालों को हर प्लॉट के लिए 5 लाख रुपये की प्रोसेसिंग फीस और 10% अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करनी होगी। प्लॉट के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई है। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 26 अक्टूबर शाम 5 बजे तक है।
आवेदनों की जांच और मूल्यांकन के बाद आर्थिक और तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाताओं के नाम 16 नवंबर को जारी किए जाएंगे। इसके बाद प्लॉट का अंतिम आवंटन ई-ऑक्शन के जरिए किया जाएगा। ई-नीलामी 18 नवंबर को सुबह 11 बजे शुरू होगी।
होटल प्लॉट की भी स्कीम
होटल प्लॉट स्कीम के लिए, YEIDA सेक्टर 29 में 6 और सेक्टर 28 में 4 प्लॉट दे रहा है। सभी प्लॉट का साइज 3,100 वर्ग मीटर से 10,000 वर्ग मीटर के बीच है।
होटल प्लॉट के लिए YEIDA ने 87,010 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तय की है। इस हिसाब से 10,000 वर्ग मीटर के सबसे बड़े प्लॉट की रिजर्व कीमत करीब 91 करोड़ रुपये होगी।
इस स्कीम के तहत आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 24 अक्टूबर है। योग्य बोलीदाताओं के नाम 2 नवंबर को जारी किए जाएंगे। इसके बाद 4 नवंबर को सुबह 11 बजे से ई-नीलामी शुरू होगी।
प्लॉट रिजर्व करने के लिए बोली लगाने वालों को प्रति वर्ग मीटर ₹87,010 देने होंगे, जिससे 10,000 वर्ग मीटर वाले प्लॉट की रिजर्व कीमत ₹91 करोड़ हो जाती है। इस स्कीम के तहत आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 24 अक्टूबर है। योग्य बोली लगाने वालों के नाम 2 नवंबर को दिखाए जाएंगे और ई-नीलामी 4 नवंबर को सुबह 11 बजे होगी।
अलॉटी (प्लॉट पाने वाले) को अर्नेस्ट मनी के तौर पर 10% रकम जमा करनी होगी। फिर पहले जमा की गई अर्नेस्ट मनी को एडजस्ट करने के बाद, प्लॉट के कुल प्रीमियम का 40% हिस्सा अलॉटमेंट की तारीख से 60 दिनों के भीतर जमा करना होगा।
इसके अलावा, कुल प्रीमियम का बाकी 60% हिस्सा दो साल में चार छमाही किस्तों में चुकाना होगा।
इस स्कीम के तहत, कॉर्नर प्लॉट के लिए 5% अतिरिक्त चार्ज लगेगा, ग्रीन बेल्ट की तरफ वाले प्लॉट के लिए 5% और 45 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़क के किनारे वाले प्लॉट के लिए भी 5% अतिरिक्त चार्ज लगेगा। प्लॉट का अलॉटमेंट लीज डीड बनने की तारीख से 90 साल की अवधि के लिए लीजहोल्ड आधार पर किया जाएगा।
होटल की ऊंचाई कितनी होगी?
