अब पेट्रोल नहीं, सिर्फ EV से चलेंगी बाइक टैक्सी! महाराष्ट्र सरकार ने Ola, Uber और Rapido को दिया अल्टीमेटम

महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने इन कंपनियों को जुलाई 2027 तक अपने पूरे बाइक टैक्सी बेड़े को 100 परसेंट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में बदलने का निर्देश दिया है। यानी तय समयसीमा के बाद इन कंपनियों की बाइक टैक्सी सेवाओं में सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने बाइक टैक्सी कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर जाने के लिए नौ महीने का समय दिया है।

इस दौरान कंपनियां चरणबद्ध तरीके से अपने मौजूदा बेड़े को EV में बदल सकेंगी। विभाग ने राज्य की राइड-हेलिंग कंपनियों और सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को भी इस नई समयसीमा की जानकारी दे दी है।

6 महीने का मिलेगा समय

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नई योजना के मुताबिक, पेट्रोल वाली बाइक से टैक्सी सेवा देने वाले ऑपरेटरों को पहले चरण में अपने वाहनों को इलेक्ट्रिक बाइक से बदलने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। यानी इस अवधि के दौरान उन्हें धीरे-धीरे पेट्रोल बाइक की जगह EV को अपने बेड़े में शामिल करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र बाइक टैक्सी नियम 2025 के तहत जिन कंपनियों ने पहले ही प्रोविजनल या टेम्पररी लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है, उन्हें पहले फेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर स्विच करने के लिए छह महीने का समय मिलेगा।

करीब 18 महीने दी जाए समयसीमा

सरकार का ये फैसला बाइक टैक्सी चालकों और उनके संगठनों की चिंताओं के बाद आया है। उनका कहना है कि कम समय में पेट्रोल बाइक को EV से बदलना ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ डाल सकता है। महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होने के लिए अधिक समय देने की मांग की थी। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य के परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त के सामने यह मुद्दा रखा था। संगठन की मांग थी कि बाइक टैक्सी चालकों को पेट्रोल से इलेक्ट्रिक बाइक पर जाने के लिए करीब 18 महीने की समयसीमा दी जाए, ताकि उन्हें अचानक ज्यादा खर्च का सामना न करना पड़े।

बाइक टैक्सी कंपनियों ने EV पर पूरी तरह शिफ्ट होने के लिए 2030 तक का समय मांगा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी। सरकार ने कंपनियों को EV में बदलाव के लिए सिर्फ नौ महीने का समय दिया है।

वाराणसी में 25 जगहों पर बनेंगे हाईटेक EV चार्जिंग स्टेशन! फ्री वाई-फाई और सिटिंग एरिया के साथ मिलेंगी ये सुविधाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अब ईवी चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।वाराणसी शहर के अलग-अलग 25 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन का निर्माण होगा। फिलहाल 5 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन के निर्माण के लिए स्थान भी चिह्नित किये गए है। शहर के कचहरी स्थित आम्बेडकर चौराहे से इसकी शुरुआत होगी। यहां बने पब्लिक फैसिलिटी सेंटर को तोड़कर नए सिरे से ईवी चार्जिंग सेंटर को विकसित किया जाएगा।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर इन चार्जिंग स्टेशन को तैयार किया जायेगा। जहां न सिर्फ आप अपने इलेक्ट्रिकल वाहनों को चार्ज कर सकेंगे बल्कि वहां बैठ आप आसानी से समय को काट भी पायेंगे। इन स्टेशन पर बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाओं के साथ शुद्ध पेयजल,शौचालय, फ्री वाई फाई सहित अन्य सुविधाएं होंगी। इस ईवी चार्जिंग स्टेशन पर मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों के चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा हल्के वाहनों को भी यहां चार्ज किया जा सकेंगा।

