Noida-Ganga Expressway Link: नोएडा-ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की दूरी होगी कम! 105 मीटर चौड़ी सड़क का प्लान तैयार

Noida-Ganga Expressway Link: देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ तक पहुंचना आने वाले समय में और आसान हो सकता है। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद क्षेत्र में यात्रियों और वाहनों की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान-2041 में संशोधन करने की तैयारी है। इसके तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा को ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए नई कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सोमवार (7 सितंबर) को लखनऊ स्थित पिकअप भवन में इस नई परियोजना का प्रेजेंटेशन हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने की। बैठक में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार समेत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

लखनऊ में हुए प्रेजेंटेशनके बाद अब मास्टर प्लान में प्रस्तावित बदलाव और कनेक्टिविटी से जुड़े तकनीकी एवं नियोजन संबंधी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद सड़क निर्माण और कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह योजना जमीन पर लागू होती है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की दूरी और पहुंच दोनों आसान हो सकती हैं। करीब 15 किलोमीटर की प्रस्तावित कनेक्टिविटी और 105 मीटर चौड़ी सड़क से क्षेत्र के यात्रियों को राहत मिलने के साथ ही जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों के बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में भी मदद मिल सकती है।

15 किलोमीटर की नई कनेक्टिविटी पर जोर

इस प्रस्ताव के मुताबिक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबी कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इसके लिए दादरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्ग को बेहतर बनाने की योजना है। प्रस्ताव में करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क का भी उल्लेख किया गया है। इस कनेक्टिविटी के विकसित होने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए मौजूदा रास्तों पर निर्भरता कम होगी। इससे यात्रा का समय भी कम होने की उम्मीद है।

नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ तक पहुंचने में 30 से 45 मिनट की बचत

योजना के लागू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में वर्तमान की तुलना में करीब 30 से 45 मिनट तक की बचत हो सकती है। इससे खासतौर पर उन यात्रियों और वाहनों को फायदा मिलेगा जिन्हें गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों और अन्य क्षेत्रों की ओर जाना है। बेहतर कनेक्टिविटी से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच भी आसान होगी।

क्यों है इस कनेक्टिविटी की जरूरत?

जेवर स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यात्री और वाहन आवागमन बढ़ने की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए केवल मौजूदा सड़कों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में नए और चौड़े संपर्क मार्ग विकसित करने की जरूरत होगी। इससे एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख एक्सप्रेसवे के बीच आवागमन सुगम बनाया जा सके।

मास्टर प्लान-2041 में होगा बदलाव

इस प्रोजेक्ट को भविष्य की परिवहन जरूरतों से जोड़ते हुए ‘ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान-2041’ में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ में संबंधित विभागों और प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने प्रस्ताव का प्रस्तुतीकरण किया गया। योजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा के मौजूदा और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात का दबाव कम किया जा सके।

औद्योगिक विकास को भी मिलेगा फायदा

नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहले से ही बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। ऐसे में ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से औद्योगिक आवागमन और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। नई कनेक्टिविटी बनने से क्षेत्र के लोगों को एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। साथ ही यात्रा का समय घट सकता है। इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा को यूपी के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा।

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Ganga Expressway to Haridwar: प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे! ₹10,761 करोड़ की योजना को यूपी कैबिनेट की मंजूरी

Ganga Expressway to Haridwar: उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने प्रयागराज और हरिद्वार के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को विस्तार देने के प्रस्ताव को मंगलवार (25 अगस्त) को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को छह-लेन हाईवे के तौर पर बनाया जाएगा, जिसमें भविष्य में इसे आठ-लेन तक बढ़ाने की गुंजाइश होगी। एक बयान में कहा गया है कि यूपी का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी, मेरठ से प्रयागराज) हरिद्वार तक बढ़ाया जाएगा। इसके विस्तार की कुल लंबाई 130 किमी होगी (100 किमी यूपी में और 30 किमी उत्तराखंड में)। इस प्रोजेक्ट पर ₹10,761 करोड़ का खर्च आएगा, जिसे पूरा राज्य सरकार वहन करेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे दो कुंभ नगरियों (प्रयागराज और हरिद्वार) के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। परियोजना पर करीब 10,761 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना में केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित या प्रस्तावित नहीं है।

मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने समेत आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए फिलहाल प्रमुख रूप से मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार नेशनल हाईवे उपलब्ध है।

प्रयागराज-हरिद्वार के बीच एक्सप्रेसवे कॉरिडोर बनेगा

बयान में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर से हरिद्वार तक आवागमन बेहतर एवं तेज होगा। बयान के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत प्रयागराज-हरिद्वार के बीच एक्सप्रेसवे गलियारा विकसित किया जाएगा।

बयान में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से प्रयागराज और हरिद्वार के बीच एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए तेज एवं सुगम ट्रैफिक सुविधा विकसित होगी। अधिकारियों ने बताया कि इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

₹10,761 करोड़ का आएगा खर्च

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने पर राज्य सरकार का अनुमानित खर्च 10,761 करोड़ रुपये होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से किसी वित्तीय मदद की उम्मीद या प्रस्ताव नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इसमें डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करना भी शामिल है। अभी उत्तराखंड की सीमा से सटे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार नेशनल हाईवे) का इस्तेमाल किया जाता है।

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने से बिजनौर को शहर से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे से बिजनौर और राज्य की राजधानी लखनऊ के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यूपी सरकार ने एक बयान में कहा कि इस विकास से क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने से प्रयागराज और हरिद्वार के बीच एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी। इस पहल से धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए इन दो पवित्र शहरों के बीच यात्रा करना ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा।

एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन-आधारित आर्थिक गतिविधियों में भी तेज़ी आ सकती है।

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प्रोजेक्ट के निर्माण और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बयान में कहा गया है कि इससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है।

उत्तर प्रदेश में ये 4 नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट हुए मंजूर, पूर्वांचल से विंध्य तक जबर्दस्त तरीके से बदलेगी कनेक्टिविटी

UP Expressway news: उत्तर प्रदेश के व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित यूपी कैबिनेट की बैठक में राज्य के रोड नेटवर्क को मजबूती देने के लिए चार नए प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। इन मंजूरियों में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले दो लिंक एक्सप्रेसवे के साथ-साथ प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक का एलाइनमेंट शामिल है।

आइए जानते हैं इन चारों नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के बारे में विस्तार से और यह भी समझते हैं कि कैसे ये स्टेट की सुपर डेवलपमेंट स्पीड को सपोर्ट कर सकते हैं-

12264 करोड़ रुपये से ज्यादा के 2 ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे

कैबिनेट ने दो लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए संशोधित और अंतिम रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल को मंजूरी दी है। इनकी कुल लागत 12,264 करोड़ रुपये से अधिक है। पहला है 50.98 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक। यह 6-लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर होगा। इसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत करीब 4775.84 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा।

इसमें दूसरा है 90.84 किलोमीटर लंबाई वाला फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक। यह फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। यह 6-लेन (8 लेन तक विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड लिंक होगा। इस प्रोजेक्ट के निर्माण में अनुमानित 7,488.74 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डेवलपर्स के चयन के लिए टेंडर की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। चुनी गई एजेंसियों को लगभग 36 महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा और उसके बाद अगले 5 वर्षों तक सड़क का रखरखाव करना होगा।

26315 करोड़ रुपये की लागत वाला ‘विंध्य एक्सप्रेसवे’

कैबिनेट ने राज्य के दक्षिणी और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए विंध्य एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 26315 करोड़ रुपये होगी। यह 6-लेन वाला एक्सप्रेसवे होगा। इसे जरूरत पड़ने पर 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों के लिए आवागमन और सड़कोंकी कनेक्टिविटी को सीधे तौर पर बेहतर बनाएगा।

पूर्वांचल को जोड़ने वाला विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक (विकल्प-1) के एलाइनमेंट को भी मंजूरी दी है। यह करीब 9039 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला प्रोजेक्ट है। यह लिंक गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को आपस में जोड़ेगा, जिससे पूर्वी यूपी के इन जिलों में सड़कों का नेटवर्क काफी मजबूत होगा।

एक्सप्रेसवे ग्रिड से मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा

राज्य सरकार के अनुसार, इन सभी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे को मिलाकर एक सीमलेस एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार करना है। इस इंटिग्रेटेड नेटवर्क से लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल हो जाएगी। यात्रा के समय और ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।