बिल्डिंग नियमों के अनुसार, होटल की बिल्डिंग की ऊंचाई पर कोई सीमा नहीं है। हालांकि, सेक्टर 28 और 29 नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हैं, इसलिए बिल्डिंग की मंजूर ऊंचाई लगभग 29 मीटर है।
YEIDA के CEO आर.के. सिंह ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट की वजह से हाल ही में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा, “जमीन की कमी को देखते हुए, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी जैसे वर्टिकल प्रोजेक्ट बनाना सबसे अच्छा है। साथ ही, अगले महीने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज तैयार हो जाएगा। इससे गुरुग्राम, पलवल, गाजियाबाद और हापुड़ जैसे आस-पास के इलाकों की ग्रेटर नोएडा और जेवर से आसानी से कनेक्टिविटी हो सकेगी।”
Yamuna Expressway Bus Fire: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार (24 सितंबर) सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। जेवर एयरपोर्ट के पास एक चलती प्राइवेट स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत होने की खबर है। जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि करीब 30 से अधिक यात्री बस में सवार थे। आग लगते ही कई यात्रियों ने कूदकर जान बचाई। जेवर पुलिस ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि इस दुखद घटना में एक महिला और 8 पुरुषों समेत 9 लोगों की मौत हो गई है।
नोएडा से महोबा जा रही थी बस
न्यूज 18 के मुताबिक, यह निजी स्लीपर बस नोएडा से महोबा जा रही थी। हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर एयरपोर्ट के नजदीक हुआ। आग लगते ही बस देखते ही देखते आग की लपटों से घिर गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बस पूरी तरह आग की चपेट में दिखाई दे रही है। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने यात्रियों की मदद करने की कोशिश की।
बस में करीब 30-40 यात्री सवार थे
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय बस में करीब 30 से 40 लोग सवार थे। आग लगने के बाद जान बचाने के लिए कई यात्रियों ने बस की खिड़कियों से बाहर छलांग लगा दी। बस के अंदर धुआं भर जाने के कारण यात्रियों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया। कई यात्रियों ने घबराहट और भगदड़ के बीच किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
‘मैं सो रही थी, दरवाजे पर किसी ने जोर से मारा’
हादसे से बची एक महिला यात्री ने ANI को बताया कि वह बस में सो रही थी। तभी किसी ने दरवाजे पर जोर से आवाज की। जब उसकी आंख खुली तो बाहर काफी भीड़ थी और बस के अंदर धुआं भर चुका था। महिला के मुताबिक, वह अपना कोई सामान नहीं ले सकी। यहां तक कि उसने जूते भी नहीं पहने और सिर्फ अपना फोन लेकर बस से बाहर निकलने की कोशिश की। उसने बताया कि बस के अंदर इतना ज्यादा धुआं था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और लोग दम घुटने की स्थिति में थे। बाहर निकलने की कोशिश में यात्री एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। महिला ने बताया कि किसी व्यक्ति ने अंततः उसे बाहर खींचकर निकाला।
‘बहुत कम लोग बाहर निकल पाए’
महिला यात्री ने बताया कि बस में हालात बेहद अफरातफरी वाले थे। उसके पीछे कई लोग मौजूद थे और उसे आशंका है कि उनमें से कुछ लोग बाहर नहीं निकल सके। एक अन्य यात्री ने बताया कि वह सो गया था। तभी किसी ने उसे जगाकर बताया कि बस में आग लग गई है। इसके बाद सभी लोग बाहर निकलने के लिए भागने लगे। उस यात्री के मुताबिक, बस यात्रियों से भरी हुई थी और धुएं के कारण बाहर निकलना आसान नहीं था। किसी तरह यात्रियों ने घबराहट की स्थिति में बस से बाहर निकलने की कोशिश की।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे की सूचना मिलते ही जेवर पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है। फिलहाल आग लगने की सटीक वजह सामने नहीं आई है। पुलिस और संबंधित अधिकारी हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं।
CM योगी ने लिया संज्ञान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को घायलों को उचित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। CMO के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों से जुड़े लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज, राहत-बचाव अभियान और हादसे में प्रभावित लोगों की पहचान करना है। आग कैसे लगी और हादसे के पीछे क्या कारण था, इसकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
#WATCH | Greater Noida | A passenger says, “…I was asleep when someone banged on the door. When I woke up, there was already a huge crowd. I didn’t pick up any of my belongings; I didn’t even put on my shoes. I just grabbed my phone and stepped out. It was so crowded that… https://t.co/udoxnMaZrkpic.twitter.com/41N7aaXZZi
Electric vehicles have skyrocketed in significance over the past decade, particularly in light of global issues like climate change and pollution. EVs require no fossil fuels to run, and therefore emit zero harmful pollutants into the atmosphere. To promote the adoption of EVs, September 9 was designated ‘World EV Day’ six years ago by sustainability-focused companies Green.TV and ABB Group, and is recognised worldwide.