फर्स्ट फेज में यहां बनेंगे स्टेशन

वाराणसी में फिलहाल ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए जो 5 स्थान तय किए गए है उनके कचहरी के आंबेडकर चौराहे के साथ रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, रविंद्रपुरी,गुरुधाम और सारनाथ शामिल है। माना जा रहा है अक्टूबर महीने के अंत से सभी तय स्थानों पर इसके निर्माण का काम शुरू हो जायेगा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया की इन ईवी चार्जिंग स्टेशन से चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल फर्स्ट फेज में उन स्थानों पर ही इसका निर्माण हो रहा है जहां हर रोज लोगों की आवाजाही ज्यादा है।

तेजी से बढ़ रहें EV वाहन

बता दें कि वाराणसी में बीते कुछ सालों में ईवी वाहनों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एक आंकड़े के मुताबिक, वाराणसी में फिलहाल 62 हजार से ज्यादा ईवी वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें मोटर साईकिल, रिक्शा और कार शामिल है। वाराणसी के सड़को पर इस समय 22500 से ज्यादा ई रिक्शा दौड़ रहें है, इसके अलावा 21 हजार इलेक्ट्रिकल वाहने भी है। वहीं 10 हजार के करीब टू व्हीलर वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है आने वाले दिनों में ईवी वाहनों की संख्या अभी और बढ़ेगी। यही कारण है की वाराणसी में स्मार्ट सिटी के सहयोग से हाईटेक ईवी चार्जिंग स्टेशन के निर्माण के लिए पहल की गई है, जिसका फायदा ईवी वाहन चालकों को मिलेगा।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

उत्तरपाड़ा में EV प्रोजेक्ट की तैयारी, CKA बिड़ला ग्रुप से पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगी DPR

पश्चिम बंगाल सरकार ने CKA Birla Group से उत्तरपाड़ा में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने के प्रस्ताव की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जल्द से जल्द जमा करने को कहा है। Moneycontrol को मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार चाहती है कि ग्रुप इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी जानकारी जल्द उपलब्ध कराए।

ग्रुप के एक प्रतिनिधि ने राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से संपर्क किया था। इसके बाद एक सरकारी अधिकारी ने ग्रुप से DPR जल्द जमा करने को कहा। हालांकि, ग्रुप ने अभी तक यह रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है।

मनीकंट्रोल ने 21 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि CKA बिड़ला ग्रुप ने पुरानी हिंदुस्तान मोटर्स फैक्ट्री में EVs बनाने के प्रस्ताव के साथ पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क किया था। उस समय प्रस्ताव पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा था।

प्रस्तावित प्रोजेक्ट में कितना निवेश किया जाएगा, किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहन बनाए जाएंगे, कितनी गाड़ियों का उत्पादन होगा और प्रोजेक्ट कब तक शुरू होगा, इन सबकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि कौन सी ग्रुप कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम करेगी।

हालांकि, मनीकंट्रोल ने पश्चिम बंगाल सरकार और CKA बिड़ला ग्रुप (जिसे पहले CK बिड़ला ग्रुप के नाम से जाना जाता था) को DPR रिक्वेस्ट और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के बारे में सवाल भेजे हैं। अब उनके जवाब का इंतजार है।

बता दें कि उत्तरपाड़ा में कभी Hindustan Motors की फैक्ट्री थी, जहां Ambassador और Contessa गाड़ियां बनती थीं। इस फैक्ट्री में काम 2014 में रोक दिया गया था। इस प्रस्ताव से एक दशक से ज़्यादा समय के बाद उस जगह पर फिर से गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू हो सकता है, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक अहम सवाल बनी हुई है।

395 एकड़ जमीन पर सरकार का कब्जा

Hindustan Motors ने अपनी FY26 की सालाना रिपोर्ट में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने फैक्ट्री की पूरी जमीन (लगभग 395 एकड़) वापस ले ली है और उस पर कब्जा कर लिया है। कंपनी ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट में इस प्रॉपर्टी को राइट-ऑफ भी कर दिया है।

