ग्रेटर नोएडा के अवैध कमर्शियल निर्माणों पर NGT की सख्त रुख! GNIDA को दिया 10 दिनों का अल्टीमेटम

Greater Noida News: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण के मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को ऐसे सभी अवैध व्यावसायिक निर्माणों की पूरी लिस्ट और उनसे संबंधित कार्रवाई का डिटेल्स 10 दिनों के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश पूर्व गाजियाबाद पार्षद राजेंद्र त्यागी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। मामले की सुनवाई 24 सितंबर को NGT की प्रिंसिपल बेंच के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद ने की।

GNIDA को नोटिस और कोर्ट के आदेशों का देना होगा ब्योरा

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने कहा कि GNIDA को अपनी कार्रवाई से जुड़े पूरे डिटेल्स के साथ उन उल्लंघनकर्ताओं को जारी किए गए नोटिस और अदालतों द्वारा पारित आदेशों की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। NGT ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की है।

मामले में GNIDA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने जुलाई में जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा था। अब ट्रिब्यूनल ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 10 दिनों के भीतर आवश्यक जानकारी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।

पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप

  • याचिका में ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करते हुए निर्माण परियोजनाएं चलाए जाने का आरोप लगाया गया है।
  • इसमें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) संबंधी अधिसूचना के प्रावधानों का पालन नहीं करने तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से आवश्यक सहमति प्राप्त किए बिना संचालन करने जैसे आरोप शामिल हैं।
  • मामले में NGT ने पहले जुलाई में UPPCB को ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन में शुरू की गई कथित अवैध निर्माण परियोजनाओं के आरोपों की जांच और सत्यापन करने का निर्देश दिया था।

UPPCB ने कहा- GNIDA ने नहीं दी परियोजनाओं की जानकारी

  • 23 सितंबर को UPPCB की ओर से दाखिल रिपोर्ट में NGT को बताया गया कि GNIDA ने संबंधित परियोजनाओं का विवरण साझा नहीं किया।
  • बोर्ड के मुताबिक, इस संबंध में GNIDA को 17 अगस्त और 16 सितंबर को पत्र भेजे गए थे। लेकिन इसके बावजूद परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • इसके बाद NGT ने GNIDA से कहा कि वह कथित अवैध निर्माणों से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराए।
  • इसमें प्राधिकरण की ओर से अब तक जारी किए गए नोटिस, उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई और संबंधित अदालतों के आदेशों का विवरण भी शामिल होगा।

10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

NGT के इस आदेश के बाद GNIDA को निर्धारित समयसीमा में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माणों की सूची और उनसे जुड़ी कार्रवाई का रिकॉर्ड पेश करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 दिसंबर को तय की गई है।

ये भी पढ़ें- Noida Airport: जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा 200 एकड़ का लॉजिस्टिक्स पार्क! YEIDA बोर्ड की बैठक में 8,000 हेक्टेयर के इंडस्ट्रियल हब को मंजूरी

ईवी चालकों को बड़ी राहत! नोएडा की 30 अहम पार्किंग में लगेंगे चार्जिंग स्टेशन, कार से लेकर दोपहिया तक होगी चार्जिंग की सुविधा

EV Charging Stations Noida: नोएडा में इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। शहर में अब घर के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी ईवी चार्जिंग की सुविधा मिलने लगेगी। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 के तहत नोएडा प्राधिकरण और यूपी रिन्यूएबल एंड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच 24 सितंबर को एमओयू हुआ है।

इस MoU के तहत शहर की 30 अहम पार्किंग में ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्थान पर कम से कम दो चार्जर होंगे, जिनसे एक साथ दो कार और एक दोपहिया वाहन चार्ज हो सकेगा। चार्जिंग स्टेशनों का पूरा खर्च कंपनी उठाएगी, जबकि प्राधिकरण स्थान उपलब्ध कराएगा।

इससे ईवी वाहनों की खरीद में भी हो सकता है इजाफा

अब तक नोएडा में ईवी वाहन खरीदने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक सार्वजनिक जगह पर चार्जिंग की सुविधा की कमी भी रही है। घर पर चार्जिंग की सुविधा होने के बावजूद शहर में सफर के दौरान बैटरी खत्म होने पर वाहन को चार्ज करने के विकल्प न के बराबर हैं। ऐसे में नोएडा निवासी ईवी खरीदने से पहले चार्जिंग को लेकर सोचते हैं। अब 30 अलग-अलग पार्किंग वाली जगहों पर चार्जिंग स्टेशन लगने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी दूर होगी।

सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग की सुविधा बढ़ने से ईवी चालकों को सफर के दौरान चार्जिंग की चिंता से राहत मिल सकेगी। खास बात यह है कि हर एक स्थान पर कम से कम दो चार्जर लगाए जाएंगे, जिनसे एक साथ दो कार और एक दोपहिया वाहन को चार्ज किया जा सकेगा। नोएडा में चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने से आने वाले समय में ईवी वाहनों की खरीद में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

इन जगहों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशन

नोएडा प्राधिकरण के सीनियर अधिकारी एस पी सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नोएडा मेट्रो पार्किंग सेक्टर 101, वेद वन पार्किंग सेक्टर 78, बॉटनिकल गार्डन पार्किंग सेक्टर 38, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 76, मेट्रो पार्किंग, ब्लॉक E सेक्टर 51, हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड पार्किंग क्षेत्र सेक्टर 119, नोएडा इंडोर स्टेडियम पार्किंग लॉट सेक्टर 21A, मेट्रो पार्किंग, ब्लॉक C सेक्टर 81, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 154, मेट्रो पार्किंग गढ़ी चौखंडी / गढ़ीपुर सेक्टर 145, मेट्रो पार्किंग झट्टा सेक्टर 146, शहीद भगत सिंह पार्किंग लॉट सेक्टर 150, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 144, नोएडा अथॉरिटी पार्किंग (NSEZ मेट्रो के पास) ब्लॉक A फेज-2, वेंडर्स जोन (हल्दीराम के पास) सेक्टर 18, सब मॉल (SAB Mall) पार्किंग सेक्टर 27 में लगाए जाएंगे।

नोएडा के महत्वपूर्ण जगहों पर मिलेगी ये सुविधा

इसके साथ ही कैम्ब्रिज स्कूल पार्किंग सेक्टर 27, ब्रह्मपुत्र मार्केट पार्किंग सेक्टर 29, अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्किंग ब्लॉक B सेक्टर 1, बीएचईएल (BHEL) ऑफिस पार्किंग के पास सेक्टर 18, महामाया फ्लाई-ओवर के नीचे पार्किंग ब्लॉक C सेक्टर 38, गंगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पार्किंग सेक्टर 29, निरूलाज होटल के सामने सेक्टर 15, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास पार्किंग, सेक्टर 2, आईजीएल (IGL) गैस स्टेशन विकास मार्ग सेक्टर 122, साया स्टेटस मॉल सेक्टर 129, इन्फोसिस कैंपस सेक्टर 132, एनटीपीसी ईओसी (NTPC EOC) ऑफिस ब्लॉक A सेक्टर 24, नोएडा अथॉरिटी का नया ऑफिस सेक्टर 96, कमांड कंट्रोल सेंटर बिल्डिंग सेक्टर 94 में स्थापित किए जाएंगे।

रिपोर्ट- सुमित राजपूत

Noida Residential Scheme: नोएडा के इन सेक्टरों में प्लॉट खरीदने का मौका! 19 इंडस्ट्रियल प्लॉट पर लगी रिकॉर्ड बोली! यूपी में नौकरी की होगी बरसात

Noida Residential Scheme: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग का एक और बड़ा संकेत सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण की वित्तीय वर्ष 2026-27 की औद्योगिक भूखंड योजना के तहत 19 प्लॉट के लिए हुई ई-नीलामी में बोली ने आरक्षित कीमत को काफी पीछे छोड़ दिया। इन प्लॉट का कुल आरक्षित मूल्य करीब ₹86 करोड़ था। लेकिन ई-ऑक्शन में इनकी बोली बढ़कर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। यानी आरक्षित मूल्य से करीब ₹152 करोड़ ज्यादा की बोली लगी।

224 आवेदन, 195 आवेदक बोली के लिए योग्य

नोएडा प्राधिकरण की इस योजना के तहत 19 औद्योगिक प्लॉट के लिए कुल 224 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की जांच के बाद 195 आवेदकों को योग्य पाया गया। इसके बाद योग्य बोलीदाताओं ने बैंक के ई-ऑक्शन पोर्टल के जरिए नीलामी में हिस्सा लिया। बुधवार को हुई ई-नीलामी में बोलीदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। आखिरी बोली कुल मिलाकर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। प्राधिकरण के लिए यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 19 भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य सिर्फ ₹86 करोड़ के आसपास रखा गया था।

किन सेक्टरों में हैं ये औद्योगिक प्लॉट?