On the sixth iteration of World EV Day, let’s take a look at some of Autocar India’s most notable achievements in the all-electric mobility space.
1. Mercedes Benz EQC clean energy charging
Hydro, wind and solar energy were the only means of charging we used
In 2021, we set out on a journey in the Mercedes-Benz EQC to explore how truly “green” EVs can be when powered by renewable energy only; at present, coal is the primary source of energy production. We departed from the Mercedes-Benz facility in Chakan with a full charge, heading to Tata Power’s Khopoli hydroelectric plant, Agaswadi wind farm and Mulshi solar farm.
Along the way, we investigated clean power sources – hydro, wind and solar – that could sustainably fuel EVs in India. While the EQC couldn’t be charged directly from the hydro grid since it mixes with the main grid, we were able to charge the SUV via a 15A plug at Tata Power. However, we did tap charging power directly from wind turbines and solar panels for the EQC. Ultimately, this trip showed us that our EVs could soon be truly emissions-free – not just at the tailpipe, but across the entire power chain.
2. Green Mumbai Drive 2021
30 EVs quietly trundling through the Sanjay Gandhi National Park
We achieved a rare feat by bringing together every EV that was on sale in India at the time and driving them across Mumbai and through the protected Sanjay Gandhi National Park in Borivali. 30 EVs were part of the drive, including the Hyundai Kona, Tata Nexon EV, MG ZS EV, Mercedes-Benz EQC, Jaguar i-Pace, Audi e-tron GT, and even a Tesla Model X.
The Green Mumbai Drive was flagged off from the Mahalakshmi Racecourse by Aditya Thackeray, MoS for Tourism, Environment and Protocol, and Jeet Adani, director of Adani Electricity. Notable auto industry executives like Santosh Iyer (Mercedes-Benz India), Balbir Singh Dhillon (Audi India), Rohit Suri (JLR India), and Amit Suri (Volvo India) were also part of the event.
3. Debuting EVs in two different national parks
Tata Nexon EV in Satpura Tiger Reserve, Audi e-tron in Gir National Park
In 2021, we were the first to drive an electric car (specifically, the Tata Nexon EV) into Madhya Pradesh’s Satpura Tiger Reserve. The roughly 140km drive from Bhopal to Forsyth Lodge was completed with around 30km of range remaining, despite starting with the battery at 92 percent. With no fast-charging infrastructure nearby, the Nexon EV had to be charged overnight using a 15A socket. During the safari, the torquey and compact EV performed well on steep inclines and narrow forest trails, and its silent operation allowed it to approach wildlife like sambars, gaurs, wild pigs, and even a leopard without the noise of an idling engine – no tiger, though.
Then, in 2022, we were yet again the first to drive an EV into Gujarat’s Gir National Park, this time in an Audi e-tron. Reaching our accommodation induced a great deal of range anxiety due to faulty chargers along the way, but we managed to get there with around 20 percent of charge remaining. Once we reached, the e-tron was an excellent companion to tour the park with, helping us spot wildlife like chital, crocodiles, lions, and more.
4. Porsche Taycan Kashmir to Kanyakumari road trip
Nearly 4,500km in a performance EV
2022 saw us take one of our most ambitious roadtrips to date: 4,467km from Kashmir to Kanyakumari in a Porsche Taycan. Despite challenges like landslides in Jammu, flooded roads in Punjab, and power outages at certain charging spots, the Taycan handled the journey with ease. On one of the most efficient legs, the Porsche EV delivered 7.1km/kWh, working out to an indicated range of 475km.