वहीं, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन वापस लिए जाने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली Hindustan Motors की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने कहा था कि वह इस फैसले पर दोबारा विचार के लिए याचिका दायर करने और जमीन के एक हिस्से की मांग करने की योजना बना रही है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में गाड़ियों का निर्माण भले ही कम होता हो, लेकिन वहां गाड़ियों का एक बड़ा बाजार है। SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में राज्य में लगभग 10.2 लाख दो-पहिया और 1.25 लाख पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री हुई। हालांकि, यहां अभी तक किसी गाड़ी बनाने वाले प्लांट के आस-पास कंपोनेंट सप्लायर्स का कोई बड़ा नेटवर्क नहीं बन पाया है।

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ईवी चालकों को बड़ी राहत! नोएडा की 30 अहम पार्किंग में लगेंगे चार्जिंग स्टेशन, कार से लेकर दोपहिया तक होगी चार्जिंग की सुविधा

EV Charging Stations Noida: नोएडा में इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। शहर में अब घर के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी ईवी चार्जिंग की सुविधा मिलने लगेगी। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 के तहत नोएडा प्राधिकरण और यूपी रिन्यूएबल एंड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच 24 सितंबर को एमओयू हुआ है।

इस MoU के तहत शहर की 30 अहम पार्किंग में ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्थान पर कम से कम दो चार्जर होंगे, जिनसे एक साथ दो कार और एक दोपहिया वाहन चार्ज हो सकेगा। चार्जिंग स्टेशनों का पूरा खर्च कंपनी उठाएगी, जबकि प्राधिकरण स्थान उपलब्ध कराएगा।

इससे ईवी वाहनों की खरीद में भी हो सकता है इजाफा

अब तक नोएडा में ईवी वाहन खरीदने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक सार्वजनिक जगह पर चार्जिंग की सुविधा की कमी भी रही है। घर पर चार्जिंग की सुविधा होने के बावजूद शहर में सफर के दौरान बैटरी खत्म होने पर वाहन को चार्ज करने के विकल्प न के बराबर हैं। ऐसे में नोएडा निवासी ईवी खरीदने से पहले चार्जिंग को लेकर सोचते हैं। अब 30 अलग-अलग पार्किंग वाली जगहों पर चार्जिंग स्टेशन लगने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी दूर होगी।

सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग की सुविधा बढ़ने से ईवी चालकों को सफर के दौरान चार्जिंग की चिंता से राहत मिल सकेगी। खास बात यह है कि हर एक स्थान पर कम से कम दो चार्जर लगाए जाएंगे, जिनसे एक साथ दो कार और एक दोपहिया वाहन को चार्ज किया जा सकेगा। नोएडा में चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने से आने वाले समय में ईवी वाहनों की खरीद में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

इन जगहों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशन

नोएडा प्राधिकरण के सीनियर अधिकारी एस पी सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नोएडा मेट्रो पार्किंग सेक्टर 101, वेद वन पार्किंग सेक्टर 78, बॉटनिकल गार्डन पार्किंग सेक्टर 38, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 76, मेट्रो पार्किंग, ब्लॉक E सेक्टर 51, हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड पार्किंग क्षेत्र सेक्टर 119, नोएडा इंडोर स्टेडियम पार्किंग लॉट सेक्टर 21A, मेट्रो पार्किंग, ब्लॉक C सेक्टर 81, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 154, मेट्रो पार्किंग गढ़ी चौखंडी / गढ़ीपुर सेक्टर 145, मेट्रो पार्किंग झट्टा सेक्टर 146, शहीद भगत सिंह पार्किंग लॉट सेक्टर 150, मेट्रो पार्किंग सेक्टर 144, नोएडा अथॉरिटी पार्किंग (NSEZ मेट्रो के पास) ब्लॉक A फेज-2, वेंडर्स जोन (हल्दीराम के पास) सेक्टर 18, सब मॉल (SAB Mall) पार्किंग सेक्टर 27 में लगाए जाएंगे।