  • नोएडा प्राधिकरण की योजना में शामिल ये औद्योगिक भूखंड सेक्टर-3, सेक्टर-6, सेक्टर-7, सेक्टर-9, सेक्टर-10, सेक्टर-80, सेक्टर-162 और सेक्टर-164 में स्थित हैं। इन प्लॉट का आकार भी एक जैसा नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनका क्षेत्रफल करीब 58.56 वर्ग मीटर से लेकर 7,990 वर्ग मीटर तक है।
  • यानी योजना में छोटे आकार के प्लॉट से लेकर अपेक्षाकृत बड़े औद्योगिक भूखंड तक शामिल किए गए थे। अलग-अलग सेक्टरों में स्थित होने के कारण इनकी लोकेशन और संभावित औद्योगिक उपयोग भी अलग-अलग हो सकता है।

मई में लॉन्च हुई थी स्कीम

  • नोएडा प्राधिकरण ने इस औद्योगिक भूखंड योजना को मई 2026 में लॉन्च किया था। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ई-बोली की प्रक्रिया में कुछ समय लगा। सितंबर में ई-नीलामी पूरी होने के बाद अब सफल बोलीदाताओं के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • सितंबर की शुरुआत में नोएडा प्राधिकरण ने IT/ITeS प्लॉट के लिए भी नई कीमत व्यवस्था तय की थी। प्राधिकरण ने ऐसे प्लॉट के लिए ₹86,000 प्रति वर्ग मीटर की एक समान आवंटन दर तय की थी। यह फैसला नोएडा में उपलब्ध औद्योगिक जमीन की सीमितता और निवेश की मांग के बीच लिया गया था।

अब सफल बोलीदाताओं की DPR की होगी जांच

  • E-ऑक्शन पूरा होने के बाद अब सिर्फ बोली लगना ही अंतिम चरण नहीं है। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ पुष्प राज सिंह के मुताबिक, सफल बोलीदाताओं की DPR (Detailed Project Report) की जांच की जाएगी।
  • इस प्रक्रिया के जरिए प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश और उनसे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों का आकलन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि इन प्लॉट पर कौन-कौन सी औद्योगिक यूनिट्स स्थापित होंगी। उनसे कितना निवेश या रोजगार पैदा होगा। इसकी तस्वीर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग क्यों अहम है?

  • नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, नोएडा करीब 20,316 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक योजनाबद्ध औद्योगिक शहर है। शहर में पहले से कई औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हैं और दिल्ली से सड़क संपर्क के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत है।
  • ऐसे में उपलब्ध औद्योगिक जमीन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगना इस बात का संकेत है कि कंपनियां और निवेशक नोएडा में औद्योगिक गतिविधियों के लिए जमीन हासिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, इन 19 प्लॉट पर वास्तविक निवेश और रोजगार का आंकड़ा संबंधित परियोजनाओं की DPR और उनके क्रियान्वयन के बाद ही सामने आएगा।

निवेश और रोजगार पर अब निगाहें

ई-ऑक्शन में आरक्षित मूल्य की तुलना में काफी ऊंची बोली लगने के बाद अब अगला फोकस इन प्लॉट पर प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के विकास पर रहेगा। सफल आवेदकों की परियोजनाओं की जांच और DPR के आकलन के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितना निवेश आएगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि इससे कितने रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

नोएडा के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक जमीन सीमित होने के बीच नए प्लॉट के आवंटन से शहर में नई मैन्यूफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध होती है। हालांकि, ₹238 करोड़ की बोली को सीधे ₹238 करोड़ के नए औद्योगिक निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से भूखंडों के लिए लगी बोली की राशि है। वास्तविक प्रोजेक्ट निवेश इससे अलग और आगे तय होगा।

ये भी पढ़ें- LPG Price 24 September 2026: कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹600 तक हुआ सस्ता? जानें- घरेलू एलपीजी के ताजा रेट