Comfort mode was the default setting, but we did have lots of fun in some stretches courtesy of the Taycan’s Sport Plus drive mode. Up to 225kW of fast charging bolstered convenience, and total charging expenses tallied up to just Rs 15,422 – cheaper than fuel for an equivalent petrol car. More than just distance, the trip proved that combining sports car-like performance with electric efficiency works perfectly in real-world conditions, and that the Taycan is more durable than you may think.
5. Pininfarina Battista India top speed record
1900hp, quad-motor hypercar achieved a 358.03kph top speed
Back in early 2023, we set a new Indian top-speed record with the 1,900hp Pininfarina Battista electric hypercar at the NATRAX high-speed oval near Indore. Achieving an impressive v-max of 358.03kph, the Battista blitzed past the previous record of 332.20kph, which was also set by us in 2016 in an Audi R8 V10 Plus.
The Battista top-speed run also ended up establishing new world records for a production car: 0-300kph in 10.49 seconds and a quarter-mile time of 8.55 seconds, all verified by the Federation of Motor Sports Clubs of India (FMSCI).
6. Hero Vida V1 Pro longest distance in 24 hours record
The e-scooter travelled just shy of a whopping 1,800km
The endurance challenge relied on swift battery swaps and flawless coordination, with the pit crew achieving 38 battery changes in under 20 seconds – quite impressive considering the extreme heat, rider fatigue, and complexity involved. Moreover, the Vida V1 Pro ran flawlessly throughout, handling the gruelling conditions with ease and maintaining performance consistently.
7. Volvo EC40 Jaisalmer to Mawsynram road trip
From India’s driest region to its wettest
In 2024, we took the Volvo EC40 (formerly known as the C40 Recharge) on a roughly 3,000km road trip from Jaisalmer in Rajasthan – one of India’s driest locations – to Mawsynram in Meghalaya, widely recognised as the country’s wettest. The route included a detour to Ghaziabad’s Volvo Reverse Project, a former dumping ground where around 10,000 trees had been planted as part of the company’s reforestation initiative.
Charging was carried out mainly overnight with DC fast chargers also used along the route, and the EC40 posed no issues during the journey. Ironically, we encountered heavy rain and waterlogging in Jaisalmer but surprisingly little rainfall in Mawsynram.
8. Mercedes Benz EQS sedan longest distance world record
Setting off from Bangalore on a full charge, the EQS 580 covered a distance of 949km when it reached its destination in Navi Mumbai, beating the previous Guinness World Record for the same by 32.26km. Impressively, the 949km real-world range exceeds EQS 580’s claimed range of 817km by just over 16 percent. It’s also worth mentioning that the two-day journey was completed under arduous conditions like heavy rainfall, lots of traffic, broken roads, and even a flat tyre.
9. Porsche Taycan BIC EV lap record
2:10.313 lap time makes the Taycan the fastest EV around BIC so far
At the Buddh International Circuit in Greater Noida, we lapped a Porsche Taycan Turbo S and clocked a time of 2:10.313 minutes – the first-ever EV lap record around the 5.125km track. Despite its rather portly kerb weight of 2,370kg, the Taycan delivered unexpectedly sharp performance at BIC thanks to 761hp and 1,050Nm, a low centre of gravity (aided by the heavy 93.4 kWh battery), precise steering, and superb balance.
Upon hitting the apex and pinning the throttle, the Taycan belied physics the way it propelled out of corners with explosive speed, and despite weighing 845kg more, the EV achieved nearly the same top speed as the 911 GT3 RS at the end of BIC’s main straight.
10. Ultraviolette F99 India top speed record
258kph around NATRAX and a 100-200kph run of 6.2 seconds
One of our more recent records entailed setting a new benchmark for made-in-India two-wheelers by hitting a top speed of 258kph on the Ultraviolette F99 at the NATRAX oval. Designed around a 400V architecture with a liquid-cooled powertrain, the purpose-built F99 packs 120hp and an astounding 972Nm (measured at the rear wheel).