नोएडा के महत्वपूर्ण जगहों पर मिलेगी ये सुविधा

इसके साथ ही कैम्ब्रिज स्कूल पार्किंग सेक्टर 27, ब्रह्मपुत्र मार्केट पार्किंग सेक्टर 29, अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्किंग ब्लॉक B सेक्टर 1, बीएचईएल (BHEL) ऑफिस पार्किंग के पास सेक्टर 18, महामाया फ्लाई-ओवर के नीचे पार्किंग ब्लॉक C सेक्टर 38, गंगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पार्किंग सेक्टर 29, निरूलाज होटल के सामने सेक्टर 15, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास पार्किंग, सेक्टर 2, आईजीएल (IGL) गैस स्टेशन विकास मार्ग सेक्टर 122, साया स्टेटस मॉल सेक्टर 129, इन्फोसिस कैंपस सेक्टर 132, एनटीपीसी ईओसी (NTPC EOC) ऑफिस ब्लॉक A सेक्टर 24, नोएडा अथॉरिटी का नया ऑफिस सेक्टर 96, कमांड कंट्रोल सेंटर बिल्डिंग सेक्टर 94 में स्थापित किए जाएंगे।

रिपोर्ट- सुमित राजपूत

ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेअर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रेअर अर्थ मिनरल की खदानों वाले इलाकों में विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों से अमेरिकी कंपनी के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। बलूच विद्रोहियों ने चागई जिले में रेको दिक खदान तक जाने वाली सड़कों को जाम कर दिया है। आर्मी चीफ मुनीर ने वाइट हाउस में किया था ‘स्टोन शो’ आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने सितंबर 2025 में वाइट हाउस में ‘स्टोन शो’ किया था। उन्होंने लकड़ी का एक बॉक्स ट्रम्प को दिखाया था, जिसमें रंग-बिरंगे पत्थर (मिनरल स्पेसिमेन) रखे थे। इन्हें देखकर ट्रम्प बेहद खुश हुए थे। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका भेजी गई पहली खेप में एंटीमनी, कॉपर कॉन्सन्ट्रेट, नियोडिमियम और प्रेजोडिमियम जैसे खनिज शामिल थे। इस प्रोजेक्ट के तहत 2025-26 में मिनरल्स का निर्यात, 2027-28 में पाकिस्तान में मिनरल प्रोसेसिंग और 2029 में बड़े पैमाने पर खनन शुरू करने की योजना थी। इलेक्ट्रॉनिक्स से IT तक में रेयर अर्थ मटेरियल का इस्तेमाल रेयर अर्थ मटेरियल 17 रासायनिक तत्वों का समूह है। इनका इस्तेमाल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मिलिट्री उपकरणों तक में होता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और कई आधुनिक तकनीकों में इनकी अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल IT, केमिकल और ऑयल रिफाइनिंग जैसी इंडस्ट्रीज में भी होता है। आधुनिक तकनीक और हाई-टेक उपकरणों में इनकी मांग लगातार बनी हुई है। कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी काम छोड़ सकती है रेको दिक में कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी खनन का काम कर रही है। हालांकि, बलूच विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण कंपनी के लिए यहां काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उसके भी काम बंद करने और निवेश से पीछे हटने की आशंका है। बलूचिस्तान के खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा बलूचिस्तान को पाकिस्तान का खनिज भंडार कहा जाता है। यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का दबदबा है। चीन ने CPEC के तहत ग्वादर और आसपास के इलाकों में करीब 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीनी फिशिंग बोट्स की मौजूदगी भी बढ़ी है। स्थानीय बलूच मछुआरों का आरोप है कि बड़ी और ज्यादा ताकतवर चीनी बोट्स उनकी छोटी नावों को पीछे हटने पर मजबूर करती हैं। ज्यादातर स्थानीय मछुआरे अब भी पाल वाली छोटी नावों से मछली पकड़ते हैं। इससे उनके रोजगार पर असर पड़ रहा है। बलूचिस्तान के रेअर अर्थ मिनरल पर अमेरिका की नजर है। मुनीर ट्रम्प के सामने इन खनिजों के सैंपल तक दिखा चुके हैं। PAK के हाथ से बलूचिस्तान का 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… PoK में सेना की घेराबंदी, राशन तक की चेकिंग:स्कूल-हॉस्पिटल बंद, लोग बोले- सरकार ने बात की, फिर इंडिया का एजेंट बता दिया हम इंडिया के एजेंट नहीं हैं, हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, यानी POK से ये आवाजें ऐसे वक्त में आ रही है, जब वहां इंटरनेट बंद है। स्कूल नहीं खुल रहे, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, कामकाज ठप है। लोग राशन और दवाइयों तक के लिए परेशान हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