The F99’s custom trellis frame, forged carbon-fibre bodywork, Brembo brakes, and Ohlins suspension helped the bike remain stable at high speeds, culminating in a clean record run captured via precision V-Box data. It also achieved a blistering 0-200kph run in under 10 seconds and 100-200kph in just 6.2 seconds, smashing previous Indian motorcycle speed records.
11. Mercedes Benz EQS SUV temperature change record
From the sweltering heat of Rajasthan to the sub-zero chill of Ladakh
Our 2025 Guinness World Record saw us achieving the greatest temperature change endured by a production EV. We accomplished this using the Mercedes-Benz EQS 450 SUV, driving from the scorching heat of 47.5 deg-C in Rajasthan to the below-freezing chill of -3.7 deg-C in Ladakh, for an impressive overall temperature swing of 51.2 deg-C.
The journey tested the limits of the EQS 450 SUV, especially its 122kWh battery’s thermal management system. Despite extreme variations in temperature, the climate control and battery systems kept the EQS 450 SUV performing smoothly and safely.
Viral Video: सोशल मीडिया पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ सिटी मॉल के KFC से जुड़ा एक मामला काफी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया एक ग्राहक ने दावा किया कि, उसने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी मॉल के KFC आउटलेट से डीप-फ्राइड चिकन खरीदा था, लेकिन उसमें उसे एक कीड़ा नजर आया। ग्राहक (कस्टमर) ने इसका वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। शेयर किए गए इस वीडियो में उन्होंने KFC India को टैग करते हुए मामले पर नाराजगी जताई है।
वहीं KFC के डीप-फ्राइड चिकन में कीड़ा देख हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
चिकन में मिला कीड़ा
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में ग्राहक ने KFC इंडिया को टैग करते हुए इस घटना पर नाराजगी और हैरानी जताई। ग्राहक ने बताया कि, ये मामला 5 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे गौर सिटी मॉल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हुआ। यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, ‘गौर सिटी मॉल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के KFC आउटलेट से लिए गए डीप-फ्राइड चिकन में उसे एक कीड़ा मिला, जिसे देखकर वह काफी हैरान और परेशान हुआ। इसके साथ ही उसने आउटलेट की फूड सेफ्टी और क्वालिटी कंट्रोल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर क्या खाने की सही तरीके से जांच की गई थी।’
दिल्ली में खाने-पीने की चीजों पर हो रही जांच
इस मामले से जुड़ा एक लंबा वीडियो भी दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया गया है। इसमें पूरी घटना दिखाने का दावा किया गया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इसे देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में फूड सेफ्टी विभाग ने खाने-पीने की चीजों की जांच बढ़ा दी है। खासतौर पर दूध, डेयरी प्रोडक्ट, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामानों पर नजर रखी जा रही है। 28 अगस्त को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग को त्योहारों से पहले शहरभर में खाने-पीने की चीजों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए।
Insect found in deep-fried chicken at KFC, Gaur City Mall, Greater Noida West. pic.twitter.com/y8u8FULTCE
ANI के मुताबिक, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस रिलीज में बताया गया कि, फूड सेफ्टी टीमों ने त्योहारों को देखते हुए मिठाई बनाने वाली जगहों, मंडियों, बाजारों और खाने-पीने की दुकानों पर जांच बढ़ा दी है। इस दौरान कई खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए जा रहे हैं। अधिकारियों का खास ध्यान दूध और उससे बने सामान जैसे पनीर, खोया और घी के साथ-साथ मिठाइयों और उन खाद्य चीजों पर है, जिनकी त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना है।
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)
Delhi Gangrape: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में एक स्लीपर बस के अंदर 11वीं क्लास की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया। पीड़िता की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना चार अगस्त की रात की है जब ग्रेटर नोएडा में अपने रिश्तेदार से मिलने जा रही लड़की भारी बारिश के दौरान गलती से परी चौक पर उतर गई। उसने कथित तौर पर खाली स्लीपर बस को रूकने का इशारा किया। फिर ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने उसे बस में बैठा लिया। पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर उसके साथ गैंगरेप किया। फिर आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।
आरोपियों ने पीड़िता को घटना के बारे में किसी को बताने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। बस को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, बस परी चौक से नोएडा सेक्टर 63 तक गई। फिर नोएडा सेक्टर 63 से दिल्ली के बस कश्मीरी गेट की तरफ गई। लड़की को रिंग रोड पर उतारा गया। फिर बस को तिमारपुर बस डिपो में पार्क किया गया।
दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?
दिल्ली पुलिस ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “राजधानी में एक स्लीपर बस में 16 साल की स्कूली छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ़्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना 4 अगस्त की रात को हुई थी। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस को जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।” पुलिस ने बताया कि पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली है। वह 11वीं क्लास की छात्रा है।
47 किलोमीटर तक दरिंदगी!
पुलिस ने बताया कि 4 तारीख को ही दोनों आरोपियों कुलदीप (39) और संदीप (26) को गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि परी चौक और नोएडा सेक्टर 63 के बीच उसके साथ गैंगरेप किया गया। पुलिस ने बताया कि बस के CCTV कैमरे बंद थे। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के 47 किलोमीटर की दूरी के दौरान दोनों आरोपियों ने छात्रा के साथ जबरन हैवानियत की। पुलिस का दावा है कि स्लीपर बस में पर्दे लगे थे, इसलिए इस सफर के दौरान अंदर का किसी को दिखाई नहीं दिया।
गलती से परी चौक उतर गई थी पीड़िता
पुलिस के मुताबिक, भारी बारिश और अंधेरे के बीच पीड़िता गलती से परी चौक पर उतर गई। फिर उसके मदद के लिए इशारा करने पर उस इलाके से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस रुकी। इस दौरान पूछने पर ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने कथित तौर पर उससे कहा कि बस नोएडा सेक्टर 63 जा रही है। दोनों दरिंदों ने उसे बस में प्यार से चढ़ने को कहा। पुलिस ने बताया कि बस चलने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर ने कथित तौर पर उस लड़की के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं।
गैंगरेप के बाद जान से मारने की धमकी दी
लड़की का आरोप है कि इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर दोनों ने उसका जबरन गैंगरेप किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद बस परी चौक से कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही। आरोपियों ने कथित तौर पर देर रात कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर लड़की को छोड़कर भाग गए। डरी हुई छात्रा ने कश्मीरी गेट पुलिस से संपर्क किया और घटना की पूरी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने तिमारपुर के बस पार्किंग एरिया से कुलदीप और संदीप को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही स्लीपर बस को जब्त कर लिया।
बस को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच करने वालों ने बताया कि बस पहले खराब हो गई थी। उसे मरम्मत के लिए सूरजपुर के एक वर्कशॉप में ले जाया गया था। मरम्मत पूरी होने के बाद, ड्राइवर और कंडक्टर खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी परी चौक पर उन्हें पीड़िता दिखी। पुलिस ने बताया कि स्लीपर बस की बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे थे, जिससे कथित तौर पर आरोपियों को यात्रा के दौरान अंदर हो रही गतिविधियों को छिपाने में मदद मिली। परी चौक और कश्मीरी गेट के बीच बस ने लगभग 47 किलोमीटर का सफर तय किया, जिसके बाद कथित तौर पर किशोर को छोड़ दिया गया। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।
बस से आरोपियों के सफर का रूट
47 किलोमीटर की सड़क यात्रा के दौरान जिस रूट पर गैंगरेप हुआ, उसे इस तरह समझा जा सकता है:-
– ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा सेक्टर 63 तक।
– फिर सेक्टर 63 से NH-24 तक गए।
– इसके बाद NH-24 से आउटर रिंग रोड गए।
– फिर लड़की को कश्मीरी गेट रिंग रोड पर उतार दिया।
– इसके बाद बस को आरोपियों ने तिमारपुर पार्किंग में पार्क किया