Yogi adityanath

Swachh Vayu Sarvekshan 2026 Lucknow First: उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर किए जा रहे लगातार प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 

 

लखनऊ ने 198 अंक के साथ प्रथम स्थान जबकि इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में स्वच्छ वायु को लेकर शहर स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

यूपी के दूसरे शहरों ने भी दिखाया दम

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। इस रैंकिंग से यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ हवा को लेकर प्रदेश के बड़े शहरों में किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा

मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करने को अहम उपलब्धि माना गया। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।

छोटे शहरों में भी बेहतर प्रदर्शन

तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के शहरों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता मिली।

वार्ड स्तर पर भी यूपी की बड़ी उपलब्धि

स्वच्छ वायु प्रबंधन को शहरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 स्थित वार्ड-70 ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रभावी रोक और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे उपायों को इसमें महत्वपूर्ण माना गया।

समन्वित रणनीति का परिणाम

प्रदेश में स्वच्छ हवा के लिए नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तैयार और लागू की गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में पहले स्थान समेत यूपी के कई शहरों और वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में दिखाई दिया है। 

पुरस्कार के साथ बढ़ा स्थानीय निकायों का उत्साह

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार हासिल करने के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 ने तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है।

स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ की उपलब्धि प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।

लखनऊ की नंबर-1 उपलब्धि ने बढ़ाया यूपी का गौरव

लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।

कचरा प्रबंधन और हरियाली पर भी विशेष जोर

स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। लखनऊ में 2,550 टीपीडी क्षमता से 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ही शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए।

इस तरह स्वच्छ वायु के लिए परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र सभी प्रमुख क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह सफलता अब प्रदेश के दूसरे शहरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।

2030 तक EV सेक्टर में आएंगी 5 करोड़ नौकरियां, 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा मार्केट! नितिन गडकरी का बड़ा दावा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, CII-ITC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत में अभी 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, “2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इससे 2030 तक पांच करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।”

इस दौरान गडकरी ने भारत की दो सबसे बड़ी टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प की एक्सपोर्ट क्षमता का भी जिक्र किया और कहा कि वे अपने बनाए गए वाहनों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा का एक्सपोर्ट करती हैं।

भारत को और ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन देश के मैन्युफैक्चरर अभी साल में सिर्फ 50,000-60,000 EV बसें ही बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में सबसे बड़ा बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास ट्रेंड मैनपावर और कॉम्पिटिटिव व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं।

गडकरी ने आगे कहा, “अगले पांच सालों में हमारा लक्ष्य भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में नंबर 1 बनाना है… यह मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।”

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का आकार काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर का पद संभाला था, तब इस सेक्टर की वैल्यू 14 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी US के ऑटोमोबाइल सेक्टर की वैल्यू 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे और भारत 23 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है।

फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम अच्छे हाईवे बना रहे हैं… अच्छे रास्ते और उनके विकल्प तैयार कर रहे हैं, और बायो-फ्यूल ही भविष्य है।”

लॉजिस्टिक्स लागत के बारे में गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 8% तक लाना है। उनका तर्क है कि लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से ग्लोबल मार्केट में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% हो गई है।

उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर 8% करना है, जिससे भारत को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।”

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